gurudev Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा गुरूजी Guru Ji Pyare Bhajan

ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा गुरु भजन के बोल, भावार्थ और संदर्भ सहित संपूर्ण पाठ पढ़ें। Bhaktilok पर अनुभव करें अनन्य भक्ति।

"ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा गुरूजी" (Na Koi Hai Na Koi Tha Zindagi Mein Tumhare Siva Tum Dena Saath Mera Guru Ji) एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय गुरु भजन है, जो साधक के हृदय में गुरु के प्रति अनन्य भक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास को जागृत करता है। सनातन धर्म में गुरु को साक्षात परब्रह्म का रूप माना गया है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। यह भजन विशेष रूप से गुरुदेव के चरणों में पूर्ण शरणागति (Surrender) की भावना को दर्शाता है। जब एक भक्त संसार की नश्वरता और संबंधों की क्षणभंगुरता को समझ लेता है, तब उसे केवल गुरु का ही आश्रय सच्चा प्रतीत होता है। इस भजन का गायन सत्संगों, गुरु पूर्णिमा, और दैनिक प्रार्थना के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसकी मधुर धुन और मर्मस्पर्शी शब्द साधक को ध्यान और अंतर्मुखता की ओर ले जाते हैं, जिससे मन को असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ श्री गुरुदेव भजन ॥

(स्थायी)
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी॥

(अंतरा - 1)
जग के झूठे नाते-रिश्ते, झूठी जग की माया है,
इस मतलबी संसार में मैंने, तुमको ही सच्चा पाया है।
जब भी पुकारा मैंने तुमको, तुमने ही गले से लगाया है,
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी॥

(अंतरा - 2)
भवसागर की लहरें भारी, नैया डगमग डोले मेरी,
तुम बिन कौन बचाए गुरूजी, विपदा आन पड़ी है घेरी।
हाथ पकड़ लो पतवार बनो, अब कर दो न देरी,
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी॥

(अंतरा - 3)
चरणों की धूलि पाकर अपनी, जीवन को पावन बनाना है,
तुम्हारी ही भक्ति में खोकर, इस जीवन को सफल बनाना है।
जब तक सांस रहे इस तन में, तेरा ही नाम ध्याना है,
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन जीवात्मा की परमात्मा रूपी गुरु से मिलन की तड़प और पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। इस भजन का सरल अर्थ यह है कि इस नश्वर संसार में जीव का कोई भी स्थायी संबंधी नहीं है। जन्म से लेकर मृत्यु तक के इस सफर में केवल गुरु ही एकमात्र ऐसे साथी हैं जो निस्वार्थ भाव से जीव का कल्याण करते हैं। भक्त अपने गुरुदेव से प्रार्थना करता है कि हे गुरुदेव! इस संसार में मेरे जीवन का आधार केवल आप ही हैं। आपके अतिरिक्त न तो अतीत में मेरा कोई सच्चा हितैषी था और न ही भविष्य में कोई होगा।

भजन का गहरा भावार्थ यह है कि जब मनुष्य माया के प्रभाव में आकर सांसारिक सुखों को ही सर्वोपरि मान लेता है, तब वह बार-बार दुखों का भागी बनता है। परंतु जब उसे गुरु की कृपा से विवेक प्राप्त होता है, तब उसे समझ आता है कि संसार के सभी रिश्ते-नाते स्वार्थ पर टिके हैं। गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो बिना किसी स्वार्थ के शिष्य का हाथ थामते हैं और उसे भवसागर से पार लगाते हैं। भक्त गुरु से याचना करता है कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में, सुख और दुख में, गुरुदेव उसका साथ कभी न छोड़ें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन गुरु-भक्ति की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं और आध्यात्मिक महत्व निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • अनन्य भक्ति का संदेश: यह भजन साधक को सिखाता है कि भक्ति में जब तक "अनन्यता" (एक ही आराध्य पर पूर्ण विश्वास) नहीं आती, तब तक मन स्थिर नहीं होता। गुरु को ही सर्वस्व मानना ही इस भजन का मूल मंत्र है।
  • माया से मुक्ति की प्रेरणा: भजन की पंक्तियां संसार को "झूठी माया" कहकर संबोधित करती हैं, जो साधक के भीतर वैराग्य भाव को जाग्रत करती हैं।
  • आत्मसमर्पण (Surrender): अध्यात्म में प्रगति के लिए समर्पण सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है। यह भजन साधक के अहंकार को गलाकर उसे गुरु के चरणों में समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन की लयबद्धता और सरल शब्द साधक के मस्तिष्क में सकारात्मक विचारों का प्रवाह करते हैं, जिससे मानसिक अशांति दूर होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि गुरु की महिमा का गान करने के लिए किसी विशेष समय की बाध्यता नहीं है, फिर भी शास्त्रों और संतों के अनुसार कुछ विशेष अवसरों पर इसका गायन अत्यधिक फलदायी होता है:

  • ब्रह्ममुहूर्त और प्रातः काल: सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच इस भजन का गायन या श्रवण करने से मन में सात्विक विचारों का उदय होता है और दिनभर कार्य करने की ऊर्जा मिलती है।
  • संध्या वंदन और आरती के पश्चात: शाम की पूजा के बाद जब मन शांत होता है, तब परिवार के साथ बैठकर इस भजन का कीर्तन करने से घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है।
  • गुरु पूर्णिमा और सत्संग: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर, या किसी भी धार्मिक सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाने से सामूहिक चेतना का विकास होता है।
  • गायन की विधि: भजन गाते समय शांत चित्त होकर बैठें। अपनी आंखें बंद करें और अपने आज्ञा चक्र (दोनों भौहों के बीच) पर अपने गुरुदेव के स्वरूप का ध्यान करें। प्रत्येक शब्द को केवल कंठ से नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों से महसूस करते हुए गाएं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन सनातन धर्म की आदि-अनंत गुरु परंपरा को समर्पित है। इसमें प्रयुक्त "गुरूजी" शब्द किसी एक व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि उस परम गुरु तत्व के लिए है जो साक्षात भगवान शिव (आदिगुरु), भगवान दत्तात्रे

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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