bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

छठपूजा - केकरा घर के सूपवा

लोक गायिका प्रीति लता द्वारा गाया गया पावन भोजपुरी छठ गीत 'केकरा घर के सूपवा' सुनें और पढ़ें। जानिए छठ पूजा की महिमा और लोक आस्था के इस पर्व की विशेषता।

केकरा घर के सूपवा | प्रीति लता का पावन छठ गीत

श्रेणी: भक्ति गाना भोजपुरी में | Bhojpuri Devi Geet | छठ पूजा विशेष

सनातन संस्कृति और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की महिमा अपरंपार है। यह एकमात्र ऐसा अनुष्ठान है जिसमें अचल प्रकृति, जल, सूर्य और छठी मइया की एक साथ उपासना की जाती है। लोक गायिका प्रीति लता द्वारा स्वरबद्ध पावन लोकगीत "छठपूजा - केकरा घर के सूपवा" इसी महान पर्व की साक्षात जीवंत झांकी प्रस्तुत करता है। इस गीत के माध्यम से न केवल भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि झलकती है, बल्कि इसमें निहित वह अटूट विश्वास भी प्रदर्शित होता है जो व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन कठिन साधना के दौरान सूर्य भगवान और छठी मैया के प्रति अर्पित करते हैं। सूप, दउरा, ठेकुआ और कोसी भरने की परंपरा का यह सुंदर चित्रण हर सुनने वाले के मन में भक्ति, पवित्रता और लोक-संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम जगा देता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

(स्थाई / मुखड़ा) केकरा घर के सूपवा हे छठी मइया, केकरा घर के दउरा रे हो? केकरा घर के सूपवा हे छठी मइया, केकरा घर के दउरा रे हो? उगss हे सूरज देवता अरघ के बेरिया, दरसन दs ना तू हमार हे हो! (अंतरा १) घाटवा पे उमड़ल बा भारी रे उमरिया, धइले बाड़ी बरतिया कुल नारि रे हो। केहू के नयनवा में जगमग प्रकाश बा, छठी माई तोहरे चरनवा के आस बा। उगss हे सूरज देवता अरघ के बेरिया, दरसन दs ना तू हमार हे हो! (अंतरा २) सोना के सूपवा सुहावन लागे, चाँदी के दउरा मनमोहना लागे। भउजी उठावेली सूपवा माथे धइके, सेवक लोग झूमे मइया के गुन गईके। उगss हे सूरज देवता अरघ के बेरिया, दरसन दs ना तू हमार हे हो! (अंतरा ३) घाट पोखरिआ झगमगाए, मइया तोहर महिमा जगत गाए। बाल-बच्चा सुख-सम्पति दीहs आशीषवा, प्रीति लता गावे तोहरे जसिया के गीतवा। उगss हे सूरज देवता अरघ के बेरिया, दरसन द्स ना तू हमार हे हो!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

लोक गायिका प्रीति लता द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय छठ गीत "छठपूजा - केकरा घर के सूपवा" की गहराई में उतरें तो यह गीत केवल शब्दों की माला नहीं, बल्कि लोक जीवन की सादगी और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।

मुखड़े का भाव: गीत की शुरुआत एक अत्यंत भावुक प्रश्न से होती है—"केकरा घर के सूपवा हे छठी मइया, केकरा घर के दउरा रे हो?" यह जिज्ञासा उस आकुलता को दर्शाती है जो हर व्रती के मन में अपने घर छठी मैया के आगमन को लेकर होती है। इसके तुरंत बाद सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि हे सूर्य देवता! अर्घ्य देने का पावन समय हो गया है, कृपया हमें अपने दिव्य दर्शन दें और हमारा व्रत सफल करें।

प्रथम अंतरा का भाव: छठ घाट पर उमड़ी भारी भीड़ और व्रत करने वाली कुल-नारियों (माताओं और बहनों) के कठोर अनुशासन का वर्णन यहाँ किया गया है। सभी के नयनों में एक ही प्रकाश है—वह है छठी मैया के चरणों के प्रति अटूट आस्था और विश्वास।

द्वितीय व तृतीय अंतरा का भाव: सोने-चांदी रूपी कल्पनाओं के माध्यम से सूप और दउरे की दिव्यता को दर्शाया गया है। परिवार की बहुएं और सेवकजन पारंपरिक गीत गाते हुए घाट की शोभा बढ़ाते हैं। अंत में गायिका प्रीति लता कामना करती हैं कि हे मइया! सभी को बाल-बच्चों, सुख-सम्पत्ति का आशीर्वाद दें और हमें यह सौभाग्य दें कि हम सदा आपके गुणों का गान करते रहें।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

यह गीत मुख्य रूप से लोक आस्था, प्रकृति प्रेम, पारिवारिक एकजुटता और निस्वार्थ समर्पण की भावना पर आधारित है। छठ महापर्व भारतीय संस्कृति का वह आयाम है जहाँ उगते हुए सूर्य के साथ-साथ अस्त्रगामी (डूबते हुए) सूर्य को भी नमन किया जाता है।

  • प्रकृति की वंदना: सूर्य और जल को जीवन का आधार मानकर कृतज्ञता ज्ञापित करना।
  • स्त्री शक्ति और अनुशासन: महिलाओं द्वारा किए जाने वाले 36 घंटे के निर्जल व्रत की कठिन साधना को रेखांकित करना।
  • सामूहिकता का संदेश: जाति, वर्ग और भेद-भाव से ऊपर उठकर एक ही घाट पर सभी का समवेत स्वर में छठी मईया के गीत गाना।

यह गीत हमें यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, यदि आस्था और संयम पक्का हो, तो हर कठिन व्रत और संकल्प को पूरा किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए आप भोजपुरी देवी गीत संग्रह देख सकते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का शीर्षक छठपूजा - केकरा घर के सूपवा
गायिका प्रीति लता (Priti Lata)
संगीत शैली पारंपरिक भोजपुरी छठ गीत / लोकगीत
भाषा भोजपुरी (अंगिका एवं मैथिली पुट के साथ)
मुख्य विषय छठी मईया की महिमा, सूर्योपासना, व्रत और लोक संस्कृति
संबंधित पर्व छठ महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक / पारंपरिक संदर्भ
सूपवा सूप (बांस से बना बर्तन) पूजा की सामग्री जैसे ठेकुआ, फल और दीपक सजाने का पवित्र साधन।
दउरा बड़ी टोकरी (बांस की) घाट पर पूजा सामग्री ले जाने के लिए प्रयुक्त होने वाली बड़ी टोकरी।
अरघ (अर्घ्य) जल अर्पित करना सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य देव को जल देना।
बरतिया व्रत करने वाली महिला छठ व्रत का कठिन अनुष्ठान करने वाली व्रतिन।
आशीषवा आशीर्वाद / शुभकामना छठी मैया से संतान और परिवार की मंगल कामना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह शुद्धता, पर्यावरण प्रेम और सनातन दर्शन का जीवंत दस्तावेज है। "छठपूजा - केकरा घर के सूपवा" जैसे गीत हमारी लोक-संस्कृति की रीढ़ हैं। जब कोई गायिका अपनी सुरीली आवाज में छठी मईया के गीत गाती है, तो पूरा परिवेश भक्तिमय हो जाता है।

सनातन परंपरा में प्रकृति को ही ईश्वर का रूप माना गया है। सूर्य देव आरोग्यता के प्रत्यक्ष देवता हैं और जल जीवन का आधार है। इन दोनों की आराधना के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और संस्कृति के संवर्धन में सेतु का काम करता है। समान रूप से अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी भक्ति गाना भोजपुरी में सुनने की परंपरा अत्यंत लोकप्रिय रही है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • कठिन परिश्रम और संयम: छठ व्रत का अनुष्ठान सिखाता है कि बड़े उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अनुशासन और संयम अनिवार्य है।
  • कृतज्ञता का भाव: प्रकृति (सूर्य और जल) के प्रति आभार व्यक्त करना ही सच्चा धर्म है।
  • पारिवारिक सहयोग: पर्व के दौरान घर के सभी सदस्यों का मिलकर सूप सजाना, दउरा उठाना और घाट तक जाना पारिवारिक एकजुटता का संदेश देता है।
  • सादा जीवन और उच्च विचार: लोक पर्वों की सादगी हमें दिखाती है कि सच्चा आनंद दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि में है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान सुना जाता है।

  • नहाय-खाय के दिन: घर की साफ-सफाई और प्रसाद बनाते समय।
  • खरल / लोहंडा के दिन: रसिया-खीर का प्रसाद ग्रहण करने के समय।
  • संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के दौरान: छठ घाट की ओर जाते समय और घाट पर पूजा के पावन क्षणों में।

इस प्रकार के लोकगीतों को सुनकर न केवल मन शांत होता है, बल्कि पर्व का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। आप खेशारी लाल यादव के भोजपुरी गाने और अन्य लोकप्रिय देवी गीतों के साथ इस परंपरा को और भी प्रगाढ़ कर सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत का नाम छठपूजा - केकरा घर के सूपवा
प्रसिद्ध कलाकार प्रीति लता
शैली भोजपुरी छठ लोकगीत
मुख्य विषय छठी मईया की वंदना और सूर्योपासना
सांस्कृतिक महत्व लोक आस्था, प्रकृति प्रेम और पारिवारिक सौहार्द
उपयुक्त अवसर छठ महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह पावन छठ गीत प्रसिद्ध लोक गायिका प्रीति लता द्वारा गाया गया है, जो अपनी मधुर आवाज और पारंपरिक गायन शैली के लिए जानी जाती हैं।

यह गीत विशेष रूप से छठ महापर्व के दौरान, नहाय-खाय से लेकर अर्घ्य देने तक के पावन अवसरों पर घरों में और छठ घाटों पर गाया जाता है।

सूप और दउरा बांस से बने पवित्र पात्र हैं जिनमें ठेकुआ, मौसमी फल, दीपक और पूजा की अन्य सामग्री रखकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।

छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है, तथा अब यह वैश्विक स्तर पर मनाई जाती है।

यह गीत प्रकृति के प्रति आभार, परिवार की एकता, नारी शक्ति के अनुशासन और छठी मैया के प्रति अगाध प्रेम का संदेश देता है।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है।

हाँ, पारंपरिक लोकगीत हमारी संस्कृति, रीति-रिवाजों और लोक-आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।

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संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा और लोक गायिका प्रीति लता के प्रसिद्ध गीत पर आधारित है। इसे सांस्कृतिक परंपराओं, लोक गीतों के शास्त्रीय महत्व और पाठकों की जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सभी तथ्य पारंपरिक मान्यताओं और क्षेत्रीय लोक-साहित्य पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक संस्कृति और लोकगीत परंपरा, लोक साहित्य अकादमी संदर्भ।
  • छठ महापर्व की पारंपरिक अनुष्ठान पद्धति एवं व्रत कथाएं।
  • पारंपरिक संगीत संग्रह एवं क्षेत्रीय लोक गायक अभिलेख।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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