Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

किस्मत वालो को नसीब होते है ऐसे भजन (Shraddha Bhakti)

पढ़ें किस्मत वालो को नसीब होते है ऐसे भजन | Mata Rani Ke Bhajan | Mata Bhajan |Devi Geet | Shraddha Bhakti - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी

माता रानी की परम कृपा, असीम करुणा और उनकी दिव्य आराधना से जुड़ा यह पावन भजन 'किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन' केवल एक गीत नहीं, बल्कि भक्तों के अंतःकरण को जाग्रत करने वाली एक आध्यात्मिक संजीवनी है। सनातन धर्म और देवी उपासना की समृद्ध परंपरा में माता वैष्णो देवी, माँ दुर्गा, और शेरावाली माँ के भजनों का अत्यंत विशिष्ट स्थान माना जाता है। जब कोई साधक या भक्त सच्चे हृदय, पूर्ण समर्पण और निष्कलंक भाव से आदिशक्ति जगदम्बा के चरणों में अपनी हाजिरी लगाता है, तो उसके जीवन के समस्त संताप, भय और अंधकार स्वतः ही विलीन होने लगते हैं। देवी भगवती के ये भजन मन को असीम शांति, ऊर्जा और अटूट विश्वास से भर देते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय देवी भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, श्रवण-गायन की विधि तथा माता रानी की उपासना से जुड़ी तमाम पावन बातों का रसास्वादन करेंगे, जो आपके जीवन में भक्ति और सकारात्मकता का संचार करेंगी।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई:

किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन,
मैया के दर पे जो गाते हैं, वो ही हैं पावन।
किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन...

अंतरा 1:

जो भी माँ के द्वार पे आता, खाली हाथ न जाता है,
शेरावाली माँ की ममता, सबको गले लगाती है।
भक्तों की बिगड़ी बनाती, माँ का है ये पावन भवन,
किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन...

अंतरा 2:

मैया के चरणों की धूलि, माथे पे जो लगाता है,
उसके जीवन का हर संकट, पल में दूर हो जाता है।
भक्ति के रस में डूबकर, करते हैं जो माँ का सुमिरन,
किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन...

अंतरा 3:

लाल चुनरिया, मैया की गोदी, ममता का वरदान है,
जिसने पाया माँ का प्यार, वो जग में महान है।
श्रद्धा भाव से अर्पित करते, भक्त यहाँ अपना तन-मन,
किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य संदेश अत्यंत गहरा और दार्शनिक है। यहाँ 'किस्मत' या 'भाग्य' का अर्थ केवल भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक जागृति और भगवद-कृपा से है। सनातन दर्शन के अनुसार, करोड़ों जन्मों के संचित पुण्यों के उदय होने पर ही मनुष्य के मन में ईश्वर के प्रति अनुराग और भक्ति का जन्म होता है। इसलिए, जो व्यक्ति माता रानी के भजनों का श्रवण या गायन करता है, वह वास्तव में अत्यंत सौभाग्यशाली है।

भजन के प्रथम अंतरे में माँ की ममता और उनके दरबार की महिमा का वर्णन है। माँ शेरावाली का दरबार एक ऐसा पावन स्थल है जहाँ अमीर-गरीब, ऊँच-नीच का कोई भेद नहीं होता। जो भी भक्त निष्कपट भाव से माँ के चरणों में आता है, माँ उसे अपनी ममतामयी गोद में समेट लेती हैं। द्वितीय अंतरे में 'चरण धूलि' के महत्व को प्रतिपादित किया गया है। संतों का मानना है कि भगवती के चरणों की धूलि में वह सामर्थ्य है जो प्रारब्ध के बुरे लेखों को भी बदल सकती है। अंतिम अंतरे में समर्पण की पराकाष्ठा है, जहाँ भक्त अपना सर्वस्व (तन, मन, धन) माँ के चरणों में अर्पित कर जीवन की सार्थकता को प्राप्त करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है क्योंकि यह सीधे हृदय को स्पर्श करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • कृतज्ञता का भाव: यह भजन भक्त के भीतर इस बात का अहसास कराता है कि भक्ति का मार्ग मिलना ही अपने आप में ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा है।
  • वात्सल्य रस की प्रधानता: माँ और संतान के पवित्र संबंध को रेखांकित करते हुए यह भजन साधक को सुरक्षा और परम शांति की अनुभूति कराता है।
  • सामूहिक गायन के अनुकूल: इसकी लय और धुन इतनी सरल और कर्णप्रिय है कि इसे कीर्तन, जागरण और चौकियों में सामूहिक रूप से बड़े उत्साह के साथ गाया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना के लिए हर क्षण पवित्र है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां शास्त्रों के अनुकूल मानी गई हैं:

  • शुभ समय: चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन दिनों में इस भजन का गायन विशेष फलदायी होता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को देवी पूजन के समय इसे गाया जा सकता है।
  • गायन की विधि: प्रातःकाल या संध्याकाल में स्नान आदि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करने के उपरांत पूर्ण तन्मयता और श्रद्धा के साथ इस भजन का गायन करें।
  • मानसिक स्थिति: गायन के समय मन में किसी के प्रति द्वेष या अहंकार नहीं होना चाहिए। पूर्ण समर्पण और दीनता का भाव ही माँ को शीघ्र प्रसन्न करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात आदिशक्ति, सर्वमंगला, जगज्जननी माँ दुर्गा (शेरावाली) को समर्पित है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, माँ दुर्गा ही इस सृष्टि की आदि-शक्ति हैं, जो त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को भी ऊर्जा प्रदान करती हैं। भारतीय संत परंपरा में माँ की आराधना को 'शक्त साधना' कहा गया है। रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और आदि शंकराचार्य जैसे महान संतों ने भी माँ की ममतामयी और कल्याणकारी रूप की वंदना की है। यह भजन उसी शाक्त परंपरा का एक आधुनिक और सुगम रूप है जो जन-साधारण को भक्ति मार्ग से जोड़ता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक उत्तर भारतीय लोक शैली और देवी गीतों की समृद्ध विरासत से प्रेरित है। इसकी रचना लोक कवियों द्वारा भक्तों की भावनाओं को सरल शब्दों में पिरोने के उद्देश्य से की गई थी। पंजाब और जम्मू क्षेत्र में वैष्णो देवी यात्रा के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक 'भेंट' (Devi Bhents) के प्रभाव के कारण इस भजन में एक विशेष प्रकार का उत्साह और माधुर्य देखने को मिलता है। समय के साथ यह भजन विभिन्न प्रसिद्ध गायकों की आवाज में रिकॉर्ड होकर देश-विदेश के हर हिंदू घर और मंदिर का हिस्सा बन गया।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें कहीं-कहीं पंजाबी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली 'गेय' (गाए जाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक अत्यंत सहज हैं, जैसे 'मैया की गोदी' और 'चरणों की धूलि'। यह सरलता ही इस भजन की सबसे बड़ी शक्ति है, जिससे अनपढ़ से लेकर विद्वान तक, हर कोई इसके भाव से सीधे जुड़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब हम यह मानते हैं कि भजन गाना भी हमारी 'किस्मत' या ईश्वर की कृपा से है, तो हमारे भीतर का कर्तापन का अहंकार समाप्त हो जाता है।
  2. समानता का संदेश: माँ के द्वार पर सभी का समान रूप से स्वागत होता है, जो हमें समाज में समरसता और बंधुत्व की भावना बनाए रखने की सीख देता है।
  3. धैर्य और विश्वास: 'खाली हाथ न जाता है' यह पंक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर के न्याय और उनकी करुणा पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए; सही समय आने पर वे हमारी झोली अवश्य भरते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
किस्मत वाले सौभाग्यशाली व्यक्ति वे जीव जिन पर पूर्व जन्मों के शुभ कर्मों के कारण भगवद-कृपा हुई है।
पावन पवित्र / शुद्ध जो सांसारिक विकारों से मुक्त होकर निष्पाप हो गया हो।
भवन मंदिर / दरबार वह स्थान जहाँ साक्षात ईश्वरीय चेतना का वास होता है।
सुमिरन स्मरण / ध्यान मन ही मन निरंतर भगवान के नाम का जप करना।
चुनरिया लाल वस्त्र / ओढ़नी सौभाग्य, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन..."
कवि कहते हैं कि ईश्वर की स्तुति करने का अवसर हर किसी को नहीं मिलता। यह केवल उन्हीं को प्राप्त होता है जिन पर विधाता और जगदम्बा की विशेष अनुकंपा होती है।

"जो भी माँ के द्वार पे आता, खाली हाथ न जाता है..."
माँ का हृदय अत्यंत विशाल है। वे कल्पवृक्ष के समान हैं। जो भी याचक बनकर उनके पास आता है, माँ उसकी झोली को सुख, समृद्धि और संतोष से भर देती हैं।

"मैया के चरणों की धूलि, माथे पे जो लगाता है..."
चरण-धूलि को माथे पर लगाना पूर्ण आत्मसमर्पण का प्रतीक है। जब भक्त अपना मस्तक माँ के चरणों में झुका देता है, तो उसके अहंकार का नाश होता है और प्रारब्ध के कष्ट मिट जाते हैं।

"लाल चुनरिया, मैया की गोदी, ममता का वरदान है..."
लाल रंग शक्ति और सुहाग का प्रतीक है। माँ की गोदी में बैठकर जीव सांसारिक तापों से मुक्त होकर परम सुरक्षा का अनुभव करता है, जैसे एक छोटा बच्चा अपनी माँ के आंचल में निश्चिंत रहता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करने से साधना का फल बहुगुणित हो जाता है:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥"

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।

"या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है, बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम किस्मत वालों को नसीब होते हैं ऐसे भजन
आराध्य देवी माँ दुर्गा / शेरावाली / वैष्णो देवी
मुख्य रस भक्ति रस, वात्सल्य रस
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, मंगलवार, शुक्रवार
मूल संदेश समर्पण, कृतज्ञता और निष्काम भक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य भाव 'कृतज्ञता' और 'समर्पण' है। यह दर्शाता है कि ईश्वर की आराधना करने का सौभाग्य भी केवल उनकी असीम कृपा और हमारे पूर्व जन्मों के पुण्यों से ही प्राप्त होता है।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय नवरात्रि के नौ दिन, मंगलवार, शुक्रवार और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान जैसे माता की चौकी या जागरण के दौरान होता है।

हाँ, आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय इस भजन को गा सकते हैं। यह घर के वातावरण को सकारात्मक और भक्तिमय बनाता है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रूप से यह सिद्ध है कि भक्ति गीतों के श्रवण से तनाव कम होता है, मन को शांति मिलती है और सकारात्मक विचारों का संचार होता है।

लाल चुनरिया माता रानी के सुहाग, शक्ति, ऊर्जा और ममतामयी सुरक्षा का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से भक्त को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

आवश्यक नहीं है, परंतु भजन के पूर्व "ॐ दुं दुर्गायै नमः" या "सर्वमंगल मांगल्ये..." श्लोक का उच्चारण करने से मन अधिक एकाग्र होता है।

शास्त्रों में कहा गया है- "भावो ही विद्यते देवः" अर्थात् ईश्वर भाव में ही बसते हैं। बिना सच्चे भाव के की गई पूजा अधूरी है, जबकि सच्चे हृदय से गाया गया एक छोटा सा भजन भी माँ को स्वीकार्य होता है।

यह भजन साधक के भीतर दीनता (शरणागति) का भाव जगाता है, जो कि भक्ति मार्ग की पहली सीढ़ी है। इससे साधक का मन सांसारिक प्रपंचों से हटकर भगवद-चरणों में लीन होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों और संस्कृत विद्वानों की देखरेख में तैयार किया गया है। इस भजन के बोल और भावार्थ को पारंपरिक शाक्त ग्रंथों और लोक परंपराओं के आलोक में सत्यापित किया गया है। यह सामग्री पूरी तरह से "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म की समृद्ध भजन परंपरा को शुद्ध और प्रामाणिक रूप में पाठकों तक पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: देवी की महिमा और उनके ममतामयी स्वरूप का वर्णन।
  • श्री दुर्गा सप्तशती: देवी कवच और अर्गला स्तोत्र के दार्शनिक पहलू।
  • सनातन लोक भजन परंपरा: उत्तर भारत के पारंपरिक देवी जागरणों और कीर्तन मंडलियों के मौखिक संग्रह।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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