माँ नर्मदा (रेवा) केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति में साक्षात प्राणदायिनी, पतित पावनी और मोक्षदायिनी माँ के रूप में पूजी जाती हैं। नर्मदाष्टक और विभिन्न लोकगीतों में माँ रेवा के सौंदर्य, उनकी निर्मल धाराओं और उनके भक्तों के अनन्य समर्पण का अत्यंत मनमोहक वर्णन मिलता है। प्रस्तुत भजन "हम तो दीवाने है माई रेवा के (hum to diwane hai mai rewa ke Lyrics in Hindi)" अमरकंटक से निकलने वाली उन पावन कलकल करती धाराओं के प्रति एक अनन्य साधक की आत्मीय पुकार और प्रेमानुराग की अभिव्यक्ति है। इस भक्तिमय रचना में भक्त अपने आराध्य शिव शंकर की जटाओं से प्रगट होने वाली और संपूर्ण मध्य प्रदेश व गुजरात की धरा को अपने चरणों से पवित्र करने वाली माँ रेवा के प्रति अपने अगाध प्रेम को प्रकट करता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और माँ रेवा के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई (मखड़ा):
हम तो दीवाने है माई रेवा के, हम तो दीवाने हैं
हम तो दीवाने हैं माँ तेरे दीवाने हैं
अरे हम तो दीवाने ......
अंतरा 1:
भोरई से तोरे द्वारे पे आये
द्वारे पे आये तोरे द्वारे पे आये
नर्मदे हर हर टेर लगाए
टेर लगाए मैया टेर लगाए
मैया महिमा बखाने है
माई रेवा के हम तो दीवाने...
अंतरा 2:
दूधा सी बहे निर्मल धारा
निर्मल निर्मल धारा बहे निर्मल निर्मल धारा
दर्शन दे के सबको तारा
सबको तारा मैया सबको तारा
सारी दुनिया ये जाने हैं
माई रेवा के हम तो दीवाने हैं...
अंतरा 3:
शिव शंकर से वर है पायी
पतित पावनी माँ कहलाई
मैया संतो के ठिकाने है
माई रेवा के हम तो दीवाने हैं...
अंतरा 4:
गंगा दशहरा में गंगा जी आयी
तुमसे मिलन कि आशा लगाई
मैया दर्शन तो पाने है
माई रेवा के हम तो दीवाने हैं...
अंतरा 5 (समापन):
शीश झुकाये मैया दिप तुम्हारा
ज्योति जगाये अविनाश तुम्हारा
मैया गुण तोरे गाने है
माई रेवा के हम तो दीवाने है...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन साधक के भीतर उमड़ने वाले उस गाढ़े भक्ति भाव को प्रदर्शित करता है जहाँ वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल और केवल माँ नर्मदा के प्रेम में मग्न है। मखड़े में भक्त गर्व से कहता है कि वह केवल माँ रेवा का दीवाना है। 'दीवाना' शब्द यहाँ सांसारिक पागलपन का नहीं, बल्कि भगवत्प्रेम में डूबी हुई उस तन्मयता का प्रतीक है जहाँ भक्त को अपने इष्ट के सिवा कुछ और दिखाई नहीं देता।
भक्त सुबह सवेरे ('भोरई से') उठकर माँ नर्मदा के तट पर उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुँचता है। वह पूरी श्रद्धा और ऊर्जा के साथ "नर्मदे हर हर" का उद्घोष करता है, जो रेवा भक्तों का सबसे बड़ा मंत्र है। माँ नर्मदा की दुग्ध-समान श्वेत और स्वच्छ धारा अज्ञान रूपी मैल को धोकर हर प्राणी को तारने वाली है। इस बात को पूरी दुनिया जानती है कि माँ रेवा के दर्शन मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ नर्मदा को भगवान शिवशंकर से यह वरदान प्राप्त है कि वे प्रलय काल में भी नष्ट नहीं होंगी और उनकी पूजा 'पतित पावनी' के रूप में की जाएगी। बड़े-बड़े संत, महात्मा और तपस्वी नर्मदा के तटों पर ही अपनी साधना पूरी करते हैं, इसीलिए रेवा तट को संतों का वास्तविक ठिकाना माना गया है। भजन की अंतिम पंक्तियों में साधक संध्या बेला में माँ के तट पर दीप प्रज्वलित कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है और जीवनभर माँ के गुणों का गान करते रहने का संकल्प लेता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
नर्मदा नदी भारतीय उपमहाद्वीप की उन पवित्र नदियों में अग्रणी है जिनकी परिक्रमा की जाती है (अमरकंटक से सागर संगम तक नर्मदा परिक्रमा)। यह भजन इसी नर्मदा संस्कृति और परिक्रमा वासियों की आस्था का जीवंत दस्तावेज है। इस भजन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- अनन्य समर्पण (Ananya Samarpan): इसमें भक्त का अपनी आराध्य के प्रति निश्छल और तर्कहीन प्रेम झलकता है।
- पौराणिक संदर्भ: भगवान शिव से प्राप्त वरदान और गंगा के अवतरण से जुड़ी कथाओं का सुंदर काव्यात्मक समावेश।
- लोक संस्कृति की मिठास: ग्रामीण और पारंपरिक शब्दावली जैसे 'भोरई से', 'टेर लगाए', और 'महिमा बखाने' इसे आम जनमानस के बहुत करीब लाती हैं।
- मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण मात्र से मन में एकाग्रता और दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु इसकी दिव्यता का पूर्ण अनुभव प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित समय और विधियां उत्तम मानी जाती हैं:
- प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में धूप-दीप जलाकर इस भजन का स्मरण करने से दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- नर्मदा तट पर संध्या आरती: अमरकंटक, ओंकारेश्वर, महेश्वर, या जबेरा जैसे पवित्र नर्मदा घाटों पर संध्या आरती के समय इस भजन का गायन विशेष आनंद देता है।
- नर्मदा परिक्रमा के दौरान: परिक्रमावासी साधक और यात्री विश्राम के समय इस संकीर्तन को गाकर अपनी थकान मिटाते हैं और ऊर्जावान महसूस करते हैं।
- सांस्कृतिक एवं धार्मिक सत्संग: भजन-कीर्तन की रातों और मेलों में समूह गान के लिए यह एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मुख्य केंद्र बिंदु माँ नर्मदा (रेवा) हैं। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, नर्मदा जी भगवान शिव के पसीने की बूंदों या उनकी इच्छा से प्रकट हुई थीं, इसीलिए इन्हें 'शंकर पुत्री' या 'शंकरी' भी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, आदि शंकराचार्य, संत कबीर, और अनगिनत अघोरी, नाथ पंथी तथा दंडी स्वामी नर्मदा के तटों पर तपस्या कर चुके हैं। नर्मदा पुराण और स्कंद पुराण के रेवा खंड में माँ नर्मदा के महात्म्य का विस्तार से वर्णन मिलता है। आप शिव तांडव स्तोत्र के माध्यम से नर्मदा के उद्गम स्थल और शिव आराधना के संबंध को और गहराई से समझ सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन लोक परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत का एक ऐसा अनूठा संगम है जिसे नर्मदा भक्तों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक एवं संगीत माध्यमों से जीवित रखा है। मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों, नर्मदा भक्तों और संकीर्तन मंडलियों द्वारा इसे विभिन्न मेलों और नर्मदा जयंती के पावन पर्व पर अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है। इसकी रचना का मूल उद्देश्य जनसामान्य को नर्मदा की महिमा से जोड़ना और उनके हृदय में माँ के प्रति भक्ति का भाव जगाना है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल हिंदी, बुंदेली और मालवी लोक बोलियों के संस्पर्श से युक्त है। इसमें उपमा और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है:
- सरलता: शब्दों की सादगी इसे हर उम्र के व्यक्ति के लिए आसानी से याद रखने योग्य बनाती है।
- लयात्मकता: भजन का ताल और छंद ऐसा है कि सुनते ही पैर थिरकने लगते हैं और हृदय झूम उठता है।
- बिंब (Imagery): 'दूधा सी बहे निर्मल धारा' पंक्ति आँखों के सामने नर्मदा के स्वच्छ जल का जीवंत चित्र खींच देती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि जीवन को पवित्र करने का एक आध्यात्मिक मार्ग है। इससे हमें निम्नलिखित जीवन सीख मिलती हैं:
- नियमित स्मरण: जिस प्रकार नदी निरंतर बहती है, उसी प्रकार ईश्वर और गुरु का स्मरण निरंतर होना चाहिए।
- शरणगति भाव: जीवन के दुखों से पार पाने के लिए किसी महान शक्ति के चरणों में पूर्ण समर्पण आवश्यक है।
- पवित्रता और निर्मलता: माँ नर्मदा की निर्मल धारा हमें अपने आचरण और विचारों को भी स्वच्छ रखने की प्रेरणा देती है।
- कृतज्ञता: प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल, वायु और जीवन के लिए ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| माई रेवा | माता नर्मदा | नर्मदा का एक अन्य प्राचीन और लोकप्रिय नाम। |
| भोरई से | भोर से / सुबह-सुबह | दिन के सबसे पवित्र और शांत पहर की शुरुआत। |
| टेर लगाए | पुकार लगाना / आवाज देना | भक्त द्वारा अपने इष्ट को प्रेमपूर्वक याद करना। |
| पतित पावनी | पापों का नाश करने वाली | जीवों के समस्त कर्मबंधनों और पापों को धोने वाली शक्ति। |
| दूधा सी | दूध के समान श्वेत | अत्यंत निर्मल, पवित्र और दोषरहित जल धारा। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"हम तो दीवाने है माई रेवा के..." - यहाँ भक्त संसार की तमाम चिंताओं से विरक्त होकर केवल माँ नर्मदा के प्रेम में मग्न होने की घोषणा करता है।
"भोरई से तोरे द्वारे पे आये, नर्मदे हर हर टेर लगाए..." - सुबह होते ही भक्त सबसे पहले माँ के तट पर हाजिरी लगाता है और 'नर्मदे हर' का जयकारा लगाकर अपने दिन की शुरुआत करता है।
"दूधा सी बहे निर्मल धारा, दर्शन दे के सबको तारा..." - नर्मदा का जल दूध के समान शुद्ध है, जिसके दर्शन मात्र से करोड़ों जीवों का उद्धार हो जाता है।
"शिव शंकर से वर है पायी, पतित पावनी माँ कहलाई..." - भगवान शिव के आशीर्वाद से ही माँ रेवा इस धरती पर पतित पावनी के रूप में प्रतिष्ठित हुई हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
नर्मदा नदी के स्मरण के समय निम्नलिखित पौराणिक श्लोक का उच्चारण अत्यंत फलदायी माना जाता है:
त्वदीय पाद पंकजम् नमामि नूते नर्मदा।
विनाश पाप कोटि च, हर मे नर्मदा मम॥
हे माँ नर्मदा! मैं आपके चरण कमलों को प्रणाम करता हूँ। हे नर्मदा! मेरे करोड़ों पापों का नाश करो और मेरा उद्धार करो।
आप माँ की आराधना के लिए हमारे श्री हनुमान चालीसा और अन्य स्तोत्रों के अध्ययन से अपनी साधना को और मजबूत कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| भजन का नाम | हम तो दीवाने है माई रेवा के (Hum To Diwane Hai Mai Rewa Ke) |
| आराध्य देवी | माँ नर्मदा (रेवा) |
| प्रमुख देव संबंध | भगवान शिव (शंकर) |
| भाषा | हिंदी / लोक भाषा |
| भक्ति भाव | अनन्य प्रेम, समर्पण और श्रद्धा |
| मुख्य अवसर | नर्मदा जयंती, परिक्रमा यात्रा, दैनिक सत्संग |
| मुख्य संदेश | नर्मदा दर्शन और नाम स्मरण से मोक्ष प्राप्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भजनों की मौखिक परंपरा, लोक साहित्य और सनातन ग्रंथों में वर्णित नर्मदा महात्म्य के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध गीत के बोल, उसका सही भावार्थ और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि उपलब्ध कराना है। यह पूर्णतः संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है जिसे विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में संकलित किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- नर्मदा पुराण एवं स्कंद पुराण (रेवा खंड)
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं नर्मदा परिक्रमा संकीर्तन परंपरा
- भारतीय सनातन नदी संस्कृति और लोक साहित्य अध्ययन
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