Krishna Bhajan रविवार विशेष (भगवान सूर्य नारायण)

यशोदा मां चोरी हो गयी (Yasoda maa chori ho gayi Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan

यशोदा मां चोरी हो गयी कृष्ण भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और वात्सल्य प्रेम पर आधारित इस लोकप्रिय भजन का आनंद लें।

Krishna Bhajan

भक्ति की पावन भूमि पर बाल गोपाल और माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम पर आधारित लोकप्रिय भजनों का एक विशिष्ट स्थान है। 'यशोदा मां चोरी हो गयी' (Yasoda maa chori ho gayi Lyrics in Hindi) एक अत्यंत भावपूर्ण, मनोरम और नटखट शैली में गाया जाने वाला कृष्ण भजन है, जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी की घटनाओं और उनके सखा-सखियों के साथ की गई नटखट क्रीड़ाओं का सजीव चित्रण करता है। इस भजन में द्वापर युग के उस अद्भुत वात्सल्य और प्रेममयी उलाहना का वर्णन मिलता है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के साथ सखा भाव और वात्सल्य भाव से जुड़ा महसूस करता है। भजन की रचना ब्रजभाषा की सुमधुर शैली में की गई है, जो श्रोताओं को सीधे भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप और गोकुल की गलियों में ले जाती है। जन्माष्टमी, राधाष्टमी, और विभिन्न सांस्कृतिक उत्सवों के अवसर पर इस भजन का गायन और श्रवण अत्यंत आनंददायक होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मखड़ा (Mukhda):
यशोदा मां चोरी हो गयी,
गोरस जमा के मटकी छुपा के - 2
झट से मैं सो गई,
यशोदा मां चोरी हो गयी...

अंतरा 1 (Antara 1):
कागज कलम दवात ले, लिखलो रपट हमारी,
माखन मेरा चुराया, तेरा मदन मुरारी,
मां को जवाब क्या दूं मैया - 2
बरजोरी हो गयी,
यशोदा मां चोरी हो गयी...

अंतरा 2 (Antara 2):
लिखकर रपट यशोदा, श्री कृष्ण को बुलाई,
नंद बाबा ने कचहरी में - 2 फैसला सुनाई,
कृष्ण को बांध दिए उखल में - 2
मजबूरी हो गयी,
यशोदा मां चोरी हो गयी...

अंतरा 3 (Antara 3):
उस दिन से सारी सखियां, रोए कदंब के नीचे,
आजा मोहन मुरारी - 2 आंसुओं से तन को सीचे,
रोको कलम को प्यासा - 2
कुछ गलती हो गयी,
यशोदा मां चोरी हो गयी...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण और गोकुल की गोपियों या मैया यशोदा के बीच के उस नटखट संवाद को दर्शाता है जहाँ बाल कृष्ण की शरारतों से पूरा गोकुल त्रस्त भी है और प्रेम से मुग्ध भी है। पहले पद में एक गोपी या मैया यशोदा के माध्यम से कहा गया है कि जब उसने दूध और दही (गोरस) को अच्छी तरह जमाकर और मटकी को छिपाकर रखा था, और वह थोड़ी देर के लिए सो गई, तो बाल कृष्ण ने माखन चुरा लिया। यहां कृष्ण की माखन चोरी की लीला का बहुत ही सुंदर और बाल-सुलभ वर्णन किया गया है।

अगले चरणों में भजन एक मनोरंजक कानूनी रूप ले लेता है, जहां गोपियां शिकायत लेकर माता यशोदा के पास पहुंचती हैं और कहती हैं कि "कागज, कलम और दवात लेकर हमारी रपट (शिकायत) लिख लो कि हमारे घर का सारा माखन तुम्हारे मदन मुरारी ने चुरा लिया है।" जब मैया यशोदा अपने कान्हा से पूछती हैं, तो कान्हा की चतुराई और प्रेम के आगे सबकी बोलती बंद हो जाती है। अंततः नंद बाबा की कचहरी में न्याय होता है और भगवान श्रीकृष्ण को ओखल से बांध दिए जाने की लीला का मंचन होता है। यह भजन वात्सल्य रस, बाल विनोद और प्रेम भक्ति का एक अनूठा संगम है, जो भगवान के भक्तवत्सल रूप को उजागर करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • वात्सल्य रस की प्रधानता: इस भजन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनके प्रति गोकुलवासियों के अनन्य प्रेम का सुंदर प्रदर्शन किया गया है।
  • बाल लीला का सजीव वर्णन: माखन चोरी और ओखल बंधन जैसी पौराणिक कथाओं को बहुत ही सरल शब्दों में पिरोया गया है।
  • सामूहिक गायन के लिए उपयुक्त: इसकी लय और धुन इतनी आकर्षक है कि इसे संकीर्तन, सत्संग और जन्माष्टमी उत्सव में आसानी से गाया जा सकता है।
  • भक्त और भगवान का मधुर संबंध: शिकायत करने का यह अनूठा तरीका ईश्वर के साथ घनिष्ठता और अपनेपन के भाव को प्रकट करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस आनंदमय भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, विशेषकर निम्नलिखित अवसरों पर इसका विशेष महत्व होता है:

शुभ अवसर एवं तिथियां

श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी, अन्नकूट महोत्सव, होली उत्सव और किसी भी प्रकार के पारिवारिक सत्संग या संकीर्तन के दौरान।

गायन विधि

इसे ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम के साथ तालबद्ध तरीके से गाया जा सकता है। बच्चों और महिलाओं के समूह में इस भजन को गाने से विशेष आनंद की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्रीकृष्ण, उनकी माता यशोदा और नंद बाबा हैं। सनातन धर्म में बाल कृष्ण (लड्डू गोपाल) की सेवा करना माता यशोदा के समान वात्सल्य भाव रखना माना गया है। ब्रज क्षेत्र के संतों और कवियों (जैसे सूरदास और रसखान) की परंपरा में कृष्ण की बाल लीलाओं का गुणगान करना भक्ति का सर्वोच्च मार्ग माना गया है। जब भक्त भगवान को अपने बच्चे या सखा रूप में देखता है, तो उसके मन से सारे भय और औपचारिकताएं समाप्त हो जाती हैं और शुद्ध प्रेम शेष रहता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रजभाषा के लोक-साहित्य के प्रभाव से युक्त है। इसमें उपयोग किए गए शब्द जैसे 'गोरस', 'मटकी', 'रपट', 'बरजोरी', 'उखल' और 'कचहरी' ग्रामीण परिवेश और ब्रज संस्कृति की याद दिलाते हैं। काव्य शैली संवादात्मक (Dialogic) है, जिसमें एक गोपी या सखी सीधे यशोदा मैया से संवाद कर रही है। यह शैली श्रोताओं को तुरंत बांध लेती है और उन्हें ऐसा अनुभव कराती मानो वे खुद गोकुल की किसी चौपाल पर उपस्थित हों।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • ईश्वर के साथ प्रेम संबंध: भगवान से डरने के बजाय उनसे प्रेम करना और उनके साथ आत्मीय संबंध जोड़ना ही सच्ची भक्ति है।
  • बाल रूप की दिव्यता: भगवान की हर लीला में एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा होता है, जो मानव मन को आनंदित करता है।
  • समर्पण और सरलता: गोकुलवासियों की सरल मनोदशा यह सिखाती है कि ईश्वर के सामने किसी भी प्रकार का छल-कपट नहीं टिकता।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
गोरस दूध, दही और मक्खन गोकुल के घरों में मिलने वाला डेयरी उत्पाद
रपट शिकायत / FIR कृष्ण की चोरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना
बरजोरी जबरदस्ती / हुड़दंग कान्हा की नटखट शरारतें
उखल ओखली जिससे कृष्ण को बांधा गया था (उखल बंधन)
मदन मुरारी भगवान श्रीकृष्ण सौंदर्य के प्रतीक और भक्तों के मन को मोहने वाले

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम यशोदा मां चोरी हो गयी (Yasoda Maa Chori Ho Gayi)
आराध्य देव भगवान श्रीकृष्ण (बाल रूप / लड्डू गोपाल)
संगीत शैली लोक भजन / ब्रज संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी एवं ब्रजस्थानी बोल
मुख्य भाव वात्सल्य, प्रेम, बाल विनोद एवं उलाहना
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, सांस्कृतिक कार्यक्रम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) और उनकी माखन चोरी की लीलाओं को समर्पित है।

इस भजन को मुख्य रूप से श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी, और घर में होने वाले बाल गोपाल के उत्सवों या सत्संगों में गाया जाता है।

'गोरस' का अर्थ दूध, दही और मक्खन से है, जिन्हें गोकुल में गऊ माता के दूध से तैयार किया जाता था।

हाँ, यह भजन अपनी नटखट शैली और सरल बोलों के कारण बच्चों के नृत्य और गायन प्रस्तुतियों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

'उखल' ओखली को कहा जाता है। माखन चोरी और नटखट लीलाओं से परेशान होकर जब मैया यशोदा ने कान्हा को ओखल से बांध दिया था, यह उस प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग की ओर संकेत करता है।

हाँ, यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के साथ हमारा रिश्ता भय का नहीं, बल्कि प्रेम, वात्सल्य और अपनत्व का होना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य सनातन धर्म की समृद्ध भजन परंपरा, बाल कृष्ण की लीलाओं और ब्रज संस्कृति के संदेश को पाठकों तक सहज और प्रामाणिक रूप में पहुंचाना है। सभी बोलों और भावार्थों को पारंपरिक स्रोतों और लोक-साहित्य के आधार पर संकलित किया गया है ताकि भक्तों को पढ़ने और गाने में पूर्ण आनंद की प्राप्ति हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • • श्रीमद्भागवत पुराण (दसवां स्कंध - बाल लीला प्रसंग)
  • • ब्रज लोक-साहित्य और पारंपरिक संकीर्तन संग्रह
  • • सूरसागर - महाकवि सूरदास द्वारा रचित बाल विनोद पद
  • • पारंपरिक वैष्णव भजन संकलन एवं लोक-गायन परंपरा

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया, तो हमारे पोर्टल पर उपलब्ध अन्य पावन भजनों और लेखों को भी अवश्य पढ़ें:

श्री कृष्ण स्तोत्र एवं वंदना

भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाला पावन स्तोत्र।

जन्माष्टमी व्रत कथा एवं पूजन विधि

श्री कृष्ण जन्मोत्सव की पौराणिक कथा, व्रत के नियम और संपूर्ण पूजा पद्धति।

राधा अष्टमी व्रत एवं महिमा

श्री राधा रानी के प्रकटोत्सव और उनकी भक्ति से जुड़े पावन प्रसंग।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 25 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!