Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शरण जो माँ की आये (Sharan Jo Maa Ki Aaye)

शरण जो माँ की आये भजन के बोल, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक महत्व जानें। माँ दुर्गा की भक्ति में लीन होकर पाएं आत्मिक शांति। Bhaktilok पर पढ़ें।

आदिशक्ति माँ दुर्गा की शरण में जाना समस्त सांसारिक दुखों के निवारण और आत्मिक शांति का एकमात्र मार्ग है। "शरण जो माँ की आये" भजन, जिसे सुप्रसिद्ध गायक विपिन सचदेवा ने अपने मधुर और भावपूर्ण स्वर में पिरोया है, माँ दुर्गा के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी असीम करुणा का जीवंत चित्रण है। सनातन धर्म में देवी को 'सर्वशक्तिमयी' और 'जगदम्बा' माना गया है, जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनके जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान, समृद्धि और प्रकाश का संचार करती हैं। यह भजन न केवल एक भक्ति गीत है, बल्कि यह एक साधक के लिए प्रार्थना का वह माध्यम है जिसके द्वारा वह माँ के चरणों में अपनी समस्त चिंताओं को समर्पित कर देता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के भावार्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व और देवी उपासना की महिमा पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शरण जो माँ की आये

शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए,
जो भी माँ के दर पे आए, वो मालामाल हो जाए।
शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए...

माँ की ममता है न्यारी, माँ है जग से प्यारी,
भक्तों के सारे कष्ट मिटाती, माँ है दुखियारी की रखवारी।
जो भी माँ का नाम पुकारे, माँ उसके काम बनाए,
शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए...

लाल चुनरिया माँ ने ओढ़ी, खुशियों की है ये जोड़ी,
माँ के चरण जो छू ले कोई, किस्मत उसकी है ये मोड़ी।
जो भी माँ के दर पे शीश झुकाए, वो मनचाहा फल पाए,
शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए...

सिंह सवारी मैया साजे, नौबत द्वारे बाजे,
भक्त खड़े हैं हाथ जोड़कर, दर्शन दे दो माता आज।
जो भी माँ की महिमा गाए, वो भवसागर तर जाए,
शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य संदेश 'शरणागति' (Surrender) है। हिंदू दर्शन और विशेष रूप से शाक्त परंपरा में, शरणागति को मोक्ष और शांति का सबसे सुगम मार्ग माना गया है। जब कोई भक्त अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से देवी की शरण में आता है, तो वह 'खाली' नहीं लौटता। यहाँ 'खाली न जाने' का अर्थ केवल भौतिक धन-दौलत से नहीं है, बल्कि इसका गहरा अर्थ आत्मिक संतोष, शांति और भक्ति रूपी परम धन की प्राप्ति से है।

भजन की पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि माँ की ममता इस संसार में सबसे अनूठी है। लौकिक माता केवल अपने बच्चों का ध्यान रखती है, परंतु अलौकिक जगन्माता संपूर्ण सृष्टि के जीवों की रक्षा करती है। वह 'दुखियारी की रखवारी' हैं, अर्थात जो समाज में उपेक्षित हैं, दुखी हैं और जिनका कोई सहारा नहीं है, माँ दुर्गा उनकी रक्षक बनती हैं। लाल चुनरी और सिंह की सवारी माँ के ऐश्वर्य, तेज और ममतामयी स्वरूप को दर्शाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शाक्त संप्रदाय के मूल सिद्धांतों को बहुत ही सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का महत्व: यह भजन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही मनुष्य को सभी चिंताओं से मुक्त कर सकता है।
  • वात्सल्य भाव: इसमें देवी को एक कठोर शासक के रूप में नहीं, बल्कि एक करुणामयी माँ के रूप में चित्रित किया गया है जो अपने बच्चों के कष्टों को सहन नहीं कर सकती।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: विपिन सचदेवा की मधुर आवाज और इस भजन के बोल मन में एक असीम शांति और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: आश्विन और चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का श्रवण और कीर्तन करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • दैनिक संध्या आरती: शाम के समय माँ दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन को गाने से मानसिक तनाव दूर होता है।
  • जागरण और माता की चौकी: पारिवारिक और सामाजिक धार्मिक उत्सवों जैसे माता की चौकी या जागरण में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है। माँ दुर्गा शक्ति, साहस, करुणा और विजय की अधिष्ठात्री देवी हैं। सनातन धर्म में उन्हें त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की सम्मिलित शक्ति का स्वरूप माना गया है। इस भजन के माध्यम से भक्त माँ के ममतामयी रूप की वंदना करते हैं। गायक विपिन सचदेवा ने अपनी भक्तिमयी गायकी से इस भजन को जन-जन तक पहुँचाया है, जिससे यह भजन देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भारतीय लोक संस्कृति में देवी गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। "शरण जो माँ की आये" इसी परंपरा का एक आधुनिक और सुरीला रूप है। इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक भक्ति आंदोलन से प्रेरित है, जहाँ ईश्वर को माता के रूप में पूजने की प्रथा अत्यंत प्राचीन है। ऋग्वेद के 'देवी सूक्त' से लेकर आधुनिक भजनों तक, देवी को ही सृष्टि का आदि कारण माना गया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोकप्रचलित हिंदी (खड़ी बोली) है। इसमें जटिल दार्शनिक शब्दों के स्थान पर ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिन्हें एक सामान्य व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है और महसूस कर सकता है। काव्य शैली में 'अंत्यानुप्रास' अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे आए-जाए, न्यारी-प्यारी), जो इसे गेय (गाने योग्य) और कर्णप्रिय बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • अहंकार का त्याग: जब हम माँ के चरणों में शीश झुकाते हैं, तो यह हमारे अहंकार के समर्पण का प्रतीक है।
  • समानता का संदेश: माँ के दरबार में कोई अमीर या गरीब नहीं होता। जो भी सच्ची श्रद्धा से आता है, माँ उसे अपनाती हैं।
  • धैर्य और विश्वास: जीवन के कठिन समय में यह भजन हमें विश्वास दिलाता है कि माँ हमारी रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शरण (Sharan) आश्रय या संरक्षण ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की अवस्था।
मालामाल (Malamal) समृद्ध होना भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की समृद्धि।
दुखियारी (Dukhiyari) पीड़ित या दुखी व्यक्ति संसार के कष्टों से त्रस्त जीव।
चुनरिया (Chunariya) लाल वस्त्र / ओढ़नी सौभाग्य, शक्ति और सुहाग का प्रतीक।
भवसागर (Bhavsagar) संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे मुक्त होना है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"शरण जो माँ की आये, वो खाली न जाए..."
जो भी मनुष्य अपने समस्त कर्मों और चिंताओं को माँ दुर्गा के चरणों में अर्पित कर देता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। माँ उसे अपनी कृपा से सराबोर कर देती हैं।

"माँ की ममता है न्यारी, माँ है जग से प्यारी..."
संसार के सभी रिश्ते स्वार्थ पर आधारित हो सकते हैं, परंतु माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है। वह अपने बच्चों के सभी कष्टों को हर लेती हैं।

"लाल चुनरिया माँ ने ओढ़ी, खुशियों की है ये जोड़ी..."
लाल रंग ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है। माँ का यह दिव्य स्वरूप भक्तों के जीवन में खुशियों और समृद्धि का संचार करता है।

"सिंह सवारी मैया साजे, नौबत द्वारे बाजे..."
सिंह पर सवार माँ दुर्गा इस बात का प्रतीक हैं कि वे भय का नाश करने वाली हैं। उनके द्वार पर बजने वाले वाद्य यंत्र उनकी विजय और दिव्यता की घोषणा करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

देवी भागवत और श्री दुर्गा सप्तशती में शरणागति की महिमा का वर्णन करने वाला यह श्लोक इस भजन के भाव को पूर्णतः चरितार्थ करता है:

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: शरण में आए हुए दीनों एवं पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली, सभी की पीड़ा दूर करने वाली हे नारायणी देवी! आपको नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम शरण जो माँ की आये (Sharan Jo Maa Ki Aaye)
आराध्य देवी माँ दुर्गा (आदिशक्ति)
मुख्य गायक विपिन सचदेवा (Vipin Sachdeva)
भाषा हिंदी (Hindi)
मुख्य भाव शरणागति और वात्सल्य भाव (Surrender & Devotion)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जागरण, दैनिक संध्या आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"शरण जो माँ की आये" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के मुख्य गायक सुप्रसिद्ध भक्ति गायक विपिन सचदेवा हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज से इसे जीवंत बनाया है।

इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश 'शरणागति' है। यह सिखाता है कि जब मनुष्य अपने अहंकार को छोड़कर माँ दुर्गा की शरण में जाता है, तो उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

इस भजन को किस अवसर पर सुनना सबसे उत्तम माना जाता है?

इसे नवरात्रि, दुर्गा पूजा, माता की चौकी, जागरण और दैनिक सुबह-शाम की पूजा के समय सुनना और गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भजन में 'लाल चुनरिया' का क्या महत्व है?

लाल चुनरिया माँ दुर्गा के सुहाग, सौभाग्य, शक्ति और ममतामयी स्वरूप का प्रतीक है। यह भक्तों के जीवन में खुशहाली लाती है।

क्या इस भजन का संबंध किसी शास्त्रीय ग्रंथ से है?

यह भजन सीधे तौर पर किसी ग्रंथ से नहीं है, परंतु इसका भाव श्री दुर्गा सप्तशती के 'शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे' श्लोक से पूरी तरह मेल खाता है।

माँ दुर्गा की शरण में जाने से भक्त को क्या लाभ मिलता है?

माँ की शरण में जाने से भक्त को मानसिक शांति, भय से मुक्ति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन के संकटों से उबरने की शक्ति मिलती है।

इस भजन की भाषा कैसी है?

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल और सुबोध हिंदी है, जिसे कोई भी सामान्य भक्त आसानी से समझ और गा सकता है।

'दुखियारी की रखवारी' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि माँ दुर्गा उन सभी लोगों की रक्षक और सहारा हैं जो इस संसार में असहाय, दुखी और पीड़ित हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "शरण जो माँ की आये" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं का एक विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री का संकलन और संपादन सनातन धर्म के शाक्त सिद्धांतों और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर किया गया है। यह संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों को न केवल भजन के बोल प्रदान करती है, बल्कि उन्हें इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ से भी जोड़ती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री दुर्गा सप्तशती: देवी महात्म्य और शरणागति श्लोक।
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: आदिशक्ति की महिमा और ममतामयी स्वरूप का वर्णन।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: विपिन सचदेवा द्वारा गाए गए लोकप्रिय देवी गीत।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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