Papmochani Ekadashi Vrat Katha मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय माता दी कहे लांगुरिया (Jay Mata Dee Kahe Laanguriya) - Navratri Bhajan Mata Jhanki

जय माता दी कहे लांगुरिया भजन माँ दुर्गा की महिमा को व्यक्त करता है, हर भक्त की समस्याओं का समाधान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

जय माता दी: विश्वास और भक्ति का राजमार्ग

इस भजन में माँ दुर्गा की महिमा का वर्णन है, जो हर भक्त की तकलीफ दूर करती हैं।

जय माता दी कहे लांगुरिया, माताजी की जय। आशा की किरण हो तुम, हर दुख दूर करो। भक्तों के तू सखे, माताजी की जय। शांति की धारा बहाओ, प्रेम की भक्ति जगाओ। मन के विकार हर लो, माताजी की जय। स्वास्थ्य का वरदान दो, जीवन में सुख भर दो। सारे कर्म सफल करो, माताजी की जय। ज्योतिर्मयी हो तुम, अज्ञान को दूर करो। सबको सुख दे दो, माताजी की जय। जो भी भक्त तेरे पास आता, कभी ना वो निराश होता। संकट मोचन हो तुम, माताजी की जय। तुमसे ही सब रहता, माता तू सबकी पय समता। हर मनोकामना को सुन लो, माताजी की जय।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्तों की श्रद्धा और विश्वास को अभिव्यक्त करना है। 'जय माता दी कहे लांगुरिया' वाक्य का प्रयोग करके भक्त माँ दुर्गा को जयकारा देते हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक हैं। माँ दुर्गा को सामने रखते हुए यह स्वीकार किया जाता है कि वह सभी दुखों का निवारण करती हैं। 'आशा की किरण हो तुम' पंक्ति में माँ के प्रति भक्तों की अपार श्रद्धा का प्रदर्शन होता है। वे उनके प्रति भक्ति के साथ-साथ नवजात आशाएं व्यक्त करते हैं, क्योंकि माँ दुर्गा को जीवन की समस्याओं का समाधानकर्ता माना जाता है। अगले श्लोक में, 'प्रेम की भक्ति जगाओ' कहकर भक्त प्रेम और करुणा के लिए माँ से प्रार्थना करते हैं। यह भक्ति का एक गहरा भाव है, जो दर्शाता है कि भक्त केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि आत्मिक शांति भी माँ से चाहते हैं।

इस भजन में भक्तों के मन में माँ के प्रति अटूट विश्वास का चित्रण किया गया है। जब भक्ति का भाव 'स्वास्थ्य का वरदान दो, जीवन में सुख भर दो' में व्यक्त होता है, तो यह दर्शाता है कि भक्त अपनी भौतिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए माँ के समक्ष जाकर सभी चिंताओं को छोड़ देते हैं। माँ दुर्गा को संकट मोचन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो हर भक्त के कठिन समय में सहारा देती हैं। भक्त का यह विश्वास होता है कि जब वे माँ के नाम का जाप करते हैं तो उनके मन की हर एक चिंता दूर हो जाती है। भावार्थ में यह भक्त की निरंतर प्रार्थना और माँ से सहयोग की अनुभूति को दर्शाता है।

इस भजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भक्ति मार्ग पर चलने वाले सभी भक्तों को आश्वस्त करता है कि माँ दुर्गा हमेशा उनके साथ हैं। 'तुमसे ही सब रहता, माता तू सबकी पय समता' पंक्ति में, यह दर्शाया गया है कि माँ संसार के सभी जीवों का पालन करती हैं और आवश्यकतानुसार उनके जीवन में मार्गदर्शन करती हैं। यह भक्ति और सेवा का एक अद्भुत संयोग है, जिसमें भक्तिता का अद्वितीय अनुभव प्राप्त होता है। यह भजन भक्ति के गहन स्तर को प्रकट करता है, और साथ ही भक्त को सिखाता है कि उन्हें अपनी समस्या का समाधान माँ दुर्गा से मांगना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का एक गहरा पुराणिक संदर्भ है जो देवी दुर्गा की महिमा को उजागर करता है। देवी दुर्गा को शक्ति, साहस और जीत की देवी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब दैत्य तत्त्वों ने संसार को आतंकित किया, तब देवी ने अपने दिव्य रूप से उन अत्याचारों का अंत किया। यह भजन भक्तों को याद दिलाता है कि माँ दुर्गा की कृपा से सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। महाभारत और देवी भागवत में उनके विभिन्न रूपों का वर्णन मिलता है, जिससे समझा जा सकता है कि भक्तों को किस प्रकार की समस्याओं का सामना करने का साहस और शक्ति दी जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, भक्ति की भावना में वृद्धि और दैनिक जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और भक्त को मानसिक मजबूती प्रदान करता है। साथ ही, यह भक्ति से आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है, जो व्यक्ति को जीवन की कठिनाइयों से निपटने में सक्षम बनाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह सूर्योदय के समय या शाम को सूर्योदय के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के समय एक दीया जलाना, फूल और फल चढ़ाना उचित है। सही स्थिति में बैठते हुए मन को एकाग्र करना चाहिए और भावपूर्वक माता की स्तुति करनी चाहिए। ध्यान और भक्ति के साथ कंठ से इस भजन का उच्चारण करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का पाठ किस उद्देश्य से किया जाता है?

यह भजन माँ दुर्गा की महिमा का गान करता है और भक्तों को आशा और साहस प्रदान करता है, अनेकों समस्याओं का समाधान माँ से माँगा जाता है।

भजन का अनुष्ठान कब और कैसे करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना चाहिए, साथ ही एक दीया जलाकर माता को फल-फूल चढ़ाना चाहिए।

इस भजन का भावार्थ क्या है?

इस भजन का भावार्थ माँ दुर्गा की शक्ति, करुणा और मातृत्व की भावना को स्वीकार करना है, जो सभी भक्तों के दुख दूर करती हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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