Kiran Singh Bhakti Gana Devigeet
प्रकाशित तिथि: 2023 / श्रेणी: देवी भजन, भक्ति गाना भोजपुरी में, छठ पूजा गीत
सनातन संस्कृति में आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, महासरस्वती और कुलमाता की आराधना का विशेष स्थान है। लोक गीतों और पारंपरिक लोक-साहित्य में 'पचरा' (Pachara) एक अत्यंत प्राचीन और विशिष्ट विधा है, जो विशेष रूप से नवरात्र, छठ पूजा, मुंडन, विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर देवियों के आह्वान और स्तुति के लिए गाई जाती है। प्रसिद्ध लोक गायिका किरण सिंह (Kiran Singh) द्वारा प्रस्तुत यह 'माता भजन देवी पचरा' (Mata Bhajan Devi Pachara) जगत जननी की असीम कृपा, ममतामयी करुणा और दुष्टनाशिनी शक्ति का जीवंत चित्रण करती है। भोजपुरी और लोक संगीत की सोंधी खुशबू से ओत-प्रोत यह भक्ति रचना साधक के मन में अगाध श्रद्धा, समर्पण और आंतरिक ऊर्जा का संचार करती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, पचरा गायन की परंपरा, और इसके सांस्कृतिक महत्व का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ मुखड़ा ॥
निअरा भइले नवराता, जगमग जागे चुनरिया,
आइयो ना भवानी मोरे अंगना, ओढ़ के रे लाल चुनरिया।
झिलमिल झिलमिल दीप जले, बाजे थरिया रे पइहरिया,
आइयो ना भवानी मोरे अंगना...
॥ प्रथम अंतरा ॥
ऊँचे परबत भवन तोहार, मैया सिंह चढ़ी तू आवेली,
खप्पर धरि के हाथे मैया, दुष्टन के तू संहारेली।
भगत खड़ा तोहरे दुअरिया, लेके फूल और अरितिया,
आइयो ना भवानी मोरे अंगना...
॥ द्वितीय अंतरा ॥
घर-घर गूंजे जयकारा तोहार, मैया महिमा अपरम्पार,
सुख-संपत्ति घर दियो भवानी, हरियो संकट सब विकार।
किरण सिंह गुण गावे तोहार, चरण धरे लिलारिया,
आइयो ना भवानी मोरे अंगना, ओढ़ के रे लाल चुनरिया।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
किरण सिंह के गाए इस पारंपरिक देवी पचरा का भावार्थ अत्यंत गहन और भक्त-भगवान के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाता है। पचरा का शाब्दिक और पारंपरिक अर्थ वह गान है जो देवी के पंच रूपों या उनकी पचई (संरक्षण) के लिए गाया जाता है।
मुखड़े का भाव: भक्त अपनी आराध्य देवी को पुकारते हुए कहता है कि नवरात्र का पावन पर्व नजदीक आ गया है, चारों तरफ दीपों की झिलमिलाहट और माता के स्वागत की तैयारियां हो रही हैं। हे भवानी! आप अपनी लाल चुनरी ओढ़कर मेरे इस आंगन में अवश्य पधारें। यहाँ आपकी प्रतीक्षा में भक्त पलकें बिछाए बैठा है।
अंतर 1 का भाव: भक्त माता के दिव्य स्वरूप का स्मरण करता है कि आपका निवास ऊंचे पर्वतों पर है। आप सिंह की सवारी करती हुई भक्तों के संकटों को दूर करने के लिए प्रगट होती हैं। आपके हाथ में खप्पर (अस्त्र) दुष्टों और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला है। भक्त हाथ में पूजा की थाली और पुष्प लिए आपकी द्वारी पर खड़ा है।
अंतिम भाव: सम्पूर्ण संसार में माता का जयकारा गूंज रहा है। गायिका किरण सिंह कहती हैं कि हे मैया! मेरे घर-परिवार में सुख-समೃದ್ಧि का वास हो और सभी कष्टों का हरण हो जाए। मैं अपने मस्तक को आपके चरणों में रखकर आपकी वंदना करती हूँ। यह समर्पण ही सच्ची भक्ति है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- लोक संस्कृति और परंपरा का संगम: यह भजन भोजपुरी अंचल और उत्तर भारतीय लोक-संस्कृति में गाए जाने वाले पारंपरिक 'पचरा' गीत का आधुनिक और परिष्कृत रूप है।
- स्त्री शक्ति का सम्मान: सनातन धर्म में नारी शक्ति को ब्रह्मांड की जननी माना गया है; यह भजन उसी आदिशक्ति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता है।
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा: इस प्रकार के देवी गीत सुनने से घर का वातावरण पवित्र होता है और मन से भय एवं नकारात्मकता दूर होती है।
- संबंधित पावन पृष्ठ: माँ दुर्गा की महिमा के लिए आप दुर्गा सप्तशती पाठ विधि और माता दुर्गा की आरती का भी स्मरण कर सकते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
देवी पचरा और देवी गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्र: नौ दिनों तक चलने वाले इन पावन दिनों में प्रातः और संध्याकालीन बेला में इस भजन का श्रवण करना श्रेष्ठ है।
- छठ पूजा एवं अन्य व्रत: बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोक पर्वों पर महिला मंडलों द्वारा सामूहिक रूप से यह गीत गाया जाता है।
- गृह प्रवेश एवं मांगलिक कार्य: घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश हेतु इस प्रकार के भक्ति गानों को बजाया या गाया जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की केंद्र बिंदु आदिशक्ति माँ दुर्गा हैं, जिन्हें प्रकृति, चेतना, बुद्धि और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। पुराणों के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और असुरों का प्रकोप बढ़ा है, तब-तब माँ दुर्गा ने विभिन्न रूपों (जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) में अवतार लेकर सृष्टि की रक्षा की है।
लोक परंपरा के अंतर्गत ग्रामीण अंचल की महिलाओं ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन गीतों को मौखिक परंपरा के माध्यम से संचित रखा है, जिन्हें किरण सिंह जैसे प्रतिष्ठित लोक कलाकारों ने आधुनिक संगीत के साथ सहेजा है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
'पचरा' शब्द की उत्पत्ति प्राकृत और अपभ्रंश काल के लोकगीतों से मानी जाती है। जब गाँव की माताएं और बहनेंजगत जननी को प्रसन्न करने के लिए सामूहिक स्वर में गाती थीं, तो उसे पचरा कहा जाता था।
किरण सिंह द्वारा प्रस्तुत यह संस्करण पारंपरिक धुनों और आधुनिक वाद्ययंत्रों का एक सुंदर मेल है, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन ठेठ लोक भाषा (भोजपुरी मिश्रित हिंदी) में रचा गया है। इसकी भाषा इतनी सरल और मधुर है कि साधारण ग्रामीण से लेकर शहरी श्रोता भी इसके भाव को तुरंत आत्मसात कर लेते हैं।
काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'झिलमिल दीप', 'लाल चुनरिया', 'ऊँचे परबत भवन' जैसे बिंबों (Imagery) का बहुत ही सजीव प्रयोग किया गया है, जो श्रोता के सम्मुख देवी के दरबार का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत कर देता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: माता के चरणों में सिर झुकाना (चरण धरे लिलारिया) यह सिखाता है कि मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार का त्याग कर सर्वोच्च सत्ता के प्रति समर्पित रहना चाहिए।
- संकट में धैर्य और विश्वास: जीवन में कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की रक्षा माँ अवश्य करती हैं।
- सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: अपनी भाषा, लोकगीतों और परंपराओं को जीवित रखना हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| पचरा | देवी गीत / स्तुति | नवरात्र या उत्सव पर गाया जाने वाला पारंपरिक लोकगीत |
| निअरा | निकट / पास | त्योहार या शुभ समय का नजदीक आना |
| खप्पर | पात्र / शस्त्र विशेष | माता के द्वारा दुष्टों के संहार के लिए प्रयुक्त अस्त्र |
| लिलारिया | मस्तक / ललाट | चरणों में शीश झुकाना या प्रणाम करना |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"निअरा भइले नवराता, जगमग जागे चुनरिया..."
भावार्थ: पर्व का समय निकट आ गया है। घरों में माँ की ज्योति जल उठी है और चारों ओर उत्सव का उल्लास है। हे माता! आप हमारे घर पधारिए।
"ऊँचे परबत भवन तोहार, मैया सिंह चढ़ी तू आवेली..."
भावार्थ: आपका पवित्र धाम पर्वतों की ऊंचाइयों पर स्थित है। आप सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों के कल्याण के लिए प्रगट होती हैं।
"किरण सिंह गुण गावे तोहार, चरण धरे लिलारिया..."
भावार्थ: गायिका किरण सिंह आपके गुणों का गान कर रही हैं और अपना मस्तक आपके श्रीचरणों में झुकाकर आशीर्वाद मांग रही हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस पचरा भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:
इस श्लोक का अर्थ है कि जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, हम उन जगदम्बा को बारंबार प्रणाम करते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप नवदुर्गा मंत्र संग्रह देख सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | माता भजन देवी पचरा (Mata Bhajan Devi Pachara) |
|---|---|
| गायिका | किरण सिंह (Kiran Singh) |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोक गीत / देवी गीत / पचरा |
| आराध्य देवी | आदिशक्ति माँ दुर्गा / भवानी |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, स्वागत और आशीर्वाद |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्र, छठ पूजा, देवी जागरण, पारिवारिक अनुष्ठान |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. देवी पचरा क्या होता है?
पचरा एक पारंपरिक लोकगीत विधा है, जो विशेष रूप से उत्तर भारत (विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश) में माता दुर्गा के आह्वान, स्तुति और उनकी महिमा के गान के लिए नवरात्र या अन्य शुभ अवसरों पर गाई जाती है।
Q2. 'माता भजन देवी पचरा' की गायिका कौन हैं?
इस लोकप्रिय देवी पचरा को प्रसिद्ध लोक गायिका किरण सिंह (Kiran Singh) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।
Q3. इस भजन को किस अवसर पर सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?
यह भजन शारदीय नवरात्र, चैत्र नवरात्र, छठ पूजा, माता के जागरण और घर में होने वाले मांगलिक आयोजनों के समय सुनने के लिए अत्यंत उत्तम है।
Q4. पचरा गायन का सनातन संस्कृति में क्या महत्व है?
पचरा गीत हमारी प्राचीन मौखिक लोक संस्कृति का हिस्सा हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचित होते आए हैं। यह महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गाए जाते हैं, जो परिवार में सकारात्मकता और धार्मिक भावना जगाते हैं।
Q5. क्या इस भजन को घर पर अकेले भी गाया जा सकता है?
हाँ, इस भजन को व्यक्तिगत रूप से पूजा के समय या सामूहिक रूप से कीर्तन और सत्संग में भी पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।
Q6. भोजपुरी भक्ति गानों में देवी गीतों की क्या विशेषता है?
भोजपुरी देवी गीतों में माता को बेटी, बहन या ममतामयी माँ के रूप में बहुत ही आत्मीयता से पुकारा जाता है, जो लोकमानस के बेहद करीब है।
Q7. माता दुर्गा के नौ स्वरूपों के नाम कहाँ मिलते हैं?
माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का विस्तृत वर्णन मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत आने वाले 'दुर्गा सप्तशती' (चंडी पाठ) में मिलता है।
Q8. क्या भक्तिलोक (Bhaktilok) पर अन्य देवी भजन भी उपलब्ध हैं?
हाँ, आप Bhaktilok.in पर विभिन्न प्रकार के देवी भजन, चालीसा, आरती और व्रत कथाओं के बोल व अर्थ आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख पारंपरिक लोक संगीत, देवी पचरा परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी, संपूर्ण गीत के बोल और उसके आध्यात्मिक अर्थ से अवगत कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- देवीभागवत पुराण - महर्षि वेद व्यास कृत
- भारतीय लोक संगीत और पचरा परंपरा अध्ययन
- पारंपरिक भोजपुरी लोक-साहित्य एवं संकीर्तन संग्रह
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