hari bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

श्री विष्णु धुन लिरिक्स (Shri Vishnu Dhun Lyrics in Hindi) - Shriman Narayan Narayan Hari Hari Vishnu Mantra

श्री विष्णु धुन 'श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि' लिरिक्स, अर्थ और महिमा पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण जानकारी के लिए आएं।

सनातन धर्म में नाम-संकीर्तन को कलयुग में मोक्ष प्राप्ति और मानसिक शांति का सबसे सुलभ और अमोघ साधन माना गया है। "श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि" (Shriman Narayan Narayan Hari Hari) एक ऐसी ही दिव्य और पावन विष्णु धुन है, जो साधक के अंतःकरण में भक्ति रस का संचार करती है। भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनहार और आदि-अनादि परमेश्वर हैं, उनके इस पावन मंत्र रूपी धुन का निरंतर जाप करने से जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है। यह धुन न केवल भगवान विष्णु के प्रति अनन्य समर्पण (शरणागति) को दर्शाती है, बल्कि मन को एकाग्र कर परम शांति प्रदान करती है। इस लेख में हम इस महामंत्र रूपी धुन के संपूर्ण लिरिक्स, उसके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ, शास्त्रीय महत्व और गायन विधि का सविस्तार अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री विष्णु धुन - श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि

॥ कोरस ॥
श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।
श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ अंतरा - १ ॥
लक्ष्मी नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।
सत्यनारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ अंतरा - २ ॥
बद्री नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।
शेष नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ अंतरा - ३ ॥
राम नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।
कृष्ण नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ अंतरा - ४ ॥
सुख के दाता नारायण हरि हरि।
दुख के हर्ता नारायण हरि हरि।
श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ अंतरा - ५ ॥
भव भय हारी नारायण हरि हरि।
मुक्ति के दाता नारायण हरि हरि।
श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।

॥ समापन ॥
श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि।
भजमन नारायण नारायण हरि हरि।
हरि बोल नारायण नारायण हरि हरि।
विष्णु नारायण नारायण हरि हरि।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "श्री विष्णु धुन" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। "श्रीमन् नारायण" का अर्थ है - लक्ष्मीपति नारायण, जो संपूर्ण सृष्टि के ऐश्वर्य, सौंदर्य और ऊर्जा के स्रोत हैं। जब हम "भजमन नारायण" कहते हैं, तो हम अपने चंचल मन को निर्देश देते हैं कि वह व्यर्थ के सांसारिक प्रपंचों को छोड़कर केवल उस परमेश्वर का ध्यान करे जो शाश्वत और आनंदमय है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस पावन धुन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे प्रत्येक सनातनी गृहस्थ और साधक के लिए अनिवार्य बनाती हैं:

  • मानसिक तनाव से मुक्ति: इस धुन की लयबद्ध आवृत्ति (Rhythmic Repetition) मस्तिष्क की तरंगों को शांत करती है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद का नाश होता है।
  • एकाग्रता में वृद्धि: "नारायण" शब्द का बार-बार उच्चारण करने से शरीर के चक्र जागृत होते हैं और ध्यान लगाने की क्षमता का विकास होता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: जिस घर में नियमित रूप से इस धुन का गायन या श्रवण होता है, वहां से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • शरणागति का भाव: यह धुन साधक के भीतर अहंकार को समाप्त कर विनम्रता और समर्पण की भावना जागृत करती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान के नाम का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष समय पर इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

सर्वोत्तम समय: ब्रह्ममुहूर्त (सुबह ४ से ६ बजे) और संध्याकाल (सूर्यास्त के समय) इस धुन के जप के लिए सबसे उत्तम माने गए हैं। इसके अतिरिक्त एकादशी, पूर्णिमा और गुरुवार के दिन इसका विशेष अनुष्ठान करना चाहिए।

गायन की विधि:

  • सर्वप्रथम स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • अपने सम्मुख भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें और एक शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • यदि संभव हो तो तुलसी की माला से इस धुन का मानसिक या वाचिक जप करें।
  • गायन करते समय अपने मन में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप (शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए हुए) का ध्यान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह धुन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्रीमन नारायण (विष्णु) और उनकी आद्या शक्ति माता लक्ष्मी को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवर्षि नारद तीनों लोकों में विचरण करते हुए निरंतर वीणा की तान पर इसी महामंत्र "श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि" का संकीर्तन करते हैं। आधुनिक युग में अनेक महान संतों और गायकों जैसे जगजीत सिंह, अनुराधा पौडवाल और हरिहरन ने अपनी मधुर आवाज से इस धुन को जन-जन तक पहुंचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस धुन की रचना किसी एक आधुनिक कवि द्वारा नहीं की गई है, बल्कि यह प्राचीन वैदिक संकीर्तन परंपरा का हिस्सा है। श्रीमद्भागवत महापुराण में नाम-संकीर्तन की महिमा का जो वर्णन मिलता है, यह धुन उसी का संगीतमय स्वरूप है। सदियों से भारत के विभिन्न संप्रदायों, विशेषकर वैष्णव संप्रदाय में, इस धुन का उपयोग सामूहिक प्रार्थना और प्रभात फेरी के दौरान किया जाता रहा है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस धुन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और संस्कृतनिष्ठ हिंदी है। इसमें जटिल अलंकारों के स्थान पर सहज प्रवाह और नाद-सौंदर्य (Acoustic Beauty) पर बल दिया गया है। इसकी काव्य शैली "प्रगाथ" या "धुन" श्रेणी में आती है, जहां एक ही मुख्य पंक्ति (Mukhda) को बार-बार दोहराया जाता है ताकि साधक का मन विचारशून्य होकर केवल नाद ब्रह्म में लीन हो सके।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह धुन हमें केवल आध्यात्मिक शांति ही नहीं देती, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देती है:

  • समता का भाव: सुख और दुख दोनों ही परिस्थितियों में भगवान नारायण का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि वे ही सुख के दाता और दुख के हर्ता हैं।
  • कर्मयोग की प्रेरणा: संसार में रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करें, परंतु फल की चिंता किए बिना अपना सर्वस्व ईश्वर को समर्पित कर दें।
  • नाम की महिमा: कलयुग में कठिन तपस्या या यज्ञ करना सबके लिए संभव नहीं है, इसलिए केवल नाम जप से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
श्रीमन् (Shriman) लक्ष्मी सहित, ऐश्वर्यशाली जो समस्त भौतिक और आध्यात्मिक संपदा के स्वामी हैं।
नारायण (Narayan) नार (जल) में निवास करने वाले, मनुष्यों के आश्रय परम पुरुष जो संपूर्ण सृष्टि के कण-कण में व्याप्त हैं।
हरि (Hari) हरण करने वाले जो अपने भक्तों के पापों, दुखों और अज्ञान का हरण कर लेते हैं।
भजमन (Bhajman) हे मन! भजन कर अपने चंचल मन को अंतर्मुखी होने का निर्देश देना।
भव भय (Bhav Bhay) संसार का भय, जन्म-मृत्यु का चक्र संसार सागर में डूबने और बार-बार जन्म लेने का भय।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि। भजमन नारायण नारायण हरि हरि।"
हे मानव! तू उस परम ऐश्वर्यशाली लक्ष्मीपति नारायण का निरंतर स्मरण कर। हे मेरे मन! तू व्यर्थ की चिंताओं को छोड़कर केवल उस हरि के नाम का भजन कर जो संपूर्ण जगत के रक्षक हैं।

२. "लक्ष्मी नारायण नारायण हरि हरि। सत्यनारायण नारायण हरि हरि।"
माता लक्ष्मी के साथ सुशोभित होने वाले भगवान विष्णु और सत्य स्वरूप परमेश्वर सत्यनारायण का ध्यान कर। सत्य ही नारायण का वास्तविक रूप है, इसलिए सत्य के मार्ग पर चलते हुए उनका भजन कर।

३. "बद्री नारायण नारायण हरि हरि। शेष नारायण नारायण हरि हरि।"
बद्रिकाश्रम में तपस्यालीन बद्रीनाथ और क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विराजमान शेषनारायण का स्मरण कर, जो संपूर्ण ब्रह्मांड को विश्राम और शांति प्रदान करते हैं।

४. "राम नारायण नारायण हरि हरि। कृष्ण नारायण नारायण हरि हरि।"
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और लीला पुरुषोत्तम श्री कृष्ण के रूप में अवतार लेने वाले उन नारायण का ही भजन कर, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की।

५. "सुख के दाता नारायण हरि हरि। दुख के हर्ता नारायण हरि हरि।"
वे ही जीवन में वास्तविक सुख, शांति और संतोष देने वाले हैं, और वे ही हमारे प्रारब्ध जनित दुखों और कष्टों का हरण करने वाले कृपालु देव हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस धुन के साथ यदि निम्नलिखित मंत्रों का भी स्मरण किया जाए, तो साधना पूर्ण मानी जाती है:

॥ महामंत्र ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

॥ ध्यान श्लोक ॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम श्री विष्णु धुन (श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि)
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री विष्णु (नारायण)
मुख्य भाव (Bhava) शांत रस, समर्पण भाव (शरणागति), दास्य भाव
भाषा संस्कृतनिष्ठ हिंदी
काव्य शैली संकीर्तन धुन (Chant)
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, एकादशी व्रत, गुरुवार पूजा, सत्संग, प्रभात फेरी
मुख्य लाभ मानसिक शांति, पापों का नाश, सकारात्मक ऊर्जा का संचार

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका अर्थ है - "हे मन! तू लक्ष्मीपति, सर्वव्यापी, दुखों का हरण करने वाले भगवान नारायण का निरंतर भजन और स्मरण कर।" यह ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की प्रार्थना है।

इस धुन का जाप किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु ब्रह्ममुहूर्त (सुबह ४ से ६ बजे) और संध्याकाल के समय इसका जाप करने से सर्वाधिक मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

हां, सनातन धर्म में नाम-संकीर्तन पर सभी का समान अधिकार है। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और वृद्ध सभी पूर्ण श्रद्धा भाव से इस पावन धुन का गायन और श्रवण कर सकते हैं।

नहीं, यह एक सार्वजनिक संकीर्तन धुन है। इसके लिए किसी गुरु दीक्षा की आवश्यकता नहीं है। कोई भी व्यक्ति शुद्ध मन से इसका उच्चारण शुरू कर सकता है।

इसके नियमित जाप से मानसिक तनाव दूर होता है, घर में सुख-समृद्धि आती है, एकाग्रता बढ़ती है और साधक को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है।

"नारायण" भगवान विष्णु का वह नाम है जो दर्शाता है कि वे संपूर्ण सृष्टि के आश्रयदाता हैं। इस नाम के उच्चारण मात्र से ही मनुष्य के संचित पापों का क्षय होने लगता है।

हां, एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन "श्रीमन् नारायण" धुन का अखंड कीर्तन या श्रवण करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

भगवान विष्णु की साधना के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए इस धुन के मंत्र रूपी जाप के लिए तुलसी की माला का ही प्रयोग करें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा और प्रामाणिक वैष्णव ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। "श्रीमन् नारायण नारायण हरि हरि" धुन का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो चुका है, क्योंकि इसके नाद कंपन (Sound Vibrations) मानव मस्तिष्क को गहन विश्राम की स्थिति में ले जाते हैं। यह सामग्री पाठकों के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से पूर्णतः शोधपरक और भक्तिमय भाव से प्रस्तुत की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण: नाम-संकीर्तन महिमा अध्याय।
  • विष्णु पुराण: भगवान विष्णु के अवतारों और उनके नामों की महिमा का वर्णन।
  • वैष्णव भजन संग्रह: पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियां।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

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