रवि राज नया कृष्ण भजन
एल्बम: घर जाने को दिल नहीं करता | गायक: रवि राज | गीतकार: कमल सिंह पुठी | संगीत: लवली शर्मा | लेबल: राधा भक्ति
सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में संकीर्तन, पद गायन और भगवान श्री बांके बिहारी के चरणों में अनन्य अनुराग का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। 'घर जाने को दिल नहीं करता' (Ghar Jaane Ko Dil Nhi Karta) - रवि राज द्वारा गाया गया यह नवीनतम और अत्यंत हृदयस्पर्शी कृष्ण भजन जीवात्मा और परमात्मा के उस अगाध मिलन को दर्शाता है, जहां भक्त बांके बिहारी की शरण में आने के पश्चात इस भौतिक संसार या अपने गृहस्थ जीवन के बंधनों की ओर लौटना ही नहीं चाहता। जब साधक का मन बांके बिहारी के चरणों की पावन रज में रम जाता है, वृन्दावन की कुंज-गलियों के दर्शन कर लेता है, तब उसे सांसारिक मोह-माया फीकी लगने लगती है। राधा कृष्ण भजन के रूप में यह रचना भक्तों के अंतःकरण में भगवत प्रेम की अलख जगाती है और उन्हें भगवान की शरण में पूर्ण शरणागति का अनुभव कराती है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, रचना की पृष्ठभूमि और कृष्ण भक्ति के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थाई (मखड़ा):
तेरी शरण में आने के बाद,
घर जाने को दिल नहीं करता!
ओ बांके बिहारी मेरे साँवरिया,
घर जाने को दिल नहीं करता...
अंतरा 1:
दुनिया के मेले फीके लगे जब,
तेरे चरणों की छांव मिले।
तेरे दर पे जो सुख मिलता है,
कहाँ किसी को पाँव मिले?
तेरी मुरली की धुन सुनकर,
कहीं जाने को दिल नहीं करता...
घर जाने को दिल नहीं करता...
अंतरा 2:
वृन्दावन की कुंज गलियन में,
राधा-कृष्ण का रास रचे।
मेरे मन मंदिर में सांवरिया,
बस तेरी ही मूरत बसे।
इन नैनों से रूप निहारकर,
पलकें झुकाने को दिल नहीं करता...
घर जाने को दिल नहीं करता...
अंतरा 3:
माया के बंधन झूठे सारे,
तू ही मेरा सच्चा मीत है।
कमल सिंह गाए तेरी महिमा,
तुझसे ही मेरी हर जीत है।
तेरे चरणों में बित जाए जीवन,
अब और कुछ चाहने को दिल नहीं करता...
घर जाने को दिल नहीं करता...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
रवि राज द्वारा स्वरबद्ध और कमल सिंह पुठी द्वारा रचित यह भजन भक्ति रस की उस पराकाष्ठा को छूता है जहां भक्त भगवान के दर्शन मात्र से अपनी सुध-बुध खो बैठता है। भजन के मुखड़े में भक्त भगवान श्री बांके बिहारी से संवाद करते हुए कहता है कि हे प्रभु! जब से मैं आपकी शरण में आया हूँ, तब से मेरा मन इस भौतिक संसार रूपी घर में वापस जाने को बिल्कुल नहीं करता। सांसारिक जिम्मेदारियां और मोह-माया अब उसे आकृष्ट नहीं कर पातीं।
पहले अंतरे में, गीतकार ने यह दर्शाया है कि इस संसार के रंग-मंच और मेले तभी तक आकर्षक लगते हैं जब तक जीव को परमात्मा के चरणों की शीतल छाया प्राप्त नहीं होती। एक बार जब प्रभु के दरबार का अलौकिक आनंद मिल जाता है, तो दुनिया की कोई भी सुख-सुविधा उसके सामने टिक नहीं पाती। भगवान की मुरली की वह मधुर तान भक्त के मन को ऐसा मोह लेती है कि वह उस दिव्य वातावरण को छोड़कर कहीं और जाने का विचार भी नहीं कर सकता।
दूसरे और तीसरे अंतरे में वृन्दावन की पवित्र भूमि, श्री राधा रानी और कृष्ण के नित्य विहार का स्मरण किया गया है। भक्त कहता है कि उसकी आंखें निरंतर बांके बिहारी के सांवले रूप और राधा रानी के दर्शन में इतनी तल्लीन हो चुकी हैं कि अब पलकें झपकाना भी उसे स्वीकार नहीं है, कहीं दर्शन का एक पल भी छूट न जाए। अंत में गीतकार कमल सिंह पुठी यह संदेश देते हैं कि संसार के सभी रिश्ते-नाते और माया के बंधन झूठे हैं, केवल बांके बिहारी ही एकमात्र सच्चे सखा और मुक्तिदाता हैं। भक्त की अब यही अंतिम अभिलाषा है कि उसका पूरा जीवन कृष्ण चरणों की सेवा में ही व्यतीत हो, इसके अतिरिक्त उसकी कोई और कामना शेष नहीं रही है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
पूर्ण शरणागति (Surrender)
यह भजन जीव की परमात्मा के प्रति अनन्य शरणागति (आत्मसमर्पण) का जीवंत प्रतीक है, जहां भक्त सांसारिक बंधनों को छोड़कर केवल हरि स्मरण में मग्न रहना चाहता है.
मधुर संकीर्तन परंपरा
रवि राज की मधुर वाणी और लवली शर्मा का कर्णप्रिय संगीत इस भजन को ऐसा रूप देता है जो हर आयु वर्ग के भक्तों के हृदय को झकझोर देता है और कीर्तन में झूमने पर विवश कर देता है.
राधा-कृष्ण प्रेम रस
ब्रज भूमि के प्रेम, कुंज गलियों की महक और बांके बिहारी की मोहनी मूरत का स्मरण करते हुए यह भजन श्रोताओं को सीधे मानसिक रूप से वृन्दावन की आध्यात्मिक अनुभूति कराता है.
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत को अपने दैनिक जीवन में उतारने के लिए उचित भाव और समय का बहुत महत्व होता है। 'घर जाने को दिल नहीं करता' भजन को श्रवण या गायन करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन किया जा सकता है:
- ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर स्नान के पश्चात जब मन शांत होता है, तब इस भजन का श्रवण करने से पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। संध्या के समय घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने के बाद इसे गाने से मानसिक शांति मिलती है।
- साप्ताहिक सत्संग एवं संकीर्तन: घर पर होने वाले पारिवारिक आयोजनों, एकादशी व्रत, जन्माष्टमी या राधाष्टमी के पावन अवसरों पर इस भजन का सामूहिक गायन अत्यंत आनंददायक होता है।
- एकांत साधना एवं ध्यान: जब भी मन अशांत हो या सांसारिक चिंताओं से घिरा हो, आंखें बंद कर इस भजन को सुनने से मन भगवान श्री कृष्ण के चरणों में केंद्रित हो जाता है।
आप इस प्रकार के अन्य लोकप्रिय भजनों जैसे श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी और पावन राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का भी नियमित पाठ कर सकते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में भगवान श्री कृष्ण (बांके बिहारी) और जगत जननी श्री राधा रानी हैं। सनातन परंपरा में भगवान कृष्ण को पूर्ण पुरुषोत्तम और राधा रानी को उनकी अह्लादिनी शक्ति माना गया है। ब्रज भूमि के संतों जैसे सूरदास, मीराबाई, चैतन्य महाप्रभु और हित हरिवंश महाप्रभु ने इसी प्रेम भाव (मधुर उपासना) को अपने पदों के माध्यम से समाज के सामने रखा। यह भजन उसी प्राचीन संत परंपरा की आधुनिक किंतु उतनी ही प्रामाणिक अभिव्यक्ति है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल हिंदी अर्थ | सांकेतिक / आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| बांके बिहारी | टेढ़े होकर खड़े होने वाले कृष्ण | वृन्दावन के मुख्य अधिष्ठाता भगवान श्री कृष्ण, जो भक्तों के दिलों को मोह लेते हैं। |
| चरणों की छांव | भगवान के चरणों का आश्रय | संसार के तापों से मुक्ति और परम शांति की प्राप्ति। |
| कुंज गलियन | वृन्दावन की लता-पल्लव से घटी गलियां | वह पावन भूमि जहां राधा-कृष्ण नित्य लीलाएं करते हैं। |
| माया के बंधन | सांसारिक मोह-माया और प्रपंच | धन, परिवार और भौतिक सुखों का वह चक्र जिसमें जीव फंसा रहता है। |
| सच्चा मीत | सच्चा मित्र | वह परमात्मा जो सुख-दुख में हमेशा साथ निभाता है। |
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्री कृष्ण और राधा रानी की आराधना को पूर्णता प्रदान करने के लिए निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:
"कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण द्विषो विद्रावणो मम।
वृन्दावन निवासं च देहि मे पादपंकजम्॥"
अर्थात: हे कृष्ण! हे महाकृष्ण! मेरे सभी दुखों और शत्रुओं का नाश करने वाले, मुझे अपने वृन्दावन धाम का निवास और अपने चरण कमलों की भक्ति प्रदान करें।
इसी प्रकार आप भगवान के पावन स्मरण हेतु महामृत्युंजय मंत्र या भगवान विष्णु के स्वरूपों के ध्यान का भी आश्रय ले सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | घर जाने को दिल नहीं करता (Ghar Jaane Ko Dil Nhi Karta) |
|---|---|
| गायक | रवि राज (Ravi Raj) |
| गीतकार | कमल सिंह पुठी (Kamal Singh Puthi) |
| संगीतकार | लवली शर्मा (Lovely Sharma) |
| संगीत लेबल | राधा भक्ति (Radha Bhakti) |
| मुख्य विषय | कृष्ण भक्ति, वृन्दावन प्रेम, शरणागति |
| भाव (Bhava) | अनन्य प्रेम, विरह, आनंद, समर्पण |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, सत्संग, एकादशी, जन्माष्टमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख पाठकों की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जिज्ञासाओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें भजन के प्रामाणिक बोल, उसका भावार्थ और सनातन भक्ति परंपरा के विभिन्न पक्षों को विस्तार से संकलित किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ: पारंपरिक ब्रज लोकगीत परंपरा, आधुनिक भक्ति संगीत संग्रह तथा राधा भक्ति चैनल के आधिकारिक प्रकाशन।
संबंधित भजन एवं लेख
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
भगवान श्री कृष्ण की स्तुति और उनके पावन नामों का संकीर्तन...
पूरा पढ़ें →राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र
श्री राधा रानी की कृपा प्राप्ति का सबसे चमत्कारी और पावन स्तोत्र...
पूरा पढ़ें →
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें