Parvati Stotram

चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है भजन लिरिक्स (Chalo Bulava Aaya Hai Mata Ne Bulaya Hai Lyrics in Hindi) - mata rani Bhajan - Bhaktilok

79 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

"चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है" सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजनों में से एक है। यह भजन केवल सुर और ताल का संगम नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी परम जननी, आदिशक्ति मां दुर्गा (विशेष रूप से माता वैष्णो देवी) के प्रति अनन्य श्रद्धा, समर्पण और व्याकुलता का जीवंत प्रतीक है। जब भी कोई भक्त जम्मू की पावन पहाड़ियों में स्थित माता वैष्णो देवी के दरबार की यात्रा की योजना बनाता है, तो उसके होठों पर स्वतः ही यह भजन आ जाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'शरणागति' और 'दिव्य आह्वान' (बुलावा) है। हिंदू दर्शन के अनुसार, जब तक भगवती की कृपा या उनकी इच्छा नहीं होती, तब तक कोई भी जीव उनके पावन धाम तक नहीं पहुँच सकता। यह भजन इसी आध्यात्मिक सत्य को अत्यंत सरल और सुमधुर शब्दों में अभिव्यक्त करता है। इस लेख में हम इस कालजयी भजन के संपूर्ण लिरिक्स, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है


जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी!
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी!

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
ऊंचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।

सारे जग में एक ठिकाना, सारे संकट का हल पाना,
मैया के चरणों में आकर, अपने सोए भाग्य जगाना।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...

वैष्णो देवी के मंदिर की, महिमा सबसे न्यारी है,
जो भी जाए खाली हाथ, उसकी झोली भर जाती है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...

पहाड़ों के ऊपर सुंदर गुफा है, गुफा में माता का वास है,
भक्तों की रक्षा करने वाली, माँ की महिमा बड़ी ख़ास है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...

प्रेम से बोलो, जय माता दी!
सारे बोलो, जय माता दी!
मिलकर बोलो, जय माता दी!
मैंने सुना नहीं, जय माता दी!
फिर से बोलो, जय माता दी!
आने वाले बोलो, जय माता दी!
जाने वाले बोलो, जय माता दी!

कष्ट मिटे सब संकट टूटे, जब मैया का नाम लिया,
जिसने श्रद्धा से शीश झुकाया, माँ ने उसको सब कुछ दिया।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...

ऊंचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक अंतरा और शब्द भक्ति रस से सराबोर है। इसका केंद्रीय भाव यह है कि संसार की समस्त भौतिक उपलब्धियां और प्रयास तब तक निरर्थक हैं, जब तक कि ईश्वर की कृपा प्राप्त न हो। 'बुलावा' शब्द यहाँ केवल एक निमंत्रण नहीं है, बल्कि यह आत्मा का परमात्मा की ओर खिंचाव है। जब मनुष्य संसार के दुखों, चिंताओं और माया-मोह से थक जाता है, तब उसे माता की शरण में ही परम शांति मिलती है।

भजन की शुरुआत में ही यह घोषणा की गई है कि "चलो बुलावा आया है"। इसका अर्थ है कि अब वह शुभ समय आ गया है जब माता ने अपने भक्त को याद किया है। ऊंचे पर्वत पर दरबार लगाने का आध्यात्मिक संकेत यह है कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए मनुष्य को अपने विचारों और चेतना को ऊंचा उठाना पड़ता है। संकीर्ण सांसारिक विचारों से ऊपर उठकर ही उस परम सत्ता का साक्षात्कार संभव है।

भजन में आगे कहा गया है कि "सारे जग में एक ठिकाना"। यह संसार नश्वर है और यहाँ के संबंध क्षणभंगुर हैं। केवल जगज्जननी का चरण ही वह शाश्वत ठिकाना है जहाँ जीव को वास्तविक सुरक्षा और शांति मिलती है। मैया के चरणों में आने से मनुष्य के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं और उसका सोया हुआ भाग्य जागृत हो जाता है। यह पूर्ण शरणागति का मार्ग है, जो श्रीमद्भगवद्गीता के 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज' के सिद्धांत के अनुरूप है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भारतीय जनमानस में एक विशेष स्थान रखता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • आध्यात्मिक जागृति: यह भजन साधक के भीतर सोई हुई भक्ति भावना को जगाता है और उसे सांसारिकता से विमुख कर दिव्यता की ओर ले जाता है।
  • सामूहिक गायन का आनंद: इस भजन की लय और धुन ऐसी है कि इसे सामूहिक रूप से गाने पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। कीर्तन और जगरातों में इसका गायन अनिवार्य माना जाता है।
  • वैष्णो देवी यात्रा का प्रतीक: यह भजन माता वैष्णो देवी की पावन यात्रा का अनौपचारिक राष्ट्रगान बन चुका है। कटरा से लेकर भवन तक की चढ़ाई के दौरान भक्त इसी भजन को गाकर अपनी थकान भूल जाते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: "जय माता दी" का सामूहिक उद्घोष भक्तों के भीतर असीम ऊर्जा और साहस का संचार करता है, जिससे कठिन से कठिन मार्ग भी सुगम हो जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि के दौरान इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से कल्याणकारी होता है।
  • माता की चौकी और जगराता: किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर आयोजित होने वाली माता की चौकी या जगराते में इस भजन को गाकर माता रानी का आह्वान किया जाता है।
  • दैनिक संध्या आरती: घर के मंदिर में संध्या काल की पूजा के समय इस भजन को बजाने या गाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, होठों पर मुस्कान और हाथों से ताली बजाकर लय का साथ देना चाहिए। सामूहिक रूप से गाते समय "जय माता दी" के जयकारों का प्रयोग करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से माता वैष्णो देवी (आदिशक्ति, महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का एकीकृत रूप) को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता वैष्णो देवी ने त्रेतायुग में धर्म की रक्षा और भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लिया था। वे त्रिकूट पर्वत पर स्थित एक पवित्र गुफा में निवास करती हैं।

इस भजन को अमर बनाने का श्रेय महान देवी-भक्त और गायक नरेंद्र चंचल जी को जाता है। उन्होंने अपनी बुलंद और भावपूर्ण आवाज से इस भजन को घर-घर तक पहुँचाया। नरेंद्र चंचल जी की गायकी में जो तड़प और समर्पण था, उसने इस भजन को भारतीय संगीत और भक्ति इतिहास में अमर कर दिया। उनके साथ ही महेंद्र कपूर जी की आवाज ने भी इस भजन को एक नया आयाम दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह कालजयी भजन वर्ष 1983 में आई प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'अवतार' का हिस्सा है। इस फिल्म के संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल थे और इसके गीतकार आनंद बख्शी थे। आनंद बख्शी जी ने अत्यंत सरल लेकिन मर्मस्पर्शी शब्दों में एक आम भक्त की भावनाओं को पिरोया है।

इस गीत का फिल्मांकन राजेश खन्ना और शबाना आज़मी पर किया गया था, जिसमें वे माता वैष्णो देवी की यात्रा पर जाते हैं। फिल्म में इस गीत के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे माता का बुलावा आने पर मनुष्य अपनी सभी बाधाओं को पार कर उनके दर्शन के लिए खिंचा चला आता है। यह गीत रिलीज होते ही पूरे देश में गूंज उठा और आज चार दशकों के बाद भी इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और जनसामान्य की खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें पंजाबी लोक संस्कृति और डोगरी शैली का सुंदर प्रभाव देखने को मिलता है। "जय माता दी" का बार-बार आने वाला टेक (रिफ्रेन) गीत को एक अद्भुत लयबद्धता प्रदान करता है।

काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'प्रार्थना गीत' या 'भक्ति पद' है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है। "ऊंचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है" में माता की सर्वोच्चता और उनकी दिव्य सत्ता को दर्शाया गया है। भाषा की सरलता के कारण ही यह भजन बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को आसानी से याद हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र भी प्रदान करता है:

जीवन सीख (Life Lesson) आध्यात्मिक संदेश (Spiritual Message) व्यावहारिक उपयोगिता (Practical Application)
धैर्य और विश्वास ईश्वर के समय पर भरोसा रखें, बुलावा अवश्य आएगा। कठिन समय में विचलित न हों, सही समय का इंतजार करें।
समानता का भाव माता के दरबार में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं है। समाज में सभी के साथ समरसता और आदर का व्यवहार करें।
कठिनाइयों पर विजय ऊंचे पर्वत की चढ़ाई जीवन के संघर्षों का प्रतीक है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए आने वाली बाधाओं से घबराएं नहीं।
पूर्ण समर्पण अपने अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में शीश झुकाना। अहंकार का त्याग करने से ही मानसिक शांति और प्रगति संभव है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बुलावा आमंत्रण या बुलावा परमात्मा की कृपा से मिलने वाली आंतरिक प्रेरणा।
दरबार राजसभा या पावन मंदिर वह स्थान जहाँ दिव्य ऊर्जा का साक्षात अनुभव होता है।
सोए भाग्य दुर्भाग्य या सुप्त चेतना अज्ञानता के अंधकार का दूर होना और ज्ञान का उदय।
खाली हाथ बिना किसी सांसारिक साधन के जब भक्त निष्काम भाव से केवल प्रेम लेकर ईश्वर के पास जाता है।
शीश झुकाना प्रणाम करना या नमन करना अपने अहंकार को पूरी तरह से समाप्त कर देना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. "चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है।"
हे भक्तों! उठो और माता के धाम की ओर प्रस्थान करो, क्योंकि स्वयं जगज्जननी ने हमें याद किया है। उनकी इच्छा के बिना हम उनके पास नहीं जा सकते थे, लेकिन अब उनका बुलावा आ गया है।

2. "ऊंचे पर्वत पर रानी माँ ने दरबार लगाया है।"
माता का दिव्य दरबार त्रिकूट पर्वत की ऊंचाइयों पर स्थित है। यह दर्शाता है कि दिव्य ज्ञान और शांति प्राप्त करने के लिए हमें अपनी चेतना को सांसारिक तुच्छताओं से ऊपर उठाना होगा।

3. "सारे जग में एक ठिकाना, सारे संकट का हल पाना।"
इस संसार में कोई भी स्थान या व्यक्ति हमें स्थाई सुरक्षा नहीं दे सकता। केवल माता का चरण ही वह एकमात्र स्थान है जहाँ हमारे जीवन के सभी दुखों और संकटों का अंत होता है।

4. "मैया के चरणों में आकर, अपने सोए भाग्य जगाना।"
जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक माता के चरणों में समर्पित होता है, उसके जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसका सोया हुआ भाग्य फिर से चमक उठता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता वैष्णो देवी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है:

"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।"

यह नवार्ण मंत्र आदिशक्ति के तीनों रूपों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) को जाग्रत करने वाला परम शक्तिशाली मंत्र है। इसके अतिरिक्त, देवी महात्म्य का यह श्लोक भी अत्यंत प्रसिद्ध है:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है
मुख्य देवी/देवता माता वैष्णो देवी (आदिशक्ति दुर्गा)
मूल गायक नरेंद्र चंचल, महेंद्र कपूर, आशा भोंसले
गीतकार (Lyricist) आनंद बख्शी
संगीतकार (Music Composer) लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
फिल्म/एल्बम अवतार (1983)
मुख्य भाव (Bhava) भक्ति, समर्पण, शरणागति, हर्ष
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जगराता, वैष्णो देवी यात्रा, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मूल लेखक (गीतकार) प्रसिद्ध भारतीय कवि और गीतकार आनंद बख्शी जी हैं। उन्होंने इस गीत को अत्यंत सरल और मर्मस्पर्शी शब्दों में लिखा है।

यह भजन वर्ष 1983 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'अवतार' से लिया गया है। इसके संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी थी।

इस भजन को मुख्य रूप से प्रसिद्ध भजन सम्राट नरेंद्र चंचल, महेंद्र कपूर और आशा भोंसले ने गाया है। नरेंद्र चंचल जी की आवाज में यह भजन आज भी अमर है।

इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि जब तक ईश्वर की कृपा या दिव्य इच्छा नहीं होती, तब तक मनुष्य के मन में भक्ति का उदय नहीं होता और न ही वह तीर्थ यात्रा कर पाता है। यह पूर्णतः भगवद-कृपा का प्रतीक है।

हाँ, नवरात्रि के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान इस भजन का श्रवण और कीर्तन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

माता वैष्णो देवी की पवित्र गुफा भारत के जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू संभाग में कटरा के पास त्रिकूट पर्वत पर स्थित है।

इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण समर्पण, श्रद्धा, और माता के प्रति प्रेम का भाव होना चाहिए। सांसारिक चिंताओं को भूलकर केवल माता के चरणों में ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

हाँ, इस भजन की सुमधुर ध्वनि और "जय माता दी" का दिव्य कीर्तन मस्तिष्क को शांत करता है, तनाव को दूर करता है और मन में अपूर्व शांति का संचार करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोलों और इसके आध्यात्मिक पक्षों की समीक्षा वैदिक विद्वानों और संगीत विशेषज्ञों द्वारा की गई है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के भक्तों को उनकी आस्था के प्रति अधिक जागरूक और समर्पित बनाना है। इसमें दी गई सभी जानकारियां पारंपरिक मान्यताओं और प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - आदिशक्ति की महिमा और उनके विभिन्न अवतारों का वर्णन।
  • श्री दुर्गा सप्तशती - माता के चरित्र और उनके दिव्य मंत्रों का संग्रह।
  • फिल्म 'अवतार' (1983) - मूल गीत और संगीत का संदर्भ।
  • माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (MVDSB) - तीर्थ यात्रा और गुफा का ऐतिहासिक संदर्भ।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन और इसका आध्यात्मिक विश्लेषण पसंद आया है, तो आप हमारे निम्नलिखित लेखों और भजनों को भी पढ़ सकते हैं:

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!