‘जग जननी है माँ जगदम्बे माँ शेरावाली’ भजन माँ दुर्गा की असीम शक्ति, करुणा और वात्सल्य का एक अत्यंत भावपूर्ण गुणगान है। यह भजन न केवल माँ के 'जगदम्बा' (संसार की माता) स्वरूप को नमन करता है, बल्कि उनके 'शेरावाली' (सिंहवाहिनी) रूप की वीरता और दुष्टों के संहारक प्रभाव को भी रेखांकित करता है। चेतना शुक्ला द्वारा स्वरबद्ध यह भजन भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करता है और उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि संसार के समस्त विघ्न-बाधाओं का नाश करने वाली माँ दुर्गा सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर हैं। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा, और दैनिक साधना के समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपने अहंकार को त्यागकर माँ के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करते हैं। इसकी सरल शब्दावली और मधुर धुन इसे हर आयु वर्ग के भक्तों के बीच लोकप्रिय बनाती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली,
जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली।
दुख हरनी है माँ सुख की खानी, माँ शेरावाली,
जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली॥
पर्वत ऊपर तेरा डेरा, मैया शेरावाली,
भक्तों का तू करती सवेरा, मैया शेरावाली।
तेरी ज्योति से जगमग सारा, माँ शेरावाली,
जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली॥
सिंह सवारी मैया तेरी, माँ शेरावाली,
दुष्टों की तू काल है मैया, माँ शेरावाली।
भक्तों की तू बिगड़ी संवारे, माँ शेरावाली,
जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन माँ भगवती के दिव्य स्वरूप और उनकी असीम अनुकंपा को समर्पित है। भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास की अभिव्यक्ति है। प्रथम अंतरे में भक्त माँ को 'जग जननी' यानी संपूर्ण ब्रह्मांड की माता कहकर पुकारता है। वह स्वीकार करता है कि माँ ही इस सृष्टि की रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। माँ जगदम्बा का 'शेरावाली' स्वरूप उनकी शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है, जो भक्तों को जीवन के संघर्षों से लड़ने का साहस प्रदान करता है।
भजन में माँ को 'दुख हरनी' और 'सुख की खानी' कहा गया है। इसका अर्थ है कि माँ अपने शरण में आने वाले भक्तों के सभी कष्टों, संतापों और मानसिक क्लेशों को हर लेती हैं और उन्हें सुख, शांति तथा समृद्धि का वरदान देती हैं। जब मनुष्य संसार की कठिनाइयों से थक जाता है, तब माँ की शरण ही उसे परम शांति प्रदान करती है। माँ का पर्वत पर निवास करना (पर्वत ऊपर तेरा डेरा) उनके उच्च और दिव्य स्थान को दर्शाता है, जो सांसारिक कोलाहल से दूर, शांत और पवित्र है।
मैया की सिंह सवारी उनके शौर्य, पराक्रम और दुष्टों के दमन की क्षमता को प्रदर्शित करती है। सिंह जो कि पशुराज है, वह भी माँ के अधीन है, जो यह दर्शाता है कि प्रकृति की सबसे शक्तिशाली शक्तियां भी माँ की इच्छा के अनुसार कार्य करती हैं। माँ अपने भक्तों के जीवन के अंधकार को दूर कर ज्ञान और भक्ति का सवेरा लाती हैं। उनकी दिव्य ज्योति से संपूर्ण ब्रह्मांड आलोकित है, और जो भी भक्त सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, उसके जीवन की बिगड़ी हुई परिस्थितियां भी संवर जाती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक साधना का माध्यम भी है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- समर्पण का भाव: भजन में भक्त का माँ के प्रति पूर्ण समर्पण झलकता है। यह सिखाता है कि ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही जीवन की नैया को पार लगा सकता है।
- शक्ति और करुणा का समन्वय: जहाँ एक ओर माँ को दुष्टों का काल बताया गया है, वहीं दूसरी ओर उन्हें भक्तों की बिगड़ी संवारने वाली करुणामयी माता के रूप में चित्रित किया गया है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह होता है और भय, चिंता तथा अवसाद का नाश होता है।
- नवरात्रि साधना में उपयोगी: नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का गायन देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का एक सुगम मार्ग माना जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:
सर्वोत्तम समय: सुबह के समय (ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के समय) इस भजन को सुनने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है। संध्या आरती के समय भी इसका गायन अत्यंत मंगलकारी होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और शाम दोनों समय इस भजन का सामूहिक कीर्तन करना चाहिए।
गायन की विधि:
- सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक जलाएं।
- माँ को लाल पुष्प, रोली और अक्षत अर्पित करें।
- पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ, ताली बजाते हुए या वाद्य यंत्रों के साथ इस भजन का गायन करें।
- भजन की समाप्ति पर माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन आदि शक्ति माँ दुर्गा (जगदम्बा) को समर्पित है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, माँ दुर्गा ही आदि शक्ति हैं, जिन्होंने महिषासुर, शुंभ-निशुंभ और चंड-मुंड जैसे भयानक राक्षसों का संहार कर देवताओं और मनुष्यों की रक्षा की थी। इस भजन में माँ के 'शेरावाली' रूप की वंदना की गई है, जो जम्मू के त्रिकुटा पर्वत पर स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस भजन को आधुनिक समय में सुप्रसिद्ध भजन गायिका चेतना शुक्ला ने अपनी मधुर और ओजस्वी आवाज से सजाया है। उनकी गायकी में एक विशेष प्रकार की तन्मयता और भक्ति रस होता है, जो श्रोताओं को सीधे माँ के चरणों से जोड़ देता है। इस भजन की लोकप्रियता का एक बड़ा श्रेय उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति को जाता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
पारंपरिक रूप से, देवी भजन भारतीय लोक संस्कृति और भक्ति आंदोलन का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं। 'जग जननी है माँ जगदम्बे' भजन की पृष्ठभूमि भी इसी समृद्ध लोक परंपरा से प्रेरित है। उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में देवी माँ के जगराते और चौकियों की एक लंबी परंपरा रही है। इन आयोजनों में गाए जाने वाले भजनों में माँ के महिमामयी रूपों का वर्णन सरल और सुबोध भाषा में किया जाता है ताकि आम जनमानस भी इससे जुड़ सके।
इस भजन की रचना में प्रयुक्त शब्द सदियों से चले आ रहे देवी स्तोत्रों और पुराणों के सार को समेटे हुए हैं। माँ के सिंह पर सवार होने और पर्वतों पर निवास करने की कथाएं देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण के 'देवी महात्म्य' (दुर्गा सप्तशती) से ली गई हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें राजस्थानी और पंजाबी लोक शैलियों का भी सुंदर प्रभाव देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गेय (गाने योग्य) है।
- अलंकार और रूपक: भजन में 'सुख की खानी' और 'दुष्टों की काल' जैसे सुंदर रूपकों का प्रयोग किया गया है, जो माँ के बहुआयामी व्यक्तित्व को स्पष्ट करते हैं।
- लय और ताल: इसकी लय मध्यम से तीव्र की ओर बढ़ती है, जो कीर्तन के दौरान भक्तों को नृत्य करने और मग्न होने के लिए प्रेरित करती है।
- पुनरावृत्ति (Refrain): 'जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली' पंक्ति की बार-बार पुनरावृत्ति मन को एकाग्र करने और ध्यान लगाने में सहायक होती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
- अहंकार का त्याग: जब हम माँ को 'जग जननी' स्वीकार करते हैं, तो हमारे भीतर का यह भ्रम दूर हो जाता है कि हम ही इस संसार के कर्ता हैं। यह हमें विनम्र बनाता है।
- बुराई पर अच्छाई की जीत: माँ का 'दुष्टों की काल' रूप हमें यह विश्वास दिलाता है कि चाहे अंधकार कितना भी घना क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
- कठिनाइयों में धैर्य: 'भक्तों की तू बिगड़ी संवारे' पंक्ति हमें सिखाती है कि जीवन में जब भी कोई संकट आए, हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि माँ पर विश्वास रखकर धैर्यपूर्वक प्रयास करते रहना चाहिए।
- समानता का भाव: माँ के दरबार में अमीर-गरीब, राजा-रंक सभी समान हैं। वह सभी पर अपनी कृपा समान रूप से बरसाती हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| जग जननी | संसार को जन्म देने वाली माता | आदि शक्ति, जो संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी हैं। |
| जगदम्बे | जगत की अंबा (माता) | समस्त जीवों का पालन-पोषण करने वाली देवी। |
| दुख हरनी | कष्टों को दूर करने वाली | भक्तों के त्रिविध तापों (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक) का नाश करने वाली। |
| सुख की खानी | आनंद और सुख का भंडार | परम आनंद और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी। |
| सिंह सवारी | शेर पर सवारी करने वाली | शौर्य, साहस और निर्भयता का प्रतीक। |
| बिगड़ी संवारे | बिगड़े हुए काम बनाना | प्रारब्ध के कठिन कर्मों के प्रभाव को कम कर जीवन को सुगम बनाना। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
पंक्ति: "जग जननी है माँ जगदम्बे, माँ शेरावाली..."
भावार्थ: हे माँ! आप ही इस संपूर्ण जगत की माता हैं। आप ही जगदम्बा हैं और सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करने वाली शेरावाली हैं। मैं आपके इस परम पावन स्वरूप को बारंबार प्रणाम करता हूँ।
पंक्ति: "दुख हरनी है माँ सुख की खानी, माँ शेरावाली..."
भावार्थ: हे माँ, आप अपने भक्तों के सभी दुखों और कष्टों को हरने वाली हैं। आप ही समस्त सुखों, शांति और ऐश्वर्य का भंडार हैं। आपकी शरण में आने के बाद भक्त को किसी अन्य वस्तु की अभिलाषा नहीं रह जाती।
पंक्ति: "पर्वत ऊपर तेरा डेरा, मैया शेरावाली, भक्तों का तू करती सवेरा, मैया शेरावाली..."
भावार्थ: हे मैया, आपका निवास स्थान ऊंचे पर्वतों पर है, जो आपकी दिव्यता और सर्वोच्चता को दर्शाता है। आप अपने भक्तों के जीवन में फैले अज्ञान और निराशा के अंधकार को दूर कर ज्ञान और आशा का नया सवेरा लाती हैं।
पंक्ति: "तेरी ज्योति से जगमग सारा, माँ शेरावाली..."
भावार्थ: हे माँ, आपकी दिव्य ज्योति से यह संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशमान है। सूर्य, चंद्रमा और तारे भी आपकी ही आभा से चमकते हैं। आपकी कृपा दृष्टि जिस पर पड़ जाए, उसका पूरा जीवन आलोकित हो जाता है।
पंक्ति: "सिंह सवारी मैया तेरी, माँ शेरावाली, दुष्टों की तू काल है मैया, माँ शेरावाली..."
भावार्थ: हे माँ, आपकी सवारी सिंह है, जो आपके अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। आप सज्जनों और भक्तों की रक्षा के लिए अत्यंत सौम्य हैं, परंतु दुष्टों और अधर्मियों के लिए आप साक्षात काल (मृत्यु) के समान हैं।
पंक्ति: "भक्तों की तू बिगड़ी संवारे, माँ शेरावाली..."
भावार्थ: हे माँ, जब भक्त चारों ओर से निराश होकर आपके चरणों में आता है, तो आप उसके असंभव कार्यों को भी संभव बना देती हैं और उसकी बिगड़ी हुई तकदीर को संवार देती हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ माँ दुर्गा के निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी हैं, सब पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को सिद्ध करने वाली हैं। आप शरण में आए हुए भक्तों की रक्षा करने वाली तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, आपको मेरा नमस्कार है।
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा—इन नामों से प्रसिद्ध जगदम्बिका! आपको मेरा नमस्कार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | जग जननी है माँ जगदम्बे माँ शेरावाली |
| मुख्य देवी/देवता | माँ दुर्गा (जगदम्बा, शेरावाली) |
| स्वर (Singer) | चेतना शुक्ला |
| भाषा | हिंदी (खड़ी बोली) |
| भक्ति रस / भाव | वात्सल्य, समर्पण, वीर रस (शक्ति भाव) |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराता, दैनिक संध्या आरती |
| मुख्य विषय | माँ की महिमा, दुष्ट संहार, भक्तों का कल्याण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और विश्लेषण हिंदू धर्मग्रंथों, जैसे कि देवी भागवत पुराण और दुर्गा सप्तशती के सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। चेतना शुक्ला द्वारा गाए गए इस भजन के बोलों की प्रामाणिकता को सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक स्रोतों से इसका मिलान किया गया है। यह सामग्री भक्तों को माँ दुर्गा की महिमा से परिचित कराने और उनके आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- मार्कंडेय पुराण: देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) - माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी लीलाओं का मुख्य स्रोत।
- श्रीमद्देवी भागवत पुराण: आदि शक्ति माँ जगदम्बा की उत्पत्ति और उनके ब्रह्मांडीय कार्यों का विस्तृत वर्णन।
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह: उत्तर भारतीय देवी जागरण और कीर्तन मंडलियों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों का संकलन।
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