Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

प्रभु हम भी शरणागत हैं लिरिक्स (Prabhu Hum Bhi Shranagat Hain Lyrics in Hindi) - Shri Raam Bhajan Devendra Ji Maharaj

भजन 'प्रभु हम भी शरणागत हैं' श्री राम की कृपा के प्रति समर्पण और प्रेम का प्रतीक है, जो जागृत भक्ति का उद्घोष करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

प्रभु शरणागति: राम कृपा का संचार

श्री राम की शरण में आने का यह भजन, भक्तों के हृदय को शांति और आशा से भरता है।

प्रभु हम भी शरणागत हैं, प्रभु हम भी शरणागत हैं। कृपा करो हे सच्चिदानंद, कृपा करो हे सच्चिदानंद। हरि हम भी शरणागत हैं, हरि हम भी शरणागत हैं। पातक हमसे न हों हमाश... कान्तार, मर्म्हीं तिसें न खुस्या। तिन्हें करों तुम कठिन मगन, तुम कल्याण सुधा बरसो। प्रभु हम भी शरणागत हैं, प्रभु हम भी शरणागत हैं। तेरी शरण में जो आए, धर्म की राह पर चले। प्रभु तुम कृपा बिना किसी का, कर गतिका हो हर किसी का। हरि हम भी शरणागत हैं, हरि हम भी शरणागत हैं। तेरे नाम सदा जपे हम, सब भले काम से जुड़े। श्री राम जी से जो भजें, उन पर कृपा हो हर घड़ी। प्रभु हम भी शरणागत हैं, प्रभु हम भी शरणागत हैं।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'प्रभु हम भी शरणागत हैं' शरणागति की गहरी भावनाओं का प्रतीक है। इसमें भक्त भगवान के प्रति अपनी पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त करते हैं। 'प्रभु हम भी शरणागत हैं' का संयोजन बार-बार दोहराकर यह बताया गया है कि जब मनुष्य हर विघ्न और संकट में भगवान की शरण में जाता है, तब वह सब संकटों से मुक्ति पाता है। 'कृपा करो हे सच्चिदानंद' में भक्त अपनी आत्मा की गहराई से भगवान से कृपा की याचना कर रहा है। यह भजन मुख्यतः ध्यान को केंद्रित करने, भक्तों में भक्ति के भावों को बढ़ाने और इस जीवन में भगवान के प्रति अटल विश्वास को जगाने के लिए कम्पोज किया गया है। यह ध्यान स्वरूप भक्त की आशा की पुकार और अंत में भगवान की कृपा की चाहत को प्रदर्शित करता है।

इस भजन में भक्त की आत्मविकास और आत्मस्वीकृति का एक अद्भुत चित्रण किया गया है। जब कोई भक्त कहता है कि 'प्रभु हम भी शरणागत हैं', तो वह नहीं केवल भगवान से अपने पापों की माफी मांग रहा है, बल्कि अपने दिल की गहराईयों से यह भी बता रहा है कि वह उनकी अनुकम्पा की पूर्णतया अपेक्षा करता है। यहाँ 'शरणागत' का मतलब है कि वह भगवान को अपने उद्धारक मानता है। यह भजन भक्त के मन को शांति प्रदान करता है, क्योंकि वह जानता है कि जब भी उसे कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, भगवान उसकी सहायता के लिए हमेशा उपस्थित हैं। यह भावनात्मक स्थिति विश्वास और निस्वार्थ सेवा की एक अनोखी परिभाषा प्रस्तुत करती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का महत्व प्रमुखता से दर्शाया गया है। भारतीय दर्शन में भक्ति का मार्ग आत्मा के आध्यात्मिक उदय के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें भावनाओं की पवित्रता, श्रद्धा की गहराई, और प्रेम की अपारता का समंथन है। भक्त की भावना केवल व्यक्तिगत उद्धार की नहीं होती, बल्कि समस्त जीवों का कल्याण करना भी इसमें शामिल होता है। भक्ति में यह समझ बुनियाद है कि जब हम प्रभु की शरण में जाते हैं, हम अपनी इच्छा को उनके समर्थन में समर्पित कर देते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन के हर मोड़ पर हमें प्रभु की शरण में रहना चाहिए, जिससे हमारी आत्मा शुद्ध और प्रगति करती रहेगी।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

रामायण में भगवान श्रीराम की शरणागति का महत्त्व अत्यधिक है। भक्तों का मानना है कि श्रीराम सभी दुखों का निवारण करते हैं और उनके नाम का जप करने से सभी पाप समाप्त होते हैं। पवित्र ग्रंथों में वर्णित है कि जब भक्त सच में राम की शरण में आते हैं, तब श्रीराम उनकी रक्षा करते हैं और उन्हें अनंत सुख प्रदान करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्तों को यह प्रेरणा मिलती है कि जैसे ही हम सच्चे मन से भगवान की शरण लेते हैं, हम उनके अनुग्रह के साथ-साथ आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। भगवद गीता में भी यह उल्लेखित है कि 'जो लोग मेरे पास आते हैं, उन्हें कभी निराश नहीं किया जाता।'

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का गायन मानसिक शांति, आत्मिक सशक्तिकरण और तनाव से मुक्ति दिलाता है। यह भक्तों के बीच सहकारिता और एकता की भावना विकसित करता है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करना मनोबल को ऊंचा रखता है और भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। साथ ही, यह मानसिक स्पष्टता और ध्यान केन्द्रित करने में भी सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का ध्यान सुबह के समय या शाम को करना अत्यन्त शुभ माना जाता है। दीया जलाकर और फूलों की माला अर्पित करने से प्रभु की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। ध्यान करते समय साधक को आसन पर सीधे बैठकर शांत स्वर में इस भजन का जाप करना चाहिए, जिससे मन एकाग्र होकर प्रभु की भक्ति में लीन हो सके। साधक को भगवान में पूर्ण विश्वास एवं समर्पण के साथ अपना मन एवं हृदय अर्पित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस प्रकार की भक्ति को दर्शाता है?

यह भजन शरणागति की भक्ति को दर्शाता है, जिसमें भक्त प्रभु की कृपा के लिए पूर्ण समर्पण और विश्वास के साथ रहते हैं।

क्या इस भजन का संध्या वंदन कीर्तन में उपयोग हो सकता है?

हाँ, यह भजन संध्या वंदन में विशेष रूप से उपयोग होता है। इससे भक्ति का उत्सव और अधिक गहराई से मनाया जाता है।

इस भजन का साधना करने की विधि क्या है?

इस भजन का साधना सुबह या शाम को दीया जलाकर और फूलों की माला अर्पित करते हुए करना चाहिए। साथ ही, शांत मन से ध्यान करना आवश्यक है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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