Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है प्यारी-प्यारी है (O Maa O Maa Pyari Maa Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan

तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है प्यारी-प्यारी है भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित देवी भजन।

आदिशक्ति जगदम्बा माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के चरणों में समर्पित यह अत्यंत लोकप्रिय और भावुक भजन "तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है प्यारी-प्यारी है (O Maa O Maa Pyari Maa Lyrics in Hindi)" वात्सल्य, प्रेम, समर्पण और मातृत्व की महिमा का अनमोल प्रतीक है। सनातन संस्कृति में माँ को ईश्वर का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है, जो बिना किसी स्वार्थ के अपनी संतान पर सर्वस्व न्योछावर कर देती है। यह भजन मूल रूप से प्रसिद्ध फिल्म 'यादें' का एक लोकप्रिय मातृत्व गीत है, जिसे भक्तजनों और संगीत प्रेमियों ने देवी माँ (माता दुर्गा, शेरावाली, वैष्णो देवी) की आराधना, जागरण, चौकी और सात्विक संकीर्तन के दौरान माँ भगवती के प्रति अपनी अनन्य श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अपनाया है। इस भजन का मुख्य भाव (Bhava) मातृत्व प्रेम, अगाध करुणा, निःस्वार्थ समर्पण और विनय से परिपूर्ण है। इसे विशेष रूप से नवरात्रि, माता के जागरण, कन्या पूजन, पारिवारिक उत्सवों तथा संध्या वंदन के समय अत्यंत श्रद्धा और भावुकता के साथ गाया जाता है। इसके श्रवण मात्र से हृदय में माता के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का भाव जाग्रत हो जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ माँ भगवती का स्मरण करें:


तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!
ये जो दुनिया है, ये बन है काँटों का, तू फुलवारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!

दूखन लागी है माँ, तेरी अँखियाँ,
मेरे लिए जागी है तू, सारी-सारी रतियाँ!
मेरी निंदिया पे अपनी निंदिया भी, तूने वारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!
तू कितनी अच्छी है...

अपना नहीं तुझे, सुख-दुख कोई,
मैं मुस्काया, तू मुस्काई, मैं रोया, तू रोई!
मेरे हँसने पे, मेरे रोने पे, तू बलिहारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!
तू कितनी अच्छी है...

माँ बच्चों की जाँ होती है,
वो होते हैं किस्मत वाले, जिनके माँ होती है!
कितनी सुन्दर है, कितनी शीतल है, न्यारी-न्यारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!
तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है,
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, प्यारी माँ!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल एक साधारण गीत नहीं है, बल्कि यह उस जीव और जगदम्बा के बीच के शाश्वत संबंध का सजीव चित्रण है जो एक शिशु और उसकी माता के मध्य होता है। भक्त जब आदि शक्ति जगदम्बा को माँ के रूप में देखता है, तो उसकी सारी चिंताएं और भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं। भजन की पहली पंक्तियों में माँ की ममता की तुलना काँटों भरे संसार में एक सुरक्षित फुलवारी से की गई है। संसार रूपी वन (जंगल) में जहाँ स्वार्थ, छल, और दुःख के कांटे हैं, वहीं माता का आँचल एक ऐसी पावन फुलवारी है जहाँ शीतलता और प्रेम की छाँव मिलती है।

आगे की पंक्तियों में माँ के अगाध त्याग का वर्णन किया गया है। माता अपनी संतान के सुख के लिए अपनी नींद, अपने सुख और अपने स्वास्थ्य तक का त्याग कर देती है। 'दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ' यह दर्शाती है कि संतान के कष्ट में माँ रात-रात भर जागकर पहरा देती है। इसके पश्चात, इस दार्शनिक सत्य को उजागर किया जाता है कि माता का अपना कोई स्वतंत्र सुख-दुख नहीं होता; संतान की मुस्कान में उसकी हंसी और संतान के आँसुओं में उसका क्रंदन छिपा होता है। अंत में यह पंक्तियाँ अत्यंत मर्मस्पर्शी हैं कि "वो होते हैं किस्मत वाले जिनके माँ होती है", जो यह याद दिलाती हैं कि मातृत्व और भगवती की कृपा का होना मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। इस भजन को गाते समय साधक की आँखें श्रद्धा और कृतज्ञता के आंसुओं से भर जाती हैं, जो मन की शुद्धि (चित्त शुद्धि) का मार्ग प्रशस्त करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस अद्भुत भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे भारतीय संगीत और भक्ति परंपरा में अमर बनाती हैं:

  • मातृत्व और दिव्यता का समन्वय: यह भजन लौकिक जननी (माता) और अलौकिक जननी (आदिशक्ति दुर्गा) दोनों के प्रति एकसमान भाव जगाता है।
  • भक्ति का सुलभ मार्ग: इसमें कठिन दार्शनिक शब्दों के स्थान पर सरल, हृदयस्पर्शी और सीधे संवाद की भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे हर उम्र के लोग आसानी से जुड़ सकते हैं।
  • भावनात्मक शुद्धि: इसे गाने या सुनने से मन का अहंकार और कठोरता समाप्त होती है तथा करुणा और प्रेम का संचार होता है।
  • विविध अवसरों पर प्रस्तुति: इसे नवरात्र, देवी जागरण, माता की चौकी, मातृ दिवस (Mother's Day) तथा किसी भी मांगलिक उत्सव पर विशेष रूप से सराहा जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत में भाव और काल (समय) का विशेष महत्व होता है। श्री दुर्गा चालीसा के पाठ के उपरांत या संध्याकालीन बेला में इस भजन का गायन करने से विशेष शांति की अनुभूति होती है।

  • उत्तम समय: प्रातःकाल स्नान के पश्चात मंदिर में दीपक प्रज्वलित करते समय अथवा प्रदोष काल (संध्या के समय) में माँ के सम्मुख बैठकर इसका स्मरण करना अत्यंत फलदायी है।
  • विशेष अवसर: चैत्र या शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में, अष्टमी-नवमी पूजन के समय, या किसी भी मंगलवार एवं शुक्रवार को जब माता की विशेष चौकी सजाई जाती है।
  • विधि: आसन पर बैठकर, चित्त को शांत करके, माता के स्वरूप (चाहे वह मूर्ति हो या चित्र) पर नजर टिकाकर इसे प्रेमपूर्वक गाना या सुनना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मूल रूप से भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम काल के गीतकार आनंद बख्शी द्वारा रचित और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध किया गया था, जिसे महान गायक मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से अमर कर दिया। सनातन संस्कृति में इसे आदिशक्ति माँ दुर्गा, माता वैष्णो देवी, माँ चामुंडा और जगत जननी जगदम्बा के विभिन्न रूपों की स्तुति के रूप में भी उतनी ही श्रद्धा के साथ गाया जाता है जितनी श्रद्धा से इसे लौकिक माँ के लिए गाया जाता है। माँ भगवती ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड की आदिशक्ति हैं, जो समस्त जीवों का पालन-पोषण अपनी सगी संतानों की भांति करती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन और लोकगीत परंपरा में इस रचना का एक विशिष्ट स्थान है। यद्यपि इसकी उत्पत्ति फिल्मी पटपटकथा से हुई, किंतु इसकी सार्वभौमिक और शाश्वत भावनाओं ने इसे विशुद्ध भक्ति रचना के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है। आज देश के कोने-कोने में जब भी माता के जागरण होते हैं या पारिवारिक अनुष्ठान होते हैं, तब इस भजन के बिना देवी स्तुति अधूरी मानी जाती है। यह इस बात का प्रमाण है कि सच्ची कला और शुद्ध भावनाएं सीमाओं से परे जाकर सीधे ईश्वर और भक्त के हृदय को जोड़ देती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, मधुर और प्रवाहमयी खड़ी हिंदी (हिन्दुस्तानी) है, जिसमें जनसामान्य की बोलचाल के शब्दों का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'वात्सल्य रस' और 'भक्ति रस' का अद्भुत सम्मिश्रण है। 'फुलवारी', 'काँटों का बन', 'निंदिया वारी है' जैसे रूपक और उपमाएं इसके सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाती हैं। शब्दों की यह सादगी ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है जो श्रोता के अंतःकरण को सीधे स्पर्श करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और नैतिक पाठ सिखाता है:

  • कृतज्ञता का भाव: हमें अपने माता-पिता और जगत जननी माँ के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए जिनके कारण हमारा जीवन सुरक्षित है।
  • निःस्वार्थ प्रेम की प्रेरणा: सच्ची ममता और प्रेम किसी भी स्वार्थ या अपेक्षा से परे होती है, जैसा कि एक माँ का अपने बच्चे के प्रति होता है।
  • संकट में संबल: दुनिया रूपी कांटों भरे मार्ग में भगवती की कृपा ही एकमात्र ऐसा फूल है जो जीवन को सुगंधित और सुरक्षित बनाता है।
  • नम्रता और समर्पण: अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में समर्पण करना ही असली भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
फुलवारी फूलों का बगीचा प्रेम, शांति और सुरक्षा से भरा दिव्य वातावरण
बन जंगल या वन कठिनाइयों, दुखों और मोह-माया से भरा संसार
निंदिया वारी है अपनी नींद न्योछावर कर देना संतान के कल्याण के लिए अपने सुखों का त्याग करना
बलिहारी है न्योछावर होना, कुर्बान होना अगाध प्रेम और समर्पण का भाव
जां होती है प्राण या जीवन होना जीवन का आधार और संपूर्ण संबल

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है..." - इस प्रारंभिक पंक्ति में माँ के सहज, निष्कलंक और अत्यंत सुंदर स्वभाव का बखान किया गया है। माँ का हृदय किसी भी छल-कपट से रहित और अत्यंत कोमल होता है।

"ये जो दुनिया है ये बन है काँटों का तू फुलवारी है..." - यहाँ संसार को काँटों का जंगल बताया गया है जहाँ पग-पग पर दुख और प्रपंच हैं, और माँ का आंचल उस जंगल में एकमात्र सुरक्षित और सुगंधित फुलवारी है।

"दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ, मेरे लिए जागी है तू..." - यह पंक्ति माता के रात्रि-जागरण और अथक परिश्रम को दर्शाती है, जहाँ वह खुद कष्ट सहकर अपनी संतान को सुख देती है।

"माँ बच्चों की जां होती है, वो होते हैं किस्मत वाले जिनके माँ होती है..." - यह जीवन का एक परम सत्य है कि माँ का होना ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है, ठीक उसी प्रकार जैसे भक्त के साथ जगत जननी माँ दुर्गा का होना उसका सबसे बड़ा सौभाग्य है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पौराणिक श्लोक का स्मरण करना अति उत्तम है:

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥

अर्थ: जो देवी समस्त जीवों में माता के रूप में विराजमान हैं, मैं उनको बार-बार नमस्कार करता हूँ।

इसके अतिरिक्त दुर्गा सप्तशती पाठ विधि का अनुशरण कर आप माँ की कृपा और अधिक गहराई से प्राप्त कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है (O Maa O Maa Pyari Maa)
समर्पित देवता आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी एवं लौकिक जननी
रचनाकार / गीतकार आनंद बख्शी (मूल फिल्म गीत), लोक परंपरा
भाषा सरल हिंदी / हिन्दुस्तानी
मुख्य थीम मातृत्व प्रेम, अगाध समर्पण, वात्सल्य और भक्ति
मुख्य भाव (Bhava) प्रेम, करुणा, कृतज्ञता और विनय
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी, परिवार मिलन एवं संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मूल रूप से मातृत्व और माँ के अगाध प्रेम को समर्पित है। इसे न केवल अपनी जन्मदात्री माँ के लिए बल्कि देवी माँ (माता दुर्गा, वैष्णो देवी) की आराधना और जागरण के समय भी उतनी ही श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

हाँ, यह माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन और नवरात्रि के आयोजनों में सबसे लोकप्रिय भजनों में से एक है। यह भक्तों और माँ के बीच एक भावनात्मक सेतु का कार्य करता है।

इस प्रसिद्ध गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी जी द्वारा लिखे गए थे और इसे संगीतबद्ध लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने किया था। समय के साथ यह भारतीय संस्कृति का एक अमर भक्ति गीत बन गया है।

इस भजन के भावपूर्ण शब्दों और मधुर धुन के श्रवण से मन का तनाव कम होता है, हृदय में करुणा और प्रेम जागृत होता है तथा माता के प्रति समर्पण का भाव मजबूत होता है।

यद्यपि इसकी उत्पत्ति एक फिल्म से हुई थी, परंतु इसके सार्वभौमिक भाव और 'माँ' रूपी दिव्य सत्ता के साथ इसकी तल्लीनता के कारण इसे संपूर्ण भारत में एक प्रमुख भक्ति गीत एवं भजन के रूप में स्वीकार किया गया है।

नवरात्रि के दौरान संध्या आरती के पश्चात या माँ के दरबार के समक्ष बैठकर इस भजन को भावपूर्ण स्वर में गाएं या सुनें। इससे माता का आशीर्वाद और घर में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

इस पृष्ठ पर दिए गए संपूर्ण हिंदी लिरिक्स को पढ़कर और इसके अंतरा-दर-अंतरा अर्थ को समझकर आप इसे आसानी से याद कर सकते हैं। इसे धीमी और मधुर लय में गाना सबसे प्रभावी होता है।

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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिलोक (Bhaktilok) के संपादकीय दल द्वारा यह मार्गदर्शिका सनातन परंपरा, लोक संस्कृति और संगीत के आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इस आलेख में प्रस्तुत सभी लिरिक्स, भावार्थ और व्याख्याएं पाठकों की सुगमता और प्रामाणिकता को सुनिश्चित करने के लिए संयोजित हैं। यह सामग्री पूरी तरह से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के मानकों के अंतर्गत आती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोकगीत एवं भक्ति संगीत परंपरा
  • देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (मातृ महिमा प्रसंग)
  • भारतीय सुगम संगीत एवं फिल्म गीत संग्रह (पारंपरिक संदर्भ)
  • भक्तिलोक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथ आकाइव

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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