"आते हैं हर साल नौराते माता के (Aate Hain Har Saal Naurate Mata Ke)" एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लख्खा ने स्वर दिया है। यह भजन विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर संपूर्ण भारतवर्ष में गूंजता है। इस भजन में आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का सुंदर चित्रण किया गया है। जब भी नवरात्रि का पावन पर्व आता है, भक्तों का हृदय हर्ष और उल्लास से भर जाता है। इस गीत के माध्यम से लखबीर सिंह लख्खा ने मां के नौ रूपों की महिमा, उनके आगमन की खुशी और भक्तों की व्याकुलता को अत्यंत मधुर और ओजस्वी स्वर में प्रस्तुत किया है। यह भजन न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह मां दुर्गा के चरणों में आत्मसमर्पण करने और उनके दिव्य आशीर्वाद को प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
आते हैं हर साल नौराते माता के
आते हैं हर साल नौराते माता के,
आते हैं हर साल नौराते माता के।
खुशियां हजार लाते नौराते माता के,
आते हैं हर साल नौराते माता के॥
मैया का चोला है रंगला, मैया का चोला है रंगला,
भक्तों ने श्रद्धा से इसे है रंगा।
जो भी श्रद्धा से मां के दर पे आता है,
वह मुंहमांगा वर पाता है।
आते हैं हर साल नौराते माता के॥
प्रथम शैलपुत्री, द्वितीय ब्रह्मचारिणी,
तृतीय चन्द्रघण्टा, कुष्माण्डा सुखकारिणी।
पंचम स्कन्दमाता, षष्ठम कात्यायनी माता,
सप्तम कालरात्रि, महागौरी सुखदाता।
अष्टम महागौरी, नवम सिद्धिदात्री माता,
सबकी बिगड़ी बनाने आती हैं माता।
आते हैं हर साल नौराते माता के॥
लाल चुनरिया, लाल चूड़ियां, मां को भाती हैं,
भक्तों की टोलियां मां के भवन को जाती हैं।
जय माता दी, जय माता दी का शोर मचता है,
मां का पावन दरबार सुंदर सजता है।
आते हैं हर साल नौराते माता के॥
लख्खा भी गाए, सुरिन्दर भी गाए,
मां के चरणों में अपना शीश झुकाए।
कर दो कृपा हे मैया हम सब पर अपनी,
मिट जाए जीवन की हर विपदा घनी।
आते हैं हर साल नौराते माता के॥
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य भाव मां दुर्गा के प्रति अनन्य भक्ति और उनके आगमन पर होने वाले आनंद को प्रकट करना है। नवरात्रि के नौ दिन भक्तों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आते हैं। यह समय आत्म-शुद्धि, साधना और मां की आराधना का होता है।
भजन के प्रथम भाग में गायक कहते हैं कि हर साल आने वाले नवरात्रि के नौ दिन भक्तों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आते हैं। यह समय आत्म-शुद्धि, साधना और मां की आराधना का होता है।
दूसरे भाग में मां के दिव्य स्वरूप और उनके वस्त्रों (चोला) का वर्णन है। "मैया का चोला है रंगला" का अर्थ है कि मां का वस्त्र भक्तों के प्रेम और श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ है। जो भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में हाजिरी लगाता है, मां उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उसे मुंहमांगा वरदान देती हैं।
तीसरे भाग में नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाने वाले मां दुर्गा के नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री) का स्मरण किया गया है। यह भाग अत्यंत कल्याणकारी है क्योंकि इसमें नवदुर्गा के नाम का संकीर्तन है, जो भक्तों के सभी कष्टों का निवारण करता है।
अंतिम भाग में मां के श्रृंगार और भक्तों की यात्रा का वर्णन है। लाल चुनरी और लाल चूड़ियां मां को अत्यंत प्रिय हैं। भक्त टोलियों में "जय माता दी" का जयकारा लगाते हुए मां के मंदिर की ओर बढ़ते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस भजन की मुख्य भावना 'भक्ति रस' और 'उत्साह' है। नवरात्रि केवल एक व्रत या उपवास का समय नहीं है, बल्कि यह आदिशक्ति के स्वागत का उत्सव है। यह भजन हमें संदेश देता है कि ईश्वर के प्रति समर्पण ही जीवन के दुखों से मुक्ति का एकमात्र मार्ग है। मां दुर्गा ममता की प्रतिमूर्ति हैं, जो अपने बच्चों के सभी अपराधों को क्षमा कर उन्हें अपनी शरण में ले लेती हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि सामूहिक रूप से ईश्वर का गुणगान करने से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी भाईचारा बढ़ता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण (Parameter) | जानकारी (Information) |
|---|---|
| गीत का नाम (Song Name) | आते हैं हर साल नौराते माता के (Aate Hain Har Saal Naurate Mata Ke) |
| गायक (Singer) | लखबीर सिंह लख्खा (Lakhbir Singh Lakkha) |
| संगीत निर्देशक (Music Director) | सुरिन्दर कोहली (Surinder Kohli) |
| गीतकार (Lyricist) | पारंपरिक / लखबीर सिंह लख्खा (Traditional) |
| एल्बम (Album) | मैया का चोला है रंगला (Maiya Ka Chola Hai Rangla) |
| भाषा (Language) | हिंदी / पंजाबी मिश्रित (Hindi / Punjabi Mix) |
| मुख्य विषय (Theme) | नवरात्रि उत्सव, देवी आराधना, नवदुर्गा महिमा |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
यह भजन मुख्य रूप से लखबीर सिंह लख्खा की जादुई और बुलंद आवाज के लिए जाना जाता है। लखबीर सिंह लख्खा भारत के उन चुनिंदा देवी गीत गायकों में से हैं, जिनकी आवाज में एक अनोखा खिंचाव और भक्ति का तीव्र वेग है। उनके गाए भजन जैसे "प्यारा सजा है दरबार भवानी" और "मैया का चोला है रंगला" आज भी हर मंदिर और पंडाल में गूंजते हैं। इस भजन के संगीत निर्देशक सुरिन्दर कोहली हैं, जिन्होंने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक वाद्यों के साथ इस प्रकार पिरोया है कि सुनते ही पैर थिरकने लगते हैं और मन भक्ति में लीन हो जाता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| नौराते | नवरात्रि (नौ रातें) | देवी दुर्गा की आराधना के नौ पवित्र दिन |
| चोला | वस्त्र / पोशाक | माता रानी को पहनाया जाने वाला दिव्य वस्त्र |
| रंगला | रंगीन / सुंदर रंगों से भरा हुआ | भक्ति और प्रेम के रंग में रंगा हुआ वस्त्र |
| वर | आशीर्वाद / मनोकामना पूर्ति | माता द्वारा भक्तों को दिया जाने वाला फल |
| विपदा | कष्ट / संकट / परेशानी | संसार के भौतिक और आध्यात्मिक दुख |
| श्रद्धा | अटूट विश्वास और आदर | भक्त का भगवान के प्रति सच्चा भाव |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। "आते हैं हर साल नौराते माता के" भजन केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है। नवरात्रि के दौरान इस भजन को सुनने और गाने से मन में सकारात्मक विचारों का उदय होता है। सांस्कृतिक रूप से, यह भजन उत्तर भारत में नवरात्रि के त्योहार की पहचान बन चुका है। डांडिया, गरबा और माता की चौकी जैसे आयोजनों में इस भजन का गायन अनिवार्य रूप से किया जाता है। यह भजन विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है, जहां सभी भेदभाव भूलकर मां के जयकारे लगाते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
इस भजन के माध्यम से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:
- धैर्य और निरंतरता: जैसे नवरात्रि हर साल नियम से आती है, वैसे ही हमें अपने जीवन में अच्छे समय की प्रतीक्षा धैर्यपूर्वक करनी चाहिए।
- समर्पण का महत्व: जब हम अपना सर्वस्व ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
- समानता का भाव: मां के दरबार में अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा सभी एक समान हैं। हमें भी समाज में समानता और समरसता का व्यवहार करना चाहिए।
- सकारात्मकता: मां के जयकारों और भजनों से वातावरण में जो ऊर्जा उत्पन्न होती है, वह हमें मानसिक तनाव और अवसाद से मुक्ति दिलाती है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
इस भजन को सुनने और गाने के लिए सबसे उत्तम समय नवरात्रि का पावन पर्व माना जाता है। इसके अतिरिक्त:
- माता की चौकी और जागरण: किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर आयोजित होने वाले माता के जागरण में इस भजन को गाकर माहौल को भक्तिमय बनाया जाता है।
- नित्य सुबह की प्रार्थना: सुबह के समय इस भजन को सुनने से पूरे दिन मन शांत और ऊर्जावान रहता है।
- पारिवारिक उत्सव: गृह प्रवेश, मुंडन या विवाह के समय देवी पूजन के दौरान इस भजन का श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| मुख्य बिंदु (Key Point) | संक्षिप्त विवरण (Quick Detail) |
|---|---|
| भजन का शीर्षक | आते हैं हर साल नौराते माता के |
| मुख्य कलाकार | लखबीर सिंह लख्खा |
| संगीत शैली | भक्ति संगीत / देवी गीत |
| सर्वोत्तम अवसर | चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि, माता का जागरण |
| मुख्य संदेश | मां दुर्गा की शरण में जाने से सभी संकटों का नाश होता है |
| संबंधित देवी | मां दुर्गा (आदिशक्ति) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "आते हैं हर साल नौराते माता के" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध देवी भजन के मुख्य गायक लखबीर सिंह लख्खा हैं, जो अपनी बुलंद और भावपूर्ण आवाज के लिए जाने जाते हैं।
प्रश्न 2: यह भजन किस एल्बम से लिया गया है?
उत्तर: यह भजन टी-सीरीज द्वारा जारी किए गए अत्यंत लोकप्रिय एल्बम "मैया का चोला है रंगला" से लिया गया है।
प्रश्न 3: नवरात्रि में मां दुर्गा के किन नौ रूपों की पूजा की जाती है?
उत्तर: नवरात्रि में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जिनका उल्लेख इस भजन में भी किया गया है।
प्रश्न 4: इस भजन का संगीत किसने तैयार किया है?
उत्तर: इस भजन का मधुर और ऊर्जावान संगीत प्रसिद्ध संगीत निर्देशक सुरिन्दर कोहली द्वारा तैयार किया गया है।
प्रश्न 5: इस भजन को सुनने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?
उत्तर: इस भजन को सुनने का सबसे उत्तम समय नवरात्रि के नौ दिन, सुबह की पूजा और माता के जागरण या चौकी के दौरान होता है।
प्रश्न 6: "मैया का चोला है रंगला" पंक्ति का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि माता रानी का वस्त्र (चोला) भक्तों की अटूट श्रद्धा, प्रेम और भक्ति के सुंदर रंगों में रंगा हुआ है।
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