परिचय
देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "होली खेलें शंकर भोला (Holi Khelein Shankar Bhola Lyrics in Hindi)" गायक केशव शर्मा की मधुर वाणी में शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। रंगों के पावन पर्व होली के उल्लास और शिव के परम वैराग्य का अद्भुत समन्वय इस भजन की मुख्य विशेषता है। जहाँ एक ओर संपूर्ण संसार रंगों के उल्लास में सराबोर रहता है, वहीं दूसरी ओर महाकाल भगवान शिव श्मशान की भस्म से होली खेलकर संसार को यह संदेश देते हैं कि भौतिक सुखों और रंगों से परे असली आनंद आत्मानुभूति और प्रभु स्मरण में है। इस लेख में हम इस प्रसिद्ध भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ और इसकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
शिवभक्ति और रंगोत्सव का यह अनूठा संगम साधकों को भगवान शिव के कल्याणकारी और अघोर स्वरूप का दर्शन कराता है। इस भजन को गाने और सुनने मात्र से मन में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है और साधक सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त होकर शिवमय हो जाता है। आइए, इस दिव्य भजन के एक-एक शब्द और उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
|| होली खेलें शंकर भोला ||
मुखड़ा:
होली खेलें शंकर भोला, नंदी की असवारी पै,
भस्म रमाए बैठे डमरू वाले, कैलाश बिहारी पै।
होली खेलें शंकर भोला, नंदी की असवारी पै...
अंतरा 1:
गले में नाग विराजे, जटा में गंगा बहती है,
मैया पार्वती संग गोरा, देखो छटा ये कहती है।
डम-डम डमरू बाजे प्यारा, ताल मृदंग बजारी पै,
भस्म रमाए बैठे डमरू वाले, कैलाश बिहारी पै।
होली खेलें शंकर भोला, नंदी की असवारी पै...
अंतरा 2:
भूत-प्रेत और पिशाच सारे, रंग लगाने आते हैं,
भस्म और मसान की होली, शिव गण मिलकर गाते हैं।
ऐसा रंग जमा है भोले का, तीनों लोक बलिहारी पै,
भस्म रमाए बैठे डमरू वाले, कैलाश बिहारी पै।
होली खेलें शंकर भोला, नंदी की असवारी पै...
अंतरा 3:
केशव शर्मा गुण गाए, चरणों में शीश झुकाए,
जो भी शिव का नाम लेवे, वो भव से तर जाए।
कृपा करो हे भोले बाबा, शरण तिहारी आई री,
भस्म रमाए बैठे डमरू वाले, कैलाश बिहारी पै।
होली खेलें शंकर भोला, नंदी की असवारी पै...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन केवल एक उत्सव का गीत नहीं है, बल्कि यह शैव दर्शन के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। भजन के मुखड़े में गायक केशव शर्मा वर्णन करते हैं कि सृष्टि के संहारक और पालक देवादिदेव महादेव अपने वाहन नंदी पर सवार होकर होली खेल रहे हैं। उनके शरीर पर रंग या गुलाल के स्थान पर श्मशान की भस्म रमी हुई है, जो इस बात का प्रतीक है कि यह संपूर्ण संसार नश्वर है और अंततः सब कुछ इसी भस्म में विलीन हो जाना है।
पहले अंतरे में शिव के स्वरूप का मार्मिक चित्रण है। उनके गले में नाग आभूषण के रूप में सुशोभित हैं, उनकी जटाओं से पावन गंगा प्रवाहित होती है और उनके वाम भाग में माता पार्वती (गोरा) विराजमान हैं। डमरू की डम-डम ध्वनि और मृदंग की थाप के साथ यह उत्सव ब्रह्मांडीय आनंद का रूप ले लेता है।
दूसरे अंतरे में शिव की अघोरता का सुंदर वर्णन है। समाज द्वारा जिन्हें तिरस्कृत माना जाता है—जैसे भूत, प्रेत, पिशाच और गण—वे सभी शिव की बारात और होली के उत्सव का हिस्सा बनते हैं। शिव भेदभाव की सभी दीवारों को गिराकर सबको अपने गले लगाते हैं। अंतिम अंतरे में गायक केशव शर्मा अपनी दीनता प्रकट करते हुए कहते हैं कि जो भी मनुष्य सच्चे भाव से शिव का स्मरण करता है, वह भवसागर से तर जाता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- शिव और शक्ति का मिलन: भजन में माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त उपस्थिति गृहस्थ और वैराग्य के समन्वय को दर्शाती है।
- समता का संदेश: श्मशान की भस्म से होली खेलना यह सिखाता है कि भगवान की दृष्टि में राजा और रंक, सुंदर और भयानक सभी समान हैं।
- संगीत और भक्ति का रस: डमरू, मृदंग और लोक शैली की धुनों पर आधारित यह गीत श्रोताओं को झूमने पर विवश कर देता है।
- संबंधित और पावन अनुष्ठानों के लिए पढ़ें शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को विशेष रूप से महाशिवरात्रि, प्रदोष काल, सावन मास और होली के पावन पर्व पर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे सुबह की पूजा के समय या शाम को संध्यावंदन के पश्चात अपने इष्टदेव महादेव के ध्यान के साथ सुना जा सकता है। भजन गाते समय मन में पूर्ण समर्पण और पवित्रता का भाव होना चाहिए। ढोलक, मंजीरा और डमरू के साथ इस भजन को गाने से सामूहिक सत्संग का वातावरण और अधिक ऊर्जावान हो जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव (भगवान शिव) और माता पार्वती हैं। शिव सनातन धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं जिन्हें 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) कहा जाता है। लोक गायक केशव शर्मा ने अपनी सुमधुर आवाज और भक्तिपूर्ण शैली से इस भजन को अमर बना दिया है। उनकी गायकी में ब्रज और उत्तर भारतीय लोक संस्कृति की सोंधी खुशबू मिलती है जो शिव भक्तों के हृदय को सीधे छू लेती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| भोला | सरल हृदय वाले, आशुतोष | शिव का सहज और दयालु स्वभाव |
| अ्सवारी | सवारी करना | नंदी महाराज पर विराजमान होना |
| भस्म | राख / विभूति | नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक |
| कैलाश बिहारी | कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले | भगवान शिव का धाम |
| पिशाच | शिवगण, भूत-प्रेत | प्रकृति के अघोर रूपों का समावेश |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | होली खेलें शंकर भोला (Holi Khelein Shankar Bhola) |
|---|---|
| समर्पित देवता | भगवान शिव एवं माता पार्वती |
| गायक / कलाकार | केशव शर्मा (Keshav Sharma) |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज प्रांतीय लोक भाषा |
| संगीत शैली | भक्ति गीत / लोक भजन |
| मुख्य भाव | भक्ति, वैराग्य, उत्सव और आनंद |
| उपयुक्त अवसर | होली, महाशिवरात्रि, सावन मास, शिव सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. "होली खेलें शंकर भोला" भजन के गायक कौन हैं?
इस लोकप्रिय भजन के गायक केशव शर्मा (Keshav Sharma) हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज में इसे गाया है।
Q2. भगवान शिव होली में रंगों के स्थान पर क्या लगाते हैं?
भगवान शिव रंगों के स्थान पर श्मशान की भस्म (विभूति) लगाकर होली खेलते हैं, जो वैराग्य और नश्वरता का प्रतीक है।
Q3. यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन होली के पावन पर्व, महाशिवरात्रि और शिव भजनों के सत्संग में विशेष रूप से गाया जाता है।
Q4. इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?
इस भजन के श्रवण और गायन से मन शांत होता है, सांसारिक मोह-माया से विरक्ति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
Q5. क्या इस भजन को घर पर परिवार के साथ गाया जा सकता है?
हाँ, इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और मधुर है, जिसे परिवार के सभी सदस्य मिलकर गा सकते हैं।
Q6. भजन में शिव के साथ कौन विराजमान हैं?
भजन में भगवान शिव के साथ माता पार्वती (गोरा) और उनके वाहन नंदी का वर्णन है।
Q7. शिवभक्ति में भस्म का क्या महत्व है?
भस्म यह याद दिलाती है कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है, जो साधक को अहंकार से दूर रखती है।
Q8. भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग क्या है?
सच्चे भाव से शिव का स्मरण, जल और बेलपत्र अर्पण करना तथा उनके नामों का संकीर्तन करना शिव को शीघ्र प्रसन्न करता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पारंपरिक स्रोतों, लोकगीत परंपरा और शैव दर्शन के सिद्धांतों पर आधारित है। पाठकों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए इसे पूरी प्रमाणिकता के साथ तैयार किया गया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ
- शिव पुराण एवं पौराणिक आख्यान
- भारतीय लोकगीत एवं भजन परंपरा
- केशव शर्मा संकीर्तन संग्रह
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