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तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना लिरिक्स (Tera Dwar Saware Nahi Nahi Chhodna Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Shruti Sharma

श्रुति शर्मा द्वारा गाया गया भावपूर्ण भजन 'तेरा द्वार सांवरे नहीं छोड़ना' लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। जानें इस भक्तिमय संकीर्तन का अर्थ और महत्व।

Shiv Bhajan Shruti Sharma

भक्ति और समर्पण की अनूठी गाथा प्रस्तुत करता यह पावन भजन "तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना लिरिक्स", प्रसिद्ध भजन गायिका श्रुति शर्मा (Shruti Sharma) की मधुर वाणी में गाया गया एक अत्यंत भावुक और आत्मीय संकीर्तन है। यद्यपि इस भजन में 'सांवरे' और 'श्याम' संबोधन का प्रयोग भगवान श्रीकृष्ण या खाटू श्याम जी के संदर्भ में सहज ही प्रतीत होता है, किंतु इसका गूढ़ आध्यात्मिक भाव देवाधिदेव महादेव शिव (Bholenath), बांके बिहारी और संपूर्ण आराध्य जगत के चरणों में अनन्य शरणागति को समर्पित है। इस भजन का मुख्य भाव साधक की उस अचल निष्ठा को दर्शाता है जहां वह समस्त संसार को त्यागने के लिए तत्पर रहता है परंतु अपने इष्ट का द्वार कभी नहीं छोड़ता। साधक की यह पुकार विनय, विरह, प्रेम और पूर्ण समर्पण की त्रिवेणी है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, शिव भजन परंपरा से इसका संबंध और जीवन में भक्ति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप भगवान शिव की आराधना में लीन रहना चाहते हैं, तो हमारे अन्य पावन लेख जैसे इन आँखों में सूरत है तेरी भोले लिरिक्स और एक लोटा जल सारी समस्या का हल का भी रसास्वादन कर सकते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


मुखाड़ा (Refrain):

तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना,
तेरे लिए पड़े चाहे जग छोडना!
तेरा द्वार सांवरे...

अंतरा 1:

नाम तेरा जुबान पर हमेशा रहे,
बनके जोगी मैं तुझको रिझाऊँ!
गर जो तेरा इशारा मिलेगा मुझे,
तेरे चरनो में जीवन बिताऊँ!
जो सहारा मिला मेरा जीवन खिला,
फिर मुझे श्याम कैसा गिला?
मैं हूं दीवाना तेरा कोई जाने ना,
तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना...

अंतरा 2:

याद तेरी ये दिल से ना जाए मेरे,
प्रेम का ऐसा रिश्ता बनादे!
मेरी विनती है तुझसे यही सांवरे,
मेरे जीवन की बगिया खिला दे!
ऐसी लागी लगान मैं तो हो गया मगन,
किया जीवन ये तेरे हवाला!
हाथ पकड़ के मेरा नहीं छोडना,
तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना...

अंतरा 3:

साथ छुटे ना तेरा मेरा कभी,
ऐसी उम्मिद दिल में जगा दे!
हाथ मेरा पकड ले जरा श्याम तू,
तेरी मुझ पे कृपा भी बरसा दे!
ऐसा दर जो मिला मेरा जीवन खिला,
मेरा मुर्झाया गुलशन खिला!
मुझसे किया जो वादा नहीं तोड़ना,
तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक और भगवान के बीच के अटूट रिश्ते को परिभाषित करता है। "तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना, तेरे लिए पड़े चाहे जग छोडना" इन पंक्तियों में साधक की परम वैराग्यमयी भावना दिखाई देती है। वह कहता है कि हे प्रभु! यदि मुझे आपकी प्राप्ति के लिए संपूर्ण संसार, उसके रिश्ते-नाते और मोह-माया का त्याग भी करना पड़े, तो मैं सहर्ष तैयार हूँ, परंतु आपका पवित्र द्वार कभी नहीं छोड़ूँगा।

आगे की पंक्तियों में साधक अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम व्यक्त करते हुए कहता है कि उसके मुंह पर हर पल बस इष्ट का ही नाम रहे। वह शिव भक्त या गोपी भाव की तरह 'बनके जोगी मैं तुझको रिझाऊँ' की कामना करता है। जब साधक को अपने प्रभु का थोड़ा सा भी इशारा या कृपा मिल जाती है, तो उसका संपूर्ण जीवन धन्य हो जाता है। वह अपना जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। सांसारिक दुखों और चिंताओं से मुक्त होकर वह कहता है कि जब मुझे आपका परम सहारा मिल गया है, तो मुझे इस दुनिया से कोई शिकायत नहीं रह जाती। मैं आपका ऐसा दीवाना हूँ जिसे दुनिया की परवाह नहीं है।

अंतिम चरणों में भक्त विनती करता है कि उसकी प्रार्थना है कि प्रभु उसकी जीवन रूपी बगिया को अपनी कृपा से हरा-भरा कर दें। उसने अपनी जीवन की डोर पूरी तरह से प्रभु के हाथों में सौंप दी है। वह केवल यह आश्वासन चाहता है कि प्रभु उसका हाथ पकड़कर कभी न छोड़ें और अपने किए वादे को हमेशा निभाएं। यह भाव किसी भी सच्चे भक्त की उस सर्वोच्च स्थिति को दर्शाता है जहां ईश्वर ही उसका सर्वस्व बन जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह शुद्ध भक्ति योग और शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का संदेश: यह भजन साधक को सिखाता है कि जीवन में कितनी भी विपत्तियाँ आएं, भगवान का द्वार कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
  • वैराग्य और प्रेम का समन्वय: इसमें संसार को छोड़ने की तत्परता और प्रभु से प्रेम करने की अदम्य इच्छा का सुंदर मेल है।
  • श्रुति शर्मा की मधुर प्रस्तुति: गायिका ने अपनी भावपूर्ण आवाज से इस भजन के हर एक भाव को श्रोताओं के हृदय तक सीधे उतार दिया है।
  • मानसिक शांति का स्रोत: इस भजन का निरंतर श्रवण और गायन करने से मन में उत्पन्न होने वाले भय, चिंता और अकेलापन दूर होते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के अनुशासन और प्रभाव को बनाए रखने के लिए भजन गायन का उचित समय और विधि अत्यंत महत्वपूर्ण होती है:

  • प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना मन को पूरे दिन ऊर्जावान रखता है। संध्या के समय शांति के पल में इसका गान मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • सत्संग एवं जागरण: रात्रि जागरण, महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और संकीर्तन सभा में इसे समूह में गाया जा सकता है।
  • एकांत साधना: जब मन अशांत हो या जीवन में संघर्ष बढ़ गया हो, तब एकांत में बैठकर इस भजन को गुनगुनाने से आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आराध्य देव भगवान शिव (महादेव) और भक्त वत्सल श्याम/सांवरे (श्रीकृष्ण) की स्तुति से जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म में 'सांवरे' शब्द का अर्थ वह है जो रूप-रंग में सांवला हो, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और नीलकंठ महादेव (जिनका गला विषपान के कारण नीला/सांवला हुआ) दोनों की छवि समाहित है। इस भजन को गाने वाली श्रुति शर्मा ने अपनी भक्तिमय शैली से इसे संपूर्ण शिव और कृष्ण भक्तों के बीच लोकप्रिय बनाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत की परंपरा में ऐसे भजनों की रचना पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत संयोजन के मिश्रण से की जाती है। 'तेरा द्वार सांवरे नहीं छोड़ना' भजन समकालीन devotional music industry का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे डिजिटल माध्यमों और यूट्यूब के जरिए घर-घर तक पहुँचाया गया है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युग की भागदौड़ और तनाव से भरी जिंदगी में इंसान को पुनः अपनी आध्यात्मिक जड़ों और ईश्वर के प्रति निष्ठा की ओर मोड़ना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करने वाली हिंदी और ब्रज-अवधी मिश्रित बोलचाल की भाषा है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'जीवन की बगिया खिला दे', 'मुरझाया गुलशन खिला', और 'बनके जोगी मैं तुझको रिझाऊँ' जैसे प्रयोग इसकी काव्य सुंदरता को चार चांद लगाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अटल विश्वास: भगवान पर भरोसा कभी नहीं टूटना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों।
  • मोह-माया का त्याग: ईश्वर की प्राप्ति के लिए सांसारिक बंधनों और स्वार्थों से ऊपर उठना आवश्यक है।
  • समर्पण की भावना: अपना जीवन और अपने कर्म ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देने से सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है।
  • नम्रता और विनय: भगवान के सामने हमेशा एक विनीत और प्रेमी भक्त बनकर रहना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
सांवरे सांवले रंग वाले इष्ट (कृष्ण या शिव) भक्त का प्रियतम आराध्य
जोगी योगी, साधु या वैरागी सब कुछ त्यागकर भगवान की भक्ति में लीन व्यक्ति
जुबान जीभ, वाणी हर समय ईश्वर का नाम जपना
हवाला सौंप देना, सुपुर्द करना अपनी जीवन नैया ईश्वर को सौंपना
गुलशन बाग, बगीचा भक्त का जीवन रूपी संसार

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति "तेरा द्वार सांवरे नहीं छोड़ना" साधक की दृढ़ प्रतिज्ञा को बताती है कि वह किसी भी कीमत पर भगवान का दामन नहीं छोड़ेगा। अगली पंक्ति "तेरे लिए पड़े चाहे जग छोडना" दर्शाती है कि भगवान के प्रेम के आगे संसार की सारी वस्तुएं और संबंध तुच्छ हैं। "नाम तेरा जुबान पर हमेशा रहे" का अर्थ है कि अजपा जाप की स्थिति में भी इष्ट का नाम स्मरण बना रहे। इस प्रकार हर पंक्ति साधक को भक्ति की गहराई में ले जाती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को और अधिक पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण किया जा सकता है:

त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन विवरण विवरण तथ्य
भजन का नाम तेरा द्वार सांवरे नहीं छोडना (Tera Dwar Saware Nahi Chhodna)
गायिका श्रुति शर्मा (Shruti Sharma)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भाव
विषय / थीम भक्ति, शरणागति, प्रेम और वैराग्य
मुख्य भाव इष्ट के प्रति अनन्य प्रेम और अटूट विश्वास
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, जागरण और संकीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

तेरा द्वार सांवरे नहीं छोड़ना भजन किसने गाया है?

यह लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध गायिका श्रुति शर्मा (Shruti Sharma) द्वारा अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज में गाया गया है।

इस भजन का मुख्य केंद्रीय भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव भगवान के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और हर परिस्थिति में इष्ट का द्वार न छोड़ने की प्रतिज्ञा है।

क्या यह भजन केवल श्याम बाबा के लिए है?

यद्यपि इसमें 'सांवरे' और 'श्याम' शब्दों का प्रयोग है, परंतु इसका आध्यात्मिक भाव सभी आराध्य देवों, विशेषकर महादेव शिव और श्री बांके बिहारी के भक्तों पर समान रूप से लागू होता है।

इस भजन को कब और कैसे गाना चाहिए?

इसे प्रातःकालीन पूजा, संध्या वंदना, एकांत साधना या किसी भी धार्मिक सत्संग और जागरण के समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

इस भजन को सुनने से क्या लाभ मिलता है?

इसके निरंतर श्रवण से मन की व्याकुलता दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और भगवान के प्रति प्रेम एवं भक्ति गहरी होती है।

क्या इस भजन के बोल हिंदी में उपलब्ध हैं?

हाँ, इस लेख में सम्पूर्ण भजन के बोल देवनागरी लिपि में अर्थ सहित दिए गए हैं।

भगवान शिव और कृष्ण की भक्ति में क्या समानता है?

दोनों ही रूपों में प्रेम, करुणा, शरणागति और भक्त-वत्सलता का भाव प्रमुख है। साधक दोनों में ही अपने परमेश्वर के दर्शन करता है।

क्या ऐसे भजन मानसिक तनाव को कम करते हैं?

निश्चित रूप से, भक्ति संगीत और भजन सुनने से मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और तनाव में भारी कमी आती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भों को पूरी प्रमाणिकता और भक्ति भाव के साथ संकलित किया गया है ताकि पाठकों को एक उत्कृष्ट और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भारतीय भक्ति संगीत और संकीर्तन परंपरा।
  • श्रुति शर्मा द्वारा प्रस्तुत लोक एवं भजन संगीत संग्रह।
  • वैदिक एवं पौराणिक शरणागति साहित्य।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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