Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे गुन जाने निकले हम ( Tere Gun Gaane Nikle Hum) - Bela Sulakhe Maa Teri Mahima Nirali -

बेला सुल्खे द्वारा गाए प्रसिद्ध देवी भजन 'तेरे गुन गाने निकले हम' के बोल और भावार्थ पढ़ें। माँ दुर्गा की भक्ति से ओत-प्रोत इस भजन का आनंद लें।

तेरे गुन जाने निकले हम (Tere Gun Gaane Nikle Hum) - Bela Sulakhe Maa Teri Mahima Nirali

माँ भगवती आदिशक्ति जगदम्बा की अराधना और संकीर्तन से परिपूर्ण पावन भजन "तेरे गुन जाने निकले हम" (Tere Gun Gaane Nikle Hum) एक ऐसा आध्यात्मिक सृजन है, जो साधक के अंतस को दिव्यता से भर देता है। प्रख्यात गायिका बेला सुल्खे (Bela Sulakhe) की सुमधुर और करुणामयी वाणी में गाया गया यह देवी भजन, प्रसिद्ध एल्बम 'माँ तेरी महिमा निराली' (Maa Teri Mahima Nirali) का एक अत्यंत लोकप्रिय रत्न है। संगीत जगत के दिग्गज संगीतकार द्वय लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल (Laxmikant-Pyarelal) के निर्देशन में तैयार इस भजन के बोल जाने-माने गीतकार रविन्द्र रावल (Ravinder Rawal) द्वारा रचे गए हैं। सनातन धर्म में माता दुर्गा के संकीर्तन और उनके गुणों के गान को मोक्षदायिनी और भवसागर से पार लगाने वाला साधन माना गया है। जब कोई भक्त पूर्ण समर्पण और विरह के भाव से माँ के द्वार पर उनके यश का गान करने निकलता है, तो उसके जीवन के समस्त संताप स्वतः ही समाप्त होने लगते हैं। यह भजन न केवल देवी के प्रति प्रेम और अनन्य निष्ठा का प्रतीक है, बल्कि यह जीवात्मा की अपने मूल स्रोत (परम चेतना) से मिलने की व्याकुलता को भी अत्यंत सहजता से प्रकट करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Refrain):
तेरे गुन गाने निकले हम, तेरी महिमा गाने निकले हम।
मैया री मैया, शेरावाली मैया, तेरे दर पे आए हम॥
तेरे गुन गाने निकले हम...

प्रथम अंतरा (First Stanza):
दुनिया के मेले में भटके, जीवन की राहों में अटके।
तूने जो थामा हाथ हमारा, पा लिया हमने जग से किनारा॥
अब तो चरणों में ठिकाना दे दे, मैया मुझको अपना बना ले।
तेरे गुन गाने निकले हम, तेरी महिमा गाने निकले हम॥

द्वितीय अंतरा (Second Stanza):
पाप और संताप मिटा दो, मन का अंधेरा दूर भगा दो।
ज्योति तुम्हारी जो मन में जगे, हर इक संकट हमसे दूर भगे॥
चरणों की धूल का हमको वर दे, झोली हमारी खुशियों से भर दे।
तेरे गुन गाने निकले हम, तेरी महिमा गाने निकले हम॥

अन्तिम अंतरा (Final Stanza):
रविन्द्र कहे सुन शेरावाली, कोई भी भक्त ना लौटे खाली।
तू है ममता की मूरत प्यारी, तेरी कृपा पर दुनिया वारी॥
तेरी दया का अंत नहीं है, तेरे सिवा कोई संत नहीं है।
तेरे गुन गाने निकले हम, तेरी महिमा गाने निकले हम॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्या के बीच के पवित्र रिश्ते की जीवंत कथा कहता है। मुखड़े में भक्त उद्गार व्यक्त करता है कि वह सांसारिक प्रपंचों और मोह-माया के बन्धनों से मुक्त होकर केवल और केवल जगदम्बा के गुणों का गान करने के लिए निकला है। उसका यह निकलना किसी भौतिक यात्रा के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और भगवद् प्राप्ति की आंतरिक यात्रा है।

गीत के अंतरांशों में यह दर्शाया गया है कि मनुष्य जब तक संसार के मायावी मेलों में भटकता रहता है, तब तक उसे दुखों और भ्रमों के सिवा कुछ नहीं मिलता। परन्तु जैसे ही माँ शेरावाली का करुणामयी हाथ उसके सिर पर आ जाता है, उसका संपूर्ण जीवन बदल जाता है। अज्ञानता का अंधकार मिट जाता है और दिव्यता का प्रकाश फैल जाता है। गीतकार रविन्द्र रावल जी ने अंत में बहुत सुंदर भाव रखा है कि माँ के दरबार से कोई भी निराश नहीं लौटता; वह करुणा की ऐसी सागर हैं जो अपने हर बच्चे की झोली खुशियों से भर देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी, मार्मिकता और उच्च कोटि का संगीत संयोजन है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे महान संगीतकारों के निर्देशन में बना यह भजन शास्त्रीय संगीत की सुगम धुनों पर आधारित है, जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देता है। बेला सुल्खे की आवाज में जो एक विरह और करुणा का भाव है, वह सीधे सुनने वाले के हृदय को छू जाता है। यह भजन नवरात्र, मंगलवार, शुक्रवार अथवा किसी भी विशेष देवी जागरण और सत्संग के अवसर पर सुनने के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। इसके नियमित श्रवण से मानसिक शांति मिलती है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों का आनंद और उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा को अनुभव करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल का समय सर्वोत्तम माना जाता है। प्रातःकाल स्नान के पश्चात माता के सम्मुख घी का दीया जलाकर इस भजन का पाठ या श्रवण करने से दिनभर सकारात्मकता बनी रहती है। आप इसे अपने घर के मंदिर में, दुर्गा सप्तशती के पाठ के उपरांत, या नवरात्रि पूजा विधि के दौरान विशेष रूप से गा सकते हैं। सामूहिक सत्संग और माता की चौकी के समय इस भजन को कोरस में गाने से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी महाशक्ति जगदम्बा, शेरावाली माँ, माँ दुर्गा का स्वरूप हैं। सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। आदि शंकराचार्य से लेकर रामकृष्ण परमहंस तक सभी ने माँ भगवती को जगत की जननी और मोक्षदायिनी माना है। इस भजन की रचना गीतकार रविन्द्र रावल ने की है और इसे स्वरबद्ध बेला सुल्खे ने किया है, जो अपनी भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

एल्बम 'माँ तेरी महिमा निराली' 90 के दशक के उन प्रतिष्ठित देवी भजन एल्बमों में से एक है जिन्होंने भारतीय संगीत प्रेमियों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उस स्वर्ण युग में जब कैसेट्स का दौर था, तब इस तरह के भजन हर घर में गूंजते थे। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने फिल्मी संगीत के साथ-साथ devotional music में भी अपनी अद्भुत छाप छोड़ी। रविन्द्र रावल के लिखे शब्द और बेला सुल्खे का गायन इस एल्बम को अमर बना देता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी/ब्रज-प्रभावित लोकभाषा में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "दुनिया के मेले में भटके" और "ममता की मूरत प्यारी"। भाषा की सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है, जिससे यह अनपढ़ से लेकर विद्वान तक हर व्यक्ति की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है और हृदय में उतर जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन की भागदौड़ और सांसारिक असफलताओं से घबराने के बजाय मनुष्य को अपनी ऊर्जा को ईश्वर की शरण में लगाना चाहिए। जब भक्त का अहंकार गल जाता है और वह केवल 'गुणगान' को ही अपना एकमात्र उद्देश्य बना लेता है, तब उसके जीवन के सभी कष्ट स्वतः कट जाते हैं। यह समर्पण का मार्ग ही वास्तविक मोक्ष का द्वार है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
गुन गाने गुणों का बखान करना ईश्वर की महिमा और परोपकार का स्मरण करना
शेरावाली सिंह पर सवार होने वाली माता दुर्गा का एक प्रसिद्ध नाम और स्वरूप
संताप दुख, पीड़ा और कष्ट कर्म फल के कारण मिलने वाले मानसिक और शारीरिक कष्ट
किनारा तट या मुक्ति भवसागर से पार उतरने की स्थिति
ममता की मूरत स्नेह और वात्सल्य का प्रतीक भक्तों के प्रति माता का अहेतुकी प्रेम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तेरे गुन गाने निकले हम..." - इस पंक्ति में साधक के संकल्प को दिखाया गया है कि वह घर-परिवार की सीमाओं और मोह को पीछे छोड़कर केवल भगवती के यशोगान के लिए निकल पड़ा है।
"दुनिया के मेले में भटके, जीवन की राहों में अटके..." - यह मनुष्य के उस भ्रमित जीवन का वर्णन है जहाँ वह भौतिक सुखों के पीछे भागते-भागते थक जाता है और उलझनों में फंस जाता है।
"तूने जो थामा हाथ हमारा, पा लिया हमने जग से किनारा..." - जैसे ही माँ का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है, साधक सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन या स्मरण के समय निम्नलिखित देवी मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

इसके साथ ही आप श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं जो देवी उपासना का एक अन्य प्रमुख स्तंभ है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम तेरे गुन जाने निकले हम (Tere Gun Gaane Nikle Hum)
एल्बम माँ तेरी महिमा निराली (Maa Teri Mahima Nirali)
गायिका बेला सुल्खे (Bela Sulakhe)
संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल (Laxmikant-Pyarelal)
गीतकार रविन्द्र रावल (Ravinder Rawal)
भाषा हिंदी / सुगम संगीत
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, शरणागति और देवी प्रेम
उचित अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, संध्या वंदन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

उत्तर: इस प्रसिद्ध देवी भजन को सुप्रसिद्ध गायिका बेला सुल्खे (Bela Sulakhe) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

उत्तर: इस भजन का संगीत दिग्गज संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया है और इसके गीत जाने-माने गीतकार रविन्द्र रावल द्वारा लिखे गए हैं।

उत्तर: यह भजन 'माँ तेरी महिमा निराली' (Maa Teri Mahima Nirali) नामक लोकप्रिय देवी भजन एल्बम से संबंधित है।

उत्तर: इस भजन को नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार/शुक्रवार की पूजा अथवा अपनी दैनिक पूजा के समय कभी भी सुना जा सकता है।

उत्तर: देवी भजनों के नियमित श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

उत्तर: हाँ, इसकी धुन और शब्द अत्यंत सरल हैं, इसलिए इसे आसानी से याद करके घर पर हारमोनियम या ढोलक के साथ गाया जा सकता है।

उत्तर: सनातन परंपरा में संकीर्तन को कलयुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन माना गया है, जिससे चित्त शुद्ध होता है और ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है।

उत्तर: माता की कृपा प्राप्ति के लिए नियमित पूजा, दुर्गा चालीसा का पाठ, कन्या पूजन, गरीबों की सहायता और सच्चे भाव से माता का स्मरण करना उत्तम माना गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख पारंपरिक भक्ति साहित्य, संगीत अभिलेखों और श्रोता अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त सभी तथ्य एल्बम के मूल विवरणों से मेल खाते हैं। इस सामग्री को पाठकों के लिए अधिक उपयोगी और बोधगम्य बनाने हेतु संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

1. पारंपरिक देवी भजन संग्रह एवं ऑडियो अभिलेखागार
2. 'माँ तेरी महिमा निराली' एल्बम के आधिकारिक कवर नोट्स एवं गीत निर्देशिका
3. सनातन भक्ति साहित्य और देवी उपासना पद्धतियाँ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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