Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

असिन झले हां मैए सानू झल्लियां रेहान देयो मैं (Asin Jhalle Haan Maaiye Saanu Jhallian Rehan Deyo)

Asin Jhalle Haan Maaiye भजन के बोल, अर्थ और महत्व जानें। माता रानी की भक्ति में लीन करने वाला यह पंजाबी भजन मन को शांति और आनंद प्रदान करता है।

"असिन झले हां मैए सानू झल्लियां रेहान देयो" (Asin Jhalle Haan Maaiye Saanu Jhallian Rehan Deyo) पंजाबी भक्ति संगीत परंपरा का एक अत्यंत भावुक और लोकप्रिय देवी भजन है। संदीप सूद द्वारा गाए गए इस भजन में भक्त की पराभक्ति और पूर्ण शरणागति का जीवंत चित्रण मिलता है। पंजाबी भाषा में 'झल्ला' या 'झल्ली' शब्द का अर्थ 'पागल' या 'दीवाना' होता है। यहाँ इस शब्द का प्रयोग किसी मानसिक विकार के लिए नहीं, बल्कि आदिशक्ति माता दुर्गा के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति में लीन हो जाने की उस अवस्था के लिए किया गया है जहाँ सांसारिक मान-अपमान का कोई मूल्य नहीं रह जाता। यह भजन साधक को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर भगवती के चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है। विशेष रूप से नवरात्रि, माता की चौकी और जगराता जैसे पावन अवसरों पर इस भजन का गायन भक्तों के हृदय में अश्रुपूर्ण भक्ति और आनंद का संचार करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

असिन झले हां मैए सानू झल्लियां रेहान देयो

असिन झल्ले हां मैए सानू झल्लियां रहण देयो,
सानू चरणां दे नाल लाई रखियो, होर कुछ ना कहण देयो।
असिन झल्ले हां मैए सानू झल्लियां रहण देयो...

दुनिया वाले सानू पागल कहंदे,
असीं तां मैया तेरे नाम दे दीवाने।
सानू दुनिया दी परवाह कोई ना,
असीं तां तेरे दर दे मस्ताने।
सानू चरणां दे नाल लाई रखियो, होर कुछ ना कहण देयो...

लोकी कहंदे असीं तां झल्ले हो गए,
मैया तेरे प्यार विच कमले हो गए।
सानू एहो कमलीपन प्यारा लगदा,
साडा तेरे बिना कोई ना सहारा लगदा।
सानू चरणां दे नाल लाई रखियो, होर कुछ ना कहण देयो...

तेरी ममता दी छां थल्ले रहना असीं,
सुख-दुख जो भी आवे सहना असीं।
बस मैया साडी झोली खाली भर देयो,
साडे सिर ते मेहर दा हथ धर देयो।
सानू चरणां दे नाल लाई रखियो, होर कुछ ना कहण देयो...

असिन झल्ले हां मैए सानू झल्लियां रहण देयो,
सानू चरणां दे नाल लाई रखियो, होर कुछ ना कहण देयो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर पंजाबी भजन का मुख्य भाव पूर्ण आत्मसमर्पण और दिव्य प्रेम है। भक्त माता से प्रार्थना करता है कि हे माँ! हम आपके प्रेम में पागल हैं और हमें इसी पागलपन की अवस्था में रहने दीजिए। हमें इस संसार की चतुरता और चालाकियों से दूर रखिए। हमें केवल अपने चरणों से लगाए रखिए और इसके अतिरिक्त हमें कुछ भी कहने या चाहने की आवश्यकता नहीं है।

भजन के माध्यम से भक्त समाज की उस संकीर्ण सोच पर प्रहार करता है जो ईश्वर भक्ति में लीन साधकों को 'पागल' या 'दीवाना' समझती है। भक्त कहता है कि दुनिया भले ही हमें पागल कहे, लेकिन हम तो केवल आपकी ममता की शीतल छाया में रहना चाहते हैं। जीवन में चाहे सुख आए या दुख, हम उसे आपकी इच्छा मानकर सहने को तैयार हैं, बशर्ते आपका वरदहस्त हमारे सिर पर बना रहे। यह भजन श्रीमद्भागवत और देवीभागवत पुराण में वर्णित गोपी-भाव और अनन्य शरणागति के सिद्धांत को सरल लोकभाषा में प्रस्तुत करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि एक साधक की आंतरिक पुकार है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • अनन्य शरणागति (Surrender): भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के अहंकार को शून्य कर माता के चरणों में समर्पित करने की बात करती है।
  • लोकभाषा का माधुर्य: पंजाबी भाषा के मिठास भरे शब्दों जैसे 'झल्ले', 'कमले' और 'मैया' का प्रयोग हृदय को सीधे स्पर्श करता है।
  • सांसारिक विरक्ति: यह भजन सिखाता है कि जब व्यक्ति ईश्वर के प्रेम में रंग जाता है, तो उसे संसार की आलोचनाओं या प्रशंसा की कोई चिंता नहीं रहती।
  • ममतामयी रूप की आराधना: इसमें देवी के उग्र रूप के स्थान पर उनके ममतामयी, करुणामयी और रक्षक रूप की स्तुति की गई है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवती की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि उत्सव: नवरात्रि व्रत विधि के दौरान सुबह या शाम के समय इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • माता की चौकी और जगराता: पंजाब और उत्तर भारत में माता के जगराते के समय इस भजन को मध्यरात्रि या भोर के समय गाया जाता है, जब वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
  • दैनिक पूजा: संध्या आरती के पश्चात शांत मन से इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है और मन को असीम शांति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात् आदिशक्ति दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के एकीकृत ममतामयी रूप को समर्पित है। सनातन धर्म में देवी को 'करुणा की सागर' माना गया है। संत मत और सूफी परंपरा में भी ईश्वर को पाने के लिए 'दीवानगी' या 'मस्ती' को अनिवार्य माना गया है। इस भजन में भी उसी सूफी और भक्ति कालीन परंपरा का प्रभाव दिखाई देता है जहाँ भक्त स्वयं को भगवान के प्रेम में पूरी तरह खो देता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन को प्रसिद्ध गायक संदीप सूद ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है। पंजाब की समृद्ध लोक संस्कृति और सूफी-भक्ति परंपरा से प्रेरित होकर इस भजन की रचना की गई है। पंजाब की धरती हमेशा से ही संतों, पीरों और भक्तों की भूमि रही है, जहाँ ईश्वर को 'साहिब' या 'मैया' मानकर अत्यंत आत्मीय संबंध स्थापित किया जाता है। यही आत्मीयता इस भजन के शब्दों में भी झलकती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और ठेठ पंजाबी है, जिसे गैर-पंजाबी भाषी लोग भी आसानी से समझ सकते हैं। काव्य शैली की दृष्टि से इसमें 'गीत' और 'पद' शैली का मिश्रण है। इसमें अनुप्रास अलंकार और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। 'झल्ले' और 'कमले' जैसे शब्दों का बार-बार आना भजन की लयबद्धता को बढ़ाता है और गाते समय भक्त को झूमने पर मजबूर कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. अहंकार का त्याग: जब तक मनुष्य के भीतर 'मैं' और 'मेरा' का भाव रहता है, तब तक वह ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता। 'झल्ला' बनना वास्तव में अपने अहंकार को मिटाना है।
  2. सच्ची प्रसन्नता: वास्तविक सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि ईश्वर के चरणों के सानिध्य में है।
  3. धैर्य और समभाव: जीवन के सुखों और दुखों को समान भाव से स्वीकार करना ही सच्ची धार्मिकता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
झल्ले (Jhalle) पागल / दीवाने ईश्वरीय प्रेम में सुध-बुध खो देने वाला भक्त।
कमले (Kamle) भोले / सीधे-सादे सांसारिक चालाकियों से रहित निष्पाप मन।
चरणां दे नाल (Charnan De Naal) चरणों के साथ ईश्वर की शरण में हमेशा बने रहने की इच्छा।
मेहर दा हथ (Mehar Da Hath) कृपा का हाथ भगवती का आशीर्वाद और सुरक्षा कवच।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "असिन झल्ले हां मैए सानू झल्लियां रहण देयो, सानू चरणां दे नाल लाई रखियो..."
भावार्थ: हे माता! हम आपके प्रेम में सुध-बुध खो चुके हैं। हमें इसी अवस्था में रहने दीजिए। हमें दुनिया की नजरों में बुद्धिमान बनने की कोई चाह नहीं है, बस हमें अपने श्रीचरणों में स्थान दीजिए।

पंक्ति: "दुनिया वाले सानू पागल कहंदे, असीं तां मैया तेरे नाम दे दीवाने..."
भावार्थ: यह संसार हमें पागल समझता है क्योंकि हम उनकी तरह भौतिक धन-दौलत के पीछे नहीं भागते। हम तो केवल आपके नाम के रस का पान करने वाले दीवाने हैं।

पंक्ति: "तेरी ममता दी छां थल्ले रहना असीं, सुख-दुख जो भी आवे सहना असीं..."
भावार्थ: आपकी ममतामयी छाया हमारे लिए सबसे सुरक्षित स्थान है। आपके सानिध्य में रहते हुए हम जीवन के हर सुख-दुख को सहने का साहस रखते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के शरणागति भाव को पुष्ट करने के लिए श्री दुर्गा सप्तशती का यह प्रसिद्ध श्लोक अत्यंत प्रासंगिक है:

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थात्: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी और सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। आप ही शरण में लेने योग्य गौरी और त्रिनेत्री हैं, आपको हमारा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम असिन झले हां मैए सानू झल्लियां रेहान देयो
मुख्य देवी/देवता मां दुर्गा / आदिशक्ति
गायक संदीप सूद (Sandeep Sood)
भाषा पंजाबी (Punjabi)
भक्ति भाव शरणागति एवं माधुर्य भाव (Surrender & Devotion)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और निस्वार्थ प्रेम है। यह सिखाता है कि दुनिया की परवाह किए बिना भगवान की भक्ति में लीन रहना ही जीवन का परम लक्ष्य है।

इस अत्यंत लोकप्रिय पंजाबी देवी भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायक संदीप सूद ने गाया है।

पंजाबी में 'झल्ला' का अर्थ पागल या दीवाना होता है। यहाँ इसका अर्थ उस भक्त से है जो माता के प्रेम में इतना मग्न है कि उसे दुनिया की कोई सुध नहीं है।

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, माता के जगराते, चौकी और पारिवारिक धार्मिक उत्सवों के दौरान गाया और सुना जाता है।

हाँ, इस भजन की मधुर धुन और समर्पण से भरे शब्द मन को शांत करते हैं, तनाव को दूर करते हैं और साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

यह भजन सरल और मधुर पंजाबी भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत सहित पूरे विश्व में देवी भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

'चरणां दे नाल' का अर्थ है माता के चरणों के समीप रहना। यह भक्त की उस इच्छा को दर्शाता है जहाँ वह हमेशा देवी की छत्रछाया और सुरक्षा में रहना चाहता है।

हाँ, संदीप सूद की आवाज में यह भजन सभी प्रमुख संगीत प्लेटफॉर्म और यूट्यूब पर आसानी से उपलब्ध है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के आध्यात्मिक पहलुओं, लोक संस्कृति में इसके महत्व और इसके दार्शनिक संदेश का गहन विश्लेषण कर इसे तैयार किया है। यह भजन सनातन धर्म की उस समृद्ध परंपरा को दर्शाता है जहाँ संगीत को ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल और सुलभ माध्यम माना गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - देवी भक्ति और शरणागति प्रसंग।
  • पंजाब की लोक भक्ति परंपरा और सूफी काव्य संग्रह।
  • संदीप सूद के आधिकारिक भक्ति संगीत एलबम।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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