Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो

पढ़ें अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो" माता रानी (माँ दुर्गा, शेरावाली, वैष्णो देवी) के चरणों में समर्पित एक अत्यंत ही भावुक, पावन और ऊर्जावान देवी भजन है, जिसे अपनी जादुई और रूहानी आवाज से प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम (Sonu Nigam) ने अपने अनूठे अंदाज में गाया है। यह भजन संगीत प्रेमियों और माता के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इस भजन के बोल (Lyrics) बलबीर निर्दोष (Balbir Nirdosh) द्वारा रचे गए हैं और इसका कर्णप्रिय संगीत सुरिंदर कोहली (Surinder Kohli) द्वाराबद्ध किया गया है, जिसे प्रतिष्ठित टी-सीरीज (T-Series) द्वारा प्रस्तुत किया गया है। सनातन धर्म और शक्ति उपासना की परंपरा में माता के दरबार में जाने की लालसा, सांसारिक बंधनों से मुक्ति की छटपटाहट और अनन्य शरणागति का यह भजन एक जीवंत प्रतीक है। जब एक सच्चा साधक या भक्त अपनी अंतरात्मा की पुकार सुनकर माँ के दर्शन के लिए निकलता है, तो रास्ते में आने वाली हर बाधा, हर रुकावट उसे छोटी लगने लगती है। इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर छिपी उस गहरी तड़प को उजागर करता है जो उसे सीधे जगत जननी आदिशक्ति जगदंबा के चरणों से जोड़ देती है। नवरात्रि के पवित्र दिनों, माता के जागरण, चौकी और संकीर्तन के समय इस भजन का श्रवण और गायन भक्तों को परमानंद की अनुभूति कराता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


मूर्छना / मुखड़ा (Refrain):

अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो,
मुझे माँ के दर्शन पाने दो।
रोको ना रोको, मुझे जाने दो,
शेरावाली के दर पे ठिकाने दो...
अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो,
मुझे माँ के दर्शन पाने दो।

पहला अंतरा (First Stanza):

दुनिया के मेले मुझे रास ना आए,
बिन माँ के कोई मुझे पास ना लाए।
मेरी भक्ति की डोरी है मैया के हाथों,
कटने ना दो ये बंधन रातों-रातों।
मुझे शेरावाली की ज्योत जगाने दो,
अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो,
मुझे माँ के दर्शन पाने दो।

दूसरा अंतरा (Second Stanza):

ऊंचे पर्वतों पर माता का डेरा,
जहाँ जगमग जगमग जलता सवेरा।
चरणों की धूल मेरे माथे लगा दो,
मेरे सारे दुखों को हमेशा मिटा दो।
मुझे मैया के चरणों में शीश झुकाने दो,
अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो,
मुझे माँ के दर्शन पाने दो।

अंतिम अंतरा एवं समापन (Concluding Stanza):

सोनू गाए गुणगान मैया तेरा,
तू ही है मेरी ज्योति, तू ही सवेरा।
बलबीर कहे मैया द्वार जो भी आया,
उसने इस जीवन में सब कुछ है पाया।
मुझे प्यार की गंगा में बह जाने दो,
अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो,
मुझे माँ के दर्शन पाने दो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth


"अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो" भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और आत्मीय है। इसमें एक सच्चे भक्त की उस मानसिक स्थिति का वर्णन किया गया है जब उसका मन संसार के भौतिक आकर्षणों, बंधनों और मोह-माया से उचटकर केवल और केवल अपनी आराध्य जगत जननी माँ भवानी के चरणों में लीन होना चाहता है। भजन की पहली पंक्ति "अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो" साधक की उस तीव्र उत्कंठा को दर्शाती है जहाँ वह दुनिया के अवरोधों और रोक-टोक से परे जाकर अपनी माँ के दर्शन करना चाहता है। बच्चे और माँ का रिश्ता इस संसार का सबसे पवित्र और निष्कलंक रिश्ता माना जाता है; ठीक उसी प्रकार एक भक्त जब माँ के द्वार की ओर बढ़ता है, तो उसके भीतर का अहंकार और मोह स्वतः ही समाप्त होने लगता है।

भजन के अंतरे में यह दर्शाया गया है कि सांसारिक मेले और भौतिक सुख-सुविधाएं साधक को सच्चे आनंद से वंचित कर रहे हैं। उसे केवल मैया के दरबार की अलौकिक शांति और चरण कमलों की धूल चाहिए। सोनू निगम की जादुई आवाज और सुरिंदर कोहली का मधुर संगीत इस भाव को और अधिक तीव्र कर देता है, जिससे श्रोता की आंखें श्रद्धा से नम हो जाती हैं और हृदय में भक्ति रस का संचार होने लगता है। यह भजन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन की भागदौड़ में यदि ईश्वर प्राप्ति की तड़प कम हो जाए, तो मनुष्य भीतर से खाली हो जाता है। अतः माँ के द्वार जाने की यह पुकार वस्तुतः अपनी अंतरात्मा से जुड़ने और परमात्मा को पाने की शाश्वत छटपटाहट है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance


  • भक्ति का सजीव चित्रण: यह भजन साधक और माता के बीच के वात्सल्य और प्रेम को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।
  • दिव्य स्वर और संगीत: प्रख्यात गायक सोनू निगम के भावपूर्ण स्वरों और सुरिंदर कोहली के संगीत निर्देशन ने इस रचना को अमर बना दिया है।
  • शारीरिक और मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण से मन का तनाव, चिंता और अवसाद दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शरणागति का संदेश: यह भजन सिखाता है कि माता के चरणों में ही समस्त दुखों का अंत और परम शांति की प्राप्ति संभव है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing


देवी भजनों के गायन और श्रवण का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। 'अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो' भजन को निम्नलिखित अवसरों और विधियों के अनुसार सुना या गाया जा सकता है:

  • नित्य पूजा के समय: प्रातः काल या संध्या काल में माता की आरती के पूर्व इस भजन को सुनने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
  • नवरात्रि के पावन पर्व पर: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में जब विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती पाठ और माता की चौकी का आयोजन होता है, तब इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • जागरण एवं संकीर्तन में: माता के जागरण, माता की भेटों के कार्यक्रमों और साप्ताहिक सत्संग में इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
  • मानसिक शांति के लिए: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कठिनाइयां आ रही हों, एकांत में बैठकर इस भजन को सुनने से आंतरिक शक्ति और धैर्य प्राप्त होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint


यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा (शेरावाली, वैष्णो देवी, जगदंबा) को समर्पित है। सनातन धर्म में आदि शक्ति माँ दुर्गा को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, पालनहार और संहारक शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मार्कण्डेय पुराण और दुर्गा सप्तशती के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और असुरों का प्रकोप बढ़ता है, तब-तब माता विभिन्न रूपों (जैसे महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) में प्रकट होकर भक्तों की रक्षा करती हैं। इस भजन के रचयिता बलबीर निर्दोष और संगीतकार सुरिंदर कोहली ने अपनी कला के माध्यम से माँ के इसी करुणावान और ममतामयी स्वरूप का गुणगान किया है, जिससे भक्तगण माता के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background


"माँ का दिल" एल्बम के अंतर्गत रिलीज़ हुआ यह भजन अपने समय के सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय देवी भजनों में गिना जाता है। टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले जब यह गीत आया, तो इसने ऑडियो और वीडियो दोनों ही रूपों में धूम मचा दी। गीतकार बलबीर निर्दोष की कलम से निकले शब्द इतने सरल, सहज और हृदयस्पर्शी हैं कि हर आम और खास इंसान इनसे तुरंत जुड़ जाता है। वहीं सुरिंदर कोहली की धुनों ने इसमें पारंपरिक पंजाबी लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति संगीत का एक अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत किया है। सोनू निगम ने अपनी बहुमुखी गायन शैली से इस भजन में प्राण फूंक दिए हैं, जिससे यह आज भी माता के भक्तों की प्लेलिस्ट का एक अनिवार्य हिस्सा बना हुआ है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style


इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, मधुर और प्रवाहमयी हिंदी-उर्दू मिश्रित बोलचाल की भाषा (ब्रज और खड़ी बोली का प्रभाव) है, जिसे पंजाब और उत्तर भारत के लोग सहज ही समझ सकते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें तुकांत पंक्तियों का प्रयोग किया गया है, जो गाने में बहुत आसान और लयबद्ध लगती हैं। रूपक और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग करते हुए भक्त की तड़प को 'द्वार जाने', 'ज्योति जगाने' और 'चरणों की धूल' जैसे बिंबों (Imagery) के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons


यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:

  • मोह का त्याग: संसार के भौतिक आकर्षण और स्वार्थी संबंध क्षणिक हैं। वास्तविक शांति ईश्वर की शरण में ही मिलती है।
  • दृढ़ संकल्प: अपने लक्ष्य (ईश्वर प्राप्ति और भक्ति) की ओर बढ़ते समय आने वाली बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ना चाहिए।
  • शरणागति का भाव: अहंकार का त्याग करके माँ के चरणों में समर्पित हो जाना ही मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings


शब्द / पदावली सरल अर्थ संदर्भ / भाव
शेरावाली शेर की सवारी करने वाली माँ माँ दुर्गा का प्रसिद्ध संबोधन
दर द्वार या चौखट माता का मंदिर या शरण स्थल
भक्ति की डोरी श्रद्धा और प्रेम का बंधन भक्त और भगवान का अटूट रिश्ता
ज्योति प्रकाश / अखंड दीपक ज्ञान और दिव्यता का प्रतीक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation


"अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो, मुझे माँ के दर्शन पाने दो।"
यहाँ भक्त संसार के लोगों से या अपने आंतरिक विकारों से विनती कर रहा है कि अब उसे माँ के दरबार में जाने से न रोका जाए, क्योंकि उसका एकमात्र उद्देश्य अब केवल माँ के दिव्य दर्शन करना है।

"दुनिया के मेले मुझे रास ना आए, बिन माँ के कोई मुझे पास ना लाए।"
संसार के तमाम सुख-भोग और मेले भक्त को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। उसे महसूस होता है कि इस दुनिया में माँ के बिना कोई भी उसका अपना नहीं है जो उसे सच्चे स्नेह की छांव दे सके।

"चरणों की धूल मेरे माथे लगा दो, मेरे सारे दुखों को हमेशा मिटा दो।"
भक्त माता से प्रार्थना करता है कि उसके चरणों की पावन धूल उसके मस्तक पर लग जाए, जिससे उसके जन्म-जन्म के पाप और दुख हमेशा के लिए समाप्त हो जाएं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok


माता के इस भजन का पाठ या श्रवण करते समय निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"

या सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

इस नौ अक्षर वाले नवार्ण मंत्र और स्तुति के जाप से साधक का अंतःकरण शुद्ध होता है और माँ दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त होती है। आप अधिक जानकारी के लिए श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information


भजन का नाम अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो (Ab Na Roko Maa Ke Dwar Jane Do)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली
गायक (Singer) सोनू निगम (Sonu Nigam)
संगीतकार (Music Director) सुरिंदर कोहली (Surinder Kohli)
गीतकार (Lyricist) बलबीर निर्दोष (Balbir Nirdosh)
संगीत लेबल टी-सीरीज (T-Series)
एल्बम माँ का दिल (Maa Ka Dil)
भाषा हिंदी / पंजाबी देवी भजन
मुख्य भाव (Bhava) अनन्य भक्ति, समर्पण और विरह
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, नित्य पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


1. "अब ना रोको माँ के द्वार जाने दो" भजन के गायक कौन हैं?

इस प्रसिद्ध देवी भजन के गायक भारत के प्रख्यात पार्श्व गायक सोनू निगम (Sonu Nigam) हैं।

2. इस भजन के गीतकार और संगीतकार कौन हैं?

इस भजन के बोल बलबीर निर्दोष (Balbir Nirdosh) ने लिखे हैं और इसका संगीत सुरिंदर कोहली (Surinder Kohli) द्वारा तैयार किया गया है।

3. यह भजन किस एल्बम से संबंधित है?

यह भजन टी-सीरीज के लोकप्रिय देवी एल्बम "माँ का दिल" (Maa Ka Dil) का हिस्सा है।

4. इस भजन को सुनने का सबसे अच्छा समय कब है?

इस भजन को नवरात्रि के दिनों में, सुबह या शाम की पूजा के समय, अथवा माता के जागरण और सत्संग में सुनना सबसे अच्छा माना जाता है।

5. इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश संसार के भौतिक मोह-माया को छोड़कर माँ के चरणों में पूर्ण शरणागति और आत्मिक शांति प्राप्त करना है।

6. क्या यह भजन पंजाबी शैली में है?

हाँ, यह भजन हिंदी और पंजाबी शैली के सुंदर मिश्रण (पंजाबी देवी भजन परंपरा) में गाया गया है, जो श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर देता है।

7. इस भजन को सुनने से मानसिक रूप से क्या लाभ होता है?

इसे सुनने से मन का तनाव दूर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और देवी ऊर्जा की अनुभूति होती है।

8. क्या इस भजन को घर पर अकेले में गाया जा सकता है?

निश्चित रूप से, एकांत में बैठकर इस भजन को गाने या सुनने से ध्यान केंद्रित करने में बहुत सहायता मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ


यह लेख भक्तों को माता के इस पावन भजन के बोल, अर्थ, और आध्यात्मिक गहराई से परिचित कराने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति, देवी उपासना और भक्ति संगीत के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ पाठकों को प्रामाणिक और सुंदर जानकारी प्रदान करना है। सभी तथ्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संगीत एल्बम और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References


  • पारंपरिक देवी भजन एवं संकीर्तन परंपरा।
  • टी-सीरीज (T-Series) आधिकारिक संगीत अभिलेख एवं एल्बम 'माँ का दिल'।
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं देवी भागवत पुराण के आधार पर शक्ति उपासना के संदर्भ।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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