Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

धरती गगन में होती है (Dharti Gagan Mein Hoti Hai) - SURESH WADKAR ANURADHA PAUDWAL Devi Bhajan

धरती गगन में होती है भजन सुरेश वाडकर एवं अनुराधा पौडवाल द्वारा गाया गया। माँ वैष्णो देवी के इस लोकप्रिय देवी भजन के बोल, अर्थ और महिमा पढ़ें।

प्रस्तुत भजन "धरती गगन में होती है" (Dharti Gagan Mein Hoti Hai) देवी भक्ति परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भजन है, जिसे सुरेश वाडकर एवं अनुराधा पौडवाल जी के दिव्य स्वरों में गाया गया है। यह भजन मुख्य रूप से माँ वैष्णो देवी की महिमा और उनकी कृपा का गुणगान करता है, जिसमें भक्त यह दर्शाता है कि माँ की शक्ति और उपस्थिति सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है। "जय माँ वैष्णो देवी" एल्बम का यह भजन श्रद्धालुओं के हृदय में गहरी आस्था और भक्ति का संचार करता है। भजन की पंक्तियों में यह भाव प्रकट होता है कि माँ की महिमा धरती, गगन, पाताल सहित तीनों लोकों में गाई जाती है, और वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। इस भजन का भाव यह है कि जब भक्त सच्चे मन से माँ को पुकारता है, तो वे तुरंत दौड़ी चली आती हैं और अपने भक्त के कष्टों को दूर करती हैं। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और वैष्णो देवी की यात्रा के समय अत्यधिक श्रद्धा भाव से गाया जाता है। भजन की मधुर धुन और सरल भाषा इसे हर वर्ग के श्रद्धालुओं के लिए ग्रहणयोग्य बनाती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

धरती गगन में होती है, तेरी महिमा सारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

तेरे दर पे आया हूँ, मैं तो बड़ा दुखियारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

पाताल में होती है, तेरी महिमा न्यारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

जो भी तुझे पुकारे, हो जाता है सुखियारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

तेरे चरणों में आकर, मिट जाती है बीमारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

भक्तों की तू रक्षा करती, है सबकी सहारी।
माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी।।

जय माँ वैष्णो देवी, जय जयकारी।
तेरी महिमा धरती गगन में होती है सारी।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव यह है कि माँ वैष्णो देवी की महिमा और शक्ति सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। भजन की पहली पंक्ति "धरती गगन में होती है, तेरी महिमा सारी" यह दर्शाती है कि माँ की कीर्ति और शक्ति धरती से लेकर आकाश तक हर स्थान पर फैली हुई है। यह भक्त की उस भावना को व्यक्त करता है जिसमें वह माँ की सर्वव्यापकता को स्वीकार करता है। "माँ वैष्णो देवी, तेरी जय जयकारी" पंक्ति में भक्त माँ की जयकार करता है, जो उसकी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।

दूसरी पंक्ति "तेरे दर पे आया हूँ, मैं तो बड़ा दुखियारी" में भक्त अपनी दीनता और दुःख को माँ के समक्ष प्रकट करता है। यह भक्त की उस स्वाभाविक भावना को दर्शाता है जिसमें वह अपने सभी कष्टों का निवारण माँ के चरणों में खोजता है। "पाताल में होती है, तेरी महिमा न्यारी" पंक्ति यह बताती है कि माँ की महिमा तीनों लोकों में अद्वितीय है। यह भक्त की उस गहरी आस्था को प्रकट करता है कि माँ की शक्ति हर स्थान पर विद्यमान है और कोई भी स्थान उनकी कृपा से वंचित नहीं है।

"जो भी तुझे पुकारे, हो जाता है सुखियारी" पंक्ति में भजनकार यह संदेश देता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माँ को पुकारता है, वह सुखी हो जाता है। यह माँ की कृपा और उनकी भक्तवत्सलता का प्रतीक है। "तेरे चरणों में आकर, मिट जाती है बीमारी" पंक्ति यह दर्शाती है कि माँ के चरणों में शरण लेने से भक्त के सभी दुःख, कष्ट और रोग दूर हो जाते हैं। यह भक्त की उस विश्वास को व्यक्त करता है कि माँ की कृपा से सभी समस्याओं का समाधान संभव है।

"भक्तों की तू रक्षा करती, है सबकी सहारी" पंक्ति में माँ की भक्तवत्सलता और उनकी रक्षक शक्ति का वर्णन है। माँ अपने भक्तों की सदैव रक्षा करती हैं और उन्हें हर संकट से उबारती हैं। अंत में "जय माँ वैष्णो देवी, जय जयकारी" पंक्ति में भक्त पुनः माँ की जयकार करता है और उनकी महिमा को धरती और गगन में व्याप्त बताता है। इस प्रकार यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस गहरे आत्मीय संबंध को दर्शाता है जिसमें भक्त अपनी सभी समस्याओं का समाधान माँ के चरणों में पाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन माँ वैष्णो देवी की भक्ति पर आधारित है, जो हिंदू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। माँ वैष्णो देवी को त्रिकूट पर्वत पर विराजमान माना जाता है और उनके दर्शन के लिए प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित मंदिर में जाते हैं। यह भजन उसी माँ की महिमा का गुणगान करता है और भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है।

भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भक्त के हृदय की गहरी भावनाओं को व्यक्त करता है। भजन में भक्त अपनी दीनता, अपनी समस्याओं, और अपनी आस्था को एक साथ प्रकट करता है। यह भजन सिखाता है कि भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण ही सभी दुःखों का निवारण है। भजन की मधुर धुन और सरल भाषा इसे हर आयु वर्ग के श्रद्धालुओं के लिए ग्रहणयोग्य बनाती है।

इस भजन को सुनने और गाने से भक्त के मन में शांति और आनंद की अनुभूति होती है। यह भजन भक्ति भाव को जागृत करता है और मन को एकाग्र करने में सहायक होता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और वैष्णो देवी की यात्रा के समय इस भजन का विशेष महत्व है। इसके अतिरिक्त, किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में, घर के मंगल कार्यों में, और दैनिक पूजा में इस भजन को गाया जा सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष समय और अवसर हैं जब इसका महत्व और भी बढ़ जाता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के समय यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • दुर्गा पूजा और दशहरा: बंगाल और अन्य क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के समय यह भजन श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
  • वैष्णो देवी यात्रा: कटरा से भवन तक की यात्रा के दौरान श्रद्धालु इस भजन को गाते हुए चलते हैं।
  • प्रातःकालीन पूजा: सुबह के समय माँ के दर्शन और पूजा के बाद इस भजन को गाना शुभ माना जाता है।
  • संध्या आरती: घर के मंदिर में संध्या आरती के समय इस भजन को गाया जा सकता है।

भजन गाने की विधि सरल है। सर्वप्रथम माँ वैष्णो देवी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें, फिर पुष्प और प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद हाथ जोड़कर भजन गाना आरंभ करें। भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव होना चाहिए। भजन के बाद माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन माँ वैष्णो देवी को समर्पित है, जो हिंदू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं और त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मानी जाती हैं।

इस भजन को प्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर और अनुराधा पौडवाल जी ने अपने दिव्य स्वरों में गाया है। इसका संगीत अमर-उत्पल ने दिया है और गीत नक्श लयालपुरी ने लिखा है।

इस भजन को नवरात्रि, दुर्गा पूजा, वैष्णो देवी यात्रा, प्रातःकालीन पूजा, और संध्या आरती के समय गाना शुभ माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में भी इसे गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ वैष्णो देवी की महिमा सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है और जो भक्त सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, उसके सभी दुःख दूर हो जाते हैं।

हाँ, इस भजन की मधुर धुन और भक्ति भाव से भरे बोल मन को शांति और आनंद की अनुभूति कराते हैं। यह भजन मन को एकाग्र करने और भक्ति भाव जागृत करने में सहायक होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्तिलोक की टीम द्वारा प्रामाणिक स्रोतों और शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। इस भजन का मूल पाठ, अर्थ, और भावार्थ प्रस्तुत करते समय हमने पारंपरिक भक्ति परंपरा और श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूर्ण सम्मान रखा है। भजन के बोल और संगीत की जानकारी एल्बम "जय माँ वैष्णो देवी" के आधार पर दी गई है।

हमारा उद्देश्य श्रद्धालुओं को माँ वैष्णो देवी की भक्ति से जोड़ना और उन्हें इस भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ से परिचित कराना है। यह सामग्री केवल भक्ति और जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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