Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अम्बे जगदम्बे माता (Ambe Jagdambe Mata) - Devi Aarti MAHENDRA KAPOOR Mata Aarti

भजन "अम्बे जगदम्बे माता (Ambe Jagdambe Mata) - Devi Aarti MAHENDRA KAPOOR Mata Aarti" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। यह भजन देवी माता के प्रति अत्यंत समर्पित आरती है जो जगत की माता के रूप में देवी की महिमा क

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
अम्बे जगदम्बे माता, तुमको निश दिन ध्यावत हैं।
अपने भक्तन की सुनो माता, दुःख दूर करो भगवती।
तुम त्रिभुवन की रानी हो, तुम सबके मन की बानी हो।

देवन के मस्तक पर विराजो, दानवन को भी त्रासो।
अम्बे जगदम्बे माता, तुमको निश दिन ध्यावत हैं।
अपने भक्तन की सुनो माता, दुःख दूर करो भगवती।
तुम शक्ति हो अनन्त अपार, तुम सर्वत्र हो व्यापक सार।

काली काल हरो हे माता, लक्ष्मी लक्षण दो भगवती।
अम्बे जगदम्बे माता, तुमको निश दिन ध्यावत हैं।
अपने भक्तन की सुनो माता, दुःख दूर करो भगवती।
सब देवन की देवी तुम हो, शक्ति के भण्डार तुम हो।

भक्तन के हृदय में वासो, सर्वदा शान्ति पास करो।
अम्बे जगदम्बे माता, तुमको निश दिन ध्यावत हैं।
अपने भक्तन की सुनो माता, दुःख दूर करो भगवती।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ यह भजन देवी माता के प्रति अत्यंत समर्पित आरती है जो जगत की माता के रूप में देवी की महिमा का गान करती है। 'अम्बे जगदम्बे माता' के माध्यम से भक्त दिन-रात देवी का ध्यान करते हैं और उनसे अपने दुःखों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। भजन की पंक्तियों में कहा गया है कि देवी तीनों भुवनों की रानी हैं और सभी देवताओं के मस्तक पर विराजमान हैं। 'दानवन को भी त्रासो' से यह भाव व्यक्त होता है कि माता असुरों को दंड देने वाली हैं और धर्म की रक्षा करती हैं। भजन में देवी को शक्ति का अनंत स्रोत माना गया है जो समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त हैं। भक्त इस भजन के माध्यम से माता से काल को हरने (समय की पीड़ा को दूर करने), लक्ष्मी के गुणों को प्रदान करने और हृदय में सर्वदा शान्ति बनाए रखने की कामना करते हैं।
इस आरती का भावार्थ देवी के प्रति गहरे आध्यात्मिक भाव और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। जब भक्त कहता है 'तुमको निश दिन ध्यावत हैं' तो इसका अर्थ है कि देवी की चेतना हर क्षण भक्त के मन में रहती है। 'अपने भक्तन की सुनो माता' से यह स्पष्ट होता है कि भक्त माता की दया और कृपा की याचना कर रहा है। भजन में 'तुम सबके मन की बानी हो' का मतलब है कि देवी समस्त जीवों की आशाओं, इच्छाओं और प्रार्थनाओं की वाणी हैं। देवी को 'शक्ति के भण्डार' कहकर यह दर्शाया गया है कि वह अपरिमित शक्ति की स्वामिनी हैं। 'भक्तन के हृदय में वासो' से यह संदेश मिलता है कि देवी भक्तों के हृदय में नित्य निवास करती हैं। यह भजन भक्त को यह विश्वास दिलाता है कि यदि वह माता की शरण में जाता है तो सभी दुःख और भय समाप्त हो जाते हैं।
यह भजन शक्ति उपासना और भक्ति मार्ग का एक सुंदर उदाहरण है। शाक्त धर्म की परंपरा में देवी को सर्वोच्च शक्ति माना जाता है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश की भी अधिष्ठात्री हैं। भजन में देवी को 'त्रिभुवन की रानी' कहकर यह सिद्ध किया गया है कि देवी का आधिपत्य सभी लोकों पर है। 'काली काल हरो' से यह संकेत मिलता है कि देवी समय की विनाशलीलता को नियंत्रित करती हैं और भक्तों को इससे मुक्त करती हैं। भजन की दार्शनिक आधार में यह विचार निहित है कि प्रकृति (माता) ही परमात्मा की शक्ति है और उसी के माध्यम से सृष्टि का संचालन होता है। भक्ति मार्ग में यह माना जाता है कि पूर्ण समर्पण, प्रेम और विश्वास के साथ देवी का आह्वान करने से दिव्य चेतना का अनुभव होता है। इस भजन के द्वारा भक्त सर्वोच्च शक्ति के साथ अपना संबंध स्थापित करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ देवी माता की उपासना भारतीय संस्कृति और धर्म का अभिन्न अंग है। वेदों में देवी को विभिन्न रूपों में वर्णित किया गया है - सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा और काली के रूप में। महाभारत की दुर्गा सप्तशती में देवी के सहस्त्र नामों का वर्णन है और उनकी महत्ता को बताया गया है। रामायण में सीता को देवी का अवतार माना जाता है। पुराणों में देवी दुर्गा के महिषासुर वध की कथा मिलती है जो यह दर्शाती है कि देवी बुराई का विनाश करती हैं। यह भजन नवरात्रि के समय विशेष महत्त्व रखता है जब देवी की पूजा की परंपरा है। शक्ति उपासना की परंपरा में यह माना जाता है कि देवी संपूर्ण सृष्टि की मूल शक्ति हैं और उनकी कृपा से ही सभी कल्याण संभव है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मन को शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। देवी के नामों का जप तनाव और चिंता को कम करता है। इस आरती का पाठ करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं। शारीरिक स्तर पर, इसका गायन और सुनना मन की एकाग्रता को बढ़ाता है। आध्यात्मिक लाभ के रूप में यह दिव्य चेतना से जुड़ाव को गहरा करता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का गायन प्रातःकाल और संध्या काल में सर्वोत्तम माना जाता है। पूजा स्थान को शुद्ध करके, दीप जलाकर और फूलों की सजावट करके यह भजन गाना चाहिए। भक्त को पवित्र मनोभाव, शुद्ध हृदय और समर्पण की भावना के साथ बैठना चाहिए। आसन सीधा रखते हुए, हाथ जोड़कर या नमस्कार की मुद्रा में बैठना उचित है। गायन के समय मन को पूरी तरह देवी पर केंद्रित रखें। नियमित सुबह और शाम के समय इस आरती को गाने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) अम्बे जगदम्बे माता आरती किस देवी को समर्पित है?यह आरती शक्ति की देवी, दुर्गा माता को समर्पित है जिन्हें आदिशक्ति, महामाया और जगत की माता के रूप में पूजा जाता है। वे तीनों भुवनों की स्वामिनी हैं और असुरों का विनाश करने वाली हैं। यह आरती नवरात्रि के समय विशेष महत्त्व रखती है।
इस भजन को गाने का सर्वोत्तम समय क्या है?इस भजन को प्रातःकाल सूर्योदय से पहले और संध्या काल में सूर्यास्त के समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में इसका विशेष महत्त्व है। शुद्ध मन और शरीर से देवी को समर्पित करते हुए इसे गाने से अधिकतम लाभ मिलता है।

महेंद्र कपूर द्वारा गाई गई इस आरती की विशेषता क्या है?महेंद्र कपूर की मधुर कंठ से गाई यह आरती भक्तों के हृदय में गहरा प्रभाव डालती है। उनकी भावपूर्ण गायन शैली भजन के आध्यात्मिक संदेश को और भी प्रभावी बनाती है। यह रिकार्डिंग भक्तों को देवी से जुड़ाव का अनुभव कराती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!