Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बेटा के घरे कब अईबु ए माई (Beta ke Ghare kab Aiyibu Ye Maai) - Pawan Singh Ma Durga Bhajan

पवन सिंह का प्रसिद्ध भोजपुरी दुर्गा भजन 'बेटा के घरे कब अईबु ए माई' लिरिक्स, संदर्भ एवं व्याख्या सहित। पढ़ें संपूर्ण भक्ति भाव.

Pawan Singh Ma Durga Bhajan

गायक: पवन सिंह एल्बम: सजल बा दरबार मोरी मइया के श्रेणी: दुर्गा भजन लिरिक्स

आदिशक्ति जगत जननी माता दुर्गा को समर्पित भोजपुरी भक्ति संगीत जगत के अत्यंत लोकप्रिय और भावुक भजन "बेटा के घरे कब अईबु ए माई (Beta ke Ghare kab Aiyibu Ye Maai)" को स्वरबद्ध किया है भोजपुरी के पावर स्टार कहे जाने वाले प्रसिद्ध गायक पवन सिंह ने। यह भजन सनातन धर्म और लोक संस्कृति के उस सुंदर समन्वय को दर्शाता है जहाँ भक्त अपनी आराध्य देवी को केवल एक शक्तिपुंज के रूप में नहीं, बल्कि अपनी परम आत्मीय जननी (माँ) के रूप में देखता है। विशेषकर शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसरों पर जब संपूर्ण वातावरण माता के जयकारों से गूंज उठता है, तब यह भजन हर आस्तिक हृदय को झकझोर देता है। इसमें एक पुत्र का अपनी माता के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, प्रतीक्षा और उनके आगमन की व्याकुलता का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। भक्तलोक के इस विस्तृत आलेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, गायन की परंपरा और जीवन पर पड़ने वाले उसके सकारात्मक प्रभावों का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मखड़ा (Refrain):

बेटा के घरे कब अईबु ए माई,
दर्शs दियs ए जगदम्ब भवानी,
तोहरे भरोसे बानी बइठल मइया,
सुन लीहs पुकार मोरी महारानी।

अंतरा 1:

सजावनी दरबार तोहरे नाम के मइया,
जोतुक जलावनी सुबहो दुपहरिया,
किए बानी अरदास गोहरावतानी,
झूठे जग के जंजाल छोड़ि आवs ए भवानी।

अंतरा 2:

सुनले बानी तू तs दीनदयाल हउअs,
भक्तन के संकट हरनिहार हउअs,
काहे देर कइलू तू तs आई जा ए माई,
तोहरे बिना मोरा मन ना बहराई।

अंतरा 3 (पवन सिंह शैली):

पवन कहे मइया सुनs अरज हमार,
भवसागर से पार लगा दs हमार,
चहुंओर बा सोर मइया महिमा तोहार,
दर्शन देहिं आइजs घरवा हमार।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"बेटा के घरे कब अईबु ए माई" भजन का भावार्थ अत्यंत गंभीर और हृदयस्पर्शी है। इस भजन के माध्यम से गायक पवन सिंह ने एक साधारण भक्त की मनोदशा को शब्दों में पिरोया है जो अपनी माँ (जगदम्बा) को अपने घर आने के लिए बार-बार पुकार रहा है। सनातन परंपरा में भक्त और भगवान का संबंध स्वामी-सेवक का तो होता ही है, साथ ही माता-संतान का वात्सल्य संबंध सबसे पावन माना गया है।

भजन की शुरुआत इस व्याकुलता से होती है कि हे जगदम्बा भवानी! आप अपने इस पुत्र के घर कब पधारेंगी? भक्त कहता है कि उसने अपना संपूर्ण जीवन और भविष्य केवल आपकी कृपा पर छोड़ दिया है। वह आपकी आराधना में लीन है और पूरी श्रद्धा के साथ अपनी पुकार आप तक पहुँचा रहा है।

आगे की पंक्तियों में भक्त बताता है कि उसने माता के स्वागत के लिए किस प्रकार अपने घर और मन के दरबार को सजाया है। सुबह और शाम अनवरत रूप से ज्योति जलाई जा रही है। संसार के झूठे प्रपंचों और मोह-माया को छोड़कर अब केवल माँ का ही आसरा बचा है। भक्त अपनी दीनता प्रकट करते हुए कहता है कि आप तो दीनदयाल हैं और भक्तों के सभी संकटों को हरने वाली हैं, फिर मेरे यहाँ आने में इतनी देर क्यों हो रही है? आपके बिना इस मन को कहीं शांति नहीं मिल रही है। अंत में रचनाकार या गायक अपने नाम (पवन) के माध्यम से यह संदेश देता है कि संसार में माता की महिमा सर्वत्र गूंज रही है, इसलिए हे मइया! इस भवसागर से पार लगाने के लिए अब शीघ्र ही मेरे घर दर्शन देने के लिए पधारिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • माता-संतान का अनूठा रिश्ता: इस भजन में ईश्वर को पाने की कठिन दार्शनिक प्रक्रिया के बजाय एक सहज और पारिवारिक स्नेह का भाव प्रकट किया गया है, जो साधक को सीधे माँ से जोड़ता है।
  • भोजपुरी लोक संस्कृति का संस्पर्श: ठेठ भोजपुरी शब्दों और लोक धुनों का प्रयोग इसे उत्तर भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिवेश के श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा: नवरात्रि के दिनों में इस भजन को सुनने से घर का वातावरण पवित्र होता है और मन के नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
  • समर्पण का भाव: यह भजन सिखाता है कि समस्त चिंताओं को त्यागकर जब मनुष्य पूरी निष्ठा से माता को पुकारता है, तो माँ अवश्य सुनती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति गीतों और भजनों का प्रभाव उनके श्रवण और गायन के समय पर भी निर्भर करता है। इस भजन को निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जा सकता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान सुबह और संध्या काल की पूजा के समय इसे बजाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • माता की चौकी या जागरण: किसी भी मांगलिक कार्य, देवी जागरण या घर में माता की चौकी के अनुष्ठान के दौरान यह भजन मुख्य आकर्षण होता है।
  • दैनिक पूजा के पश्चात: संध्या आरती के बाद शांत चित्त से इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है और आंतरिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा हैं, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित स्वरूप माना जाता है। सनातन धर्म में देवी दुर्गा को चराचर जगत की माता कहा गया है। दुर्गा सप्तशती और विभिन्न पुराणों में यह वर्णित है कि शरणागत की रक्षा करना और भक्तों के दुखों का निवारण करना ही आदिशक्ति का मुख्य स्वभाव है। इस भजन के माध्यम से गायक पवन सिंह ने पारंपरिक लोकगायन की शैली में इन्हीं आदिशक्ति का अपने घर आवाहन किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी और हिंदी के सुंदर मिश्रण में रचित है। इसकी काव्य शैली सरल, सुबोध और लोक-संगीत पर आधारित है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि आम से आम व्यक्ति भी इसके भाव को सहज ही समझ सके। "दरबार सजावनी", "जोतुक जलावनी", और "गोहरावतानी" जैसे ठेठ भोजपुरी प्रयोग इस रचना में मिठास और अपनापन घोल देते हैं। इसमें विप्रलंब श्रृंगार या कहें कि भक्ति रस के अंतर्गत 'विरह और मिलन की लालसा' का उत्कृष्ट प्रयोग हुआ है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  1. अटूट विश्वास: जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, ईश्वर और माता के प्रति विश्वास कभी कम नहीं होना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: जब भक्त यह कहता है कि "झूठे जग के जंजाल छोड़ि आवs", तो इसका संदेश यह है कि सांसारिक मोह-माया और दिखावे से ऊपर उठकर ही सच्ची भक्ति प्राप्त हो सकती है।
  3. पुकार में सच्चाई: प्रार्थना तब सफल होती है जब उसमें हृदय की सच्ची व्याकुलता और समर्पण हो।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
जगदम्ब जगत की अम्बा (माता) माता दुर्गा के संबोधन के रूप में
जोतुक जलावनी ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं पूजा-अर्चना और साधना के संदर्भ में
गोहरावतानी पुकार रहा हूँ / टेर रहा हूँ माता से विनती करने के भाव में
दीनदयाल गरीबों और दुखी जनों पर दया करने वाली माता के कृपालु स्वभाव हेतु
भवसागर दुखों रूपी संसार रूपी समुद्र संसार के बंधनों से मुक्ति पाने के लिए

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के साथ निम्नलिखित माँ दुर्गा के पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थात: हे नारायणि! आप सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, आप कल्याणमयी हैं, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं और शरण में आए हुए लोगों की रक्षा करने वाली तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम बेटा के घरे कब अईबु ए माई (Beta ke Ghare kab Aiyibu Ye Maai)
गायक / कलाकार पवन सिंह (Pawan Singh)
एल्बम सजल Ba दरबार मोरी मइया के
भाषा भोजपुरी / हिंदी
संगीत शैली भक्ति संगीत / लोक भजन
मुख्य भाव भक्ति, वात्सल्य, विरह और समर्पण
उपयुक्त अवसर शारदीय / चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध दुर्गा भजन को भोजपुरी इंडस्ट्री के लोकप्रिय गायक और अभिनेता पवन सिंह ने अपनी मधुर और ओजस्वी आवाज में गाया है।

यह भजन पवन सिंह के प्रसिद्ध देवी गीत एल्बम "सजल बा दरबार मोरी मइया के" का एक अत्यंत लोकप्रिय गीत है।

इस भजन को मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण, और घरों में होने वाली देवी पूजा या चौकी के समय सुना और गाया जाता है।

इस भजन का मुख्य भाव एक भक्त की अपनी माता (दुर्गा) के प्रति अनन्य श्रद्धा, उनके आगमन की व्याकुलता और सांसारिक बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना है।

हाँ, सुबह और शाम की पूजा के समय या नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन को बजाने से घर का वातावरण अत्यंत सकारात्मक और भक्तिमय हो जाता है।

यह भजन ठेठ भोजपुरी और लोक-हिंदी भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत के लोगों के दिलों के बहुत करीब है।

इसे सुनकर श्रोता को माँ की गोद जैसी ममता और सुरक्षा का अहसास होता है, जिससे मन का सारा तनाव और भय समाप्त हो जाता है।

भक्तलोक पर आपको इस भजन के लिरिक्स, हिंदी अर्थ, दुर्गा चालीसा, 108 नाम माला और अन्य प्रसिद्ध देवियों के भजन व आरती की विस्तृत जानकारी मिल जाएगी।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक पर प्रकाशित यह आलेख सनातन संस्कृति, लोक संगीत और भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन पर आधारित है। इस सामग्री को उपयोगकर्ताओं की खोज प्राथमिकताओं (Search Intent) और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं देवी गीत परंपरा
  • दुर्गा सप्तशती (गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन)
  • पवन सिंह ऑफिशियल म्यूजिक एलबम्स एवं संगीत अभिलेख
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं लोक साहित्य संग्रह

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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