भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे जैसा कोई न दूजा (Tere Jaisa Koi Na Duja)

अनूप जलोटा द्वारा स्वरबद्ध प्रसिद्ध साईं भजन 'तेरे जैसा कोई न दूजा' के लिरिक्स और अर्थ यहाँ पढ़ें। शिरडी साईं बाबा की भक्ति में डूबने के लिए श्रेष्ठ भजन।

महान भजन सम्राट अनूप जलोटा की मंत्रमुग्ध कर देने वाली आवाज में गाया गया साईं भजन "तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे" भक्ति रस से सराबोर एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है। यह भजन शिरडी के परम पूज्य संत श्री साईं बाबा के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) के दिव्य भाव को अभिव्यक्त करता है। भारतीय सुगम संगीत और भक्ति संगीत के क्षेत्र में अनूप जलोटा जी ने अपनी अनूठी गायन शैली से इस भजन को हर भक्त के हृदय का कंठहार बना दिया है। इस भजन का मुख्य स्वर करुणा, विनय और अनन्य भक्ति का है, जो साधक को सांसारिक कोलाहल से दूर ले जाकर शिरडी के पावन वातावरण और बाबा के चरणों में लीन कर देता है। साईं संध्या, गुरुवार की विशेष पूजा और दैनिक सत्संगों में इस भजन का श्रवण और कीर्तन भक्तों को असीम मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ तेरे जैसा कोई न दूजा ॥

(स्थायी)
तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे,
करूँ मैं तेरी ही पूजा, ओ साईं मेरे।
तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे...

(अंतरा - 1)
शिरडी के तुम हो दाता, बिगड़ी बनाने वाले,
दुखियों के तुम हो रक्षक, कष्टों को हरने वाले।
जो भी शरण में आया, खाली न कोई लौटा,
सबका भला ही सोचा, ओ साईं मेरे।
तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे...

(अंतरा - 2)
श्रद्धा सबूरी का तुमने, पावन संदेश दिया,
मानवता की सेवा का, सबको उपदेश दिया।
हिंदू हो या मुसलमां, सब एक ही हैं भाई,
यह ज्ञान तुमने बांटा, ओ साईं मेरे।
तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे...

(अंतरा - 3)
चरणों में तेरे बाबा, सारा जहां हमारा,
भटके हुए को मिलता, तेरे ही दर सहारा।
उदी की एक चुटकी, हर रोग को मिटाए,
कृपा सदा ही रखना, ओ साईं मेरे।
तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे,
करूँ मैं तेरी ही पूजा, ओ साईं मेरे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन शिरडी के साईं बाबा की महिमा और उनके अद्वितीय स्वरूप का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण वर्णन करता है। भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के हृदय में बाबा के प्रति अनन्य समर्पण भाव को जाग्रत करती है।

समर्पण और अनन्य भक्ति: भजन की शुरुआत इस स्वीकारोक्ति के साथ होती है कि इस संपूर्ण चराचर जगत में साईं बाबा के समान दयालु, कृपालु और रक्षक कोई दूसरा नहीं है। भक्त अपने जीवन की बागडोर पूरी तरह से बाबा के हाथों में सौंपते हुए कहता है कि वह केवल उन्हीं की आराधना और पूजा करेगा। यह भाव श्रीमद्भगवद्गीता के अनन्य शरणागति के सिद्धांत को दर्शाता है।

करुणा और परोपकार: भजन के अंतरा में बाबा को "बिगड़ी बनाने वाला" और "दुखियों का रक्षक" कहा गया है। शिरडी में अपने जीवनकाल के दौरान बाबा ने कभी भी किसी याचक को खाली हाथ नहीं लौटाया। चाहे वह शारीरिक व्याधि से पीड़ित हो या मानसिक संताप से, बाबा की शरण में आते ही उसके सभी कष्ट दूर हो जाते थे। भजन का यह भाग बाबा की असीम करुणा को रेखांकित करता है।

एकता और मानवता का संदेश: भजन में बाबा के सबसे महत्वपूर्ण उपदेश "श्रद्धा और सबूरी" तथा "सबका मालिक एक" को समाहित किया गया है। बाबा ने जाति, धर्म और संप्रदाय की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को ही सर्वोपरि धर्म माना। हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे का जो संदेश उन्होंने शिरडी की पावन भूमि से दिया, वह आज के युग में भी अत्यंत प्रासंगिक है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

अनूप जलोटा जी द्वारा गाए गए इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट बनाती हैं:

  • सरलता और सुबोधता: भजन की भाषा अत्यंत सरल और सुबोध है, जिससे सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को आसानी से समझ सकता है।
  • राग और संगीत का समन्वय: अनूप जलोटा जी ने इसे एक अत्यंत शांत और ध्यानमयी धुन में पिरोया है। भजन का संगीत मन को एकाग्र करने और ध्यान की अवस्था में ले जाने में सहायक है।
  • श्रद्धा और सबूरी का समावेशन: यह भजन केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि यह साईं चरित्र के मूल सिद्धांतों का स्मरण कराने वाला एक माध्यम है।
  • सर्वधर्म समभाव: भजन की पंक्तियां संकीर्णताओं को तोड़कर ईश्वर की एकता और मानवता के प्रति प्रेम को बढ़ावा देती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए सभी समय शुभ माने गए हैं, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है:

शुभ समय: गुरुवार का दिन शिरडी साईं बाबा की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इस दिन सुबह या संध्याकाल में इस भजन का गायन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, दैनिक सुबह की प्रार्थना या रात्रि को सोने से पहले इसे सुनने से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गायन और श्रवण की विधि:

  • सर्वप्रथम स्वच्छ होकर शांत स्थान पर बैठें।
  • शिरडी साईं बाबा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष एक दीपक प्रज्वलित करें।
  • बाबा को थोड़ी सी उदी (भस्म) और पुष्प अर्पित करें।
  • पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भजन के शब्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसका श्रवण या गायन करें।
  • भजन की समाप्ति के बाद कुछ क्षण मौन रहकर बाबा के स्वरूप का ध्यान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से शिरडी के साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत के एक महान भारतीय आध्यात्मिक गुरु, योगी और सूफी संत थे। उन्हें उनके भक्त भगवान दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं। बाबा का जीवन सादगी, त्याग और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का साक्षात उदाहरण था। उन्होंने शिरडी की एक जीर्ण-शीर्ण मस्जिद (जिसे उन्होंने द्वारकामाई नाम दिया) में रहकर अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत किया और वहां से प्रेम, दया, क्षमा, आंतरिक शांति और परोपकार का संदेश दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

साईं भजनों की परंपरा में इस भजन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। 1970 और 1980 के दशकों में जब भारत में भक्ति संगीत का पुनरुत्थान हो रहा था, तब अनूप जलोटा जी ने पारंपरिक भजनों को आधुनिक शास्त्रीय और सुगम संगीत के मिश्रण के साथ प्रस्तुत करना शुरू किया। "तेरे जैसा कोई न दूजा" भजन की रचना इसी दौर की देन है। इस भजन के माध्यम से शिरडी साईं बाबा के भक्तों को एक ऐसा गीत मिला जो उनकी दैनिक प्रार्थना का हिस्सा बन गया। भजन की पृष्ठभूमि शिरडी के इतिहास और बाबा के चमत्कारों से प्रेरित है, जहां अमीर-गरीब, राजा-रंक सभी एक ही पंक्ति में बैठकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करते थे।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें उर्दू और लोकभाषा के शब्दों का बहुत ही सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'पद' या 'गीत' विधा के अंतर्गत आता है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं अत्यंत सजीव हैं। उदाहरण के लिए, "उदी की एक चुटकी, हर रोग को मिटाए" पंक्ति में 'उदी' को केवल एक भौतिक भस्म नहीं, बल्कि बाबा के आशीर्वाद और संजीवनी के रूप में चित्रित किया गया है। भजन का प्रवाह अत्यंत सहज है, जिससे गायक और श्रोता दोनों ही इसके साथ एकरूप हो जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख और आध्यात्मिक संदेश प्रदान करता है:

आध्यात्मिक संदेश व्यावहारिक जीवन में महत्व
श्रद्धा (Faith): ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना। कठिन परिस्थितियों में भी विचलित न होना और सकारात्मक बने रहना।
सबूरी (Patience): सही समय का धैर्यपूर्वक इंतजार करना। जल्दबाजी और क्रोध से बचना, मानसिक शांति बनाए रखना।
सर्वधर्म समभाव: सभी धर्मों का आदर करना। समाज में भाईचारा, समरसता और शांति को बढ़ावा देना।
परोपकार और सेवा: निर्धनों और असहायों की सहायता करना। अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करना।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
दूजा दूसरा / अन्य कोई साईं बाबा के अद्वितीय और अतुलनीय स्वरूप को दर्शाता है।
दाता देने वाला / दानी बाबा की असीम उदारता और कृपा को प्रकट करता है।
सबूरी धैर्य / सहनशीलता साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए आवश्यक धैर्य।
उदी पवित्र भस्म द्वारकामाई की धूनी से प्राप्त भस्म, जो शारीरिक और मानसिक कष्टों को दूर करती है।
जहां संसार / जगत इस नश्वर संसार की समस्त वस्तुएं बाबा के चरणों के अधीन हैं।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "तेरे जैसा कोई न दूजा, ओ साईं मेरे, करूँ मैं तेरी ही पूजा, ओ साईं मेरे।"
हे मेरे साईं बाबा! इस पूरे ब्रह्मांड में आपके समान कृपालु और दयालु कोई दूसरा नहीं है। इसलिए मैं अपने मन, वचन और कर्म से केवल आपकी ही आराधना और पूजा करता हूँ।

२. "शिरडी के तुम हो दाता, बिगड़ी बनाने वाले, दुखियों के तुम हो रक्षक, कष्टों को हरने वाले।"
आप शिरडी के परम दानी हैं जो भक्तों के बिगड़े हुए कार्यों को संवार देते हैं। आप दीन-दुखियों के रक्षक हैं और उनके जीवन के सभी कष्टों और संतापों को हरने वाले हैं।

३. "जो भी शरण में आया, खाली न कोई लौटा, सबका भला ही सोचा, ओ साईं मेरे।"
आपकी चौखट पर जो कोई भी सच्ची श्रद्धा के साथ आया, वह कभी खाली हाथ वापस नहीं गया। आपने हमेशा अपने भक्तों के कल्याण और भलाई के बारे में ही सोचा है।

४. "श्रद्धा सबूरी का तुमने, पावन संदेश दिया, मानवता की सेवा का, सबको उपदेश दिया।"
आपने संसार को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) का परम पावन मार्ग दिखाया। आपने सभी को उपदेश दिया कि मानव सेवा ही माधव सेवा है।

५. "हिंदू हो या मुसलमां, सब एक ही हैं भाई, यह ज्ञान तुमने बांटा, ओ साईं मेरे।"
आपने समाज में फैले भेदभाव को मिटाकर यह सिखाया कि चाहे कोई हिंदू हो या मुसलमान, सभी एक ही ईश्वर की संतान हैं और आपस में भाई-भाई हैं।

६. "चरणों में तेरे बाबा, सारा जहां हमारा, भटके हुए को मिलता, तेरे ही दर सहारा।"
हे बाबा! हमारे लिए तो आपके चरण ही हमारा संपूर्ण संसार हैं। जो लोग जीवन की राह से भटक गए हैं, उन्हें आपके पावन दर पर ही सच्चा आश्रय और सहारा मिलता है।

७. "उदी की एक चुटकी, हर रोग को मिटाए, कृपा सदा ही रखना, ओ साईं मेरे।"
आपकी पावन धूनी की एक चुटकी उदी में वह दिव्य शक्ति है जो बड़े से बड़े असाध्य रोगों को भी शांत कर देती है। हे साईं! अपनी यह असीम कृपा हम पर सदैव बनाए रखना।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ शिरडी साईं बाबा के निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से भक्ति भाव और अधिक प्रगाढ़ होता है:

॥ साईं गायत्री मंत्र ॥

ॐ शिरडी वासाय विद्महे, सचिदानंदाय धीमहि, तन्नो साईं प्रचोदयात॥

अर्थ: हम शिरडी के निवासी और सच्चिदानंद स्वरूप साईं बाबा को जानते हैं। हम उनका ध्यान करते हैं। वे साईं बाबा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

॥ साईं बाबा का महामंत्र ॥

"ॐ साईं राम" (Om Sai Ram)

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम तेरे जैसा कोई न दूजा (Tere Jaisa Koi Na Duja)
आराध्य देव शिरडी के साईं बाबा (Shirdi Sai Baba)
मुख्य गायक अनूप जलोटा (Anup Jalota)
भाषा सरल हिंदी (Hindi)
भक्ति का भाव समर्पण, श्रद्धा, करुणा, विनय (Surrender & Devotion)
उपयुक्त अवसर गुरुवार पूजा, साईं संध्या, सत्संग, दैनिक प्रार्थना
मुख्य संदेश श्रद्धा, सबूरी, सर्वधर्म समभाव, मानवता की सेवा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य गायक भारत के सुप्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा जी हैं। उनकी मधुर और शास्त्रीय गायन शैली ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

यह भजन शिरडी के महान संत श्री साईं बाबा को समर्पित है, जिन्हें उनके भक्त भगवान दत्तात्रेय का अवतार और करुणा का सागर मानते हैं।

भजन में कहा गया है कि "उदी की एक चुटकी, हर रोग को मिटाए"। उदी शिरडी की द्वारकामाई मस्जिद में जलने वाली पवित्र धूनी की भस्म है, जिसे भक्त चमत्कारी और आरोग्य प्रदान करने वाली मानते हैं।

साईं बाबा के दो मुख्य संदेश "श्रद्धा" (अटूट विश्वास) और "सबूरी" (धैर्य) हैं। भजन में इन दोनों का उल्लेख कर भक्तों को जीवन में इन्हें अपनाने की सीख दी गई है।

वैसे तो इस भजन को प्रतिदिन सुना जा सकता है, लेकिन गुरुवार का दिन साईं बाबा की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इस दिन इसका श्रवण अत्यंत फलदायी होता है।

जी हाँ, भजन की पंक्तियां "हिंदू हो या मुसलमां, सब एक ही हैं भाई" स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि बाबा ने सभी धर्मों की एकता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया था।

यह भजन भारतीय सुगम संगीत और शास्त्रीय रागों के मिश्रण पर आधारित है। इसकी धुन अत्यंत शांत, मधुर और ध्यानमयी है, जो मन को तुरंत एकाग्र कर देती है।

"सबका मालिक एक" का अर्थ है कि ईश्वर एक ही है, भले ही लोग उसे अलग-अलग नामों और रूपों में पूजते हों। यह सिद्धांत अद्वैत वेदांत और सूफी दर्शन के अनुकूल है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ति और संगीत के अद्भुत संगम को प्रदर्शित करता है। "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत इस भजन के आध्यात्मिक पहलुओं, साहित्यिक सौंदर्य और शिरडी साईं बाबा के जीवन दर्शन का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। अनूप जलोटा जी की दिव्य आवाज ने इस भजन को केवल एक गीत न रखकर एक जीवंत साधना बना दिया है। पाठकों और साधकों की सुविधा के लिए यहाँ शुद्ध लिरिक्स और भावार्थ का समावेश किया गया है ताकि वे इसका पूर्ण लाभ उठा सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री साईं सच्चरित्र: साईं बाबा के जीवन और उपदेशों का प्रामाणिक ग्रंथ।
  • पारंपरिक साईं भजन संग्रह: शिरडी संस्थान और विभिन्न भक्ति मंचों द्वारा स्वीकृत पाठ।
  • भक्तिलोक संपादकीय मंडल: भजनों के शुद्धिकरण और आध्यात्मिक व्याख्या के लिए समर्पित शोध दल।

संबंधित भजन एवं लेख

भक्तिलोक पर साईं बाबा के अन्य पावन भजनों और स्तोत्रों का आनंद लेने के लिए निम्नलिखित कड़ियों पर जाएं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!