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छठ घाटे चली भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें छठ घाटे चली भक्ति इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म के सबसे कठिन और पवित्र महापर्व 'छठ पूजा' के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत केवल संगीत नहीं, बल्कि आस्था, समर्पण और लोक-संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। "छठ घाटे चली" (Chhath Ghate Chali) एक ऐसा ही अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय भोजपुरी छठ गीत है, जिसे सुप्रसिद्ध लोक गायक खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) और अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka) ने अपने मधुर स्वरों से सजाया है। यह गीत छठ महापर्व के पावन अवसर पर पति और पत्नी के बीच के आत्मीय संवाद, दउरा (बांस का सूप और टोकरी) उठाने की परंपरा, और छठी मैया के प्रति अटूट श्रद्धा को अत्यंत खूबसूरती से प्रदर्शित करता है। इस लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स, उसका विस्तृत भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इस महापर्व से जुड़े आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

छठ घाटे चली (भोजपुरी छठ गीत)


(कोरस / मुखड़ा)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
होई ना बलम जी अगुआ, दउरा सिर पर उठाईं ना।
छठ घाटे चलीं ऐ राजा जी, अरघ के बेर भईल जाए।
दउरा उठाईं माथा पर सइयां, छठ घाटे चलीं ना॥

(अंतरा - 1)
सभे बरतिया कइले बा तैयारी, राह जोहेली छठी महतारी।
घरे-घरे गूंजेला गीत सुहावन, लागता कतनो पावन ई मन।
सजा दऽ सूपवा में फल-फूल सइयां, देर जनि करीं ना।
छठ घाटे चलीं ऐ राजा जी, अरघ के बेर भईल जाए॥

(अंतरा - 2)
केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाए।
पवित्र मन से करीं पूजन, मैया हरेंगी सब कलेश।
दउरा उठाईं माथा पर सइयां, छठ घाटे चलीं ना॥

(अंतरा - 3)
गंगा जी के पावन तीरे, लागल बा भारी मेला।
दीपक जरेला घीव के अनगिनत, मन भईल बा अलबेला।
खेसारी गावेले महिमा अपार, अंतरा जोड़ेली हाथ।
छठ घाटे चलीं ऐ राजा जी, अरघ के बेर भईल जाए॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत छठ पूजा के पावन और उल्लासपूर्ण वातावरण को दर्शाता है। गीत के माध्यम से एक नवविवाहिता या व्रती महिला अपने पति (बलम/सइयां) से आग्रह कर रही है कि वे पूजा की तैयारियों में हाथ बटाएं और सिर पर पूजा की सामग्रियों से भरा 'दउरा' (बांस की टोकरी) रखकर छठ घाट की ओर प्रस्थान करें।

मुखड़े का भावार्थ: पत्नी कहती है कि बांस की नई और लचीली बहंगी (कांच ही बांस के बहंगिया) तैयार है। हे स्वामी! आप आगे-आगे चलिए और इस पवित्र दउरा को अपने सिर पर उठाइए। सूर्य देव को अर्घ्य देने का समय (अरघ के बेर) समीप आ रहा है, इसलिए अब विलंब न करें और श्रद्धापूर्वक छठ घाट की ओर चलें।

अंतराओं का भावार्थ: सभी व्रतियों ने अपनी-अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। छठी मैया भक्तों की राह देख रही हैं। हर घर से मंगलमय और सुहावने छठ गीत गूंज रहे हैं, जिससे मन अत्यंत पवित्र और आनंदित हो उठा है। सूप में फल, फूल और नैवेद्य सजा दिए गए हैं। गीत में पारंपरिक लोककथा का भी संदर्भ है, जिसमें केले के घौद पर मंडराने वाले सुगे (तोते) को सचेत किया जाता है कि वह पूजा के फल को जूठा न करे, क्योंकि यह अत्यंत पवित्र अनुष्ठान है। अंत में, गंगा नदी के किनारे सजे सुंदर घाट, जलते हुए घी के दीये और उमड़ी हुई भीड़ का सजीव चित्रण किया गया है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'दांपत्य समर्पण' और 'सामुदायिक भक्ति' है। छठ पूजा केवल एक व्यक्ति का व्रत नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला पर्व है। गीत में पत्नी का पति से दउरा उठाने का आग्रह करना यह दर्शाता है कि इस कठिन व्रत की पूर्णता में परिवार के हर सदस्य, विशेषकर जीवनसाथी का सहयोग अनिवार्य है। यह गीत शुद्धता, सादगी, प्रकृति प्रेम और ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति का संदेश देता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण कुंजी (Key) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) छठ घाटे चली (Chhath Ghate Chali)
मुख्य गायक (Singers) खेसारी लाल यादव एवं अंतरा सिंह प्रियंका
गीतकार (Lyricist) पारंपरिक एवं आधुनिक संकलन
श्रेणी (Category) भोजपुरी छठ गीत (Bhojpuri Chhath Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) छठ महापर्व, सूर्य उपासना, पारिवारिक सहयोग
संगीत संयोजन (Music) लोकप्रिय भोजपुरी लोक धुन

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत को भोजपुरी फिल्म उद्योग के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव और सुप्रसिद्ध गायिका अंतरा सिंह प्रियंका ने गाया है। खेसारी लाल यादव अपनी अनूठी गायकी और मिट्टी से जुड़ी आवाज के लिए जाने जाते हैं। छठ के गीतों में उनकी आवाज सीधे श्रोताओं के दिलों को छूती है। वहीं, अंतरा सिंह प्रियंका ने अपनी सुरीली आवाज से इस संवादपरक गीत में जान फूंक दी है। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने इस पारंपरिक गीत को आधुनिक पीढ़ी के बीच भी अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया / बहंगी बांस से बना हुआ लचीला डंडा जिसके दोनों सिरों पर टोकरियां लटकाकर पूजा सामग्री घाट तक ले जाई जाती है।
दउरा बांस की बड़ी गोल टोकरी इसमें छठ पूजा के मुख्य प्रसाद जैसे ठेकुआ, फल और सूप रखे जाते हैं।
अरघ / अर्घ्य जल या दूध अर्पित करना अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया जाने वाला पवित्र अर्पण।
सुगवा / सुगा तोता (Bird) छठ गीतों में पवित्रता बनाए रखने के प्रतीक के रूप में इसका उल्लेख होता है।
बरतिया व्रत करने वाले श्रद्धालु जो अत्यंत कठिन नियमों का पालन करते हुए ३६ घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व प्रकृति और मानव के सीधे जुड़ाव का पर्व है। इस गीत में प्रयुक्त बिंब जैसे "कांच ही बांस" और "केले का घौद" सीधे तौर पर प्रकृति की शुद्धता को दर्शाते हैं। सनातन परंपरा में सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं, जो संपूर्ण सृष्टि को ऊर्जा प्रदान करते हैं। छठ पूजा में किसी भी प्रकार की मूर्ति पूजा के स्थान पर प्रत्यक्ष सूर्य और उनकी शक्ति 'उषा' (छठी मैया) की आराधना की जाती है।

यह गीत हमें सिखाता है कि भक्ति में किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। बांस की टोकरी, मिट्टी के दीये, घर में बना ठेकुआ प्रसाद और नदी का किनारा—यही इस महापर्व की वास्तविक पूंजी हैं। यह गीत गाकर और सुनकर भक्त अपने भीतर एक अपूर्व शांति और पवित्रता का अनुभव करते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • पारिवारिक एकता: पति-पत्नी का मिलकर पूजा की तैयारी करना यह संदेश देता है कि जीवन के हर कठिन और पवित्र कार्य में जीवनसाथी का साथ होना आवश्यक है।
  • प्रकृति का संरक्षण: गीत में बांस, फल, फूल और नदियों का बार-बार उल्लेख हमें प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करने की प्रेरणा देता है।
  • शुद्धता और अनुशासन: छठ व्रत के कड़े नियम हमें जीवन में आत्म-अनुशासन और मन-वचन-कर्म की शुद्धता बनाए रखने की सीख देते हैं।
  • समानता का भाव: छठ घाट पर अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है। सभी एक साथ मिट्टी के घाट पर खड़े होकर सूर्य देव की आराधना करते हैं।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है। विशेषकर:

  • खरना के दिन: जब व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और घर में भक्तिमय माहौल बनता है।
  • संध्या अर्घ्य के समय: जब पूरा परिवार दउरा लेकर घाट की ओर प्रस्थान करता है।
  • उषा अर्घ्य के समय: सुबह के समय जब उगते सूर्य का इंतजार होता है।

इसके अतिरिक्त, इस पावन पर्व की तैयारी के दौरान घरों की साफ-सफाई करते समय भी लोग इन मधुर भजनों को सुनना पसंद करते हैं। आप हमारी वेबसाइट पर छठ पूजा व्रत कथा और छठ पूजा सामग्री सूची भी पढ़ सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विषय संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक छठ घाटे चली भक्ति इन हिंदी लिरिक्स
गायक जोड़ी खेसारी लाल यादव और अंतरा सिंह प्रियंका
मुख्य पर्व छठ पूजा (सूर्य षष्ठी)
मुख्य पात्र पति (सइयां) और पत्नी (व्रती)
काव्य रस भक्ति रस, वात्सल्य एवं दांपत्य प्रेम
प्रयुक्त वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, शहनाई

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस बेहद लोकप्रिय छठ गीत को भोजपुरी के प्रसिद्ध लोक गायक खेसारी लाल यादव और सुरीली आवाज की धनी अंतरा सिंह प्रियंका ने गाया है।

"बहंगिया" या बहंगी बांस से बना एक लचीला डंडा होता है, जिसके दोनों सिरों पर टोकरियां (शिकवे) बंधी होती हैं। इसमें छठ पूजा का प्रसाद रखकर पुरुष अपने कंधों पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं।

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण और उनकी मानस बहन या शक्ति 'छठी मैया' (देवी उषा) की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है।

यह एक पारंपरिक लोक पंक्ति है जो दर्शाती है कि छठ पूजा का प्रसाद अत्यंत शुद्ध होना चाहिए। यदि कोई पक्षी (जैसे सुगा/तोता) फल को स्पर्श कर झूठा कर देता है, तो वह पूजा के योग्य नहीं रहता। यह पूर्ण पवित्रता का प्रतीक है।

छठ पूजा का व्रत कुल चार दिनों का होता है। इसकी शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है, दूसरे दिन 'खरना', तीसरे दिन 'संध्या अर्घ्य' और चौथे दिन 'उषा अर्घ्य' (पारन) के साथ इसका समापन होता है।

हाँ, यह एक युगल गीत (Duet) है, जिसे महिला और पुरुष दोनों मिलकर गा सकते हैं। यह पारिवारिक उत्सवों और सामुदायिक कीर्तन के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना एक अत्यंत स्वादिष्ट और पारंपरिक महाप्रसाद है। इसे पूरी शुद्धता के साथ मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर बनाया जाता है। इसके बिना छठ पूजा अधूरी मानी जाती है।

यह गीत मुख्य रूप से भोजपुरी भाषा (Bhojpuri Dialect) में लिखा गया है, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की मुख्य लोक भाषा है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "छठ घाटे चली भक्ति इन हिंदी लिरिक्स" के प्रामाणिक स्रोतों, पारंपरिक लोकगीतों के संकलन और संगीत प्रेमियों की मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि गीत के शब्द और उनका अर्थ लोक परंपराओं के अनुकूल और त्रुटिहीन हों। यह सामग्री पूर्णतः मौलिक और शोध पर आधारित है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - भक्तीलोक संपादकीय मंडल।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं मौखिक इतिहास।
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण (सूर्य देव की उपासना के संदर्भ)।
  • बिहार एवं उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय छठ पूजा पद्धतियां और लोक परंपराएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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