Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

झुला झुलेली सातो बहिनिया (Jhula Jhuleli Saato Bahiniya) - Aavya Saini Devigeet

आव्या सैनी का प्रसिद्ध देवी गीत 'झुला झुलेली सातो बहिनिया' का आनंद लें। इस भक्तिमय लोकगीत के बोल, भावार्थ और संदर्भ की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

झुला झुलेली सातो बहिनिया - आदिशक्ति की पावन महिमा का परिचय

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी, महासरस्वती और उनकी विभिन्न स्वरूपिणी देवियों को समर्पित यह अत्यंत मधुर और कर्णप्रिय लोकगीत एवं भजन "झुला झुलेली सातो बहिनिया (Jhula Jhuleli Saato Bahiniya) - Aavya Saini Devigeet" सनातन भक्ति परंपरा में विशेष स्थान रखता है। भोजपुरी और मैथिली लोक संस्कृति में सातो बहनों (सात देवियों या माता के नौ स्वरूपों व उनकी बहनों के लोक रूप) को साक्षात प्रकृति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। जब आत्या Saini जैसी उभरती एवं सुमधुर गायिका अपनी अलौकिक आवाज में इस देवी गीत को प्रस्तुत करती हैं, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय, ऊर्जावान और शक्ति की आराधना से सराबोर हो जाता है। चैत्र और शारदीय नवरात्र, छठ पूजा, तथा विभिन्न मांगलिक अवसरों पर सातो बहनों (माता दुर्गा, शीतला माता, बिषहरि माता, फुलमती माता आदि) के झूला झूलने के प्रसंग का यह लोकगीत भक्तों के मन में मातृत्व, वात्सल्य और अगाध श्रद्धा का भाव जागृत करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति—यानी आदि पराशक्ति—को सृष्टि का संचालक माना गया है, और यह भजन उसी शाश्वत शक्ति के आनंदोत्सव का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

झुला झुलेली सातो बहिनिया (Jhula Jhuleli Saato Bahiniya) - Aavya Saini Devigeet

निमिया के डार पर झुला झुलेली सातो बहिनिया,
झुलुवे के झूमेS सगरी संसार हो माई! झुला झुलेली...

पहिला नवरतिया में पहिली भवानी आवेली,
दूसरका नवरतिया में ब्राह्मणी रूप धरेली,
तीसरका दिनवा भवानी चउरिहा पर विराजेली,
चौथा दिनवा महिमा जग में अपार हो माई! झुला झुलेली...

पाँचवाँ दिनवा स्कंदमाता रूप सुहावेली,
छठवाँ दिनवा कात्यायनी दरस दिखावेली,
सातवाँ दिनवा कालरात्रि संकट हर लेली,
आठवाँ दिनवा महागौरी कृपा बरसावेली,
नवम दिनवा सिद्धिदात्री बेड़ा पार हो माई! झुला झुलेली...

मनोज मोहित के मनवा में रमेली भवानी,
विनय बिहारी के सुरवा में गूंजे कहानी,
आव्यासैनी के गाइनवा से जगमग जहान हो माई!
निमिया के डार पर झुला झुलेली सातो बहिनिया...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस अद्भुत लोकगीत के माध्यम से रचनाकार मनोज मोहित जी और गायिका आव्या सैनी जी ने आदिशक्ति के विभिन्न रूपों और लोक में व्याप्त मातृशक्ति की वंदना की है। गीत की पंक्तियों का विस्तार से भावार्थ निम्नलिखित है:

मुखड़ा (Refrain): नीम के पवित्र वृक्ष की डालियों पर आदिशक्ति की सातों बहनें (माता के विभिन्न स्वरूप) झूला झूल रही हैं। उनके इस पावन झूले को देखकर संपूर्ण संसार, प्रकृति और जीव-जंतु आनंदित हो उठे हैं। नीम के पेड़ को शीतलता और आरोग्य की देवी माता शीतला व दुर्गा का वास माना जाता है, जहाँ चैत्र और शारदीय नवरात्र के अवसर पर विशेष उत्सव मनाया जाता है।

प्रथम से नवम चरण (Antara): नवरात्र के नौ दिनों की पावन तिथियों का वर्णन करते हुए गीत बताता है कि कैसे माँ दुर्गा के नौ रूप—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—क्रमशः प्रकट होकर भक्तों के संकटों का निवारण करती हैं और उन्हें भवसागर से पार लगाती हैं। लोक परंपरा में इन्हें 'सातो बहिनिया' (सात बहनें) के रूप में भी पूजा जाता है, जो संपूर्ण ग्राम्य संस्कृति और आंचलिक भक्ति का सुंदर समन्वय है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन लोक संस्कृति की उस गहरी आस्था का प्रतीक है जहाँ देवता केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि प्रकृति (नीम के पेड़), लोकगीतों और पारिवारिक उत्सवों में भी जीवंत रूप से उपस्थित रहते हैं। इसका मुख्य भाव आनंद, समर्पण, उल्लास और मातृ-भक्ति है। गीत हमें यह संदेश देता है कि आदिशक्ति ही इस जगत की जननी हैं और उनकी शरण में जाने से मनुष्य के समस्त दुखों का अंत हो जाता है। नवरात्र और छठ पूजा गीत परंपराओं की तरह यह गीत भी हमारी सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Title) झुला झुलेली सातो बहिनिया (Jhula Jhuleli Saato Bahiniya)
गायिका (Singer) आव्या सैनी (Aavya Saini)
गीतकार (Lyricist) मनोज मोहित (Manoj Mohit)
संगीतकार (Music Composer) विनय बिहारी मधुर (Vinay Bihari Madhur)
वीडियो निर्देशक (Director) रामबाबू यादव (Rambabu Yadav)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri / Devotional Folk)
संगीत लेबल (Company Label) तरंग म्यूजिक (Tarang Music)
श्रेणी (Category) भोजपुरी भक्ति / देवी गीत / देवी भजन

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुंदर देवी गीत को जीवंत बनाने में अनेक कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गायिका आव्या सैनी ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से इस भजन में प्राण फूंके हैं। गीतकार मनोज मोहित के शब्दों ने भोजपुरी आंचल की लोक संवेदनाओं को सटीक रूप से उभारा है, जबकि संगीतकार विनय बिहारी मधुर का संगीत निर्देशन इसे पारंपरिक और आधुनिक धुनों का एक अनूठा संगम बनाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
निमिया (Nimiya) नीम का पेड़ माता दुर्गा का निवास स्थान
सातो बहिनिया (Saato Bahiniya) सात बहनें माता के विभिन्न लोक रूप व शक्तियां
सुहावेली (Suhaveli) सुंदर लगना /शोभा देना माता के स्वरूप का वर्णन
सुरवा (Surwa) स्वर / आवाज गायन शैली

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में देवी गीतों का विशेष स्थान है। नवरात्र के दिनों में जब घर-घर में ज्वारे (खेतड़ी) बोए जाते हैं और माता की चौकी सजती है, तब ऐसे गीत महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गाए जाते हैं। यह गीत सामाजिक समरसता, पारिवारिक आनंद और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। नीम की डाल पर झूला झूलती देवियों की कल्पना भारतीय लोक मानस की उस अनूठी सृजनात्मकता को दर्शाती है जहाँ परमब्रह्म को भी मानवीय और स्नेहपूर्ण संबंधों के दायरे में अनुभव किया जाता है。

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • प्रकृति प्रेम: यह गीत हमें सिखाता है कि सनातन संस्कृति में प्रकृति (पेड़-पौधे) और ईश्वर का अटूट संबंध है।
  • माता के प्रति समर्पण: जीवन की हर कठिनाई में माँ आदिशक्ति पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • सामूहिक उल्लास: पर्व और त्योहारों को मिल-जुलकर मनाने से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

इस देवी गीत को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जा सकता है:

  • चैत्र और शारदीय नवरात्र के नौ दिनों के दौरान।
  • माता की चौकी, जागरण या माता के मंडप के समय।
  • मंगल कार्यों, गृह प्रवेश या पारिवारिक उत्सवों पर।
  • दैनिक पूजा-पाठ के दौरान मन को शांत और ऊर्जावान बनाने के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय देवी गीत की गायिका आव्या सैनी हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इसे सजाया है।

इस गीत के रचयिता मनोज मोहित हैं और संगीत विनय बिहारी मधुर द्वारा दिया गया है।

लोक परंपरा में 'सातो बहिनिया' माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी लोक देवियों (जैसे शीतला माता, बिषहरि आदि) का सामूहिक प्रतीक माना जाता है।

यह गीत अत्यंत मधुर भोजपुरी भाषा में है, जो बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति को दर्शाता है।

इसे आधिकारिक तौर पर तरंग म्यूजिक (Tarang Music) कंपनी के लेबल के तहत रिलीज किया गया है।

नवरात्र के दौरान देवी गीत गाने से घर का वातावरण पवित्र, सकारात्मक और ऊर्जावान बनता है, तथा माता के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ती है।

हाँ, यह गीत प्रमुख ऑडियो और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब, गाना, जिओ सावन आदि पर उपलब्ध है।

यह भजन हमें आदिशक्ति की ममता, करुणा और उनकी असीम कृपा का स्मरण कराता है, जिससे जीवन के संकट दूर होते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मानकों के अनुरूप पारंपरिक लोक साहित्य, भोजपुरी संगीत परंपरा और देवी आराधना के संदर्भों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त सभी विवरण पारंपरिक और प्रामाणिक लोक स्रोतों पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं देवी संकीर्तन परंपरा
  • तरंग म्यूजिक ऑफिशियल रिलीज आर्काइव
  • भारतीय शक्तिपीठ और लोक देवी परंपरा अध्ययन

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!