kali mata bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय काली है काल नाशनी (Jai Kali Hey Kaal Nashni) - Kalka Mata Bhajan Jai Maa Kali Amba Bhakti

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"जय काली है काल नाशनी (Jai Kali Hey Kaal Nashni)" कालका माता और महाकाली को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली और ऊर्जावान भजन है। यह भजन आदिशक्ति के उस भयंकर किंतु ममतामयी रूप की वंदना करता है जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों, भयों और काल (मृत्यु व समय) के चक्र को नष्ट करने वाली हैं। सनातन धर्म में माँ काली को समय की स्वामिनी और संहार की अधिष्ठात्री देवी माना गया है, जो अंततः नवसृजन का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इस भजन का मुख्य स्वर पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और भयमुक्ति का है। जब कोई साधक या भक्त इस भजन का गायन करता है, तो उसके भीतर एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, शनिवार और कालका माता के मंदिरों में विशेष श्रद्धा के साथ गाया जाता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े शास्त्रीय संदर्भों का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ जय काली है काल नाशनी ॥

(मुखड़ा)
जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली।
जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली।
अम्बा भक्ति, संकट हरनी, मंगल करणी जय महाकाली॥

(अंतरा 1)
खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजे, सिंह वाहिनी रूप सुहावे।
दुष्ट दलन जन कष्ट निवारण, भक्तन की तुम विपदा टालो।
जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली॥

(अंतरा 2)
रक्तबीज का रक्त पिया माँ, चण्ड-मुण्ड का मर्दन कीन्हा।
देवों को भयमुक्त किया माँ, अभय वरदान भक्तों को दीन्हा।
जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली॥

(अंतरा 3)
कालरात्रि विकराल स्वरूपा, ममतामयी माँ अम्बा रूपा।
शरण तुम्हारी जो भी आवे, भवसागर से पार वो पावे।
जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"जय काली है काल नाशनी" भजन का मुख्य संदेश माँ काली की असीम शक्ति और उनकी ममतामयी करुणा का सुंदर समन्वय है। माँ काली को "काल नाशनी" कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे समय के चक्र और मृत्यु के भय को समाप्त करने वाली हैं। सांसारिक जीवन में मनुष्य अनेक प्रकार के भयों से घिरा रहता है—जैसे मृत्यु का भय, रोग का भय, शत्रुओं का भय और असफलता का भय। माँ काली की शरण में आने पर ये सभी भय स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

भजन के प्रथम भाग में माँ के दिव्य स्वरूप का वर्णन है, जहाँ वे अपने हाथों में खड्ग, खप्पर और त्रिशूल धारण किए हुए हैं। ये अस्त्र-शस्त्र केवल विनाश के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये अज्ञान, अहंकार और तामसिक प्रवृत्तियों के संहार के प्रतीक हैं। माँ का सिंह पर सवार होना उनके अदम्य साहस और तेज को दर्शाता है।

द्वितीय भाग में माँ के पौराणिक पराक्रमों का स्मरण किया गया है, जैसे रक्तबीज और चण्ड-मुण्ड का वध। यह इस बात का प्रतीक है कि जब समाज में आसुरी शक्तियां (बुराइयां) चरम पर होती हैं, तब देवी माँ उनका समूल नाश कर धर्म की स्थापना करती हैं। अंतिम भाग में माँ के दोहरे स्वरूप की वंदना की गई है। एक ओर वे दुष्टों के लिए विकराल कालरात्रि हैं, तो दूसरी ओर अपने भक्तों के लिए वे अत्यंत ममतामयी अम्बा हैं। जो भी भक्त निष्काम भाव से उनकी शरण में आता है, माँ उसे इस संसार रूपी भवसागर से पार उतार देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भयमुक्ति और साहस का संचार: यह भजन साधक के मन से हर प्रकार के नकारात्मक विचारों और भय को दूर करता है।
  • आदि शक्ति का समन्वय: इसमें माँ काली को अम्बा और महाकाली दोनों रूपों में पूजा गया है, जो शक्ति के सौम्य और उग्र दोनों रूपों का प्रतीक है।
  • तामसिक ऊर्जा का नाश: माँ काली की उपासना से घर और मन की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • भक्ति मार्ग की सुगमता: यह भजन जटिल साधनाओं के स्थान पर सरल भक्ति के माध्यम से माँ को प्रसन्न करने का मार्ग दिखाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन सुबह या संध्या आरती के समय करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेषकर शनिवार, मंगलवार और नवरात्रि के दिनों में इसका महत्व और बढ़ जाता है।

गायन विधि:

  1. सर्वप्रथम माँ काली या कालका माता की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  2. माँ को लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल) अर्पित करें।
  3. पूर्ण श्रद्धा और ऊंचे स्वर में तालियों या मंजीरे की थाप पर इस भजन का गायन करें।
  4. भजन के उपरांत माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से माँ कालका (कालका माता) और महाकाली को समर्पित है। कालका माता को आदिशक्ति दुर्गा का ही एक अत्यंत जाग्रत रूप माना जाता है। दिल्ली का प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर और अन्य सिद्धपीठों में इस भजन का गायन सदियों से भक्तों द्वारा किया जाता रहा है। यह भजन किसी एक विशिष्ट संत द्वारा रचित न होकर पारंपरिक लोक-भक्ति और शाक्त परंपरा के साधकों द्वारा विकसित माना जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि शाक्त संप्रदाय और लोक संस्कृति से जुड़ी है। भारत के उत्तरी भागों, विशेषकर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कालका माता की अत्यधिक मान्यता है। इन क्षेत्रों के लोक भजनों में माँ काली के ममतामयी और रक्षक रूप को प्रमुखता दी गई है। यह भजन उसी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है जो भक्तों को माँ के प्रति अटूट विश्वास दिलाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्दों (जैसे नाशनी, संकट हरनी, विकराल) का सुंदर प्रयोग किया गया है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त रूपक और उपमाएं माँ के दिव्य और अलौकिक स्वरूप को सजीव कर देती हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: माँ काली का खड्ग हमारे भीतर के अहंकार को काटने का प्रतीक है। जीवन में प्रगति के लिए अहंकार का नाश आवश्यक है।
  • बुराई पर अच्छाई की जीत: रक्तबीज के वध की कथा हमें सिखाती है कि बुराई चाहे कितनी भी बलवान क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
  • शरणगति का महत्व: ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही मोक्ष और शांति का एकमात्र मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
काल नाशनी समय और मृत्यु के भय को नष्ट करने वाली माँ काली का वह रूप जो काल के चक्र से मुक्त करता है।
खप्पर एक विशेष पात्र जो देवी धारण करती हैं अहंकार और बुराइयों को समेटने का प्रतीक।
सिंह वाहिनी सिंह की सवारी करने वाली अदम्य साहस और शक्ति का प्रतीक।
रक्तबीज एक असुर जिसके रक्त की बूंद से नए असुर पैदा होते थे हमारे मन के अनगिनत बुरे विचारों का प्रतीक।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे पार पाना है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

  • पंक्ति: जय काली है काल नाशनी, कालका माता जय माँ काली।
    भावार्थ: हे माँ काली, आपकी जय हो! आप काल (मृत्यु और समय) का नाश करने वाली हैं। हे कालका माता, हम आपकी बारंबार वंदना करते हैं।
  • पंक्ति: अम्बा भक्ति, संकट हरनी, मंगल करणी जय महाकाली॥
    भावार्थ: आप ही जगत जननी माँ अम्बा हैं, जो भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर उनके सभी संकटों को हर लेती हैं और जीवन में मंगल (शुभ) करती हैं।
  • पंक्ति: खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजे, सिंह वाहिनी रूप सुहावे।
    भावार्थ: आपके हाथों में खड्ग, खप्पर और त्रिशूल सुशोभित हैं। सिंह पर सवार आपका यह दिव्य रूप अत्यंत मनमोहक और तेजस्वी प्रतीत होता है।
  • पंक्ति: दुष्ट दलन जन कष्ट निवारण, भक्तन की तुम विपदा टालो।
    भावार्थ: आप दुष्टों का दमन करने वाली और जन-साधारण के कष्टों का निवारण करने वाली हैं। अपने भक्तों पर आने वाली हर विपत्ति को आप टाल देती हैं।
  • पंक्ति: रक्तबीज का रक्त पिया माँ, चण्ड-मुण्ड का मर्दन कीन्हा।
    भावार्थ: आपने देवताओं की रक्षा के लिए रक्तबीज नामक असुर का रक्तपान किया और चण्ड-मुण्ड जैसे भयानक राक्षसों का संहार किया।
  • पंक्ति: देवों को भयमुक्त किया माँ, अभय वरदान भक्तों को दीन्हा।
    भावार्थ: आपने स्वर्ग के देवताओं को असुरों के भय से मुक्त किया और अपने अनन्य भक्तों को सदैव अभय (भयहीनता) का वरदान प्रदान किया।
  • पंक्ति: कालरात्रि विकराल स्वरूपा, ममतामयी माँ अम्बा रूपा।
    भावार्थ: यद्यपि दुष्टों के लिए आपका रूप कालरात्रि के समान अत्यंत विकराल और भयानक है, किंतु अपने भक्तों के लिए आप अत्यंत ममतामयी माँ अम्बा के समान हैं।
  • पंक्ति: शरण तुम्हारी जो भी आवे, भवसागर से पार वो पावे।
    भावार्थ: जो भी प्राणी आपकी पावन शरण में आता है, वह इस संसार रूपी कठिन सागर को सुगमता से पार कर मोक्ष को प्राप्त करता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माँ काली की आराधना के समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

महाकाली मंत्र:
ॐ क्रीं कालिकायै नमः

ध्यान श्लोक:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम आराध्य देवी भाषा मुख्य रस/भाव उपयुक्त अवसर प्रमुख लाभ
जय काली है काल नाशनी माँ काली / कालका माता हिंदी (खड़ी बोली) भक्ति, वीर और करुण रस नवरात्रि, शनिवार, मंगलवार, दैनिक पूजा भयमुक्ति, संकट निवारण, मानसिक शांति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ काली की महिमा का गान करना, भक्तों के मन से भय को दूर करना और उनके प्रति अटूट श्रद्धा जागृत करना है।

'काल' का अर्थ समय और मृत्यु दोनों से है। माँ काली समय से परे

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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