Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया

पढ़ें सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

संपूर्ण भक्ति गीत एवं महिमा

"सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया" यह अत्यंत पावन, मनमोहक और लोक-आस्था से परिपूर्ण भक्ति गीत है जो सनातन संस्कृति के महाकुंभ कहे जाने वाले लोक पर्व 'छठी मईया' यानी छठ पूजा के अवसर पर घर-घर, घाट-घाट और गली-मोहल्लों में गूंजता है। यह भजन या लोकगीत केवल संगीत की स्वर लहरियां नहीं है, बल्कि यह एक व्रती मां, बहन या भक्त की उस परम शक्ति के प्रति अनन्य पुकार है जो प्रकृति, सूर्य और जल की अधिष्ठात्री देवी हैं। छठी मईया का यह पवित्र गीत करुणा, विरह, समर्पण, और अटल विश्वास का अनूठा संगम है। लोक परंपराओं के अनुसार, जब एक साधक पूरे छह दिनों तक कठोर नियमों, निर्जला उपवास और अटूट निष्ठा के साथ सूर्य देव और छठी माता की आराधना करता है, तब उसके अंतर्मन से जो भाव उमड़ते हैं, वे इस गीत के माध्यम से प्रकट होते हैं। इस गीत का भाव यह है कि हे छठी मईया! मेरी इस छोटी सी अरजी (प्रार्थना) को स्वीकार करो और मेरे परिवार को आरोग्यता, संतान सुख और ऐश्वर्य का आशीर्वाद प्रदान करो। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति और श्रद्धा रूपी अमृत का संचार करता है, जिससे संपूर्ण वातावरण दिव्य ऊर्जा से ओत-प्रोत हो जाता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थायी (Mukhda):

सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया,
तोहरे चरनिया में धइले बानी पईयां।
सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया...

अंतरा 1:

घाट पर सजावनी तोहार सुरुज मड़ईया,
दर्शन दऽ तू आके हे जग की मईया।
भोरही के बेरिया जागे सारा संसारी,
तोहरे महिमा गावे बालक अउर नारी।
सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया...

अंतरा 2:

उगहू सुरुज देव भइले अरघ के बेरियां,
झूमे धरती-अंबर डोले सगरी नगरियां।
कंचन थाल सजाई के बानी तोहरे दुआरे,
नयनन में आस लेके ताकी तोहरे द्वारे।
सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया...

अंतरा 3:

बाल-बच्चा परिवार के सुख-चैन दिहलू,
भूखे रह के व्रत हमार मान लिहलू।
अखिया के नीर तू तs हरहs मईया,
चरण कमल में मोरा राखहs सजनीया।
सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया,
तोहरे चरनिया में धइले बानी पईयां।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत भोजपुरी और अंगिका अंचल की मधुर लोक शैली में रचा गया है, जिसका शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ बहुत गहरा है। स्थायी पंक्तियों में भक्त छठी मईया से प्रार्थना करता है कि हे माता! मेरी विनती सुन लीजिए, मैं आपके चरणों में गिरकर (पईयां पड़कर) क्षमा और कृपा की भीख मांग रहा हूं। भक्त का यह समर्पण उसके अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है।

प्रथम अंतरे में भक्त कहता है कि हमने नदी के घाट पर आपके लिए बहुत सुंदर मंडप सजाया है और सूर्य उपासना की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। हे जगदंबे! अब आप स्वयं आकर हमें अपने दर्शन दीजिए। सुबह के इस पावन बेला में सारा संसार जाग चुका है और छोटे-छोटे बालकों से लेकर महिलाएं तक आपकी महिमा के गीत गा रही हैं।

द्वितीय अंतरे में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का सजीव चित्रण किया गया है। भक्त पुकारता है कि हे सूर्यदेव! अब प्रकट हो जाइए, अर्घ्य देने का समय हो गया है। इस पावन बेला में धरती और आकाश दोनों झूम रहे हैं और संपूर्ण नगर में उत्सव का माहौल है। हम हाथ में कंचन (सोने जैसी पवित्र) थाल सजाकर आपके द्वार पर खड़े हैं और अपनी आंखों में आशा की किरण लिए आपकी कृपा की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

अंतिमतः, भक्त माता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहता है कि हे मईया! आपने हमारे बाल-बच्चों और पूरे परिवार को सुख-चैन प्रदान किया है और हमारे इस कठिन निर्जला व्रत को स्वीकार किया है। हमारे नेत्रों के आंसुओं और दुखों को हर लीजिए तथा सदा अपने इन पावन चरण कमलों में हमें शरण दीजिए।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस पावन गीत की मुख्य भावना मातृवत् स्नेह, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पूर्ण शरणागति है। छठी पूजा सनातन संस्कृति का वह पर्व है जिसमें उगते सूर्य के साथ-साथ अस्त होते सूर्य की भी पूजा की जाती है, जो यह सिखाता है कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। इस गीत का संदेश है कि निष्ठा, पवित्रता और सच्चे प्रेम से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती। लोकगीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि सांसारिक सुखों की प्राप्ति के साथ-साथ आंतरिक शुद्धि और पारिवारिक कल्याण के लिए प्रकृति और मातृशक्ति की उपासना सर्वोपरि है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Details) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया (Sunli Arajiya Hamar He Chhathi Maiya)
संबंधित पर्व (Related Festival) छठ पूजा व्रत एवं महाकुंभ
आराध्य देवी (Presiding Deity) षष्ठी माता (छठी मईया) एवं भगवान सूर्य
भाषा एवं शैली (Language & Style) भोजपुरी लोक भाषा, पारंपरिक भक्ति गीत
मुख्य भाव (Main Emotion) भक्ति, विनय, मातृ-प्रेम और समर्पण
गायन का अवसर (Occasion) नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

पारंपरिक छठी गीत मौखिक परंपरा (Oral Tradition) के रूप में सदियों से पीढ़ियों दर पीढ़ियों स्थानांतरित होते रहे हैं। इन्हें किसी एक कवि की रचना के रूप में नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज, विशेषकर पूर्वांचल की माताओं और बहनों के हृदय से निकली अनुभूतियों के रूप में देखा जाता है। आधुनिक समय में अनुराधा पौडवाल, शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी और पवन सिंह जैसे प्रसिद्ध लोक कलाकारों ने इन पारंपरिक गीतों को अपने स्वर से सजाकर वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
अरजिया प्रार्थना / विनती माता से अपनी मनोकामना कहने की गुहार
पईयां चरण स्पर्श / पाँव अत्यंत विनम्रता और समर्पण का भाव
सुरुज मड़ईया सूर्य देव का मंडप / वेदी घाट पर बांस और फूलों से बना पवित्र स्थान
भोरही प्रातःकाल / सुबह उषा अर्घ्य का समय
कंचन थाल स्वर्ण सदृश पवित्र थाली पूजा सामग्री से सजी थाली

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठी मईया के ये गीत केवल लोक मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय संस्कृति के प्राण हैं। छठ पर्व को प्रकृति की पूजा का सबसे शुद्ध रूप माना जाता है, जहाँ जल और सूर्य को प्रत्यक्ष रूप से जीवनदाता मानकर कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। इस गीत के माध्यम से साधक अपनी अहंता को त्यागकर छठी मईया के चरणों में समर्पित हो जाता है। यह पर्व और इसके गीत हमें यह सिखाते हैं कि शुद्ध मन और कठोर अनुशासन से ही जीवन के कठिन व्रतों को पूरा किया जा सकता है। यह हमारी प्राचीन संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा का सशक्त माध्यम है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन गीत से हमें निम्नलिखित जीवन सीख मिलती है:

  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य: जिस प्रकार व्रती कठिन निर्जला उपवास रखकर भी प्रसन्नचित रहती है, वैसे ही जीवन की कठिनाइयों में धैर्य रखना चाहिए।
  • प्रकृति के प्रति सम्मान: सूर्य और जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, अतः प्रकृति के प्रति कृतज्ञ भाव रखना चाहिए।
  • परिवार की एकता: छठ पर्व और इसके गीत पूरे परिवार और समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं।
  • विनम्रता और शरणागति: भगवान या माता के दरबार में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता, केवल सच्ची विनय ही काम आती है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले गोवर्धन पूजा के बाद आने वाले छठ महापर्व के दौरान गाया जाता है। विशेष रूप से जब व्रती महिलाएं संध्या काल में नदी या तालाब के घाट पर सूप और दौरी लेकर जाती हैं, अथवा जब सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट पर एकत्रित होती हैं, तब यह गीत महिलाओं के कोमल स्वरों में गूंजता है। इसके अलावा लोक संगीत कार्यक्रमों, सांस्कृतिक मंचों और घरों में भी इसे बड़े चाव से सुना और गाया जाता है.

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

घटक (Parameter) विवरण (Description)
गीत शीर्षक सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया
संस्कृति एवं परंपरा बिहारी, भोजपुरी और पूर्वांचल की लोक संस्कृति
प्रमुख वाद्य यंत्र ढोलक, झांझ, मंजीरा और लोक स्वर
मुख्य उद्देश्य संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि
आराध्य षष्ठी माता और भगवान सूर्य नारायण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"सुनली अरजिया हमर हे छठी मईया" गीत किस अवसर पर गाया जाता है?

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक शुक्ल पक्ष के छठ महापर्व के अवसर पर संध्या और सुबह अर्घ्य देते समय गाया जाता है।

छठी मईया किसकी पुत्री मानी जाती हैं?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठी मईया को भगवान ब्रह्मा की मानसी पुत्री और सूर्य देव की बहन या पत्नी के रूप में पूजा जाता है।

छठ पूजा में सूर्य की पूजा का क्या महत्व है?

सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है जो समस्त संसार को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से आरोग्यता प्राप्त होती है.

यह गीत किस भाषा में रचित है?

यह गीत मुख्य रूप से भोजपुरी और अंगिका लोकभाषा में रचा गया है, जो पूर्वांचल और झारखंड में अत्यधिक लोकप्रिय है।

छठ पर्व कितने दिनों का होता है?

छठ महापर्व कुल चार दिनों का होता है जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और इसका समापन उषा अर्घ्य के साथ होता है।

क्या इस गीत को पुरुष भी गा सकते हैं?

हाँ, यह लोकगीत है और इसे सभी आयु वर्ग के लोग, महिला-पुरुष और बच्चे श्रद्धा भाव के साथ गा सकते हैं।

छठ व्रत में किन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है?

छठ व्रत के दौरान अत्यंत शुद्धता, पवित्रता, जमीन पर सोना और निर्जला उपवास जैसे कड़े नियमों का पालन किया जाता है।

इस गीत को गाने से मन को क्या शांति मिलती है?

इस गीत के भावुक बोल और पारंपरिक धुन सुनने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और छठी मईया के प्रतिगामी अटूट विश्वास की प्राप्ति होती है.

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की लोक परंपराओं, क्षेत्रीय लोकगीतों और छठ पूजा के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रयुक्त शब्द और भाव लोक-संस्कृति के प्रामाणिक स्वरूप को दर्शाते हैं.

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक-संस्कृति एवं पूर्वांचल के पारंपरिक गीत संकलन।
  • छठ पूजा व्रत कथा एवं महात्म्य ग्रंथ।
  • पारंपरिक मौखिक लोक-साहित्य और प्रादेशिक संगीत परंपराएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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