"प्रथम पूज्य है सब देवो में" भगवान श्री गणेश जी की स्तुति में गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय, मधुर और श्रद्धापूर्ण भजन है। सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान या मांगलिक प्रसंग के शुभारंभ में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना अनिवार्य मानी गई है। उन्हें 'प्रथम पूज्य' का दिव्य वरदान प्राप्त है, जिसके कारण वे समस्त देवों में अग्रगण्य हैं। यह भजन भगवान गणेश के इसी अलौकिक स्वरूप, उनके गजमुख रूप, माता पार्वती और देवाधिदेव महादेव के प्रति उनके वात्सल्य, तथा भक्तों के संकटों को हरने की उनकी असीम सामर्थ्य को बहुत ही सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है। इस भजन का गायन भक्तों के हृदय में अनन्य समर्पण, विनय और आनंद का संचार करता है। गणेशोत्सव के पावन पर्व पर अथवा दैनिक पूजा-अर्चना के समय इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से घर-परिवार में ऋद्धि-सिद्धि, सुख, समृद्धि और शांति का मंगलमय आगमन होता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
प्रथम पूज्य है सब देवो में (Pratham Pujya Hai Sab Devo Mein Lyrics)
॥ स्थायी ॥
प्रथम पूज्य है सब देवो में जाने दुनिया सारी,
जय हो गणपति गज मुख धारी।
आप निराले और आप छवि है सबसे न्यारी,
जय हो गणपति गज मुख धारी ॥
॥ अंतरा - १ ॥
गिरजा माँ के प्यारे है शिव शंकर के दुलारे है,
रूप चतुर भुज धारे है सारे काज सवार है।
आन पधारो आज सभा में करके मुस सवारी,
जय हो गणपति गज मुख धारी ॥
॥ अंतरा - २ ॥
ऐसा जामुन खाते है लडूवन भोग लगाते है,
सारे विघ्न मिटाते है विघ्ननेश्वर कहलाते है।
ओह भय हारी हो शुभ कारी महिमा आप की प्यारी,
जय हो गणपति गज मुख धारी ॥
॥ अंतरा - ३ ॥
जो भी ध्यान लगाते है मन बंचित फल पाते है,
श्रद्धा से जो मनाते है कार्य सफल हो जाते है।
चरण कमल पे विवेक पड़ा है सुन लो अर्ज हमारी,
जय हो गणपति गज मुख धारी ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह पावन भजन भगवान गणेश के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। भजन का मुख्य भाव यह है कि भगवान गणेश संपूर्ण सृष्टि में सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं और उनकी महिमा अपरंपार है।
प्रथम पूज्य और गजमुख स्वरूप: भजन के प्रारंभ में भक्त स्वीकार करता है कि हे गजानन! संपूर्ण संसार इस सत्य से परिचित है कि आप सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय हैं। आपका मुख गज (हाथी) का है, जो बुद्धि, धैर्य और गंभीरता का प्रतीक है। आपकी छवि अत्यंत निराली और मनमोहक है, जो भक्तों के हृदय को अपनी ओर आकर्षित करती है।
माता-पिता के प्रति अनन्य प्रेम: भगवान गणेश माता पार्वती (गिरजा) के अत्यंत प्रिय पुत्र हैं और भगवान शिव के दुलारे हैं। वे चार भुजाओं वाले (चतुर्भुज) हैं, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के प्रदाता हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि वे अपने वाहन मूषक (मुस) पर सवार होकर आज की इस पावन सभा में पधारें और सभी के बिगड़े हुए कार्यों को संवारें।
विघ्ननाशक और कृपालु रूप: भगवान गणेश को मोदक (लड्डू) और जामुन अत्यंत प्रिय हैं। वे अपने भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के विघ्नों, बाधाओं और भयों को दूर करने वाले हैं, इसलिए उन्हें 'विघ्नेश्वर' कहा जाता है। वे शुभता और कल्याण के सागर हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, वह मनवांछित फल प्राप्त करता है। भजन के अंत में कवि 'विवेक' भगवान गणेश के चरण कमलों में शरण लेते हुए अपनी प्रार्थना स्वीकार करने की याचना करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- प्रथम पूज्यता का उद्घोष: यह भजन भगवान गणेश को प्राप्त 'प्रथम पूज्य' के गौरव को स्थापित करता है, जो भक्तों को किसी भी कार्य के प्रारंभ में गणेश स्मरण की प्रेरणा देता है।
- भक्ति और शरणागति: भजन की पंक्तियां भक्त के मन में पूर्ण शरणागति का भाव जाग्रत करती हैं। भगवान के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देना ही इस भजन का मूल संदेश है।
- विघ्नहर्ता रूप की महिमा: जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए भगवान गणेश के 'विघ्नेश्वर' रूप की स्तुति की गई है, जिससे साधक को मानसिक शांति और संबल मिलता है।
- पारिवारिक सामंजस्य: भजन में शिव-पार्वती के पुत्र के रूप में गणेश जी का वर्णन है, जो पारिवारिक प्रेम और आदर के महत्व को दर्शाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भगवान गणेश के इस भजन को गाने और सुनने के लिए कोई भी समय शुभ है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:
- दैनिक प्रातःकालीन पूजा: सुबह की पूजा के समय इस भजन का गायन करने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह के साथ होती है।
- गणेश चतुर्थी उत्सव: गणेशोत्सव के दस दिनों के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- शुभ कार्यों के प्रारंभ में: गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत के समय इस भजन को गाकर भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है।
- गायन विधि: इस भजन को ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ मध्यम लय में गाना चाहिए। गाते समय मन में भगवान गणेश की सौम्य और वरद मुद्रा का ध्यान करना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से बुद्धि, समृद्धि और विघ्न विनाशक भगवान श्री गणेश को समर्पित है। भगवान गणेश के साथ-साथ इस भजन में उनकी माता पार्वती (गिरजा) और पिता भगवान शिव का भी स्मरण किया गया है। सनातन परंपरा में गणेश जी को पंचदेवों में से एक माना गया है। इस भजन के रचयिता के रूप में 'विवेक' नाम का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने अत्यंत सरल और सुबोध भाषा में भगवान गणेश के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा को व्यक्त किया है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना आधुनिक काल के भक्ति संगीत के अंतर्गत हुई है। यद्यपि यह एक समकालीन भजन है, परंतु इसकी पृष्ठभूमि पूरी तरह से पौराणिक आख्यानों पर आधारित है। शिव पुराण और गणेश पुराण में वर्णित कथाओं के अनुसार, जब देवताओं में प्रथम पूज्य होने की प्रतियोगिता हुई, तब गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर यह सिद्ध किया कि माता-पिता ही संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। इसी पौराणिक सत्य को आधार बनाकर इस भजन की रचना की गई है, ताकि जनमानस सरल गीतों के माध्यम से इस गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य को समझ सके।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है।
- काव्य शैली: यह एक गेय पद (भजन) है, जिसे सुगमता से गाया जा सकता है। इसमें अंत्यानुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे: सारी-धारी, न्यारी-धारी)।
- बिंब योजना: भजन में भगवान गणेश के स्वरूप का सुंदर चित्रण किया गया है, जैसे "चतुर भुज धारे", "मुस सवारी" और "चरण कमल", जो गाते समय भक्त के मानस पटल पर एक दिव्य छवि अंकित करते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:
- बुद्धि और विवेक का आदर: भगवान गणेश बुद्धि के अधिष्ठाता देव हैं। उनका स्मरण हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य को करने से पहले बुद्धि और विवेक का उपयोग करना चाहिए।
- माता-पिता का सम्मान: शिव-पार्वती के दुलारे गणेश जी का चरित्र हमें अपने माता-पिता के प्रति आदर और सेवा भाव रखने की सीख देता है।
- अहंकार का त्याग: विशालकाय शरीर वाले भगवान गणेश का वाहन एक छोटा सा मूषक (मुस) है। यह दर्शाता है कि ईश्वर की दृष्टि में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं है, और हमें अपने जीवन में विनम्रता अपनानी चाहिए।
- धैर्य और विघ्न निवारण: जीवन में विघ्न आना स्वाभाविक है, परंतु भगवान पर विश्वास रखकर धैर्यपूर्वक कार्य करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| प्रथम पूज्य | सबसे पहले पूजे जाने वाले | भगवान गणेश को सभी देवों में सर्वप्रथम पूजे जाने का वरदान प्राप्त है। |
| गज मुख धारी | हाथी के मुख वाले | विशाल बुद्धि और गंभीरता के प्रतीक भगवान गणेश। |
| गिरजा माँ | माता पार्वती | पर्वतराज हिमालय की पुत्री और गणेश जी की माता। |
| चतुर भुज | चार भुजाओं वाले | चारों पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को प्रदान करने वाले। |
| मुस सवारी | मूषक (चूहा) की सवारी | अहंकार और चंचलता को नियंत्रित करने का प्रतीक। |
| विघ्नेश्वर | बाधाओं के स्वामी / नाशक | जीवन के सभी संकटों और विघ्नों को दूर करने वाले देव। |
| चरण कमल | कमल के समान कोमल चरण | भगवान के चरणों में परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"प्रथम पूज्य है सब देवो में जाने दुनिया सारी, जय हो गणपति गज मुख धारी।"
हे गजमुख धारण करने वाले भगवान गणेश! आपकी जय हो। संपूर्ण संसार इस बात को भली-भांति जानता है कि आप सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाते हैं।
"आप निराले और आप छवि है सबसे न्यारी, जय हो गणपति गज मुख धारी ॥"
आपका स्वरूप अत्यंत अनूठा और निराला है। आपकी दिव्य छवि सबसे सुंदर और मनमोहक है, जो भक्तों के कष्टों को पल भर में हर लेती है।
"गिरजा माँ के प्यारे है शिव शंकर के दुलारे है, रूप चतुर भुज धारे है सारे काज सवार है।"
आप माता पार्वती के अत्यंत प्रिय और भगवान शिव के लाडले पुत्र हैं। चार भुजाओं वाले आपके इस दिव्य रूप की आराधना करने से भक्तों के सभी बिगड़े हुए कार्य संवर जाते हैं।
"आन पधारो आज सभा में करके मुस सवारी, जय हो गणपति गज मुख धारी ॥"
हे प्रभु! आज हमारी इस भक्तिमयी सभा में अपने वाहन मूषक पर सवार होकर पधारिए और हमें अपनी दिव्य उपस्थिति से अनुगृहीत कीजिए।
"ऐसा जामुन खाते है लडूवन भोग लगाते है, सारे विघ्न मिटाते है विघ्ननेश्वर कहलाते है।"
आप जामुन और मोदक (लड्डू) का भोग बड़े चाव से लगाते हैं। आप अपने भक्तों के जीवन के सभी विघ्नों को मिटा देते हैं, इसीलिए आपको विघ्नेश्वर कहा जाता है।
"ओह भय हारी हो शुभ कारी महिमा आप की प्यारी, जय हो गणपति गज मुख धारी ॥"
आप सभी प्रकार के भयों को हरने वाले और जीवन में शुभता लाने वाले हैं। आपकी महिमा अत्यंत प्यारी और कल्याणकारी है।
"जो भी ध्यान लगाते है मन बंचित फल पाते है, श्रद्धा से जो मनाते है कार्य सफल हो जाते है।"
जो भी भक्त सच्चे मन से आपका ध्यान धरता है, वह अपनी मनचाही इच्छा पूरी करता है। जो आपको श्रद्धापूर्वक पुकारता है, उसके सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न हो जाते हैं।
"चरण कमल पे विवेक पड़ा है सुन लो अर्ज हमारी, जय हो गणपति गज मुख धारी ॥"
हे प्रभु! आपका यह सेवक 'विवेक' आपके कमल रूपी चरणों में नतमस्तक है। कृपा करके हमारी इस दीन पुकार को सुन लीजिए और अपनी कृपा दृष्टि हम पर बनाए रखिए।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ भगवान गणेश के निम्नलिखित पौराणिक मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से भजन का प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:
॥ गणेश गायत्री मंत्र ॥
"ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥"
॥ विघ्न निवारण श्लोक ॥
"वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण बिंदु | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | प्रथम पूज्य है सब देवो में (Pratham Pujya Hai Sab Devo Mein) |
| आराध्य देव | भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, विनय और स्तुति |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| रचयिता / कवि | विवेक (पारंपरिक संदर्भ) |
| गायन का अवसर | गणेश चतुर्थी, दैनिक पूजा, शुभ कार्य का आरंभ |
| मुख्य संदेश | विघ्न निवारण, बुद्धि का विकास, ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण को तैयार करने के लिए सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों जैसे गणेश पुराण, शिव पुराण और पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों का संदर्भ लिया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्ता वाली भक्ति सामग्री पहुंचाना है, ताकि वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बना सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- गणेश पुराण: भगवान गणेश के प्रथम पूज्य होने और उनके विभिन्न अवतारों की कथाएं।
- शिव पुराण (रुद्र संहिता): गणेश जन्म और उनके चतुर्भुज स्वरूप का वर्णन।
- पारंपरिक भजन संग्रह: विभिन्न संतों और भक्तों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गणेश भजनों का संकलन।
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