"जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या रिश्तेदार हैं" (Jinko Jinko Seth Banaya Wo Kya Rishtedar Hain) रानी सती दादी जी का एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और मधुर भजन है। इस भजन में भक्त और भगवान (विशेषकर आदि शक्ति स्वरूपा रानी सती दादी) के बीच के अत्यंत घनिष्ठ, आत्मीय और वात्सल्यमयी संबंध को दर्शाया गया है। भक्ति मार्ग में जब भक्त अपने आराध्य के इतने निकट आ जाता है कि वह उनसे प्रेमपूर्वक शिकायत या "उलाहना" करने लगता है, तो उसे 'उलाहना भाव' या 'सख्य-वात्सल्य भाव' कहा जाता है। इस भजन में गायिका कविता पेरीवाल ने अपनी सुमधुर आवाज के माध्यम से एक ऐसे ही निष्कपट भक्त की पुकार को जीवंत किया है, जो अपनी मैया से मीठी तकरार कर रहा है। यह भजन विशेष रूप से मारवाड़ी समाज और रानी सती दादी के भक्तों के बीच अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ गाया जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या रिश्तेदार हैं
उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।
वो भी मैया कहते हैं, हम भी मैया कहते हैं,
वो भी सेवा करते हैं, हम भी सेवा करते हैं,
हम तो छोटे मोटे भिखारी, वो क्या जागीरदार है,
उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।
वो भी हैं परिवार तेरा, ये भी परिवार तेरा,
उनको भी आधार तेरा, हमको भी आधार तेरा,
हम तो तेरे दर के नौकर, वो क्या हिस्सेदार है,
उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।
वो भी दर पे जाते हैं, हम भी दर पे जाते हैं,
वो भी मांग के लाते हैं, हम भी मांग के लाते हैं,
देख देख कर झोली भरती, तू कैसी दातार है,
उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।
उनको भर भण्डार दिया, उनको छप्पर फाड़ दिया,
जब आई मेरी बारी, अपना पल्ला झाड़ दिया,
उन भगतों का तेरे साथ में, चलता क्या व्यापार है,
उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस पावन भजन का मुख्य भाव "मधुरा भक्ति" और "उलाहना" पर आधारित है। यहाँ भक्त अपनी आराध्य देवी, श्री रानी सती दादी जी से प्रश्न करता है कि हे मैया! जिन लोगों को आपने अपार धन-दौलत देकर 'सेठ' (अमीर) बना दिया है, क्या वे आपके विशेष रिश्तेदार हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि आपको केवल उन्हीं से प्रेम है और हमसे हमेशा तकरार (अनबन या उपेक्षा) रहती है।
भक्त आगे कहता है कि हे माँ! हम दोनों ही आपको 'मैया' कहकर पुकारते हैं और दोनों ही आपकी निष्काम सेवा करते हैं। फिर हमारे बीच यह अंतर क्यों? हम तो आपके द्वार पर खड़े छोटे-मोटे याचक (भिखारी) बनकर रह गए हैं, और वे ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे कोई बड़े जागीरदार हों। भक्त अपनी दीनता और मैया की महानता के बीच के इस मधुर द्वंद्व को बहुत ही सुंदर शब्दों में व्यक्त करता है। वह कहता है कि हे माँ, चाहे अमीर हो या गरीब, दोनों ही आपके परिवार का हिस्सा हैं और दोनों का एकमात्र सहारा आप ही हैं। फिर भी ऐसा क्यों लगता है कि हम केवल आपके द्वार के सेवक हैं और वे आपके साम्राज्य के हिस्सेदार बन बैठे हैं?
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल भौतिक धन की मांग नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के साथ एक अत्यंत व्यक्तिगत और अनौपचारिक संबंध स्थापित करने का माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- उलाहना भाव (Sweet Complaint): भारतीय भक्ति परंपरा में सूरदास, मीराबाई और रसखान जैसे महान संतों ने भी अपने आराध्य से उलाहना किया है। यह भजन उसी समृद्ध परंपरा का आधुनिक रूप है।
- समानता का संदेश: भजन इस बात पर प्रकाश डालता है कि ईश्वर की दृष्टि में सभी संतानें समान हैं, चाहे वे अमीर हों या गरीब। भक्त माँ को याद दिलाता है कि उसका अधिकार भी उतना ही है जितना किसी समृद्ध भक्त का।
- समर्पण और विश्वास: यद्यपि भक्त शिकायत कर रहा है, लेकिन उसका विश्वास अडिग है। वह जानता है कि अंततः उसकी झोली भी उसकी मैया ही भरेगी।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को गाने और सुनने के लिए किसी विशेष कठिन नियम की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है। फिर भी, निम्नलिखित अवसरों पर इसका गायन विशेष फलदायी माना जाता है:
- मंगलोत्सव और मंगल पाठ: रानी सती दादी जी के मंगल पाठ के दौरान इस भजन को गाने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
- भाद्रपद अमावस्या (भादी मावस): झुंझुनू में आयोजित होने वाले वार्षिक उत्सव और घरों में होने वाली विशेष पूजा के समय इस भजन का सामूहिक संकीर्तन किया जाता है।
- दैनिक संध्या आरती: घर के मंदिर में संध्या काल की पूजा के बाद इस भजन को गाकर भक्त अपनी मैया के प्रति अपना लाड़ और प्रेम व्यक्त कर सकते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन आदि शक्ति स्वरूपा श्री रानी सती दादी जी (नारायणी देवी) को समर्पित है। रानी सती दादी जी का मुख्य मंदिर राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित है, जो देश-विदेश के लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। उन्हें भक्त अत्यंत आदर और प्रेम से 'दादी जी' या 'मैया' कहकर पुकारते हैं। इस भजन को प्रसिद्ध भजन गायिका कविता पेरीवाल ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से सजाया है, जिससे यह प्रत्येक भक्त के हृदय में सीधा उतर जाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
मारवाड़ी समाज में दादी जी को परिवार की कुलदेवी और रक्षक के रूप में पूजा जाता है। इस समाज में ईश्वर को अत्यंत निकट का संबंधी मानने की परंपरा रही है। इसी पृष्ठभूमि में इस भजन की रचना की गई है, जहाँ भक्त अपनी माँ से उसी प्रकार अधिकारपूर्वक बात करता है जैसे एक छोटा बच्चा अपनी सांसारिक माँ से जिद करता है। "पल्ला झाड़ देना" और "छप्पर फाड़ देना" जैसे मुहावरों का प्रयोग इस भजन को अत्यंत व्यावहारिक और लोक-संस्कृति के करीब लाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और मारवाड़ी लोक-शब्दावली का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसमें प्रयुक्त काव्य शैली अत्यंत संवादात्मक (Conversational) है। भक्त और भगवान के बीच का यह संवाद पाठक या श्रोता को बांधे रखता है। अनुप्रास और अंत्यानुप्रास अलंकारों के सहज प्रयोग से भजन में एक अद्भुत गेयता (लयबद्धता) उत्पन्न होती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यद्यपि यह भजन बाह्य रूप से एक शिकायत जैसा प्रतीत होता है, परंतु इसके भीतर गहरे आध्यात्मिक संदेश छिपे हैं:
- अहंकार का त्याग: भक्त स्वयं को "छोटा मोटा भिखारी" और "दर का नौकर" कहकर अपने अहंकार को पूरी तरह शून्य कर देता है। अध्यात्म में शरणागति की यह पहली सीढ़ी है।
- सच्चा अधिकार प्रेम से मिलता है: भक्त का यह विश्वास कि वह माँ से लड़ सकता है, यह दर्शाता है कि ईश्वर के साथ हमारा संबंध भय का नहीं, बल्कि असीम प्रेम का होना चाहिए।
- धैर्य और संतोष: भजन हमें सिखाता है कि जब हमारी प्रार्थनाएं तुरंत स्वीकार न हों, तब भी हमें निराश होने के बजाय अपने आराध्य पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | भक्ति संदर्भ एवं महत्व |
|---|---|---|
| तकरार | विवाद, मीठी बहस या शिकायत | भक्त और भगवान के बीच का प्रेमपूर्ण उलाहना। |
| जागीरदार | बड़ी संपत्ति या जागीर का मालिक | संसार के समृद्ध और अमीर लोगों के लिए प्रयुक्त शब्द। |
| दातार | दान देने वाला, दानी | मैया की असीम दानशीलता और दयालुता को दर्शाने वाला शब्द। |
| पल्ला झाड़ना | मना कर देना या उपेक्षा करना | भक्त का माँ से यह कहना कि मेरी बारी आने पर आपने ध्यान नहीं दिया। |
| छप्पर फाड़ना | अत्यधिक मात्रा में बिना मांगे देना | ईश्वर द्वारा भक्तों पर की जाने वाली असीम कृपा का प्रतीक। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: "जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या रिश्तेदार हैं, उनसे तो प्यार है, हमसे तकरार है।"
भावार्थ: हे दादी जी! जिन लोगों को आपने अपार धन और समृद्धि देकर बड़ा सेठ बना दिया है, क्या वे आपके विशेष संबंधी हैं? ऐसा लगता है कि आपकी सारी कृपा उन्हीं पर बरस रही है और हमसे आप केवल परीक्षा ले रही हैं।
पंक्ति: "वो भी मैया कहते हैं, हम भी मैया कहते हैं... हम तो छोटे मोटे भिखारी, वो क्या जागीरदार है।"
भावार्थ: हे माँ! हम दोनों ही आपको एक ही नाम 'मैया' से पुकारते हैं और दोनों ही आपकी सेवा में लीन रहते हैं। फिर भी वे जागीरदार की तरह ठाठ से रहते हैं और हम आपके द्वार पर याचक बनकर खड़े हैं। यह कैसा न्याय है माँ?
पंक्ति: "वो भी हैं परिवार तेरा, ये भी परिवार तेरा... हम तो तेरे दर के नौकर, वो क्या हिस्सेदार है।"
भावार्थ: अमीर और गरीब दोनों ही आपकी संतानें हैं और दोनों का अस्तित्व आपके ही सहारे है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वे आपके खजाने के हिस्सेदार बन गए हैं और हम केवल आपके द्वार के सेवक बनकर रह गए हैं।
पंक्ति: "वो भी दर पे जाते हैं, हम भी दर पे जाते हैं... देख देख कर झोली भरती, तू कैसी दातार है।"
भावार्थ: हम दोनों ही अपनी झोली फैलाकर आपके द्वार पर आते हैं। लेकिन आप उनकी झोली को देखकर तुरंत भर देती हैं। हे माँ! आप पक्षपात रहित होकर सबकी झोली भरने वाली परम दातार हैं, फिर मेरे साथ ऐसा क्यों?
पंक्ति: "उनको भर भण्डार दिया, उनको छप्पर फाड़ दिया, जब आई मेरी बारी, अपना पल्ला झाड़ दिया..."
भावार्थ: आपने दूसरों को तो बिना मांगे ही छप्पर फाड़कर दे दिया और उनके भंडार भर दिए। लेकिन जब मेरी बारी आई, तो आपने अपनी झोली समेट ली और खाली हाथ फेर दिया। क्या आपके और उन अमीर भक्तों के बीच कोई गुप्त व्यापार चल रहा है?
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
रानी सती दादी जी की आराधना करते समय इस परम कल्याणकारी मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
"ॐ श्री नारायणी देव्यै नमः"
"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥"
यह मंत्र माँ नारायणी (दादी जी) के दिव्य स्वरूप का ध्यान करने और उनकी असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अमोघ है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण का विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | जिनको जिनको सेठ बनाया वो क्या रिश्तेदार हैं |
| समर्पित देवी/देवता | श्री रानी सती दादी जी (माँ नारायणी) |
| मुख्य गायिका | कविता पेरीवाल (Kabita Periwal) |
| भजन का मुख्य भाव | उलाहना भाव, वात्सल्य एवं अनन्य भक्ति |
| भाषा | सरल हिंदी (मारवाड़ी प्रभाव सहित) |
| उपयुक्त अवसर | मंगलोत्सव, भादी मावस, दादी जी का कीर्तन, दैनिक संध्या आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"जिनको जिनको सेठ बनाया" भजन के लेखक और गायक कौन हैं?
यह भजन पारंपरिक रूप से दादी जी के भक्तों द्वारा गाया जाता रहा है, परंतु इसे सबसे अधिक लोकप्रियता प्रसिद्ध भजन गायिका कविता पेरीवाल (Kabita Periwal) की आवाज से मिली है।
इस भजन में "उलाहना भाव" का क्या अर्थ है?
उलाहना भाव का अर्थ है जब एक भक्त अपने आराध्य को अपना परम आत्मीय मानकर उनसे प्रेमपूर्वक शिकायत करता है। यह दर्शाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि अत्यंत घनिष्ठ संबंध है।
रानी सती दादी जी कौन हैं?
रानी सती दादी जी को आदि शक्ति का अवतार माना जाता है। उनका ऐतिहासिक नाम नारायणी देवी था। उनका मुख्य और भव्य मंदिर राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित है।
इस भजन को गाने से भक्तों को क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?
इस भजन को गाने से भक्त का अहंकार नष्ट होता है, माँ के प्रति समर्पण बढ़ता है और मन को असीम शांति एवं आनंद की अनुभूति होती है।
क्या इस भजन का उपयोग दैनिक पूजा में किया जा सकता है?
हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गा सकते हैं।
"पल्ला झाड़ दिया" मुहावरे का इस भजन में क्या संदर्भ है?
यहाँ भक्त अपनी माँ से लाड़ लड़ाते हुए कहता है कि जब मेरी मदद करने की बारी आई, तो आपने मुस्कुराकर मुझे टाल दिया या खाली हाथ रख दिया। यह भक्त की मीठी जिद को दर्शाता है।
रानी सती दादी जी का मुख्य उत्सव कब मनाया जाता है?
दादी जी का मुख्य उत्सव प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की अमावस्या (जिसे भादी मावस कहा जाता है) को बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है।
इस भजन की भाषा शैली कैसी है?
इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और लोक-शैली पर आधारित है, जिससे साधारण से साधारण व्यक्ति भी इसके भावों को आसानी से समझ और महसूस कर सकता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, भावार्थ और उससे जुड़ी जानकारियों को प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक मारवाड़ी भजनों के संग्रह और रानी सती दादी जी के मंदिर की परंपराओं के आधार पर संकलित और विश्लेषित किया गया है। इसका उद्देश्य भक्तों तक शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाली आध्यात्मिक सामग्री पहुंचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्री रानी सती दादी मंदिर ट्रस्ट, झुंझुनू (राजस्थान) की आधिकारिक परंपराएं।
- पारंपरिक मारवाड़ी भजन संग्रह एवं संकीर्तन पुस्तिकाएं।
- भक्ति रस और मधुरा भक्ति पर शास्त्रीय ग्रंथ।
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