radha bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी ( Radhe Dheere Jhulo Chunari Sarak javegi Lyrics in Hindi)

राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित लोकप्रिय राधा कृष्ण भजन, अर्थ और वीडियो यहाँ देखें।

"राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी" एक अत्यंत मधुर, भावपूर्ण और लोकप्रिय राधा-कृष्ण भजन है, जिसमें श्री राधा रानी के प्रति असीम प्रेम, वात्सल्य और सखी भाव की अद्भुत अभिव्यक्ति मिलती है। यह भजन मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र की लोक संस्कृति, राधा जी की लीलाओं और उनके प्रति भक्तों की गहरी श्रद्धा को दर्शाता है। भजन के बोलों में सखियाँ श्री राधा रानी को झूला झूलते समय प्रेमपूर्वक टोकती हैं कि धीरे-धीरे झूलो, क्योंकि तेज़ झूले से उनकी चुनरी सरक सकती है। यह दृश्य ब्रज की रस-परंपरा, सखा-भाव और राधा-कृष्ण के नित्य विहार का सजीव चित्रण है। यह भजन विशेष रूप से राधा अष्टमी, हरियाली तीज, झूलन उत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी और ब्रज के विभिन्न पर्वों पर गाया जाता है। इसका भाव यह है कि भक्त जब श्री राधा और श्री कृष्ण की लीलाओं का स्मरण करता है, तो उसका मन आनंद, प्रेम और शांति से भर जाता है। यह भजन न केवल एक लोकगीत है, बल्कि भक्ति, शरणागति और ब्रज संस्कृति की आत्मा है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी,
धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा १:

चुनरी तो रंगीले रंग में रंगी है,
चुनरी तो रंगीले रंग में रंगी है,
कहीं चुनरी तेरी रंग ना छुड़ावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा २:

झूला तो झूलो रे श्याम संग राधे,
झूला तो झूलो रे श्याम संग राधे,
प्रेम की डोर कहीं टूट ना जावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा ३:

सखियाँ सब कहें राधे धीरे झूलो,
सखियाँ सब कहें राधे धीरे झूलो,
कहीं मोहन की मुरली ना बिसरावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा ४:

राधा रानी लागे नयनों में प्यारी,
राधा रानी लागे नयनों में प्यारी,
कहीं प्रेम की गंगा ना बहावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा ५:

ब्रज की गलियों में गूंजे यह भजन,
ब्रज की गलियों में गूंजे यह भजन,
कहीं भक्ति की ज्योति ना बुझावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

अंतरा ६:

श्री राधा-कृष्ण की जय-जयकार हो,
श्री राधा-कृष्ण की जय-जयकार हो,
कहीं प्रेम की डोर ना टूट जावेगी,
राधे धीरे झूलो चुनरी सरक जावेगी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि सखियाँ श्री राधा रानी को झूला झूलते समय प्रेमपूर्वक टोकती हैं। वे कहती हैं, "हे राधे! धीरे-धीरे झूलो, क्योंकि तुम्हारी चुनरी सरक सकती है।" यहाँ चुनरी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि लाज, मर्यादा, प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। चुनरी का सरकना अर्थात भक्ति और प्रेम की डोर का ढीला पड़ना। सखियों का यह कहना कि "चुनरी तो रंगीले रंग में रंगी है, कहीं यह रंग न छूट जाए" यह दर्शाता है कि भक्ति का रंग जब एक बार चढ़ जाता है, तो उसे बनाए रखना अत्यंत कठिन है। यह रंग श्री कृष्ण के प्रेम का रंग है, जो भक्त के जीवन को पूर्णतः रंग देता है।

दूसरे अंतरे में सखियाँ कहती हैं कि "श्याम संग झूलो राधे, प्रेम की डोर कहीं टूट न जाए।" यह प्रेम की डोर अर्थात राधा और कृष्ण के बीच का अटूट प्रेम, जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। यह डोर कभी नहीं टूटनी चाहिए। तीसरे अंतरे में सखियाँ कहती हैं कि "कहीं मोहन की मुरली न बिसरावेगी" अर्थात भक्त को कृष्ण के नाम और मुरली की ध्वनि का स्मरण सदा बना रहना चाहिए। मुरली की ध्वनि आत्मा को जगाने वाली, प्रेम में डुबोने वाली और मोह-माया से मुक्त करने वाली है।

चौथे अंतरे में राधा रानी की सुंदरता और उनके प्रति प्रेम का वर्णन है। "राधा रानी लागे नयनों में प्यारी" अर्थात राधा जी की छवि भक्त के नेत्रों में सदा बसी रहती है। यह प्रेम की गंगा है, जो कभी नहीं रुकती। पाँचवें अंतरे में ब्रज की गलियों में इस भजन की गूंज का वर्णन है, जो भक्ति की ज्योति को प्रज्वलित रखती है। छठे अंतरे में श्री राधा-कृष्ण की जय-जयकार और प्रेम की डोर को अटूट बनाए रखने की प्रार्थना है।

इस भजन का गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य का जीवन एक झूले के समान है, जिसमें सुख-दुख, हानि-लाभ आते-जाते रहते हैं। यदि मनुष्य इस झूले को धीरे-धीरे, संयम और विवेक के साथ झूलता है, तो वह अपनी भक्ति और प्रेम की चुनरी को सुरक्षित रख सकता है। जो व्यक्ति अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह के वेग में बहकर तेज़ झूलता है, उसकी भक्ति की चुनरी सरक जाती है और वह परमात्मा से दूर हो जाता है। इसलिए इस भजन का संदेश है कि जीवन में संयम, प्रेम, भक्ति और शरणागति को सदा बनाए रखें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन ब्रज संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • राधा-कृष्ण प्रेम का प्रतीक: यह भजन राधा और कृष्ण के नित्य प्रेम, लीलाओं और उनके दिव्य मिलन का सजीव चित्रण करता है।
  • सखी भाव: इसमें सखियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो राधा जी को प्रेमपूर्वक टोकती हैं और उनकी रक्षा करती हैं।
  • झूलन उत्सव से संबंध: यह भजन विशेष रूप से सावन, हरियाली तीज और राधा अष्टमी के झूलन उत्सव में गाया जाता है।
  • भक्ति रस: इस भजन में वात्सल्य, प्रेम, श्रृंगार और भक्ति रस का अद्भुत संगम है।
  • लोकप्रियता: यह भजन उत्तर भारत, विशेषकर ब्रज क्षेत्र, मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगाँव में अत्यंत लोकप्रिय है।

इस भजन को सुनने और गाने से भक्त के मन में प्रेम, शांति और भक्ति का संचार होता है। यह भजन मन की चंचलता को दूर करता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के समान यह भजन भी राधा जी की कृपा प्राप्त करने का सरल साधन है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से निम्नलिखित समय पर इसका गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है:

  • प्रातःकाल: स्नान के बाद, पूजा स्थल पर दीपक जलाकर, श्री राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष बैठकर इस भजन का गायन करें।
  • संध्या काल: आरती के समय, विशेषकर गोधूलि बेला में इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • राधा अष्टमी: राधा जी के प्रकटोत्सव पर इस भजन का विशेष महत्व है।
  • हरियाली तीज एवं झूलन उत्सव: सावन मास में जब झूला झूलने की परंपरा होती है, तब यह भजन गाया जाता है।
  • कृष्ण जन्माष्टमी: श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर भी यह भजन गाया जाता है।

गायन विधि: इस भजन को गाने से पहले हाथ जोड़कर श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करें। फिर धीरे-धीरे, प्रेम और भक्ति भाव के साथ भजन का गायन करें। साथ में ढोलक, मंजीरा, झांझ और हारमोनियम का प्रयोग करें। भजन के बीच-बीच में "राधे-राधे" और "जय श्री राधे" का उच्चारण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन ब्रज क्षेत्र की पारंपरिक लोकगीत परंपरा से आता है। इसके मूल रचनाकार का नाम ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं है, लेकिन यह भजन पीढ़ी-दर-पीढ़ी ब्रज के भक्तों और लोकगायकों द्वारा गाया जाता रहा है। यह भजन राधा-कृष्ण की लीलाओं और ब्रज संस्कृति का अभिन्न अंग है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जीवन में संयम, प्रेम और भक्ति को बनाए रखना चाहिए। जैसे सखियाँ राधा जी को धीरे झूलने के लिए कहती हैं, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन के झूले को विवेक और धैर्य के साथ झूलना चाहिए, ताकि उसकी भक्ति और प्रेम की चुनरी कभी न सरके।

यह भजन विशेष रूप से राधा अष्टमी, हरियाली तीज, झूलन उत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी, सावन मास और ब्रज के विभिन्न पर्वों पर गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, दैनिक पूजा और संध्या आरती के समय भी इसका गायन किया जा सकता है।

हाँ, इस भजन को श्रद्धा और भक्ति भाव से गाने और सुनने से मन को शांति मिलती है, भक्ति में वृद्धि होती है, और श्री राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यह भजन मन की चंचलता को दूर करता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है।

इस भजन को गाने के लिए किसी कठोर विधि का पालन आवश्यक नहीं है। केवल शुद्ध मन, श्रद्धा और भक्ति भाव आवश्यक है। स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र पहनकर, पूजा स्थल पर बैठकर, श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करते हुए इस भजन का गायन करें। साथ में ढोलक, मंजीरा आदि वाद्य यंत्रों का प्रयोग कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे ब्रज संस्कृति, राधा-कृष्ण भक्ति परंपरा और लोकगीतों के संदर्भ में तैयार किया गया है। इस भजन के बोल पारंपरिक ब्रज लोकगीत परंपरा से लिए गए हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों द्वारा गाए जाते रहे हैं। भजन का भावार्थ और महत्व सनातन धर्म, श्रीमद्भागवत महापुराण, ब्रज के लोक साहित्य और भक्ति आंदोलन की परंपरा पर आधारित है।

इस भजन का गायन विशेष रूप से राधा अष्टमी, हरियाली तीज, झूलन उत्सव और कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर किया जाता है। यह भजन भक्तों के मन में प्रेम, शांति और भक्ति का संचार करता है।

संदर्भ: श्रीमद्भागवत महापुराण, ब्रज लोकगीत परंपरा, राधा-कृष्ण भक्ति साहित्य, और उत्तर भारत की संकीर्तन परंपरा।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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