Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नवरात्रि Special माता के मनोहक भजन नरेंद्र चंचल की ओजस्वी वाणी में NARENDRA CHANCHAL Devi Bhajans

पढ़ें नवरात्रि Special माता के मनोहक भजन नरेंद्र चंचल की ओजस्वी वाणी में NARENDRA CHANCHAL Devi Bhajans का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा व

अपडेटेड: अप्रैल 2026 श्रेणी: देवी भजन, नवरात्रि विशेष पठन समय: 12 मिनट

सनातन धर्म की पावन परंपरा में नवरात्रि का पर्व आदिशक्ति जगदम्बा की आराधना का सबसे पवित्र और ऊर्जावान अवसर माना जाता है। इस पावन काल में जब माँ दुर्गा के दरबार में भक्तों की कतारें लगती हैं, तब उनके भजनों की गूँज संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना देती है। स्वर्गीय श्री नरेंद्र चंचल जी की ओजस्वी, ऊर्जावान और भावपूर्ण वाणी में गाए गए देवी भजन माँ के दरबार की जीवंत झांकी प्रस्तुत करते हैं। उनकी आवाज़ में वह अद्भुत खिंचाव और दिव्यता थी, जो हर एक श्रद्धालु के रोंगटे खड़े कर देती है। माता रानी के प्रति अटूट प्रेम, शरणागति और उद्बोधन का यह अनूठा संगम देवी भजन प्रेमियों के लिए एक आध्यात्मिक धरोहर के समान है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम नरेंद्र चंचल जी के प्रसिद्ध भजन, उनके शब्दों के गहरे अर्थ, और नवरात्रि के पावन पर्व पर उनके स्मरण के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मुखड़ा ॥

चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!
प्रेम से बोलो, जय माता दी!
मिलकर बोलो, जय माता दी!


॥ प्रथम अंतराल ॥

सج गया दरबार निराला है, देखो शेरावाली का बोलबाला है!
सज गया दरबार निराला है, देखो शेरावाली का बोलबाला है!
जो भी दर पे आता है, कुछ ना कुछ पाता है!
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!


॥ द्वितीय अंतराल ॥

ऊँचे पर्वत पे है भवन सुहाना, पावन चरणों में बहता झरना पुराना!
ऊँचे पर्वत पे है भवन सुहाना, पावन चरणों में बहता झरना पुराना!
सारे कष्ट मिटाती है, झोलियाँ भर जाती है!
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!


॥ तृतीय अंतराल ॥

प्रेम की माला जो कोई पिरोए, माता के चरणों में जो कोई रोए!
प्रेम की माला जो कोई पिरोए, माता के चरणों में जो कोई रोए!
उसकी मुरादें पूरी होती हैं, कोई आसना अधूरी रहती है!
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाए गए इस अमर भजन का मूल स्वर निश्छल भक्ति, आमंत्रण और माता के प्रति अगाध समर्पण है। 'चलो बुलावा आया है' केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि हर उस भक्त के लिए अंतरात्मा की पुकार है जो अपने सांसारिक बंधनों को छोड़कर अपनी परम जननी के चरणों में शांति पाना चाहता है।

भजन का भावार्थ यह है कि जब मनुष्य जीवन की भागदौड़, दुखों और परेशानियों से थक जाता है, तब माता स्वयं अपने भक्तों को किसी न किसी माध्यम से अपने दरबार में बुलाती हैं। त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी का यह दरबार ऊँचा और पावन है, जहाँ पहुँचते ही मन के सारे संताप स्वतः समाप्त हो जाते हैं। भजन यह संदेश देता है कि माता के दरबार में जाति, पंथ या धन का कोई भेद नहीं होता; वहाँ केवल प्रेम और पुकार सुनी जाती है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से अपनी झोली फैलाता है, जगत जननी उसे रिद्धि-सिद्धि और अनंत कृपा से भर देती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवी संगीत के इतिहास में नरेंद्र चंचल जी का नाम अमर है। उनकी आवाज़ में जो ओज, खनक और करुणा का मिश्रण था, वह श्रोताओं के हृदय को सीधे छू लेता था। नवरात्रि के इन नौ दिनों में जब यह भजन घरों, मंदिरों और जागरणों में गूंजता है, तो पूरा परिवेश चैतन्य हो उठता है।

  • ओजस्वी गायन शैली: स्वर की ऊँचाइयों को छूती हुई आवाज़ जो आलस्य को दूर भगाकर ऊर्जा का संचार करती है।
  • सामूहिक सहभागिता: इस भजन की पंक्तियाँ ऐसी हैं कि बच्चे, वृद्ध और युवा सभी उत्साह के साथ इसमें सुर मिलाते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक शांति: तनावपूर्ण जीवनशैली से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए यह भजन मानसिक संबल प्रदान करता है।

आप नवरात्रि के अनुष्ठानों की अधिक जानकारी के लिए हमारा व्रत एवं त्यौहार विशेष लेख भी पढ़ सकते हैं, जहाँ संपूर्ण तिथियों का विवरण दिया गया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता के इन मनोहक भजनों को सुनने और गाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त, संध्याकालीन बेला या विशेष रूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को सर्वोत्तम माना गया है।

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
  2. माता रानी को लाल पुष्प, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  3. शांत चित्त से बैठकर नरेंद्र चंचल जी के भजनों को सुनें या अपने परिवार के साथ मिलकर गाएं।
  4. भजन समापन के पश्चात् माता की पावन आरती गाकर प्रसाद वितरित करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint

इस भजन की आराध्य देवी मां दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का सम्मिलित स्वरूप 'आदिशक्ति' हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड की संचालिका हैं। वहीं, इस भजन को अपनी अमर आवाज़ से जीवंत करने वाले गायक स्वर्गीय श्री नरेंद्र चंचल जी थे, जिनका जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उन्होंने अपनी पूरी जीवनयात्रा माता रानी के चरणों में समर्पित कर दी थी और उनके गाए हुए भजन आज भी हर घर में श्रद्धा के साथ सुने जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन हिंदी और पंजाबी मिश्रित सरल बोलचाल की भाषा (ब्रज और खड़ी बोली के सुंदर समन्वय) में रचित है। इसकी शब्दावली इतनी सुगम है कि भारत के किसी भी कोने का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकार और संगीतात्मकता का अद्भुत प्रयोग किया गया है, जो श्रोता को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

नरेंद्र चंचल के देवी भजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये गहरी आध्यात्मिक सीख देते हैं:

  • अहंकार का त्याग: माता के दरबार में झुकने से अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है।
  • संकटों में धैर्य: कठिन समय में ईश्वर पर भरोसा रखना ही सबसे बड़ा संबल है।
  • सामूहिक सद्भाव: जब सब मिलकर 'जय माता दी' बोलते हैं, तो सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ संदर्भ
बुलावा आंतरिक आमंत्रण या प्रेरणा माता की कृपा का संकेत
शेरावाली सिंह पर सवार रहने वाली माँ दुर्गा देवी का पराक्रमी रूप
दरबार माता का पावन मंदिर या धाम शरणस्थली
मुराद मनोकामना या इच्छा भक्त की प्रार्थना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है..." - यह पंक्ति साधक के मन में एक नया उत्साह भर देती है। इसका अर्थ है कि अब प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हो चुकी है और जगत जननी ने अपने बच्चे को दर्शन के लिए पुकार लिया है।

"सज गया दरबार निराला है..." - यह पंक्ति माता के भव्य श्रृंगार और मंदिर की अलौकिक सुंदरता का वर्णन करती है, जहाँ चारों ओर दिव्य प्रकाश और उत्सव का माहौल है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

॥ देवी मंत्र ॥

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"

इस मंत्र के नियमित स्मरण से साधक को मानसिक बल और माता की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। आप अधिक जानकारी के लिए हमारा वैदिक मंत्र संग्रह देख सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम चलो बुलावा आया है (नरेंद्र चंचल स्पेशल)
प्रमुख गायक स्वर्गीय श्री नरेंद्र चंचल जी
संगीत शैली सूफी एवं भक्तिमय लोक संगीत
भाषा हिंदी / पंजाबी
मुख्य विषय माता वैष्णो देवी स्तुति एवं आमंत्रण
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"चलो बुलावा आया है", "तूने मुझे बुलाया शेरावालिए", और "म्हारा शेरावाली का दरबार" नरेंद्र चंचल जी के अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय देवी भजन हैं।

नवरात्रि के दौरान देवी भजन सुनने से घर का वातावरण पवित्र होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को गहरी शांति मिलती है।

नहीं, यद्यपि नवरात्रि में इनका विशेष महत्व है, परंतु इन्हें किसी भी मंगलवार, शुक्रवार, जागरण या शुभ अवसर पर श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

उनकी आवाज़ में गजब का ओज, जोश और भावुकता थी, जो श्रोताओं को झूमने और माता की भक्ति में लीन होने के लिए विवश कर देती थी।

इस भजन में त्रिकूट पर्वत पर स्थित माता वैष्णो देवी के पवित्र धाम और वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का सजीव चित्रण किया गया है।

घर पर जागरण या चौकी करते समय स्वच्छता, पवित्रता और सात्विक आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा प्रेम भाव से माता का स्मरण करना चाहिए।

भक्ति संगीत सुनने से मस्तिष्क की तरंगे शांत होती हैं और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, जिससे तनाव कम होता है।

भक्तिलोक पर आपको चालीसा, स्तोत्र, व्रत कथाएं, मंदिर इतिहास और विभिन्न देवी-देवताओं के पावन भजन पढ़ने व सुनने को मिलते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक महत्व का संकलन सनातन परंपरा और लोक आस्था के आधार पर किया गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक एवं भक्तिपूर्ण सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • • पारंपरिक भारतीय लोक संगीत एवं भजन परंपरा
  • • श्री नरेंद्र चंचल जी के स्मृति ग्रंथ एवं संगीत अभिलेख

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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