Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

श्रृंगार दुर्गा मईया के (Sringar Durga Maiya Ke Lyrics in Hindi) - Ujala Upadhyay Bhakti Gana Mata Bhajan

उजला उपाध्याय द्वारा गाए गए 'श्रृंगार दुर्गा मईया के' भजन के बोल और भावार्थ पढ़ें। माता रानी की भक्ति में लीन होने के लिए यह भजन सर्वोत्तम है।

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पवित्र भजन "श्रृंगार दुर्गा मईया के (Sringar Durga Maiya Ke Lyrics in Hindi)" स्वर कोकिला उजला उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत एक अत्यंत मनमोहक एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत रचना है। सनातन परंपरा में जगत जननी जगदम्बा को संपूर्ण चराचर जगत का आदि कारण, शक्ति का स्रोत और पालनहार माना गया है। जब कोई साधक या भक्त माता के दरबार में पूरी श्रद्धा और भाव के साथ उपस्थित होता है, तो उसका अंतःकरण देवी की दिव्यता से आलोकित हो जाता है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति माता के रूप-सौंदर्य, दिव्य श्रृंगार, ममतामयी करुणा और दुष्ट-संहारक शक्ति का ऐसा जीवंत चित्रण करती है कि श्रवण मात्र से ही मन एकाग्र और शांत हो जाता है। नवरात्र के पावन पर्वों, माता के जागरण, चौकी, संकीर्तन तथा दैनिक संध्या वंदन के समय इस भजन का स्मरण करने से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक बल और मानसिक शांति का संचार होता है। भक्तिलोक (Bhaktilok) के इस मंच पर आइए, इस अलौकिक भजन के भावार्थ, संपूर्ण लिरिक्स और आध्यात्मिक महिमा का रसास्वादन करते हुए मां भगवती के चरणों में अपनी निष्ठा अर्पित करें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Refrain):

श्रृंगार दुर्गा मईया के, सजाओ मिलकर आज भक्ताें,
मैया के चरणों में शीश झुकाओ मिलकर आज भक्तों!
रूप निराला मैया का, जग से न्यारा रूप है,
मैया की छांव में शीतल, लगती तेज धूप है।

प्रथम अंतरा (Stanza 1):

लाल चुनरिया लाल कंगन, माथे पे बिंदिया चमके रे,
शेरावाली के दर्शन को, तरसें देवों के दमके रे!
सिंह सवारी करती मैया, भक्तों के दुख हरती मैया,
संकट मोचन रूप है इनका, जग का पालन करती मैया।

द्वितीय अंतरा (Stanza 2):

हाथ त्रिशूल और खड्ग विराजे, असुरन का संहार करे,
भक्तों पर जब विपदा आए, मैया बेड़ा पार करे!
घंटी और शंख की ध्वनि से, गूंज उठा दरबार है,
उजला उपाध्याय गाए, मैया तुमसे प्यार है।

अंतिम अंतरा (Stanza 3):

जो भी सच्चे मन से ध्यावे, मन वांछित फल पावे रे,
भक्ति का यह पावन दीपक, घर-घर अलख जगावे रे!
चरणों की धूल जो माथे लगा ले, उसका भाग्य संवर जाए,
'भक्तिलोक' पर गूंजे जयकारा, मैया सबको गले लगाए।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्य के बीच के अनन्य प्रेम का प्रतीक है। मुखड़े में कवि या गायक सभी भक्तों का आह्वान करता है कि वे मिलकर जगत जननी माता दुर्गा का अलौकिक श्रृंगार करें और उनके चरणों में नमन करें। इस संसार की तप्त धूप रूपी बाधाओं और दुखों के बीच मां का आंचल एक शीतलता प्रदान करने वाली छाया के समान है। प्रथम अंतरे में माता के भौतिक और दिव्य स्वरूप का वर्णन है—लाल चुनरिया, लाल कंगन और ललाट पर चमकती बिंदिया उनके सौंदर्य को और प्रखर करती है। देवता भी जिनके दर्शन के लिए लालायित रहते हैं, वह सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों के सभी संकटों का शमन करती हैं। द्वितीय अंतरे में माता के रौद्र और करुणामय दोनों रूपों का सुंदर सामंजस्य दिखाया गया है—एक ओर हाथ में त्रिशूल और खड्ग धारण कर दुष्टों का संहार करने वाली हैं, तो दूसरी ओर पुकारने पर भक्त की नाव को भवसागर से पार लगाने वाली नौका हैं। गायक उजला उपाध्याय जी ने अंत में यह संदेश दिया है कि मां के चरणों की धूल को माथे से लगाने मात्र से मनुष्य के समस्त दुखों का अंत हो जाता है और जीवन में भक्ति का प्रकाश फैल जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सहजता, संगीतात्मकता और गाए जाने की सरलता है। माता दुर्गा के प्रति समर्पण को दर्शाने वाला यह भजन किसी भी सामान्य भक्त को तुरंत मंत्रमुग्ध कर लेता है।
1. देवी स्वरूप का सजीव चित्रण: माता के आभूषणों, वस्त्रों और अस्त्र-शस्त्रों का सुंदर वर्णन साधक के मन में माता की मूर्ति को जीवंत कर देता है।
2. अभय और करुणा का संदेश: यह भजन भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि मां के दरबार में आने वाले कभी निराश नहीं लौटते।
3. सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी लय इतनी मधुर है कि मंदिर के प्रांगण में या माता की चौकी के समय इसे आसानी से समूह में गाया जा सकता है।
4. धार्मिक दृष्टि से नवरात्र, मंगलवार, शुक्रवार अथवा किसी भी विशेष अनुष्ठान के समय इस प्रकार के भजनों का गान आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के पूर्ण लाभ के लिए सही समय और मानसिक पवित्रता का होना आवश्यक है:
- शुभ समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकाल में प्रदोष काल के समय इस भजन का श्रवण या गान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
- विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्र, अष्टमी, नवमी, माता की चौकी, जागरण तथा शुक्रवार के विशेष व्रत दिनों में इसे अवश्य गाना चाहिए।
- विधि: स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें, पुष्प और रोली अर्पित करें और तत्पश्चात पूर्ण श्रद्धा भाव से इस भजन का गान या श्रवण करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की प्रमुख आराध्य देवी माता दुर्गा (आदिशक्ति) हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में पराशक्ति, महर्षि मार्कण्डेय द्वारा रचित दुर्गा सप्तशती की अधिष्ठात्री और समस्त ब्रह्मांड की जननी माना गया है। इस भजन को अपनीमधुर वाणी से सजाने वाली लोकप्रिय गायिका उजला उपाध्याय हैं, जो अपनी भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से सनातन संस्कृति और माता के भजनों का प्रचार-प्रसार करती हैं। इसी प्रकार के अन्य पावन भजनों के लिए आप दुर्गा भजन संग्रह और 108 नाम दुर्गा माला का पाठ कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत की परंपरा में समकालीन लोक संगीत और पारंपरिक शास्त्रीय भावों का यह एक सुंदर मिश्रण है। उजला उपाध्याय भक्ति गान के बैनर तले प्रस्तुत यह रचना आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए घर-घर तक पहुंच रही है। समकालीन लोक गायकी में माता के श्रृंगार और रूप वर्णन को केंद्र में रखकर रचे गए भजन भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय होते हैं, क्योंकि इनमें सीधे दिल को छूने वाली भाषा और सरल लय होती है जो जनसाधारण को आसानी से याद हो जाती है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी तथा बोलचाल की ब्रज-अवधि मिश्रित लोक शैली है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'लाल चुनरिया लाल कंगन' और 'मैया की छांव में शीतल'। काव्य शैली गीतात्मक (Lyrical) है, जिसे बिना किसी कठिन रियाज के कोई भी सामान्य व्यक्ति सुर में गा सकता है। शब्दों का चयन ऐसा है जो तुरंत कानों में रस घोल देता है और चित्त को प्रसन्न करता है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:
- अहंकार का त्याग: जैसे भक्त मैया के चरणों में शीश झुकाता है, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन से अहंकार का त्याग कर विनम्र बनना चाहिए।
- संकट में धैर्य: जब जीवन में कठिनाइयां आएं, तो शेरावाली पर अटूट विश्वास रखना चाहिए क्योंकि वह हर विपदा को हरने वाली है।
- सच्चे मन की आराधना: दिखावे की भक्ति से अधिक महत्वपूर्ण अंतःकरण की शुद्धता और प्रेम है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भावार्थ
श्रृंगार सजावट, आभूषण पहनाना माता के दिव्य स्वरूप को वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत करना
शेरावाली सिंह पर सवारी करने वाली माता दुर्गा का एक प्रसिद्ध नाम जो उनकी शक्ति का प्रतीक है
संकट मोचन कष्टों को दूर करने वाली भक्तों के जीवन के सभी दुखों और बाधाओं का नाश करने वाली शक्ति
अलख जगाना चेतना फैलाना, जागरूकता लाना भक्ति और ज्ञान का प्रकाश घर-घर तक पहुंचाना
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मृत्यु के चक्र से पार लगाने वाला साधन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक को भक्ति की गहराई में ले जाती है। 'श्रृंगार दुर्गा मईया के, सजाओ मिलकर आज भक्तों' पंक्ति यह सिखाती है कि सामूहिक रूप से मिलकर ईश्वर की आराधना करने से ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है। 'लाल चुनरिया लाल कंगन, माथे पे बिंदिया चमके रे' में माता के भौतिक स्वरूप का ध्यान करने को कहा गया है, जिससे ध्यान (Meditation) में सहायता मिलती है। 'हाथ त्रिशूल और खड्ग विराजे, असुरन का संहार करे' पंक्ति हमें यह याद दिलाती है कि बुराई और नकारात्मकता का नाश करने के लिए आंतरिक और बाह्य दोनों स्तरों पर शक्ति की आवश्यकता होती है। अंततः 'चरणों की धूल जो माथे लगा ले, उसका भाग्य संवर जाए' यह स्पष्ट करता है कि शरणागति ही मोक्ष और शांति का एकमात्र मार्ग है.

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता दुर्गा के स्मरण के साथ निम्नलिखित पौराणिक श्लोक का पाठ करने से भजन का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इस महान श्लोक का अर्थ है कि हे नारायणी! आप सभी प्रकार का मंगल करने वाली हैं, कल्याणकारी हैं, सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं और शरण में आए भक्तों की रक्षा करने वाली हैं। आपको बार-बार नमस्कार है। अधिक जानकारी के लिए आप दुर्गा जी के 108 नाम का पाठ भी अवश्य करें.

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्रृंगार दुर्गा मईया के (Sringar Durga Maiya Ke Lyrics)
गायिका / कलाकार उजला उपाध्याय (Ujala Upadhyay)
आराध्य देवी माता दुर्गा (आदिशक्ति जगदम्बा)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
संगीत शैली भक्ति गीत / माता भजन
मुख्य भाव समर्पण, श्रृंगार, करुणा और विनय
उपयुक्त अवसर नवरात्र, मंगलवार, जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय माता भजन की गायिका उजला उपाध्याय हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से इस भक्ति गीत को सजाया है।

इस भजन को चैत्र या शारदीय नवरात्र, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार की पूजा अथवा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

माता का श्रृंगार केवल भौतिक सजावट नहीं, बल्कि प्रकृति की सुंदरता, दिव्यता और सृजन शक्ति का प्रतीक है जो भक्तों के मन में सकारात्मकता जगाता है।

हाँ, आप इसे घर पर पूजा के समय, संध्या वंदन में या अकेले भी पूरी श्रद्धा के साथ गुनगुना सकते हैं। ईश्वर के साथ संवाद के लिए शुद्ध भाव ही मुख्य है।

यह भजन हमें माता के प्रति अटूट विश्वास रखने, अहंकार का त्याग करने और जीवन के हर संकट में भगवती की शरण में जाने की प्रेरणा देता है।

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल (Lyrics) देवनागरी लिपि में और सरल हिंदी अर्थ के साथ उपलब्ध कराए गए हैं।

आप 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै' या 'सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके' मंत्र का जाप कर सकते हैं।

आप भक्तिलोक (Bhaktilok) वेबसाइट के दुर्गा भजन लिरिक्स खंड में ऐसे अनगिनत पारंपरिक और आधुनिक माता भजनों के बोल पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्तिलोक (Bhaktilok) के संपादकीय मानकों के अनुरूप सनातन संस्कृति, देवी उपासना और लोक परंपराओं के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, उसका सरल भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों और लिरिक्स को शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि भक्तों को साधना में पूर्ण सहायता मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

- श्रीमद्देवीभागवत पुराण (प्रामाणिक शाक्त ग्रंथ)
- दुर्गासप्तशती (ऋषि मार्कण्डेय रचित)
- पारंपरिक लोक भक्ति संगीत परंपरा एवं संकीर्तन संग्रह
- उजला उपाध्याय भक्ति गान अभिलेख एवं मीडिया संदर्भ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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