Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मुझे ऐसा दे दे घर माँ (Mujhe Aisa De De Ghar Maa ) - Devi Bhajan BHARAT KUMAR

सुनिए भावपूर्ण देवी भजन मुझे ऐसा दे दे घर माँ। भरत कुमार की मधुर वाणी में आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित यह भजन दिलाएगा मन की शांति।

Devi Bhajan BHARAT KUMAR - Bhaktilok

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित अत्यंत भावपूर्ण देवी भजन "मुझे ऐसा दे दे घर माँ (Mujhe Aisa De De Ghar Maa )" जगत जननी की असीम कृपा, करुणा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में आदि शक्ति को इस संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल कारण माना गया है। गायक एवं गीतकार भरत कुमार (Bharat Kumar) की मधुर वाणी और सतीष अर्पित (Satish Arpit) के संगीत निर्देशन में सजा यह पंजाबी देवी भजन साधक के भीतर अनन्य भक्ति, समर्पण और आंतरिक शांति का संचार करता है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के उस आंतरिक भाव को व्यक्त करती है जहाँ वह सांसारिक प्रपंचों से दूर माँ के चरणों में अपना आशियाना पाना चाहता है। नवरात्रि, जागरण, चौकी अथवा किसी भी पावन अनुष्ठान के अवसर पर इस भजन का श्रवण और गायन मन को अलौकिक ऊर्जा से भर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और अनन्य भक्ति भाव के साथ माता रानी के इस पावन भजन का स्मरण करें:

मंगलाचरण / मुखड़ा:

मुझे ऐसा दे दे घर माँ, जहाँ तेरा वास हो,
चरणों में तेरे मेरी, हर साँस का प्रवास हो।
सुख-दुःख की इस दुनिया से, मुझको अब क्या लेना,
मेरी झोली में माँ बस, तेरा ही आशीर्वाद हो!
मुझे ऐसा दे दे घर माँ, जहाँ तेरा वास हो...

प्रथम अंतरा:

पाप और संतापों से, जब मन घबरा जाए,
तेरी ज्योति का उजाला, अंधियारा मिटा जाए।
दर-दर की ठोकर से, ऐ मेरी शेरावाली,
तेरी चौखट पे आकर ही, हर दिल को करार आए।
दुष्टों का संहार करने वाली, हे महारानी,
तेरी महिमा गाए सारा, ये जग संसार हो!
मुझे ऐसा दे दे घर माँ, जहाँ तेरा वास हो...

द्वितीय अंतरा:

बच्चे हैं हम नादान, गलती हो जाती है,
माँ की ममता फिर भी, बच्चों को अपनाती है।
अपना लोगे जो मुझको, तो मैं तर जाऊँगा,
तेरी कृपा बिना जीवन, व्यर्थ बह जाता है।
भरत कुमार गाए महिमा, हे जगजननी,
तेरे पावन चरणों में, मेरा पूरा विश्वास हो!
मुझे ऐसा दे दे घर माँ, जहाँ तेरा वास हो...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव एक भक्त की अपनी आराध्य देवी माँ के प्रति अगाध निष्ठा और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। भक्त माता से प्रार्थना करता है कि उसे कोई भौतिक सुख-सुविधा या वैभव नहीं चाहिए, बल्कि वह ऐसा पावन घर या स्थान चाहता है जहाँ साक्षात माँ भगवती का वास हो, और उसकी प्रत्येक श्वास केवल माँ के सिमरन में अर्पित हो।

प्रथम अंतरे में साधक जीवन के दुखों, संघर्षों और मानसिक संतापों का उल्लेख करते हुए कहता है कि जब सांसारिक परेशानियां उसे घेर लेती हैं, तब केवल माता की ज्योति और उनका दरबार ही उसे शांति प्रदान करता है। शेरावाली माँ की चौखट ही वह पवित्र स्थान है जहाँ आकर हर जीव के कष्ट दूर हो जाते हैं।

अंतिम चरणों में गायक भरत कुमार ने अपनी त्रुटियों को स्वीकार करते हुए माँ की क्षमाशील ममता का गुणगान किया है। बच्चे चाहे जितने भी नादान हों, माता का हृदय हमेशा क्षमा करने वाला और अपने आंचल में शरण देने वाला होता है। यह भजन साधक और आराध्य के बीच के उस अटूट रिश्ते को मजबूत करता है, जो भवसागर से पार लगाने का एकमात्र साधन है। इसी प्रकार के अन्य पावन गीतों के लिए आप श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति रस प्रधान: यह भजन साधक के मन में वैराग्य, प्रेम और अनन्य समर्पण का भाव जागृत करता है।
  • आदिशक्ति वंदना: इसमें जगत जननी माँ दुर्गा के ममतामयी और संकटमोचनी स्वरूप का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है।
  • मानसिक शांति का साधन: इस भजन के नियमित श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सत्संग और जागरण की शान: माता के जागरण, चौकी और नवरात्रों के विशेष अवसरों पर इसे बहुत चाव से गाया और सुना जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों को गाने और सुनने का कोई निश्चित समय नहीं होता, क्योंकि सच्ची भक्ति किसी भी बंधन से परे होती है। तथापि, ब्रह्म मुहूर्त में (प्रातःकाल 4 से 6 बजे के बीच) या संध्या बेला में स्नान-आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करके माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर इस भजन का गान करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है।

नवरात्रों के नौ दिनों में विशेष रूप से माता की चौकी सजाते समय या संध्या आरती के पश्चात इस प्रकार के भजन गाने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बनता है। माता रानी के समक्ष लाल फूल, धूप, और अक्षत अर्पित करते हुए मन ही मन इस भजन की पंक्तियों का स्मरण करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी आदिशक्ति दुर्गा (महामाया, शेरावाली, जगदंबा) हैं। सनातन धर्म में आदिशक्ति को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी माना गया है जो अपने भक्तों के सभी दुखों को हरकर उन्हें सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करती हैं। इस भजन के रचनाकार और गायक भरत कुमार ने अपनी सुमधुर आवाज के माध्यम से इसी देवी शक्ति के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा प्रकट की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"मुझे ऐसा दे दे घर माँ" भजन आधुनिक पंजाबी और हिंदी देवी संगीत परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे T-Series जैसे प्रतिष्ठित संगीत लेबल के अंतर्गत रिलीज किया गया था। सतीष अर्पित का संगीत निर्देशन और भरत कुमार के भावपूर्ण बोल इस भजन को एक अलग ही आध्यात्मिक ऊंचाई पर ले जाते हैं। यह गीत उन सभी भक्तों के दिलों के बहुत करीब है जो माता रानी के चरणों में अपना जीवन समर्पित करना चाहते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम जनमानस के हृदय को छूने वाली हिंदी-पंजाबी मिश्रित लोक शैली है। इसमें अलंकारों का जटिल प्रयोग करने के बजाय भावनाओं की सरलता पर जोर दिया गया है। 'चौखट', 'चरणों', 'महिमा' और 'आशीर्वाद' जैसे शब्दों का चयन इसके आध्यात्मिक सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है, जिससे हर उम्र का श्रोता आसानी से इसके साथ जुड़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: यह भजन सिखाता है कि मनुष्य को अपने भौतिक अहंकार को त्यागकर ईश्वर के चरणों में शरण लेनी चाहिए।
  • माता की ममता पर अटूट विश्वास: कठिन समय में भी माँ की कृपा पर भरोसा रखना ही सच्चे भक्त की पहचान है।
  • सांसारिक मोह से मुक्ति: क्षणिक सुखों के पीछे भागने के बजाय आत्मिक शांति और भगवद्भक्ति को जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाना चाहिए।
  • क्षमा और करुणा: जिस प्रकार माता अपने बालकों की गलतियों को क्षमा करती है, उसी प्रकार हमें भी जीवन में क्षमाभाव अपनाना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ संदर्भ / भाव
आदिशक्ति ब्रह्मांड की मूल शक्ति माता दुर्गा का स्वरूप
प्रवास निवास स्थान / बसना माता के चरणों में शरण पाना
संताप मानसिक कष्ट या पीड़ा जीवन के दुख और संघर्ष
शेरावाली शेर पर सवार रहने वाली माता दुर्गा का प्रसिद्ध संबोधन
चौखट द्वार की देहरी माता का दरबार या शरण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मुझे ऐसा दे दे घर माँ, जहाँ तेरा वास हो..."
भक्त अपनी माता से प्रार्थना करता है कि उसका जीवन या उसका आश्रय ऐसा हो जहाँ निरंतर माता की उपस्थिति का अहसास रहे।

"चरणों में तेरे मेरी, हर साँस का प्रवास हो..."
भक्त की इच्छा है कि उसकी प्रत्येक श्वास केवल माता के सिमरन और उनकी सेवा में ही व्यतीत हो।

"पाप और संतापों से, जब मन घबरा जाए..."
जब यह संसारिक जीवन दुखों और पापों के भार से मन को विचलित कर दे, तब एकमात्र माता का दरबार ही शांति देता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

माता रानी की आराधना के समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

"ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

अर्थात: हे नारायणि! आप सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, कल्याणमयी हैं, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, शरण में आए हुए की रक्षा करने वाली तथा तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको हमारा नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मुझे ऐसा दे दे घर माँ (Mujhe Aisa De De Ghar Maa)
आराध्य देवी आदिशक्ति माता दुर्गा / शेरावाली
गायक एवं गीतकार भरत कुमार (Bharat Kumar)
संगीत निर्देशक सतीष अर्पित (Satish Arpit)
संगीत लेबिल टी-सीरीज़ (T-Series)
भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण और शरणगति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. "मुझे ऐसा दे दे घर माँ" भजन के गायक कौन हैं?

इस भजन के गायक और गीतकार भरत कुमार (Bharat Kumar) हैं।

Q2. इस भजन का संगीत किसने तैयार किया है?

इस भजन का संगीत निर्देशन सतीष अर्पित (Satish Arpit) द्वारा किया गया है।

Q3. यह भजन किस म्यूजिक लेबल के तहत रिलीज हुआ है?

यह लोकप्रिय भजन T-Series संगीत लेबल के अंतर्गत रिलीज किया गया है।

Q4. इस भजन का मुख्य भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव माता के चरणों में पूर्ण समर्पण, अनन्य भक्ति और सांसारिक दुखों से मुक्ति पाना है।

Q5. इस देवी भजन को कब सुनना चाहिए?

इसे नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी अथवा प्रतिदिन प्रातः और संध्या वंदना के समय सुना जा सकता है।

Q6. क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इसे एकांत में बैठकर अथवा परिवार के साथ माता की चौकी के दौरान पूरी श्रद्धा से गाया जा सकता है।

Q7. माता दुर्गा की आराधना से क्या प्राप्त होता है?

माता की आराधना से भक्तों को शक्ति, धैर्य, मानसिक शांति और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

Q8. इस भजन से हमें क्या जीवन सीख मिलती है?

यह भजन सिखाता है कि भगवान या माता की शरण में ही वास्तविक सुख और शांति मिलती है, इसलिए अहंकार का त्याग करना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के तहत सनातन परंपरा, देवी उपासना और संगीत संस्कृति के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और भक्तिपूर्ण सामग्री प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक देवी भजन संग्रह एवं लोक संगीत परंपरा
  • T-Series आधिकारिक ऑडियो एवं वीडियो प्रकाशन अभिलेख
  • देवी भागवत पुराण एवं सनातन पंचांग संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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