Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

आरा में दोबारा छठ

पढ़ें आरा में दोबारा छठ का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

लोक आस्था के महापर्व की पावन और अद्वितीय छटा

लोक आस्था, सूर्य उपासना और लोकगीतों के मिलन का पर्व 'छठ पूजा' सनातन संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से लेकर अब पूरे विश्व में अपनी अनूठी संस्कृति और अनुशासन के लिए प्रसिद्ध यह महापर्व सूर्य देव और छठी मईया की आराधना का सबसे बड़ा अनुष्ठान है। इसी पावन संदर्भ में लोकगायकी के सिरमौर खेसारी लाल यादव और प्रसिद्ध गायिका शिल्पी राज का नया छठ गीत 'आरा में दोबारा छठ' सोशल मीडिया और संगीत प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो चुका है। यह गीत न केवल पारंपरिक लोक धुनों से सजा हुआ है, बल्कि इसमें आरा की माटी की सौंधी खुशबू, परिवार के मिलन, और छठी मईया के प्रति अटूट आस्था का बहुत ही सुंदर और जीवंत चित्रण किया गया है। गीत के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि कैसे परदेसों में रहने वाले लोग भी इस महापर्व पर अपने घर यानी 'आरा' लौटते हैं और संपूर्ण भक्ति भाव के साथ सूर्य उपासना करते हैं। इस लेख में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, इसका सांस्कृतिक महत्व, और छठ महापर्व से जुड़ी विभिन्न परंपराओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:
घाट गड़ेलिया पर उमड़ल बिया भीड़,
छठी मैया के दरसन खातिर लागल बा उमंग री!
आरा जिला के माटी पावन, जहवां जागे नेह,
एहिजा होखता दोबारा छठ, बरसेला बरदान रे!
खेसारी बोले छठी मईया के महिमा अपार,
आरा में दोबारा छठ कईले बानी हजार!

अंतरा 1:
दउरा उठवले भैया, चलले घाट ओरिया,
संगे में बहिनिया धउरेली सूप मौरिया।
सूरज देव के अरघ देबे खातिर जगल सारा गाँव,
भोजपुरीया माटी में गूंजे छठी मईया के नाव।
घाट के किनारे बाजे सोहर अउरी गीत,
भक्ति के सागर में झूमे सारा मीत!

अंतरा 2:
शिल्पी राज गावे गीत, झूमे आरा के बाजार,
कोशी भरे खातिर उमड़ल नर-नार।
चारों ओर गूंजे स्वर 'केलवा के पात पर उगलन सुरुज मल झुके झुके',
एकहूगो भगत एहिजा नाही खानी सूखे।
माई के कृपा से घर-आँगन महक जाला,
दुखवा दरिद्रता सब दूर भाग जाला।

अन्तरावर्तन / समापन:
खेसारी, शिल्पी के सुर से सजल बा त्यौहार,
छठी मईया सबके दीसु सुख अउर संसार!
बोल छठी मईया की जय!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

खेसारी लाल यादव और शिल्पी राज द्वारा गाया गया यह आधुनिक लोकगीत पारंपरिक छठ गीतों की आत्मा को जीवंत करता है। इसका भावार्थ स्पष्ट करता है कि छठ महापर्व केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और आराध्य के प्रति समर्पण का मिलन उत्सव है। गीत के मुखड़े में 'आरा में दोबारा छठ' के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि यदि किसी कारणवश कोई भक्त अपने आराध्य की उपासना में या पिछले वर्ष के संकल्प में कोई कमी महसूस करता है, तो छठी मईया की कृपा से उसे दोबारा और भी भव्य रूप से इस अनुष्ठान को पूरा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

पक्तियों में 'दउरा उठवले भैया' और 'संगे में बहिनिया धउरेली सूप मौरिया' के माध्यम से परिवार के सभी सदस्यों की सामूहिक सहभागिता को दिखाया गया है। छठ पूजा का यही सबसे बड़ा सौंदर्य है, जहाँ जाति, वर्ग और उम्र के बंधनों से ऊपर उठकर पूरा परिवार एक साथ मिलकर खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की तैयारी करता है। शिल्पी राज की मधुर आवाज और खेसारी लाल का ऊर्जावान स्वर इस गीत को हर घर की चौखट तक पहुँचा देता है, जहाँ लोग छठी मईया के गीतों पर झूम उठते हैं और अपने जीवन की मंगलकामना करते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मुख्य विषय और भावना निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित है:

  • सांस्कृतिक जुड़ाव: प्रवासियों को अपने मूल स्थान और माटी से जोड़ने का सशक्त माध्यम।
  • पारिवारिक एकता: माता-पिता, भाई-बहन और रिश्तेदारों का एक साथ मिलकर व्रत की तैयारियां करना।
  • अटूट श्रद्धा: कठिन व्रतों और नियमों का पालन करते हुए भी चेहरे पर संतोष और प्रसन्नता का भाव।
  • लोक संगीत की जीवंतता: पारंपरिक धुनों को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत कर युवा पीढ़ी को जोड़ना।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) आरा में दोबारा छठ (Aara Mein Dobara Chhath)
मुख्य गायक (Singers) खेसारी लाल यादव और शिल्पी राज
संगीतकार (Music Composer) लोक संगीत परंपरा आधारित आधुनिक संयोजन
भाषा (Language) भोजपुरी (हिन्दी भावार्थ सहित)
मुख्य विषय (Theme) छठ पूजा, सूर्य उपासना, पारिवारिक मिलन और भक्ति
प्रसार माध्यम (Platform) डिजिटल ऑडियो और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में खेसारी लाल यादव और शिल्पी राज की जोड़ी ने अनगिनत सुपरहिट और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गीत दिए हैं। खेसारी लाल यादव अपनी माटी से जुड़े होने के कारण लोक पर्वों की नब्ज को बहुत अच्छे से समझते हैं। वहीं, शिल्पी राज की सुरीली और पैनी आवाज श्रोताओं के मन में सीधे उतर जाती है। इस गीत के माध्यम से उन्होंने भोजपुर क्षेत्र विशेषकर 'आरा' की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है, जहाँ छठ महापर्व का उत्साह देखने लायक होता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
दउरा बांस का बना हुआ बड़ा सूप या टोकरी छठ पूजा में फल और प्रसाद रखने का पात्र
सूप सूप (सूपड़ी) अर्घ्य सामग्री सजाने का पारंपरिक साधन
कोशी गन्ने और दीपों से बनाया जाने वाला मंडप छठ घाट या घर पर की जाने वाली विशेष पूजा
अरघ (अर्घ्य) सूर्य देव को जल अर्पित करना छठ महापर्व का मुख्य अनुष्ठान

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व विशुद्ध रूप से प्रकृति की पूजा, स्वच्छता, समानता और अनुशासन का प्रतीक है। 'आरा में दोबारा छठ' जैसे गीत इस सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे गीत उन्हें उनके पारंपरिक मूल्यों, मातृभूमि के प्रति प्रेम और धार्मिक अनुष्ठानों की याद दिलाते हैं। सूर्य भगवान प्रत्यक्ष देवता हैं, जिनकी उपासना से आरोग्यता और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस गीत के माध्यम से सूर्योपासना के इस पर्व की महिमा घर-घर तक पहुँचती है।

आप हमारी वेबसाइट पर श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के माध्यम से अन्य पावन स्तोत्रों और भजनों का भी आनंद ले सकते हैं, जो आपकी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक समृद्ध बनाते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • परंपराओं का सम्मान: अपनी संस्कृति और लोक पर्वों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
  • समर्पण और अनुशासन: छठ व्रत के कठिन नियमों की तरह जीवन में भी अनुशासन का होना आवश्यक है।
  • सामूहिक सौहार्द: पर्व-त्यौहार समाज को आपस में जोड़ने का काम करते हैं, इन्हें मिलजुलकर मनाना चाहिए।
  • कृतज्ञता: प्रकृति (सूर्य, जल, वायु) के प्रति आभार व्यक्त करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाले छठ महापर्व के दौरान (नहाय-खाय से लेकर उद्यमी सूर्य को अर्घ्य देने तक) सबसे अधिक सुना जाता है। इसके अलावा, जब भी परदेस में रहने वाले लोग अपने घर लौटते हैं या जब परिवार में कोई मांगलिक उत्सव होता है, तब ऐसे लोकगीत वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय और आनंदित बना देते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

श्रेणी (Category) छठ पूजा गीत / लोकगीत
लोकप्रियता (Popularity) अत्यधिक लोकप्रिय (भोजपुरी संगीत क्षेत्र)
गायक (Singers) खेसारी लाल यादव, शिल्पी राज
मुख्य संदेश (Main Message) आरा की माटी और छठ महापर्व की महिमा
सांस्कृतिक मूल्य (Cultural Value) लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय गीत के मुख्य गायक भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और प्रसिद्ध गायिका शिल्पी राज हैं।

छठ पूजा मुख्य रूप से भगवान सूर्य (प्रकृति के प्रत्यक्ष देवता) और छठी मईया (माता प्रकृति/उषा) को समर्पित है।

इस गीत में बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर 'आरा' (भोजपुर जिला) की छठ पूजा का विशेष वर्णन किया गया है।

छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है, जो नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, संध्या अर्घ्य और अंत में उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होता है।

हाँ, यह गीत पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक संगीत शैली का एक बेहतरीन मिश्रण है जो छठ पर्व की भावना को पूरी तरह से दर्शाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत गीत के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पारंपरिक लोक मान्यताओं और उपलब्ध डिजिटल संगीत स्रोतों के आधार पर संकलित किए गए हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को लोक संस्कृति और पर्वों के गहरे आध्यात्मिक व सामाजिक महत्व से परिचित कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक संगीत परंपरा एवं मौखिक साहित्य
  • सनातन सूर्य उपासना पद्धतियाँ एवं छठ व्रत विधान
  • सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संगीत एवं मीडिया मंच

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!