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श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है (Shyam Tumse Milne Ka Satsang Hi Bahana hai Lyrics in Hindi)

श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है भजन के भावपूर्ण बोल हिंदी में पढ़ें। प्रभु श्री श्याम के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण को समर्पित यह सुंदर रचना।

"श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है" एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय भजन है, जो भक्त और भगवान के बीच के अटूट और प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाता है। यह भजन इस सत्य को उजागर करता है कि सत्संग केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रभु से मिलने का एक माध्यम है। जब भक्त का मन प्रभु की भक्ति में लीन हो जाता है, तो उसे संसार की हर वस्तु में अपने आराध्य श्री श्याम का ही दर्शन होने लगता है। यह भजन प्रेम, समर्पण और विरह की उस अवस्था को व्यक्त करता है जहाँ भक्त का हृदय केवल अपने प्रियतम श्याम को खोजने के लिए व्याकुल रहता है। चाहे वह प्रकृति के तत्व हों, पवित्र नदियाँ हों, या धर्मग्रंथ, भक्त को हर स्थान पर अपने श्याम का ही बसेरा दिखाई देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है,
दुनिया वाले क्या जाने मेरा रिश्ता पुराना है।
जब से तेरी लगन लगी दिल हुआ दीवाना है,
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

सूरज में ढूँढा तुझे, चंदा में पाया है,
तारों की झिलमिल में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

फूलों में ढूँढा तुझे, बागियों में पाया है,
कलियों की खुशबू में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

गंगा में ढूँढा तुझे, यमुना में पाया है,
गोदावरी की लहरों में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

गोकुल में ढूँढा तुझे, मथुरा में पाया है,
वृंदावन की गलियों में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

रामायण में ढूँढा तुझे, भागवत में पाया है,
गीता जी के श्लोकों में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

जंगलों में ढूँढा तुझे, मंदिरों में पाया है,
भक्तों के दिलों में मेरे श्याम का बसेरा है।
श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव 'अद्वैत भक्ति' है। भक्त कहता है कि संसार के लोग सत्संग को केवल एक सभा या प्रवचन का स्थान समझते हैं, लेकिन मेरे लिए यह मेरे प्रिय श्याम से मिलने का एक बहाना है। भक्त का प्रभु के साथ रिश्ता इस जन्म का नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतरों का है। जब भक्त को प्रभु की लगन लग जाती है, तो उसका मन सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर केवल प्रभु के ध्यान में मग्न हो जाता है।

भजन की पंक्तियों में भक्त ने प्रकृति के कण-कण में ईश्वर को खोजने का प्रयास किया है। सूरज, चंद्रमा, तारे, फूल, नदियाँ और पवित्र ग्रंथ—सबमें उसे श्याम का ही स्वरूप दिखाई देता है। यह इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं। अंत में, भक्त यह स्वीकार करता है कि ईश्वर का वास्तविक निवास स्थान किसी मंदिर या जंगल में नहीं, बल्कि सच्चे भक्त के हृदय में है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • सर्वव्यापकता का बोध: यह भजन सिखाता है कि ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि प्रकृति के हर कण में विद्यमान हैं।
  • भक्ति का मार्ग: सत्संग को प्रभु से मिलन का माध्यम मानकर, यह भजन भक्तों को नियमित सत्संग और नाम-जप के लिए प्रेरित करता है।
  • भावपूर्ण समर्पण: 'रिश्ता पुराना है' वाली पंक्ति भक्त के प्रभु के प्रति अटूट विश्वास और पूर्व जन्मों के संबंध को दर्शाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु एकांत में या सत्संग के दौरान इसका प्रभाव अधिक होता है। इसे गाते समय मन में प्रभु के प्रति प्रेम और विरह का भाव होना चाहिए। इसे हारमोनियम या ढोलक की थाप के साथ सामूहिक रूप से गाने पर भक्ति का वातावरण निर्मित होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
सत्संग सत्य का संग या ईश्वर की चर्चा का स्थान
लगन तीव्र इच्छा या प्रेम
बसेरा निवास स्थान
दीवाना प्रेम में पागल या मग्न

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्याम तुमसे मिलने का सत्संग ही बहाना है
आराध्य श्री कृष्ण (श्याम)
भाषा हिंदी
विषय भक्ति एवं समर्पण
उपयुक्त अवसर सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी, कीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

सत्संग का अर्थ है 'सत्य का संग'। यह वह स्थान या स्थिति है जहाँ ईश्वर की चर्चा होती है और मन को शांति मिलती है।

नहीं, इसे किसी भी समय गाया जा सकता है, विशेषकर जब आप प्रभु के प्रति अपना प्रेम व्यक्त करना चाहते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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स्रोत एवं संदर्भ

यह भजन पारंपरिक भक्ति साहित्य और लोक-कीर्तन परंपरा से संकलित है। इसका भाव श्रीमद्भगवद्गीता के भक्ति योग और विभिन्न संतों के पदों से प्रेरित है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 18 Oct 2026

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