Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

माँ का शुकराना (Maa Ka Shukrana) - KUMAR VISHU SWARANSHI Devi Bhajan

कुमार विशु और स्वरंशी द्वारा गाए गए भावपूर्ण 'माँ का शुकराना' देवी भजन के बोल और भावार्थ पढ़ें। माँ दुर्गा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला विशेष भजन।

"माँ का शुकराना" (Maa Ka Shukrana) एक अत्यंत भावपूर्ण और श्रद्धा से ओतप्रोत देवी भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायक कुमार विशु और स्वरंशी ने अपनी मधुर आवाजों में गाया है। यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा के प्रति कृतज्ञता और पूर्ण समर्पण के भाव (शरणागति भाव) को व्यक्त करता है। सनातन धर्म में माँ को करुणा, ममता और शक्ति का साक्षात स्वरूप माना गया है। जब कोई भक्त अपने जीवन में माँ की असीम कृपा का अनुभव करता है, तो उसके हृदय से केवल धन्यवाद और शुकराने के स्वर प्रस्फुटित होते हैं। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी और दैनिक पूजा-अर्चना के अवसरों पर गाया जाता है। इसके बोल अशोक शर्मा 'दास' द्वारा रचित हैं, जो सीधे हृदय को छूते हैं और भक्त को माँ के चरणों में लीन कर देते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी हर छोटी-बड़ी खुशी के लिए माँ जगदम्बा का आभार व्यक्त करता है और जीवन के हर मोड़ पर उनकी उपस्थिति को महसूस करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(मुखड़ा)

माँ का शुकराना, हर पल शुकराना।
मैया ने दिया है हमको, खुशियों का खजाना॥
माँ का शुकराना, हर पल शुकराना...

(अंतरा 1)

जब भी मुसीबत आई, माँ दौड़ी-दौड़ी आई।
अपने बच्चों पर मैया ने, ममता की छांव बिछाई॥
हाथ पकड़ कर माँ ने, हमें चलना सिखाया।
जब भी हम गिरे, माँ ने गले से लगाया॥
माँ का शुकराना, हर पल शुकराना...

(अंतरा 2)

खाली झोली को मेरी, खुशियों से भर दिया।
अंधेरे जीवन में मेरे, उजाला कर दिया॥
तेरी दया का मैया, कोई अंत नहीं है।
तेरे चरणों में ही मेरा, सारा संसार बसा है॥
माँ का शुकराना, हर पल शुकराना...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"माँ का शुकराना" भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करना है। वैदिक दर्शन में कृतज्ञता को सबसे बड़ा गुण माना गया है। जब हम परमात्मा या देवी माँ के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, तो हमारा अहंकार समाप्त हो जाता है और हम उनके असीम प्रेम के पात्र बन जाते हैं।

इस भजन में भक्त कहता है कि माँ ने हमें जीवन में इतनी खुशियाँ दी हैं कि हमारा जीवन एक खजाने के समान समृद्ध हो गया है। जब भी भक्त के जीवन में कोई संकट या विपत्ति आती है, तो माँ दुर्गा अपनी ममतामयी शक्ति के साथ उसकी रक्षा के लिए दौड़ी चली आती हैं। माँ केवल संकटों से रक्षा ही नहीं करतीं, बल्कि एक माँ की तरह हमारा हाथ पकड़कर हमें जीवन की सही राह पर चलना सिखाती हैं। जब भी हम माया-मोह के कारण मार्ग से विचलित होते हैं या गिरते हैं, तो माँ हमें अपनी गोद में उठा लेती हैं और गले से लगा लेती हैं।

भजन का दूसरा भाग भक्त के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को दर्शाता है। भक्त स्वीकार करता है कि उसकी झोली खाली थी, यानी वह आध्यात्मिक और मानसिक रूप से अपूर्ण था, लेकिन माँ की कृपा ने उसे पूर्ण कर दिया। उसके अज्ञान रूपी अंधकारमय जीवन में माँ ने ज्ञान और भक्ति का उजाला फैला दिया है। माँ की दया अनंत है, जिसका कोई अंत नहीं है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • कृतज्ञता का भाव (Attitude of Gratitude): यह भजन हमें सिखाता है कि हमें केवल अपनी माँगें लेकर ईश्वर के पास नहीं जाना चाहिए, बल्कि जो कुछ हमें मिला है, उसके लिए धन्यवाद भी देना चाहिए।
  • शरणागति (Surrender): भजन में पूर्ण समर्पण का भाव है। भक्त अपने अस्तित्व को माँ के चरणों में सौंप देता है।
  • वात्सल्य रस की प्रधानता: इस भजन में देवी माँ के ममतामयी और करुणामयी स्वरूप का वर्णन है, जो अपने बच्चों की हर पुकार सुनती हैं।
  • सरल और सुमधुर संगीत: कुमार विशु और स्वरंशी की जुगलबंदी ने इस भजन को अत्यंत कर्णप्रिय और हृदयस्पर्शी बना दिया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इस भजन को गाने और सुनने के लिए निम्नलिखित समय और अवसर अत्यंत शुभ माने जाते हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का श्रवण और कीर्तन विशेष फलदायी होता है।
  • माता की चौकी एवं जागरण: देवी जागरण या माता की चौकी के दौरान इस भजन को गाकर भक्त सामूहिक रूप से माँ का आभार व्यक्त करते हैं।
  • दैनिक संध्या आरती: शाम की पूजा के समय इस भजन को सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति मिलती है।
  • मन की व्याकुलता के समय: जब भी मन अशांत हो या जीवन में निराशा का भाव आए, इस भजन का श्रवण माँ के प्रति विश्वास को पुनः जाग्रत करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन सर्वशक्तिमान आदिशक्ति माँ दुर्गा (शेरावाली माँ) को समर्पित है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा को सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करने वाली आदि शक्ति माना गया है। वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत सौम्य और करुणामयी हैं, जबकि दुष्टों के लिए संहारक हैं। इस भजन के रचयिता अशोक शर्मा 'दास' हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से माँ के प्रति एक सच्चे भक्त के हृदय की पुकार को शब्दों में पिरोया है। गायक कुमार विशु अपनी अनूठी गायन शैली और भक्ति गीतों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

आधुनिक युग में जहाँ अधिकांश भजन केवल मन्नतें मांगने या स्तुति करने तक सीमित होते हैं, वहीं "माँ का शुकराना" भजन एक अनूठी पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह भजन भक्त को यह याद दिलाता है कि जो कुछ भी हमारे पास है, वह माँ की ही देन है। इसकी रचना बहुत ही सरल और आम बोलचाल की भाषा में की गई है ताकि हर वर्ग का भक्त इससे आसानी से जुड़ सके। इस भजन का संगीत पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक वाद्य यंत्रों का एक सुंदर मिश्रण है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी है, जिसमें पंजाबी और खड़ी बोली का सुंदर प्रभाव देखने को मिलता है। "शुकराना" शब्द मूल रूप से आभार या धन्यवाद को दर्शाता है, जो इस भजन को एक विशेष मिठास प्रदान करता है। काव्य शैली की बात करें तो इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है। "खुशियों का खजाना", "ममता की छांव" और "खाली झोली" जैसे बिंबों (Metaphors) का प्रयोग करके कवि ने भक्ति के अमूर्त भावों को बहुत ही सजीव रूप में प्रस्तुत किया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक सुंदर दर्शन है। इससे हमें निम्नलिखित सीख मिलती हैं:

  • संतोष का महत्व: जो कुछ भी हमारे पास है, उसमें संतुष्ट रहना और ईश्वर का धन्यवाद करना ही सुखी जीवन की कुंजी है।
  • ईश्वरीय सुरक्षा पर विश्वास: जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी मुसीबत क्यों न आए, हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि हमारी रक्षा करने वाली माँ हमेशा हमारे साथ हैं।
  • अहंकार से मुक्ति: जब हम यह स्वीकार करते हैं कि सब कुछ माँ की कृपा से ही संभव हुआ है, तो हमारे भीतर का 'मैं' या अहंकार समाप्त हो जाता है।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण: जीवन के अंधकार (कठिनाइयों) से घबराने के बजाय माँ की दया पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वे जल्द ही हमारे जीवन में उजाला करेंगी।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शुकराना धन्यवाद / आभार ईश्वर की असीम कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।
खजाना भंडार / संचित धन यहाँ इसका अर्थ भौतिक धन नहीं, बल्कि आत्मिक सुख और संतोष से है।
ममता की छांव माँ का स्नेहपूर्ण संरक्षण दैवीय सुरक्षा जो भक्त को सांसारिक कष्टों से बचाती है।
खाली झोली अभावग्रस्त जीवन ज्ञान और भक्ति की कमी, जिसे माँ अपनी कृपा से भरती हैं।
उजाला प्रकाश / ज्ञान अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उदय करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"माँ का शुकराना, हर पल शुकराना। मैया ने दिया है हमको, खुशियों का खजाना॥"
भक्त कहता है कि हमें हर क्षण माँ का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने हमारे जीवन को खुशियों के अनमोल खजाने से भर दिया है। यह जीवन और इसमें मिलने वाली हर खुशी माँ का ही प्रसाद है।

"जब भी मुसीबत आई, माँ दौड़ी-दौड़ी आई। अपने बच्चों पर मैया ने, ममता की छांव बिछाई॥"
जब भी भक्त के जीवन में कोई संकट आता है, तो माँ दुर्गा अविलंब उसकी सहायता के लिए प्रकट होती हैं। वे अपने भक्तों को अपने वात्सल्य और ममता की शीतल छाया में सुरक्षित कर लेती हैं, जिससे संकट का ताप उन्हें छू भी नहीं पाता।

"हाथ पकड़ कर माँ ने, हमें चलना सिखाया। जब भी हम गिरे, माँ ने गले से लगाया॥"
जैसे एक छोटी माँ अपने बच्चे की उंगली पकड़कर उसे चलना सिखाती है, वैसे ही जगदम्बा हमें धर्म के मार्ग पर चलना सिखाती हैं। यदि हम अज्ञानवश कभी गिरते हैं या गलतियाँ करते हैं, तो वे हमें दुत्कारती नहीं, बल्कि गले से लगाकर हमारा हौसला बढ़ाती हैं।

"खाली झोली को मेरी, खुशियों से भर दिया। अंधेरे जीवन में मेरे, उजाला कर दिया॥"
भक्त अपनी दीनता को स्वीकार करते हुए कहता है कि वह खाली हाथ था, लेकिन माँ ने उसकी झोली को खुशियों और भक्ति से सराबोर कर दिया। उसके अज्ञान और दुखों से भरे अंधकारमय जीवन में माँ ने अपनी कृपा का दिव्य प्रकाश फैला दिया है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भावों को और अधिक गहराई से समझने के लिए देवी माँ के इन सिद्ध मंत्रों का स्मरण करना चाहिए:

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥

अर्थ: जो शरण में आए हुए लोगों की रक्षा करने वाली हैं, जो सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, उन कल्याणमयी गौरी नारायणी को नमस्कार है।


या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँ का शुकराना (Maa Ka Shukrana)
मुख्य देवी/देवता माँ दुर्गा / आदिशक्ति
गायक कुमार विशु एवं स्वरंशी (Kumar Vishu & Swaranshi)
गीतकार अशोक शर्मा 'दास'
भाषा हिंदी (पंजाबी पुट के साथ)
मुख्य भाव कृतज्ञता, शरणागति, वात्सल्य
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'माँ का शुकराना' भजन के मुख्य गायक कौन हैं?

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक कुमार विशु और स्वरंशी ने गाया है। दोनों की जुगलबंदी ने इस भजन को बहुत ही मधुर बनाया है।

इस भजन के गीतकार कौन हैं?

इस सुंदर और भावपूर्ण भजन के बोल अशोक शर्मा 'दास' द्वारा लिखे गए हैं।

'शुकराना' शब्द का क्या अर्थ है?

'शुकराना' का अर्थ है धन्यवाद, आभार या कृतज्ञता व्यक्त करना। इस भजन में भक्त माँ दुर्गा के प्रति आभार प्रकट कर रहा है।

यह भजन किस देवी को

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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