भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश लिरिक्स (Teri Jai Ho Ganesh Teri Jai Ho Ganesh Lyrics in Hindi) - Ganesh Bhajan Saleem

प्रसिद्ध गणेश भजन 'तेरी जय हो गणेश' के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। सलीम द्वारा गाए इस भक्तिपूर्ण भजन के माध्यम से विघ्नहर्ता की महिमा का अनुभव करें।

भगवान श्री गणेश जी की आराधना के बिना हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य, पूजा या अनुष्ठान का शुभारंभ नहीं होता। वे विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और प्रथम पूज्य देव हैं। "तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश" (Teri Jai Ho Ganesh Teri Jai Ho Ganesh Lyrics) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदय को छू लेने वाला भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध गायक सलीम (Saleem) ने अपनी मधुर और भक्तिपूर्ण आवाज में गाकर जन-जन तक पहुंचाया है। यह भजन न केवल भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि साधक को अपनी आध्यात्मिक यात्रा में माता-पिता और गुरु के महत्व का भी बोध कराता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे ताकि भक्तगण इसके गूढ़ अर्थ को समझकर पूर्ण श्रद्धा के साथ इसका गायन कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

प्रथमे गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश।
त्रितिये सुमीरु शारदा, मेरे कारज करो हमेश॥


तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश।
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश॥

किस जननी ने तुझे जनम दियो है,
किसने दिया उपदेश?
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश॥

माता गौरा ने तुझे जनम दियो है,
शिव ने दिया है उपदेश।
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश॥

कारज पूरण तद ही होवे,
गणपति पूजो जी हमेश।
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश॥

सिमर चरण तेरा जो भी जस गावे,
कृपा करो परमेश।
तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भारतीय सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा को दर्शाता है जिसमें किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में त्रि-देवताओं या शक्तियों की वंदना की जाती है। भजन की शुरुआत में ही मंगलाचरण के रूप में माता पार्वती (गौरा जी), प्रथम पूज्य श्री गणेश और ज्ञान की देवी माता शारदा (सरस्वती) का स्मरण किया गया है। यह क्रम दर्शाता है कि जीवन में सफलता के लिए शक्ति, बुद्धि और ज्ञान तीनों का होना अनिवार्य है।

भजन के मुख्य भाग में एक अत्यंत सुंदर संवाद शैली का प्रयोग किया गया है। इसमें पहले प्रश्न पूछा जाता है कि हे गणेश! आपको जन्म देने वाली माता कौन हैं और आपको जीवन का परम ज्ञान या उपदेश देने वाले गुरु कौन हैं? इसके उत्तर में श्रद्धापूर्वक बताया गया है कि जगज्जननी माता पार्वती (गौरा) आपकी जन्मदात्री हैं और स्वयं देवाधिदेव महादेव भगवान शिव आपके गुरु हैं जिन्होंने आपको उपदेश दिया है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि माता-पिता और गुरु का स्थान जीवन में सर्वोपरि है। अंत में, भजनकार प्रार्थना करता है कि जो भी भक्त आपके चरणों का ध्यान करके आपका यशगान करता है, उस पर हे परमेश्वर! अपनी असीम कृपा बनाए रखें और उसके सभी विघ्नों को दूर करें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि इसके भीतर गहरे आध्यात्मिक रहस्य छिपे हुए हैं। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रथम पूज्यता का संदेश: यह भजन इस बात की पुष्टि करता है कि जब तक विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा नहीं की जाती, तब तक कोई भी सांसारिक या आध्यात्मिक कार्य पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता।
  • माता-पिता और गुरु का सम्मान: भजन में माता पार्वती को जन्मदात्री और भगवान शिव को उपदेशक (गुरु) के रूप में प्रस्तुत कर यह संदेश दिया गया है कि जीवन में माता-पिता और गुरु का मार्गदर्शन ही मनुष्य को महान बनाता है।
  • सरलता और सुगमता: इस भजन के शब्द अत्यंत सरल और लोकभाषा के निकट हैं, जिससे कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से कंठस्थ कर गा सकता है।
  • भक्ति रस का प्रवाह: गायक सलीम की विशिष्ट गायन शैली ने इस भजन में सूफी और शास्त्रीय भक्ति का ऐसा अनूठा मिश्रण तैयार किया है जो श्रोताओं को सीधे ईश्वर से जोड़ता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान गणेश का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:

  • प्रातः काल की पूजा: सुबह की नियमित पूजा के समय इस भजन का गायन करने से दिनभर मन शांत रहता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
  • शुभ कार्यों का शुभारंभ: नए गृह प्रवेश, व्यापार की शुरुआत, विवाह उत्सव या किसी भी नए कार्य को प्रारंभ करने से पहले इस भजन को सुनना या गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • गणेश चतुर्थी उत्सव: भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी के दौरान पंडालों और घरों में इस भजन का सामूहिक कीर्तन करने से वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
  • गायन की विधि: शांत चित्त होकर, हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान गणेश की प्रतिमा के सम्मुख दीपक जलाएं और पूर्ण समर्पण भाव से इस भजन का गायन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन में मुख्य रूप से चार दिव्य सत्ताओं का उल्लेख और वंदना की गई है:

  1. भगवान श्री गणेश: वे बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के अधिष्ठाता देव हैं। उन्हें विघ्नराज भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के मार्ग की सभी बाधाओं को हर लेते हैं।
  2. माता गौरा (पार्वती): वे शक्ति स्वरूपा हैं और भगवान गणेश की माता हैं। उन्होंने ही अपनी शक्ति से गणेश जी का सृजन किया था।
  3. भगवान शिव: वे देवों के देव महादेव हैं, जो ज्ञान, वैराग्य और संहार के अधिपति हैं। उन्होंने ही गणेश जी को गजमुख प्रदान कर उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया था।
  4. माता शारदा (सरस्वती): वे वाणी, कला और बुद्धि की देवी हैं। किसी भी भजन या काव्य की रचना और गायन के लिए उनकी कृपा अनिवार्य मानी जाती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और प्राचीन मंगलाचरण पर आधारित है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सदियों से "प्रथमे गौरा जी को वंदना" की पंक्तियां गाई जाती रही हैं। आधुनिक समय में, इस पारंपरिक भजन को नया संगीत देकर और सूफियाना अंदाज में पिरोकर गायक सलीम ने इसे एक नया जीवन दिया। उनके द्वारा गाए जाने के बाद यह भजन देश-विदेश में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय हो गया। इस भजन की पृष्ठभूमि पूरी तरह से भक्ति आंदोलन और लोक संस्कृति के समन्वय को दर्शाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी, पंजाबी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। जैसे "दियो है", "कारज", "सुमीरु", और "तद ही" जैसे शब्द लोक कला और क्षेत्रीय प्रभाव को प्रदर्शित करते हैं। काव्य शैली की बात करें तो यह एक पारंपरिक 'पद' या 'भजन' शैली में लिखा गया है, जिसमें अंतरा और मुखड़ा का संतुलन बहुत सटीक है। इसमें प्रयुक्त छंद और लयबद्धता इसे संगीत के अनुकूल बनाती है, जिससे इसे ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम पर बहुत खूबसूरती से बजाया जा सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख भी देता है:

  • क्रमबद्धता और अनुशासन: भजन की शुरुआत "प्रथमे", "द्वितीये", "त्रितिये" से होती है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में हर कार्य को एक व्यवस्थित और अनुशासित क्रम में करना चाहिए।
  • कृतज्ञता का भाव: अपने माता-पिता और गुरु के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही हमें यह शरीर और ज्ञान रूपी उपदेश दिया है।
  • अहंकार का त्याग: जब हम भगवान गणेश के चरणों में शीश झुकाते हैं, तो हम अपने अहंकार को समर्पित करते हैं। बिना अहंकार शून्य हुए ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती।
  • धैर्य और विश्वास: "कारज पूरण तद ही होवे" पंक्ति हमें विश्वास दिलाती है कि यदि हम सही दिशा में प्रयास करें और ईश्वर पर भरोसा रखें, तो हमारे सभी कार्य अवश्य पूरे होंगे।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
प्रथमे सबसे पहले / सर्वप्रथम पूजा की शुरुआत में सबसे पहला स्थान देना।
सुमीरु स्मरण करना / ध्यान लगाना मन को एकाग्र कर ईश्वर का नाम जपना।
शारदा माता सरस्वती ज्ञान, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री देवी।
कारज कार्य / कर्म मनुष्य द्वारा किए जाने वाले शुभ और दैनिक कार्य।
जननी माता / जन्म देने वाली सृष्टि की जननी माता पार्वती के संदर्भ में।
परमेश परमेश्वर / सर्वोच्च सत्ता भगवान गणेश को ब्रह्मांड का स्वामी मानना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "प्रथमे गौरा जी को वंदना, द्वितीये आदि गणेश। त्रितिये सुमीरु शारदा, मेरे कारज करो हमेश॥"
भावार्थ: मैं सबसे पहले माता पार्वती की वंदना करता हूँ, दूसरे स्थान पर आदिदेव भगवान गणेश का ध्यान करता हूँ, और तीसरे स्थान पर माता सरस्वती का स्मरण करता हूँ। हे देव और देवियों! आप सदा मेरे सभी कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करें।

2. "तेरी जय हो गणेश, तेरी जय हो गणेश..."
भावार्थ: हे विघ्नहर्ता भगवान गणेश! आपकी सदा ही जय हो, आपकी महिमा अपरंपार है और मैं बार-बार आपकी जय-जयकार करता हूँ।

3. "किस जननी ने तुझे जनम दियो है, किसने दिया उपदेश?"
भावार्थ: भक्त कौतूहल और श्रद्धावश पूछता है कि हे प्रभु! वह धन्य माता कौन हैं जिन्होंने आपको जन्म दिया है, और वे परम गुरु कौन हैं जिन्होंने आपको दिव्य ज्ञान का उपदेश दिया है?

4. "माता गौरा ने तुझे जनम दियो है, शिव ने दिया है उपदेश।"
भावार्थ: इसका उत्तर देते हुए कहा गया है कि जगत जननी माता पार्वती ने आपको अपने मैल से निर्मित कर जीवन दिया है, और स्वयं परम गुरु भगवान शिव ने आपको महाज्ञान का उपदेश दिया है।

5. "कारज पूरण तद ही होवे, गणपति पूजो जी हमेश।"
भावार्थ: जीवन का कोई भी कार्य तभी पूर्ण और सफल हो सकता है जब हम सदैव सबसे पहले भगवान गणपति की पूजा-अर्चना करेंगे। उनकी उपेक्षा करके किया गया कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता।

6. "सिमर चरण तेरा जो भी जस गावे, कृपा करो परमेश।"
भावार्थ: जो भी भक्त आपके पावन चरणों का स्मरण करके आपका गुणगान करता है, हे परमेश्वर! आप उस पर अपनी दया और कृपा की वर्षा करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ यदि भगवान गणेश के इन सिद्ध मंत्रों का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ: घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे सभी कार्यों को हमेशा बाधा रहित पूरा करें।


ॐ गं गणपतये नमः

यह भगवान गणेश का मूल बीज मंत्र है, जिसका प्रतिदिन 108 बार जाप करने से बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरी जय हो गणेश तेरी जय हो गणेश
मुख्य गायक सलीम (Saleem)
समर्पित देवता भगवान श्री गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव
भाषा हिंदी (लोकभाषा पुट के साथ)
भक्ति भाव समर्पण, विनय और स्तुति भाव
उपयुक्त अवसर गणेश चतुर्थी, सुबह की पूजा, मांगलिक कार्य का प्रारंभ
मुख्य संदेश माता-पिता और गुरु का सम्मान, प्रथम पूज्यता का महत्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के सबसे प्रसिद्ध संस्करण को सुप्रसिद्ध सूफी और भक्ति गायक सलीम (Saleem) ने गाया है। उनकी अनूठी आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन की शुरुआत में सबसे पहले माता पार्वती (गौरा जी) की वंदना की गई है, उसके बाद भगवान गणेश और फिर ज्ञान की देवी माता शारदा (सरस्वती) का स्मरण किया गया है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया था कि किसी भी देवता की पूजा या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा अनिवार्य होगी, अन्यथा वह पूजा स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए उन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है।

भजन के अनुसार, भगवान शिव ने गणेश जी को उपदेश दिया है। भगवान शिव उनके पिता होने के साथ-साथ उनके परम गुरु और मार्गदर्शक भी हैं।

हाँ, इस भजन का गायन या श्रवण प्रतिदिन सुबह की पूजा के समय करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि मनुष्य के कार्य तभी पूर्ण और सफल होते हैं जब वह भगवान गणेश की पूजा करता है। गणेश जी की कृपा के बिना कार्यों में विघ्न आने की संभावना बनी रहती है।

इस भजन को सुनने से मन एकाग्र होता है, भय और चिंता का नाश होता है, और भगवान गणेश की कृपा से जीवन के सभी मार्ग सुगम हो जाते हैं।

इस भजन की मुख्य सीख यह है कि हमें अपने जीवन में माता-पिता और गुरु को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए और किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले ईश्वर का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और अर्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक लोक गीतों के संग्रह और धार्मिक ग्रंथों के आधार पर संकलित किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटिहीन सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी साधना और भक्ति को सही दिशा दे सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • गणेश पुराण: भगवान गणेश की उत्पत्ति और उनके प्रथम पूज्य बनने की कथा का संदर्भ।
  • शिव पुराण: माता पार्वती द्वारा गणेश जी के निर्माण और भगवान शिव द्वारा उन्हें दिए गए उपदेशों का विवरण।
  • पारंपरिक लोक भजन संग्रह: उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गाए जाने वाले मंगलाचरण के पारंपरिक गीत।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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