आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती की संयुक्त कृपा का गान करने वाला यह भजन "जग नु हसन वालिये (Jag Nu Hasan Waliye)" पंजाबी देवी भक्ति परंपरा की एक अत्यंत प्रिय एवं हृदयस्पर्शी रचना है। गायक भारत कुमार (Bharat Kumar) के भावपूर्ण स्वर में प्रस्तुत यह भजन माँ जगत जननी के प्रति पूर्ण समर्पण, श्रद्धा एवं आत्म-निवेदन का सजीव उदाहरण है। पंजाबी भाषा में रचित यह देवी गीत मूल रूप से "जग नूँ हँसन वालिये" अर्थात् "हे जगत को हँसाने वाली माँ" के रूप में माँ के ममतामयी, करुणामयी एवं दुष्टनाशिनी स्वरूप का वर्णन करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण, पालनकर्त्री एवं संहारकर्त्री माना गया है — यह भजन उसी आदिशक्ति के चरणों में भक्त की विनम्र प्रार्थना है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी व्यथा रखता है, तो माँ उसके समस्त कष्ट हर लेती हैं और उसके जीवन में शक्ति, करुणा, तेज एवं पवित्रता का संचार करती हैं। यह भजन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, माता के मंदिरों में होने वाले अनुष्ठानों तथा घर-आँगन की नित्य आराधना में विशेष रूप से गाया जाता है। इसकी धुन सरल, भावपूर्ण एवं मर्मस्पर्शी है, जिससे श्रोता का मन स्वतः ही माता के चरणों में लीन हो जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मुखड़ा (Mukhda):
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये,
तेरे चरणों में आया हाँ, मैं तेरे दर ते ना जाना,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
अंतरा १:
शेराँ वाली माता, तू है दुखियाँ दी बेली,
जो भी तेरे दर ते आया, ओहदी झोली पै गई भर,
मैं वी आया हाँ तेरे दर ते, सुन ले मेरी अरदास,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
अंतरा २:
तेरी महिमा अपरंपार, तू है सब दी सरताज,
भक्त जन तेरे गुण गावें, तू है सब दी आस,
मैं पापी तेरे दर ते आया, कर दे मेरी बेड़ी पार,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
अंतरा ३:
जो भी तेरे नाम ध्यावे, ओहदा होवे उजियाला,
दुख दर्द सब दूर हो जावे, मिले खुशियों वाला हाला,
मैं वी तेरे नाम ध्यावां, कर दे मेरी रखवाली,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
अंतरा ४:
शेराँ वाली माता, तू है मेरी माँ,
तेरे बिना मैं किसे पुकारां, तू है मेरी शरण,
चरणों में तेरे आया, कर दे मुझे कबूल,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
समापन (Closing):
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी,
जग नूँ हँसन वालिये, मेरी अम्मी जग नूँ हँसन वालिये।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल स्वर माता के प्रति पूर्ण समर्पण एवं शरणागति का है। "जग नूँ हँसन वालिये" का शाब्दिक अर्थ है — "हे सम्पूर्ण जगत को हँसाने वाली, आनंद से भरने वाली माँ।" भक्त माता को "अम्मी" अर्थात् माँ कहकर पुकारता है, जो इस भजन की सबसे मार्मिक विशेषता है। यह सम्बोधन भक्त और भगवान के बीच के औपचारिक दूरी को समाप्त कर देता है और उसमें वात्सल्य, आत्मीयता एवं ममता का भाव भर देता है। भक्त माता से कहता है कि हे माँ, मैं तेरे चरणों में आया हूँ, अब तेरे दर से लौटकर नहीं जाऊँगा — यह वाक्य भक्त की अटूट श्रद्धा एवं पूर्ण आत्म-समर्पण को प्रकट करता है।
पहले अंतरे में भक्त माता को "शेराँ वाली" अर्थात् सिंह पर सवार दुर्गा के रूप में स्मरण करता है और उन्हें "दुखियों की बेली" अर्थात् दुःखियों की सहायक बताता है। यह वही भाव है जो शास्त्रों में माँ को "दुःखहर्त्री" एवं "सुखदात्री" कहकर व्यक्त किया गया है। भक्त कहता है कि जो भी भक्त तेरे दर पर आया, उसकी झोली भर गई — अर्थात् कोई भी तेरे दर से खाली हाथ नहीं लौटा। यह माता की असीम करुणा एवं भक्तवत्सलता का प्रतीक है।
दूसरे अंतरे में भक्त माता की महिमा को अपरंपार बताता है और स्वयं को पापी कहकर उनकी शरण में आता है। यहाँ भक्त का विनम्र भाव दिखाई देता है — वह अपनी त्रुटियों को स्वीकार करता है और माता से अपनी "बेड़ी पार" करने की प्रार्थना करता है। यह भाव भक्ति परंपरा की सर्वोच्च अवस्था है, जहाँ भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्णतः माँ के चरणों में समर्पित हो जाता है।
तीसरे अंतरे में भक्त माता के नाम-स्मरण की महिमा गाता है — जो भी माता का नाम ध्याता है, उसका जीवन उजियाला हो जाता है, उसके दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं और उसे खुशियों का हाला (मधुर रस) प्राप्त होता है। यह भाव नाम-संकीर्तन की शक्ति एवं देवी-कृपा के प्रभाव को दर्शाता है। चौथे अंतरे में भक्त माता को अपनी माँ के रूप में स्वीकार करता है और कहता है कि तेरे बिना मैं किसे पुकारूँ — यह वात्सल्य भाव भक्ति की सर्वोच्च पराकाष्ठा है। अंत में "जय माता दी" के उद्घोष के साथ भजन सम्पन्न होता है, जो पंजाबी देवी परंपरा की विशिष्ट पहचान है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन मुख्यतः आदिशक्ति माता दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें पंजाबी परंपरा में "शेराँ वाली माता" एवं "जगत जननी" के रूप में पूजा जाता है। भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें माता को "अम्मी" कहकर पुकारा गया है, जो भक्त एवं भगवान के बीच माता-संतान का पवित्र सम्बन्ध स्थापित करता है। भजन की भाषा पंजाबी है, परंतु इसका भाव सार्वभौमिक है — कोई भी भक्त, किसी भी भाषा का हो, माँ की शरण में जाकर अपनी व्यथा रख सकता है।
यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज एवं पवित्रता का संचार करता है। नियमित श्रवण एवं गायन से मन में भय का नाश होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धा एवं भक्ति भाव से इस भजन का गायन करता है, उसके जीवन से दुःख, दरिद्रता एवं संकट दूर होते हैं और माँ की कृपा सदैव उस पर बनी रहती है। भजन का संगीत सरल एवं मधुर है, जिससे यह जन-जन तक पहुँचता है और हर आयु वर्ग के भक्तों को आनंदित करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन एवं श्रवण किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय एवं पर्व इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में, इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। दुर्गा पूजा, जागरण, माता के मंदिरों में होने वाले अनुष्ठानों, तथा घर में होने वाली सामूहिक देवी आराधना में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
दैनिक साधना में प्रातःकाल स्नान के पश्चात् एवं संध्या के समय दीप प्रज्वलित करके इस भजन का गायन किया जा सकता है। गायन से पूर्व माता के चरणों में पुष्प, धूप, दीप एवं प्रसाद अर्पित करें। भजन गाते समय मन को एकाग्र रखें और माता के चरणों में पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण का भाव रखें। यदि संभव हो तो लाल वस्त्र धारण करें, क्योंकि लाल रंग माता को अत्यंत प्रिय है। भजन के साथ ढोलक, मंजीरा एवं घंटी का प्रयोग भक्ति भाव को और अधिक गहरा करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "जग नु हसन वालिये" भजन किस देवी को समर्पित है?
यह भजन आदिशक्ति माता दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें पंजाबी परंपरा में "शेराँ वाली माता" एवं "जगत जननी" के रूप में पूजा जाता है। भजन में माता को महालक्ष्मी एवं महासरस्वती के रूप में भी स्मरण किया जाता है।
प्रश्न 2: इस भजन के गायक कौन हैं?
इस भजन के गायक भारत कुमार (Bharat Kumar) हैं। संगीत निर्देशन सुरिंदर कोहली (Surinder Kohl) का है तथा गीत के रचनाकार भारत कुमार एवं पवन चड्ढा (Pavan Chadha) हैं। यह भजन टी-सीरीज़ (T-Series) लेबल पर प्रकाशित हुआ है।
प्रश्न 3: "जग नु हसन वालिये" का शाब्दिक अर्थ क्या है?
"जग नु हसन वालिये" का शाब्दिक अर्थ है — "हे सम्पूर्ण जगत को हँसाने वाली, आनंद से भरने वाली माँ।" यह सम्बोधन माता के आनंदमयी एवं मंगलमयी स्वरूप को दर्शाता है।
प्रश्न 4: इस भजन का गायन कब करना चाहिए?
इस भजन का गायन नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, माता के मंदिरों में होने वाले अनुष्ठानों तथा घर में होने वाली सामूहिक देवी आराधना में विशेष रूप से किया जाता है। दैनिक साधना में प्रातः एवं संध्या के समय भी इसका गायन शुभ माना जाता है।
प्रश्न 5: क्या इस भजन के गायन से विशेष लाभ मिलते हैं?
श्रद्धा एवं भक्ति भाव से इस भजन का गायन करने से मन में भय का नाश होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है, जीवन से दुःख एवं संकट दूर होते हैं तथा माँ की कृपा सदैव बनी रहती है। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा एवं पवित्रता का संचार करता है।
प्रश्न 6: क्या यह भजन पंजाबी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध है?
मूल भजन पंजाबी भाषा में रचित है, परंतु इसका भाव एवं संदेश सार्वभौमिक है। अनेक भक्त इसका हिंदी अनुवाद एवं भावार्थ पढ़कर भी माता की आराधना करते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें भजन के मूल पाठ, भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व को शास्त्रीय परंपरा एवं भक्ति साहित्य के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। भजन के गायक भारत कुमार, संगीतकार सुरिंदर कोहली तथा लेबल टी-सीरीज़ की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। भजन का भावार्थ देवी भक्ति परंपरा, दुर्गा सप्तशती एवं शाक्त साहित्य के संदर्भों के आधार पर व्याख्यायित किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन का गायन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से करें तथा माता की कृपा का अनुभव करें।
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