bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ

पवन सिंह का लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत 'चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ' के बोल और अर्थ पढ़ें। माता रानी के इस भक्तिमय गीत का आनंद लें।

Chamkela Chandra Badaniya Lagelu Mai Dulhania - Singar Sajal Ba Mori Maiya Ke - Pawan Singh - Bhojpuri Mata Bhajan - Bhaktilok

अपडेटेड: अप्रैल 2026  |  श्रेणी: भोजपुरी देवी गीत, भक्ति गाना भोजपुरी में  |  गायक: पवन सिंह (Pawan Singh)

सनातन संस्कृति और लोक संगीत के आंचल में भोजपुरी देवी गीतों का एक अत्यंत विशिष्ट और गौरवशाली स्थान है। जब शारदीय या चैत्र नवरात्रि का पावन अवसर आता है, तो संपूर्ण उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का कोना-कोना माता दुर्गा के जयकारों और कर्णप्रिय देवी भजनों से गूंज उठता है। इसी समृद्ध परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय, मनमोहक और ऊर्जावान भजन है—"चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ", जिसे भोजपुरी के पावर स्टार कहे जाने वाले प्रख्यात गायक पवन सिंह (Pawan Singh) ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से सजाया है। यह भजन उनके प्रसिद्ध एल्बम 'सिंगार सजल बा मोरी मइया के' (Singar Sajal Ba Mori Maiya Ke) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक भाव, देवी मां के श्रृंगार का रूपक, भोजपुरी लोक संस्कृति में देवी उपासना की परंपरा और इसके सांस्कृतिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मखड़ा (Refrain):
चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ,
सिंगार सजल बा मोरी मइया के, झुलुआ झुलेली झुमकेनिया...
चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ!

अंतरा 1:
माथे पर सजले टिकुलिया नियन टिकुली,
नाक में नथुनिया चमके जईसे जुनुनी बिजली।
अंखियन में काजल के कोरवा सोहे भारी,
भक्तन के मनवा मोह लेलियन मेहरतारी।
रंगरेजवा चुनरिया ओढ़वले बिया सोहनियाँ,
चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ!

अंतरा 2:
हाथन में कंगना खनके खन-खन पियवा के, (यहाँ आराध्य रूप में)
पांव के महावर सोहे पावन घर-आगना के।
सिंहवा पर बइठल बाड़ी जग के तारिणी,
दुखवा हरइया माँ भवानी महारानी।
दर्शन पाके धन्य भइल बाड़ेलन सगरो दुनियाँ,
चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ!

अंतिम चरण / समापन:
पवन सिंह गावे महिमा मइया के सुघड़ बानी,
चरणन में झुके संसार सब प्राणी।
मइया के कृपा से सरे हर कठिनाइयाँ,
चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल एक साधारण लोकगीत नहीं है, बल्कि यह सनातन भक्तों की उस अनूठी भावना का प्रतीक है जिसमें वे अपनी आराध्य देवी मां को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने घर की अत्यंत प्रिय और लाड़ली 'दुल्हन' या पुत्री के रूप में देखते हैं। भोजपुरी लोक संस्कृति में देवी मां को 'बेटी' और 'मइया' दोनों रूपों में पूजने की अद्भुत परंपरा रही है।

"चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ"—इस पंक्ति का भावार्थ यह है कि माता जगदंबा का मुखमंडल पूर्णिमा के चंद्रमा की भांति अलौकिक रूप से चमक रहा है। उनका यह श्रृंगार इतना सुंदर और मनमोहक है कि वे ठीक किसी नववधू (दुल्हन) के समान प्रतीत हो रही हैं, जिनके आगमन से संपूर्ण ब्रह्मांड में उत्सव का माहौल बन गया है।

आगे की पंक्तियों में गायक मां के भौतिक और दिव्य श्रृंगार का वर्णन करता है। माथे की बिंदी, नाक की नथुनी, आंखों का काजल और उनके वस्त्र इस बात के प्रतीक हैं कि भक्त अपनी मां को संसार की सबसे सुंदर और सुसज्जित रूप में देखना चाहता है। सिंह पर विराजमान माता भवानी अपने भक्तों के सभी दुखों और संतापों को हरने वाली हैं। उनके इस रूप के दर्शन मात्र से मनुष्य के जीवन की समस्त कठिनाइयां और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और अंतःकरण में भक्ति रूपी प्रकाश भर जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • लोक और भक्ति का संगम: यह भजन शास्त्रीय कठोरता से परे लोक-संस्कृति की सहज मिठास से ओत-प्रोत है, जो हर आम और खास इंसान के दिल को छू लेता है।
  • वात्सल्य और माधुरी भाव: इसमें देवी के प्रति भय या केवल शक्ति उपासना के स्थान पर वात्सल्य, प्रेम और समर्पण (माधुरी भाव) की प्रधानता है।
  • नवरात्रि पर्व की ऊर्जा: नवरात्रि के दिनों में शक्तिपीठों और घरों में पंडालों के दौरान यह गीत विशेष रूप से बजाया और गाया जाता है, जो माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देता है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इस प्रकार के कर्णप्रिय भजनों को सुनने से चित्त शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के लोक-भजनों का आनंद लेने और गाने के लिए कोई कड़े शास्त्रीय नियमों की आवश्यकता नहीं होती, फिर भी यदि इन्हें पूरी श्रद्धा के साथ निम्नलिखित अवसरों पर गाया जाए तो इनका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

  • नवरात्रि के नौ दिन: विशेषकर अष्टमी और नवमी के दिन जब मां दुर्गा के पंडाल सजते हैं और कन्या पूजन होता है।
  • संध्याकालीन आरती के समय: घर के पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात शांत मन से इसे सुना जा सकता है।
  • पारिवारिक अनुष्ठान व जागरण: माता के जगराते, सोहर या किसी मांगलिक उत्सव के दौरान महिलाएं समूह में इस तर्ज पर गीत गाती हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी भाषा में रचा गया है, जिसमें लोक-मुहावरों और ग्रामीण परिवेश के सौंदर्य का अद्भुत समावेश है। 'चंद्र बदनिया', 'टिकुलिया', 'नथुनिया', 'मेहरतारी' जैसे शब्द भोजपुरी आंचल की मिट्टी की महक को दर्शाते हैं। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जैसे मुख की तुलना चंद्रमा से करना। यह गीत भोजपुरी साहित्य और लोक-संगीत की समृद्धि का एक उत्कृष्ट प्रमाण है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
चंद्र बदनिया चंद्रमा जैसा मुख माता के अलौकिक और शीतल मुखमंडल का वर्णन
टिकुलिया बिंदी / माथे का श्रृंगार सुहाग और स्त्री सौंदर्य का पारंपरिक प्रतीक
नथुनिया नाक की नथ पारंपरिक आभूषण जो चेहरे की शोभा बढ़ाता है
मेहरतारी माता / जननी भक्तों द्वारा मां के प्रति स्नेहिल संबोधन
झुलुआ झूला नवरात्रि में मां को झुलाए जाने वाले झूले का प्रसंग

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चमकेला चंद्र बदनिया लागेलु माई दुल्हनियाँ
एल्बम सिंगार सजल बा मोरी मइया के (Singar Sajal Ba Mori Maiya Ke)
मुख्य गायक पवन सिंह (Pawan Singh)
भाषा भोजपुरी
विषय / थीम माता दुर्गा का श्रृंगार और लोक भक्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी जागरण, माता की पूजा
संबंधित लेख माँ चंद्रघंटा की कथा, श्री हनुमान चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत के गायक प्रसिद्ध भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह हैं।

यह गीत पवन सिंह के प्रसिद्ध देवी गीत एल्बम "सिंगार सजल बा मोरी मइया के" (Singar Sajal Ba Mori Maiya Ke) का एक प्रमुख हिस्सा है।

इस भजन में जगत जननी मां दुर्गा / भवानी के अलौकिक श्रृंगार और उनके सौन्दर्य का वर्णन किया गया है।

भोजपुरी देवी गीत मुख्य रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि, माता के जागरण, और विभिन्न धार्मिक उत्सवों के दौरान सबसे अधिक सुने जाते हैं।

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संपादकीय एवं संदर्भ

यह लेख पारंपरिक भोजपुरी लोक-संगीत, नवरात्रि परंपराओं और सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित है। इसे संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में पाठकों की जानकारी और भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए प्रस्तुत किया गया है। यदि आपके पास इस भजन से संबंधित कोई सुझाव या संशोधन है, तो कृपया संपर्क करें।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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