Rani Sati Dadi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

तेरे सहारे थे दादी जी लिरिक्स (Tere sahare the dadi ji Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan

तेरे सहारे थे दादी जी लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। रानी सती दादी जी का यह लोकप्रिय भजन अर्थ और संपूर्ण भावार्थ सहित यहाँ उपलब्ध है।

Rani Sati Dadi Bhajan

भक्ति और अनन्य समर्पण की पावन भूमि पर जब भी रानी सती दादी जी का स्मरण किया जाता है, भक्तों का हृदय श्रद्धा से भर जाता है। 'तेरे सहारे थे दादी जी तेरे सहारे हैं' यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक अकिंचन भक्त की अपनी आराध्य देवी के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) का सजीव दस्तावेज है। झुंझुनूं वाली माँ नारायणी यानी राणी सती दादी जी के दरबार में जब कोई भक्त अपनी सूनी झोली लेकर पहुंचता है, तो उसके पास विश्वास का एकमात्र संबल माँ का आशीर्वाद होता है। उज्जवल खकोलियां द्वारा स्वरबद्ध इस अत्यंत लोकप्रिय भजन में विरह, विनय, करुणा और असीम विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व कासांगोपांग अध्ययन करेंगे ताकि प्रत्येक साधक माँ के चरणों में अपनी निष्ठा को और प्रगाढ़ कर सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तेरे सहारे थे दादी जी, तेरे सहारे हैं,
तेरे सहारे ही रहेंगे ओ मेरी मैया!
तेरे हवाले थे दादी जी, तेरे हवाले हैं,
तेरे हवाले ही रहेंगे ओ मेरी मैया...॥

चरण कमल की सेवा दे दो, नित उठ भवन बुहारूँ,
प्रेम पूरित नयनों से तेरी निर्मल छवि को निहारूँ।
भक्ति का वरदान दे दो ओ मेरी मैया...॥
तेरे सहारे थे दादी जी...

तेरे सिवा मेरी झुंझुनूवाली कोई नहीं है हमारो,
दर-दर की है ठोकर खाई, मिलो न कोई सहारो।
अब तो आकर बांह पकड़ लो ओ मेरी मैया...॥
तेरे सहारे थे दादी जी...

दुनिया के सब रिश्ते-नाते, माया का है डेरा,
एक तू ही लागे अपनी, सर पे हाथ जो फेरा।
भवसागर से पार लगा दो ओ मेरी मैया...॥
तेरे सहारे थे दादी जी...

जन्म-मरण के फेरों में दादी, नैया डगमग डोले,
होता निश्चय भवपार वही, जो 'जय दादी की' बोले।
करे यही अरदास "गम्भीर" ओ मेरी मैया...॥
तेरे सहारे थे दादी जी, तेरे सहारे हैं,
तेरे सहारे ही रहेंगे ओ मेरी मैया!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अनुपम भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ राणी सती के प्रति एक सच्चे भक्त की आर्त पुकार और अनन्य निष्ठा छिपी हुई है। आइए इसके गहरे आध्यात्मिक भाव को समझें:

प्रथम अंतरा और मुखड़ा: भक्त अपनी आराध्य राणी सती दादी जी से कहता है कि हे मैया! भूतकाल में भी हम केवल आपके ही भरोसे थे, वर्तमान में भी हमारा एकमात्र संबल आप ही हैं और भविष्य में भी हम आपके चरणों के आश्रित ही रहेंगे। यह भाव अटूट विश्वास को दर्शाता है। भक्त आगे प्रार्थना करता है कि हे माँ! मुझे अपने चरण कमलों की सेवा का सौभाग्य प्रदान करें, जिससे मैं रोज सुबह उठकर आपके मंदिर या दरबार के आँगन को बुहार सकूं। मेरी आँखें प्रेम से भरकर आपकी उस निर्मल और अलौकिक छवि को निरंतर निहारती रहें। मुझे केवल भक्ति का पावन वरदान चाहिए।

द्वितीय अंतरा: संसार की वास्तविकता का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि हे झुंझुनूंवाली मैया! आपके अतिरिक्त इस असीम संसार में मेरा अपना कहने वाला कोई नहीं है। मैंने जीवन में दर-दर की ठोकरें खाई हैं, जगह-जगह अपमान और निराशा झेली है, परंतु मुझे कोई वास्तविक सहारा नहीं मिला। अब और परीक्षा न लें, स्वयं आकर मेरी बाँह थाम लें और मुझे इस भवसागर से उबार लें।

तृतीय अंतरा: सांसारिक मोह-माया पर प्रकाश डालते हुए गीतकार कहता है कि इस दुनिया के जितने भी नाते-रिश्ते हैं, वे सब केवल स्वार्थ और माया का एक अस्थायी डेरा हैं। इन झूठे बंधनों के बीच केवल आप ही अपनी लगती हैं जब आप ममतामयी हाथ हमारे सिर पर फेरती हैं। हे मैया! इस जन्म-मरण के चक्र रूपी भवसागर से हमारी नैया को पार लगा दीजिए। जब जीवन की नौका डगमगाने लगे, तब जो भी सच्चे मन से 'जय दादी की' का जयकारा लगाता है, उसका नैया निश्चित ही पार हो जाती है। अंत में रचनाकार 'गम्भीर' यही अरदास करते हैं कि हे मैया, हमारी यह डगमगाती नाव अब आपके हवाले है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन राणी सती दादी जी की उपासना करने वाले भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पूर्ण शरणागति (Surrender): भजन का मूल भाव जीव की ईश्वर के प्रति सम्पूर्ण आत्मसमर्पण की भावना को उजागर करता है।
  • झुंझुनूं धाम की महिमा: राजस्थान के प्रसिद्ध झुंझुनूं स्थित राणी सती मंदिर के प्रति भक्तों की अटूट आस्था को इसमें बहुत ही सुंदर ढंग से पिरोया गया है।
  • सरल एवं हृदयस्पर्शी भाषा: बोल इतने सरल और भावपूर्ण हैं कि साधारण से साधारण भक्त भी इसे आसानी से गा सकता है और रोमांचित हो सकता है।
  • मानसिक शांति और संबल: संकट के समय इस भजन का स्मरण करने से भक्तों को असीम मानसिक संबल और ढांढस बंधता है।
  • आप इस प्रकार के अन्य लोकप्रिय स्तोत्रों के लिए श्री राणी सती दादी चालीसा और श्री राणी सती दादी जी की आरती का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पवित्र भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, तथापि इसे पूरी पवित्रता और एकाग्रता के साथ गाने से विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है:

  • समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात मंदिर में दीपक प्रज्वलित करते समय अथवा संध्याकाल के समय जब घर में धूप-दीप किया जाता है, तब इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • अवसर: भाद्रपद अमावस्या (राणी सती दादी जी का मुख्य प्रकटोत्सव), मंगला पाठ, सत्संग, पारिवारिक अनुष्ठान और जागरण के समय झुंझुनूं वाली दादी के दरबार में इस भजन का गान विशेष आनंद देता है।
  • विधि: आसन पर बैठकर, मन को शांत करके, दादी जी के चित्र या ज्योति के समक्ष दीप जलाकर भाव विभोर होकर इसे गाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन राजस्थान की कुलदेवी और शक्तिस्वरूपा माँ राणी सती (नारायणी देवी) को समर्पित है। राणी सती दादी जी को आदि शक्ति दुर्गा का अवतार माना जाता है। राजस्थान के झुंझुनूं में स्थित उनका भव्य मंदिर पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। जहाँ भक्त अपनी मंगल कामनाओं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए उनकी आराधना करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना लोकप्रिय भजन गायक और गीतकार उज्जवल खकोलियां द्वारा की गई है। उनके द्वारा रचित इस भजन में दादी जी के भक्तों के आंतरिक संघर्ष और माँ के प्रति उनकी अगाध निष्ठा का सजीव चित्रण मिलता है। यह भजन उन तमाम भक्तों की आवाज़ है जो सांसारिक दुखों से त्रस्त होकर अंत में माँ की शरण में शांति पाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा विशुद्ध हिंदी और राजस्थानी लोक-संस्कृति से प्रभावित सरल ब्रज-अवधी मिश्रित हिंदी है। इसमें 'भवन बुहारूँ', 'निहारूँ', 'हमारो', 'सहारो' जैसे शब्दों का प्रयोग कर इसे अत्यंत मधुर बनाया गया है। रूपक और उपमा अलंकारों के सुंदर प्रयोग ने इस रचना को काव्य की दृष्टि से भी उत्कृष्ट बना दिया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जब मनुष्य अपने बल-बूते पर भरोसा छोड़कर खुद को भगवान के हवाले कर देता है, तब उसके जीवन के सभी संकट टल जाते हैं।
  • माया से मुक्ति: सांसारिक रिश्ते-नाते क्षणिक हैं, केवल ईश्वर की भक्ति ही शाश्वत सत्य है।
  • धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी दादी जी के चरणों में अटूट विश्वास बनाए रखना ही सच्चे भक्त की पहचान है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
तेरे सहारे आपका आश्रय / भरोसा ईश्वर पर पूर्ण निर्भरता
भवन बुहारूँ मंदिर के आँगन की सफाई करना नम्रता और सेवा भाव का प्रतीक
निहारूँ प्रेम से देखना दिव्य दर्शन की लालसा
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मरण का चक्र
अरदास विनम्र प्रार्थना भक्त की ईश्वर से गुहार

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: 'चरण कमल की सेवा देदो नित उठ भवन बुहारूँ'
भावार्थ: भक्त का सबसे बड़ा सपना यह है कि उसे सांसारिक सुखों के बजाय अपनी इष्ट देवी के चरणों की सेवा मिले। मंदिर की सफाई करना अहंकार को मिटाने का सबसे उत्तम साधन है।

पंक्ति: 'दर दर की है ठोकर खाई मिलो न कोई सहारो'
भावार्थ: जब इंसान दुनिया के तमाम दरवाजों पर जाकर निराश हो जाता है, तब उसे समझ आता है कि वास्तविक शरण केवल माँ के दरबार में ही है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ श्री राणी सती नमः ॥
नमो नारायण्यायै नमः ॥

दादी जी के स्मरण के समय इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। आप अधिक जानकारी के लिए अल्लाह सती अनसूया और राणी सती दादी मनका 108 के पावन पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरे सहारे थे दादी जी लिरिक्स (Tere sahare the dadi ji Lyrics)
आराध्य देवी श्री राणी सती दादी जी (माँ नारायणी)
गायक / रचनाकार उज्जवल खकोलियां एवं अन्य
भाषा हिंदी / राजस्थानी भाव
भक्ति भाव शरणागति, विनय और प्रेम
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, मंगला पाठ, अमावस्या उत्सव, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन को गायक उज्जवल खकोलियां द्वारा स्वरबद्ध किया गया है, जिसे दादी जी के भक्तों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है।

राणी सती दादी जी का मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

इस भजन को प्रातःकालीन पूजा, संध्या आरती, अमावस्या के विशेष उत्सवों या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान व सत्संग के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

राणी सती दादी जी को माँ शक्ति, दुर्गा और नारायणी देवी का अवतार माना जाता है, जो नारी शक्ति, त्याग, और वीरता का प्रतीक हैं।

भाद्रपद अमावस्या के पावन पर्व पर झुंझुनूं स्थित राणी सती मंदिर में विशाल मेला लगता है और देश भर से भक्त यहाँ आकर दादी जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

हाँ, अमावस्या या किसी भी शुभ अवसर पर घर पर विधि-विधान से घी का दीपक जलाकर दादी जी का मंगला पाठ और भजन कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश जीवन की समस्त चिंताओं और अहंकारों को त्यागकर अपनी इष्ट देवी राणी सती के चरणों में पूर्ण शरणागति अर्पित करना है।

हाँ, भक्तजनों की सुविधा के लिए इस लेख में देवनागरी लिपि (हिंदी) में सम्पूर्ण भजन के बोल, अर्थ और भावार्थ बहुत ही सरल रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख राणी सती दादी जी के भक्तों की आध्यात्मिक भावनाओं और पारंपरिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए **संपादकीय रूप से तैयार सामग्री** है। इसमें भजन के सटीक बोल, सरल अर्थ और प्रासंगिक जानकारियों का समावेश किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस की प्राप्ति हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत एवं भजन संकलन
  • श्री राणी सती मंदिर ट्रस्ट, झुंझुनूं की परंपराएं एवं इतिहास
  • वैदिक एवं पौराणिक सनातन संस्कृति के भक्ति ग्रंथ

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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