Maha Shivaratri

Purab Se ( Om Namah Shivay) | Banaras | Shreya Ghoshal | AVS - BhaktiLok

106 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"पूरब से (ओम नमः शिवाय)" भजन देवादिदेव महादेव की पावन नगरी काशी (बनारस) की अलौकिक सुबह, गंगा घाटों की दिव्यता और भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण को दर्शाने वाला एक अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी गीत है। फिल्म "बनारस" का यह प्रसिद्ध गीत, जिसे सुरों की मल्लिका श्रेया घोषाल ने अपनी दिव्य आवाज से सजाया है, श्रोता को सीधे काशी के मणिकर्णिका और दशाश्वमेध घाटों की आध्यात्मिक तरंगों से जोड़ देता है। इस गीत में राग-रागिनियों के साथ-साथ शिव भक्ति का वह रस घुला है जो मन को शांत कर आत्मा को परमात्मा के ध्यान में लीन कर देता है। जब पूरब दिशा से सूर्यदेव अपनी सिंदूरी आभा बिखेरते हैं, तब गंगा की लहरों पर तैरती "ओम नमः शिवाय" की ध्वनि संपूर्ण सृष्टि को शिवमय बना देती है। यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह साधक को सांसारिक कोलाहल से दूर ले जाकर अंतर्मुखी होने और पंचाक्षरी मंत्र की महिमा को आत्मसात करने का एक पावन माध्यम है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

पूरब से जब सूरज निकले (ओम नमः शिवाय)

पूरब से जब सूरज निकले, सिंदूरी रंग बिखराए...
गंगा मैया की लहरों पर, पावन संगीत बहाए...
हर हर महादेव, हर हर महादेव...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...

बनारस की सुबह निराली, घाट-घाट पर छाई लाली...
मंदिर-मंदिर शंख बजे जब, गूंजे शिव की महिमा न्याली...
डमरू बाजे, घंटा बाजे, गूंजे हर-हर की आवाज...
भोले बाबा के चरणों में, झुके आज धरती और आकाश...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...

तन पर भस्म, गले मुंडमाला, नयनों में करुणा की धारा...
नीलकंठ महादेव हमारे, तू ही जग का पालनहारा...
गंगा बहे जटा से जिनकी, माथे सोहे चंदा प्यारा...
ऐसे शिव की शरण में आकर, धन्य हुआ यह जीवन सारा...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...

सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर, शिव ही है अनंत का स्वामी...
कण-कण में जो वास करे, वह घट-घट का अंतर्यामी...
भक्ति के इस पावन रस में, मन मेरा आज रंगा जाए...
पूरब से जब सूरज निकले, सिंदूरी रंग बिखराए...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...
ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत भगवान शिव की आराधना और बनारस (काशी) की अलौकिक सुबह का एक अत्यंत सजीव और भावपूर्ण चित्रण है। इसके प्रत्येक अंतरे में गहरा आध्यात्मिक संदेश और समर्पण का भाव निहित है:

प्रथम अंतरा: काशी की सुबह और सूर्योदय की दिव्यता

गीत की शुरुआत पूरब दिशा में सूर्योदय के सुंदर दृश्य से होती है। जब सूर्य अपनी सिंदूरी किरणें बिखेरता है, तो गंगा की लहरें भी उस प्रकाश से जगमगा उठती हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो गंगा मैया स्वयं भगवान शिव की स्तुति में संगीत बहा रही हों। इस पावन बेला में संपूर्ण वातावरण "ओम नमः शिवाय" के महामंत्र से गुंजायमान हो उठता है। यह दृश्य साधक को यह सिखाता है कि दिन की शुरुआत परमात्मा के स्मरण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के साथ होनी चाहिए।

द्वितीय अंतरा: बनारस के घाट और शिवमय वातावरण

बनारस के घाटों की सुबह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जब मंदिरों में शंख और घंटे बजते हैं, तो ऐसा लगता है मानो काल भी ठहर गया हो। डमरू की ध्वनि और हर-हर महादेव का उद्घोष भक्तों के हृदय में असीम शांति और ऊर्जा का संचार करता है। इस पावन भूमि पर आकर धरती और आकाश भी महादेव के चरणों में नतमस्तक हो जाते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि महादेव ही इस चराचर जगत के परम अधिपति हैं।

तृतीय अंतरा: शिव का अलौकिक स्वरूप और वैराग्य

इस भाग में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके शरीर पर भस्म रमी है, गले में मुंडों की माला है, लेकिन उनके नेत्रों से करुणा की अविरल धारा बहती है। वे नीलकंठ हैं, जिन्होंने संसार की रक्षा के लिए विष पी लिया। उनकी जटाओं से मां गंगा प्रवाहित होती हैं और मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है। ऐसे परम कृपालु महादेव की शरण में आने मात्र से ही मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

चतुर्थ अंतरा: सत्य, शिव और सुंदर का अद्वैत सिद्धांत

"सत्यं शिवं सुंदरं" के सनातन सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए यह अंतरा बताता है कि जो सत्य है, वही कल्याणकारी (शिव) है और वही सबसे सुंदर है। वे अनंत के स्वामी हैं और सृष्टि के कण-कण में वास करते हैं। वे घट-घट के अंतर्यामी हैं, जो हमारे मन के हर विचार को जानते हैं। जब भक्त का मन इस भक्ति रस में डूब जाता है, तो उसे संसार के सारे कष्टों से मुक्ति मिल जाती है और वह परम आनंद का अनुभव करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "शांत रस" और "भक्ति रस" का अद्भुत समन्वय है। यह गीत हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • समर्पण का भाव: जीवन की समस्त चिंताओं को भूलकर स्वयं को महादेव के चरणों में समर्पित कर देना ही सच्ची शांति का मार्ग है।
  • प्रकृति और परमात्मा का संबंध: सूर्योदय, गंगा की लहरें और सुबह की ताजी हवा—ये सभी ईश्वर की ही विभूतियां हैं। प्रकृति के सानिध्य में ईश्वर को खोजना सहज हो जाता है।
  • मंत्र की शक्ति: "ओम नमः शिवाय" केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) को संतुलित करने वाली परम ध्वनि है। इसके निरंतर जप से मानसिक क्लेश दूर होते हैं।
  • वैराग्य और करुणा: शिव का स्वरूप हमें सिखाता है कि बाहरी चमक-दमक से दूर रहकर भी भीतर करुणा और प्रेम का सागर बहाया जा सकता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) पूरब से जब सूरज निकले (Purab Se)
गायिका (Singer) श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal)
संगीतकार (Music Composer) आदेश श्रीवास्तव (Aadesh Shrivastava)
गीतकार (Lyricist) समीर (Sameer)
फिल्म/एल्बम (Movie/Album) बनारस - अ मिस्टिक लव स्टोरी (Banaras - A Mystic Love Story)
मुख्य देवता (Deity) भगवान शिव (Lord Shiva)
भाषा (Language) हिंदी (Sanskritized Hindi)
मुख्य रस (Mood/Bhava) भक्ति, शांत और समर्पण (Devotion & Peace)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत की सफलता के पीछे भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों का योगदान है:

  • श्रेया घोषाल: अपनी मधुर और मखमली आवाज के लिए प्रसिद्ध श्रेया घोषाल ने इस गीत में शास्त्रीय पुट देकर इसे एक कालजयी भजन बना दिया है। उनकी आवाज में जो ठहराव और भक्ति का भाव है, वह सीधे हृदय को स्पर्श करता है।
  • आदेश श्रीवास्तव: स्वर्गीय आदेश श्रीवास्तव ने इस गीत का संगीत तैयार किया है। उन्होंने बनारस की पारंपरिक शास्त्रीय संगीत शैली और आधुनिक वाद्य यंत्रों का ऐसा संयोजन किया है जो मन को एक अलग ही ध्यानमग्न अवस्था में ले जाता है।
  • समीर अंजान: प्रसिद्ध गीतकार समीर ने बहुत ही सरल लेकिन गहरे आध्यात्मिक शब्दों का चयन किया है, जिससे आम जनमानस भी शिव की महिमा को आसानी से समझ सके।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
सिंदूरी (Sindoori) लाल-नारंगी रंग की आभा सूर्योदय के समय आकाश का रंग
नीलकंठ (Neelkandh) नीले गले वाले विषपान करने के कारण शिव का एक नाम
अंतर्यामी (Antaryami) मन की बात जानने वाले परमात्मा का सर्वव्यापी स्वरूप
भस्म (Bhasma) राख (Vibhuti) शिव के शरीर पर सुशोभित पवित्र भस्म
चंदा (Chanda) चंद्रमा (Moon) शिव के मस्तक पर सुशोभित बालचंद्र
चराचर (Charachar) सजीव और निर्जीव सृष्टि संपूर्ण ब्रह्मांड

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

काशी (बनारस) को भगवान शिव की त्रिशूल पर बसी नगरी माना जाता है। इस नगरी का कण-कण शिवमय है। यह गीत काशी की उसी शाश्वत ऊर्जा को संगीत के माध्यम से प्रकट करता है।

सांस्कृतिक रूप से, यह भजन गंगा आरती और सुबह की प्रार्थनाओं का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जब कोई भक्त इस गीत को सुनता है, तो उसे ऐसा अनुभव होता है मानो वह स्वयं दशाश्वमेध घाट पर बैठकर मां गंगा की आरती देख रहा हो। आध्यात्मिक रूप से, यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व उस परम चेतना (शिव) का ही एक अंश है। शिव तांडव स्तोत्र की तरह ही, यह भजन भी शिव के रौद्र और सौम्य दोनों रूपों का स्मरण कराता है, लेकिन इसका मुख्य ध्यान शिव के शांत और कल्याणकारी रूप पर है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस भजन के माध्यम से हम अपने दैनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं:

  1. दिन की सकारात्मक शुरुआत: सुबह उठकर सबसे पहले ईश्वर का ध्यान करने से पूरे दिन मन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  2. विषमताओं को पचाना (नीलकंठ भाव): जैसे शिव ने विष पीकर संसार की रक्षा की, वैसे ही हमें भी जीवन की कड़वाहट और निंदा को पचाकर दूसरों को केवल प्रेम और करुणा देनी चाहिए।
  3. सादगी और वैराग्य: शिव ब्रह्मांड के स्वामी होकर भी श्मशान में रहते हैं और भस्म लगाते हैं। यह हमें सिखाता है कि भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक मोह नहीं रखना चाहिए।
  4. मानसिक शांति: "ओम नमः शिवाय" मंत्र का मानसिक जप तनाव और चिंता को दूर करने का सबसे अचूक उपाय है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

वैसे तो महादेव की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इस गीत को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर हैं:

  • प्रातः काल की प्रार्थना: सुबह 4 से 6 बजे (ब्रह्ममुहूर्त) के बीच इस गीत को सुनने से मन एकाग्र और शांत होता है।
  • महाशिवरात्रि: इस पावन पर्व पर शिव मंदिरों और घरों में इस भजन का गायन अत्यंत शुभ माना जाता है। आप इस अवसर पर श्री हनुमान चालीसा के साथ-साथ शिव भजनों का भी पाठ कर सकते हैं।
  • सावन मास (Shravan Month): सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा के समय इस भजन को बजाने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
  • ध्यान और योग के समय: इस गीत का धीमा संगीत ध्यान (Meditation) लगाने में बहुत सहायक सिद्ध होता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक पूरब से जब सूरज निकले (ओम नमः शिवाय)
गायन शैली भक्ति संगीत / अर्ध-शास्त्रीय (Semi-Classical Devotional)
मुख्य वाद्य यंत्र बांसुरी, तबला, सितार, डमरू और मंजीरा
आध्यात्मिक संदेश शिव ही सत्य हैं, उनकी शरण में ही परम शांति है
संबंधित तीर्थ स्थल काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस (वाराणसी)
उपयुक्त समय प्रातः काल (Morning Time)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन वर्ष 2006 में रिलीज हुई फिल्म "बनारस - अ मिस्टिक लव स्टोरी" (Banaras) का है। इस फिल्म में बनारस की संस्कृति और आध्यात्मिकता को बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाया गया है।

इस भजन को भारत की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल ने गाया है और इसका दिव्य संगीत स्वर्गीय आदेश श्रीवास्तव द्वारा तैयार किया गया है।

"ओम नमः शिवाय" भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र है। इसका अर्थ है—"मैं उस परम सत्ता, कल्याणकारी शिव को नमन करता हूँ।" यह मंत्र ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व करता है।

सुबह का समय (ब्रह्ममुहूर्त) सात्विक ऊर्जा से भरपूर होता है। इस समय इस भजन को सुनने से मन शांत होता है, एकाग्रता बढ़ती है और दिनभर के कार्यों के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

हाँ, इस भजन में राग भैरव और बिलावल के स्वर सुनाई देते हैं, जो सुबह के समय गाए जाने वाले राग हैं। यही कारण है कि यह गीत सुबह के समय सुनने पर अत्यंत शांति प्रदान करता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बनारस (काशी) भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी है। इसे शिव की राजधानी भी कहा जाता है। यहाँ स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है।

इसका अर्थ है कि इस नश्वर संसार में केवल परमात्मा (शिव) ही एकमात्र शाश्वत सत्य हैं। बाकी सब कुछ परिवर्तनशील और नश्वर है। सत्य को जानना ही शिव को जानना है।

हाँ, संगीत चिकित्सा (Music Therapy) और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, इस भजन की धीमी लय और "ओम नमः शिवाय" का बार-बार उच्चारण मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है, जिससे तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण को सनातन धर्म के ग्रंथों, शिव पुराण और संगीत शास्त्र के सिद्धांतों के आलोक में तैयार किया गया है। यह सामग्री भक्तों को भगवान शिव की महिमा और बनारस की पावन संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य से संकलित की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण: भगवान शिव के स्वरूप और पंचाक्षरी मंत्र की महिमा का शास्त्रीय संदर्भ।
  • फिल्म "बनारस" (2006): गीत के मूल बोल और संगीत संरचना का आधिकारिक स्रोत।
  • श्रीमद्भगवद्गीता: ईश्वर के सर्वव्यापी स्वरूप (घट-घट वासी) का दार्शनिक आधार।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 27 Sep 2026

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