Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

धमाकेदार

शिल्पी राज का धमाकेदार भोजपुरी देवी गीत 'नाच लेबे द' (Naach Lebe Da)। नीलम गिरी के शानदार अभिनय और नृत्य के साथ माता दुर्गा की भक्ति में लीन कर देने वाला भजन।

आदिशक्ति माता दुर्गा की आराधना में संगीत और नृत्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भोजपुरी लोक संस्कृति और भक्ति संगीत के क्षेत्र में देवी गीतों (Devi Geet) का अपना एक विशिष्ट, जीवंत और ऊर्जावान स्थान है। "नाच लेबे द" (Naach Lebe Da) एक ऐसा ही अत्यंत लोकप्रिय और भक्ति से सराबोर देवी गीत है, जिसे सुप्रसिद्ध लोक गायिका शिल्पी राज (Shilpi Raj) ने अपनी सुरीली और धमाकेदार आवाज में गाया है। इस गीत के वीडियो में प्रसिद्ध अभिनेत्री नीलम गिरी (Neelam Giri) ने अपने जीवंत अभिनय और भावपूर्ण नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। यह गीत विशेष रूप से नवरात्रि के पावन अवसर पर भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुआ। इस गीत में एक भक्त की उस तीव्र इच्छा और अनन्य भक्ति भाव को दर्शाया गया है, जहां वह माता के भव्य दरबार में पूरी तरह से लीन होकर नृत्य करना चाहता है। सनातन धर्म में नृत्य को भी ईश्वर की आराधना का एक सशक्त माध्यम माना गया है, जिसे 'नृत्य सेवा' कहा जाता है। यह लेख इस लोकप्रिय देवी गीत के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और संगीतमय पहलुओं का एक विस्तृत और विद्वतापूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ नाच लेबे द ॥

(मुखड़ा)
मैया के सज गइल बा पावन दरबार हो,
चमकेला चम-चम माई के सिंगार हो।
अरे बाजे पैजनिया, बाजे ढोल और नगाड़ा हो,
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!

(अंतरा - 1)
लाल-लाल चुनरी सोहे मैया के कपरिया,
भक्तन के भीड़ लागल बाटे डगरिया।
अरे धूप-दीप गमकत बा, महकेला कपूर हो,
माई के दर्शन से भागे दुख दूर हो।
अरे बाजे पैजनिया, बाजे ढोल और नगाड़ा हो,
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!

(अंतरा - 2)
शिल्पी गावेली गीतिया, नीलम नाचेली झूम के,
सभ कोई निहारे माई के चरनिया चूम के।
अरे गूंजे जयकारा चारों ओर बेमिसाल हो,
माई के किरपा से चमके सभकर भाल हो।
अरे बाजे पैजनिया, बाजे ढोल और नगाड़ा हो,
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!
नाच लेबे द माई के पंडरिया में, रोके जन कोई आज हो!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह देवी गीत "नाच लेबे द" भोजपुरी भाषा की मिठास और भक्ति रस के अद्भुत समन्वय को प्रदर्शित करता है। गीत का प्रत्येक छंद और पंक्ति माता के प्रति पूर्ण समर्पण और आनंद की अभिव्यक्ति है।

मुखड़े का भावार्थ

गीत की शुरुआत में गायिका कहती हैं कि जगदंबा मैया का पावन दरबार सज चुका है। माता का दिव्य श्रृंगार अत्यंत चमकीला और मनमोहक लग रहा है। दरबार में ढोल, नगाड़े और माता की पैजनिया (पायल) की मधुर ध्वनि गूंज रही है। ऐसे दिव्य वातावरण को देखकर भक्त का मन मयूर हो उठा है और वह अन्य लोगों से प्रार्थना करता है कि आज उसे माता के पंडाल में जी भरकर नाचने दिया जाए, उसे कोई भी न रोके। यह अहंकार के विसर्जन और पूर्ण आत्मसमर्पण की स्थिति है।

प्रथम अंतरे का भावार्थ

प्रथम अंतरे में माता के स्वरूप और पंडाल के दृश्य का सुंदर वर्णन है। माता के मस्तक पर लाल रंग की चुनरी सुशोभित हो रही है। भक्तों की भारी भीड़ माता के दर्शन के लिए मार्ग में उमड़ पड़ी है। पंडाल में धूप, दीप और कपूर की सुगंध चारों ओर महक रही है। गायिका कहती हैं कि माता के केवल दर्शन मात्र से ही जीवन के सारे कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं। इसलिए, इस पावन बेला में भक्त बिना किसी संकोच के माता की भक्ति में लीन होकर नृत्य करना चाहता है।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ

द्वितीय अंतरे में कलाकारों के माध्यम से भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाया गया है। शिल्पी राज भक्ति गीत गा रही हैं और नीलम गिरी झूमकर नृत्य कर रही हैं। सभी भक्त माता के चरणों को चूमकर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं। चारों ओर माता के जयकारों की गूंज है। माता की कृपा से सभी भक्तों का मस्तक (भाग्य) चमक उठा है। यह अंतरा दर्शाता है कि जब कला को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दिया जाता है, तो वह साधना बन जाती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस देवी गीत की मुख्य भावना 'हर्षोल्लास' (Joy) और 'भक्ति रस' (Devotion) है। सनातन धर्म में ईश्वर की प्राप्ति के कई मार्ग बताए गए हैं, जिनमें से 'कीर्तन' और 'नर्तन' (नृत्य) को नवधा भक्ति के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

  • अहंकार का त्याग: जब कोई भक्त सबके सामने नृत्य करता है, तो वह अपने सामाजिक संकोच और अहंकार को भूल जाता है। यह गीत इसी निष्कपट भक्ति का संदेश देता है।
  • सामूहिक आनंद: पंडाल में सभी भक्तों का एक साथ झूमना सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्सव की भावना को सुदृढ़ करता है।
  • मातृ-भाव: माता दुर्गा को अपनी जननी मानकर उनके सामने एक बालक की भांति हठ करना कि "मुझे नाचने दो", भक्त और भगवान के बीच के अत्यंत आत्मीय संबंध को दर्शाता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु गीत की जानकारी (Song Details)
गीत का नाम नाच लेबे द (Naach Lebe Da)
मुख्य गायिका शिल्पी राज (Shilpi Raj)
अभिनय / फीचरिंग नीलम गिरी (Neelam Giri)
गीत का प्रकार भोजपुरी देवी गीत / देवी भजन (Devi Geet)
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
रिलीज वर्ष 2021 (नवरात्रि विशेष)
मुख्य विषय माता दुर्गा की आराधना, पंडाल का उत्सव और नृत्य सेवा

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत की सफलता के पीछे इसके कलाकारों का उत्कृष्ट योगदान है:

  • शिल्पी राज (Shilpi Raj): शिल्पी राज भोजपुरी संगीत उद्योग की एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली गायिका हैं। उनकी आवाज की खनक और उच्च स्वर-लहरी इस देवी गीत को एक विशेष ऊर्जा प्रदान करती है। उन्होंने भक्ति भाव को आधुनिक संगीत के साथ बखूबी जोड़ा है।
  • नीलम गिरी (Neelam Giri): नीलम गिरी ने अपने उत्कृष्ट नृत्य कौशल और भाव-भंगिमाओं से इस गीत के वीडियो को जीवंत बना दिया है। उनके पारंपरिक परिधान और चेहरे के भक्तिमय भावों ने दर्शकों के दिलों को छू लिया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल हिंदी अर्थ (Meaning) संदर्भगत महत्व (Contextual Significance)
पंडरिया पूजा का पंडाल / देवी का दरबार वह पवित्र स्थान जहां माता की प्रतिमा स्थापित की गई है।
पैजनिया पायल / नूपुर माता के चरणों में सुशोभित होने वाले आभूषण की ध्वनि।
कपरिया मस्तक / सिर माता के मस्तक पर सुशोभित लाल चुनरी के संदर्भ में।
डगरिया रास्ता / मार्ग भक्तों द्वारा माता के दर्शन के लिए तय किया जाने वाला मार्ग।
भाल मस्तक / भाग्य माता की कृपा से भक्तों के भाग्य का उदय होना।
गमकत सुगंधित होना / महकना धूप और कपूर की दिव्य सुगंध का वातावरण में फैलना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी अंचल में देवी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक महान सांस्कृतिक उत्सव है। "नाच लेबे द" जैसे गीत इस उत्सव की आत्मा हैं।

शास्त्रीय दृष्टिकोण से देखें तो श्रीमद्देवीभागवत पुराण में माता की प्रसन्नता के लिए गीत, वाद्य और नृत्य को उत्तम साधन बताया गया है। जब भक्त माता के सम्मुख नृत्य करता है, तो वह अपने स्थूल शरीर की सुध-बुध खोकर सूक्ष्म आध्यात्मिक चेतना में प्रवेश करता है। यह गीत लोक-संस्कृति के माध्यम से इसी शास्त्रीय सत्य को जन-जन तक पहुंचाता है।

सांस्कृतिक रूप से, यह गीत पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के क्षेत्रों में नवरात्रि के दौरान हर पंडाल में बजाया जाता है। यह लोगों को एकत्रित होने, अपनी लोक-कला पर गर्व करने और सामूहिक रूप से माता की आराधना करने की प्रेरणा देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यद्यपि यह एक लोक देवीगीत है, परंतु इसके अंतर्निहित संदेश अत्यंत गहरे हैं:

  1. निश्छल भक्ति: ईश्वर के दरबार में किसी भी प्रकार का संकोच या लोक-लाज बाधक नहीं बनना चाहिए। भक्त को बालक की भांति सरल होना चाहिए।
  2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: संगीत और नृत्य मानसिक तनाव को दूर कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं।
  3. कला का सदुपयोग: अपनी कला (गायन, नृत्य, अभिनय) को ईश्वर की सेवा में समर्पित करना ही कला की वास्तविक सार्थकता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुना और गाया जाता है:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान पंडालों, मंदिरों और घरों में इस गीत की गूंज सुनाई देती है।
  • देवी जागरण एवं चौकी: माता के जागरण (Jagran) में भक्तों को झूमने पर मजबूर करने के लिए यह एक आदर्श गीत है।
  • दैनिक पूजा-आरती के पश्चात: कई भक्त अपने घरों में सुबह-शाम आरती के बाद आनंद और उत्साह के वातावरण के लिए इसे सुनते हैं। आप इस अवसर पर मां दुर्गा की आरती का पाठ भी कर सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य तत्व संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक नाच लेबे द (Naach Lebe Da)
गायिका शिल्पी राज
कलाकार (वीडियो) नीलम गिरी
विधा भोजपुरी देवी गीत (Bhojpuri Devi Geet)
मुख्य रस भक्ति रस एवं अद्भुत रस
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, देवी जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय देवीगीत की मुख्य गायिका भोजपुरी संगीत जगत की जानी-मानी कलाकार शिल्पी राज (Shilpi Raj) हैं।

इस गीत के वीडियो में प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेत्री और मॉडल नीलम गिरी (Neelam Giri) ने अपने शानदार नृत्य और अभिनय का प्रदर्शन किया है।

यह गीत शुद्ध और कर्णप्रिय भोजपुरी (Bhojpuri) भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत के विशाल क्षेत्र में बोली और समझी जाती है।

इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर की आराधना में पूर्ण समर्पण और अहंकार का त्याग आवश्यक है। नृत्य और कीर्तन के माध्यम से भक्त माता के चरणों में अपनी निश्छल प्रीति प्रकट करता है।

हां, यद्यपि यह नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय होता है, लेकिन भक्त इसे किसी भी समय माता की आराधना, कीर्तन, जागरण या पारिवारिक मांगलिक कार्यों के दौरान सुन सकते हैं।

सनातन धर्म में नृत्य को पंचोपचार और षोडशोपचार पूजा का एक अंग माना गया है। भगवान शिव (नटराज) और माता पार्वती (लास्य नृत्य) स्वयं नृत्य के अधिष्ठाता हैं। अतः माता के सम्मुख श्रद्धापूर्वक नृत्य करना उनकी प्रसन्नता का कारण बनता है।

गीत में पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल, नगाड़ा और पैजनिया (पायल) का उल्लेख है, जो भारतीय लोक संगीत और उत्सवों के मुख्य आधार हैं।

इस गीत को सुनने से मन में उत्साह, उमंग, आनंद और माता के प्रति अनन्य श्रद्धा एवं भक्ति भाव (भक्ति रस) की उत्पत्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वत मंडली और संगीत समीक्षकों ने इस भोजपुरी देवी गीत के साहित्यिक, भाषाई और आध्यात्मिक पक्षों का गहन विश्लेषण किया है। शिल्पी राज की गायकी और नीलम गिरी के अभिनय ने इस पारंपरिक लोक विधा को आधुनिक युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय बना दिया है। यह गीत दर्शाता है कि कैसे लोक संगीत आज भी हमारी प्राचीन धार्मिक परंपराओं को सहेजने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी की आराधना में संगीत और नृत्य के महत्व का शास्त्रीय संदर्भ।
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं संगीत परंपरा: पूर्वी भारत के लोक देवी गीतों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  • भक्ति आंदोलन और लोक कला: संतों द्वारा कीर्तन और नर्तन के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति के सिद्धांतों का अध्ययन।

संबंधित लेख

यदि आपको यह देवी गीत और इसका आध्यात्मिक विश्लेषण पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित पावन लेखों और भजनों का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!