radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

छठ पूजा छठ पूजा के गीत I Chhath Pooja Ke Geet, ANURADHA PAUDWAL, SHARDA SINHA, Songs

अनुराधा पौडवाल और शारदा सिन्हा के स्वर में प्रसिद्ध छठ पूजा के गीत, बोल और उनके आध्यात्मिक महत्व की संदर्भ एवं व्याख्या सहित जानकारी पढ़ें।

छठ महापर्व हिंदू धर्म के सबसे कठिन, पवित्र और आस्था से परिपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, सूर्य देव और छठी मैया के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करने का एक महापर्व है। छठ पूजा की आत्मा इसके पारंपरिक लोक गीतों में बसती है। जब तक हवाओं में "कांच ही बांस के बहंगिया" या "उगा हो सुरुज देव" जैसे मधुर गीत नहीं गूंजते, तब तक छठ का उत्सव अधूरा सा प्रतीत होता है। बिहार कोकिला पद्मश्री शारदा सिन्हा और सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल के दिव्य स्वरों ने इन गीतों को घर-घर तक पहुंचाया है। इन कलाकारों की आवाज में जो करुणा, समर्पण और भक्ति का भाव है, वह हर प्रवासी को अपनी मिट्टी और संस्कृति की ओर खींच लाता है। प्रस्तुत लेख में हम छठ पूजा के इन विशेष गीतों के बोल, उनके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और इस महापर्व की पावन परंपराओं का सविस्तार विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics of Iconic Chhath Geets

गीत १: कांच ही बांस के बहंगिया (स्वर: शारदा सिन्हा)

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
बहंगी लचकत जाए...
बात जे पुछेलो बटोहिया, बहंगी केकरा के जाए?
बहंगी केकरा के जाए...
तू त आन्हर हउवे रे बटोहिया, बहंगी छठी मैया के जाए।
बहंगी छठी मैया के जाए...

केरवा जे फरेला घवध से, ओह पर सुगा मेड़राय।
ओह पर सुगा मेड़राय...
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय।
सुगा गिरे मुरझाय...
उ जे सुगनी जे रोवेले वियोग से, आदित होइहें ना सहाय।
आदित होइहें ना सहाय...

नारियल जे फरेला घवध से, ओह पर सुगा मेड़राय।
ओह पर सुगा मेड़राय...
मारबो रे सुगवा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय।
सुगा गिरे मुरझाय...


गीत २: उगा हो सुरुज देव भिनसार (स्वर: अनुराधा पौडवाल)

उगा हो सुरुज देव भिनसरवा, अरघ के रे बेरवा।
अरघ के रे बेरवा...
पूजन के रे बेरवा हो सुरुज देव, अरघ के रे बेरवा।
अरघ के रे बेरवा...

बाट जे जोहेली छठ बरतिया, ठाढ़ बाड़ी घाटवा।
ठाढ़ बाड़ी घाटवा...
अरघ के रे बेरवा हो सुरुज देव, अरघ के रे बेरवा।
अरघ के रे बेरवा...

सभकर पुजवा सफल करीं हे देव, दीहीं आशीषवा।
दीहीं आशीषवा...
उगा हो सुरुज देव भिनसरवा, अरघ के रे बेरवा।
अरघ के रे बेरवा...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

छठ पूजा के इन पारंपरिक गीतों में प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। ये गीत केवल सुर और ताल का संगम नहीं हैं, बल्कि इनमें लोक जीवन की सादगी और उच्च दार्शनिक विचार छिपे हुए हैं।

"कांच ही बांस के बहंगिया" का भावार्थ: इस गीत में एक बटोहिया (राहगीर) व्रत करने वाले परिवार से पूछता है कि यह कच्चे बांस की सुंदर बहंगी (टोकरी) किसके लिए जा रही है? इस पर उत्तर मिलता है कि हे राहगीर! तुम अज्ञानी हो जो यह नहीं जानते कि यह पावन बहंगी साक्षात छठी मैया के पूजन के लिए जा रही है। गीत के अगले भाग में प्रकृति के संतुलन और शुद्धता को दर्शाया गया है। केले और नारियल के गुच्छों पर मंडराने वाले तोते (सुगा) को सचेत किया जाता है कि वह फल को जूठा न करे, क्योंकि यह फल भगवान सूर्य देव को अर्पित किया जाना है। यदि तोता फल को अपवित्र करेगा, तो उसे दंडित किया जाएगा। यह गीत हमें सिखाता है कि पूजा की सामग्री अत्यंत शुद्ध और सात्विक होनी चाहिए।

"उगा हो सुरुज देव भिनसार" का भावार्थ: यह गीत उषा काल (सुबह के अर्घ्य) के समय गाया जाता है। इसमें व्रती महिलाएं पूरी रात जागने के बाद, ठंडे पानी में खड़ी होकर सूर्य देव से प्रार्थना करती हैं कि हे सूर्य देव! अब सुबह हो चुकी है, कृपया उदित होइए। आपके दर्शन और अर्घ्य का समय हो गया है। सभी व्रती और श्रद्धालु नदी के घाट पर आपके आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हे जगत के पालनहार! उदित होकर हम सभी का अर्घ्य स्वीकार करें और अपनी कृपा दृष्टि से संपूर्ण संसार को आलोकित करें।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

छठ गीतों की मुख्य भावना समर्पण, धैर्य, शुद्धता और प्रकृति प्रेम है। इन गीतों में किसी भी प्रकार के आडंबर या दिखावे का स्थान नहीं होता। मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप, ताजे फल और गंगा मैया के पावन तट के माध्यम से ईश्वर की आराधना की जाती है।

  • प्रकृति संरक्षण का संदेश: इन गीतों में बांस, केला, नारियल, सुगा (तोता) और सूर्य देव का वर्णन है, जो मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहने की प्रेरणा देते हैं।
  • समानता और सामूहिकता: छठ के गीतों को सामूहिक रूप से गाया जाता है। इसमें अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता। सभी लोग एक साथ मिलकर घाटों की सफाई करते हैं और गीत गाते हैं।
  • कठिन साधना और श्रद्धा: ३६ घंटे के निर्जला व्रत के दौरान गाए जाने वाले ये गीत व्रतियों को मानसिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) मुख्य गायक (Singer) संगीत शैली (Genre) मुख्य भाषा (Language) मुख्य विषय (Theme) संबंधित पर्व (Festival)
कांच ही बांस के बहंगिया शारदा सिन्हा भोजपुरी / मैथिली लोकगीत भोजपुरी / मैथिली छठ मैया की महिमा और शुद्धता छठ पूजा (महापर्व)
उगा हो सुरुज देव भिनसार अनुराधा पौडवाल पारंपरिक भक्ति गीत भोजपुरी सूर्य देव को अर्घ्य और प्रार्थना छठ पूजा (सुबह का अर्घ्य)
केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल शारदा सिन्हा पारंपरिक लोकगीत भोजपुरी सूर्य देव का प्राकृतिक सौंदर्य छठ पूजा

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

छठ गीतों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में दो महान महिला कलाकारों का अतुलनीय योगदान रहा है:

१. बिहार कोकिला शारदा सिन्हा: शारदा सिन्हा जी की आवाज के बिना छठ पर्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने अपनी माटी की खुशबू को अपने सुरों में पिरोया है। उनके गाए गीत जैसे "कांच ही बांस के बहंगिया" और "होख न सुरुज देव सहाय" आज भी हर बिहारी और पूर्वांचली के दिल की धड़कन हैं। उनके गीतों में शास्त्रीयता और लोक संवेदना का अनूठा मिश्रण मिलता है।

२. अनुराधा पौडवाल: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका अनुराधा पौडवाल ने अपनी सुरीली और भक्तिमय आवाज से छठ गीतों को एक नया आयाम दिया। टी-सीरीज के माध्यम से जारी उनके छठ गीतों के एलबम ने देश-विदेश में बसे श्रद्धालुओं को इस पावन पर्व से जोड़े रखा है। उनकी आवाज में जो शांति और दिव्यता है, वह मन को सीधे ईश्वर से जोड़ती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Word) सरल हिंदी अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया / बहंगी बांस से बना हुआ कांवड़ या टोकरी जिसमें छठ पूजा का प्रसाद (ठेकुआ, फल) रखकर घाट पर ले जाया जाता है।
बटोहिया राहगीर या यात्री संसार रूपी मार्ग पर चलने वाला साधारण मनुष्य।
भिनसरवा / भिनसार उषाकाल, सुबह का समय जब सूर्य देव उदित होने वाले होते हैं।
अरघ / अर्घ्य जल या दूध अर्पित करना सूर्य देव को दिया जाने वाला पावन अर्घ्य।
बरतिया व्रत करने वाली महिला या पुरुष जो अत्यंत कठिन नियमों के साथ छठ का व्रत रखते हैं।
सुगवा / सुगा तोता प्रकृति का एक सुंदर पक्षी जो फल चखने की चेष्टा करता है।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा के गीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये वेदों और उपनिषदों के दार्शनिक विचारों को सरल लोक भाषा में प्रस्तुत करते हैं। ऋग्वेद में सूर्य उपासना का विशेष महत्व बताया गया है, और छठ गीत इसी वैदिक परंपरा का आधुनिक लोक स्वरूप हैं।

सांस्कृतिक रूप से, ये गीत समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। जब घाट पर हजारों लोग एक साथ मिलकर "कांच ही बांस के बहंगिया" गाते हैं, तो वहां एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपनी समृद्ध लोक परंपराओं से परिचित कराते हैं। इन गीतों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी अत्यंत सहजता से दिया जाता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

छठ पूजा के इन पावन गीतों से हमें अपने दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  • धैर्य और प्रतीक्षा: "उगा हो सुरुज देव" गीत हमें सिखाता है कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार (कठिनाई) क्यों न हो, सुबह की नई किरण (सफलता) अवश्य आएगी। हमें धैर्यपूर्वक अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहना चाहिए।
  • शुद्धता और अनुशासन: छठ के गीतों में पवित्रता पर बहुत जोर दिया गया है। यह हमें सिखाता है कि हमारे विचार, कर्म और आहार हमेशा शुद्ध और सात्विक होने चाहिए।
  • प्रकृति के प्रति सम्मान: पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता ही सच्ची मानवता है। हमें प्रकृति का दोहन नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen & Sing

छठ पूजा चार दिवसीय महापर्व है, और इसके प्रत्येक दिन के लिए विशेष गीत निर्धारित हैं:

१. नहाय-खाय (प्रथम दिन): इस दिन व्रती गंगा स्नान कर पवित्र भोजन बनाते हैं। इस अवसर पर घर की सफाई और पवित्रता से जुड़े गीत गाए जाते हैं।

२. खरना (द्वितीय दिन): इस दिन शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद बनता है। इस समय शांत और ध्यानमयी भक्ति गीत गाए जाते हैं।

३. संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन): इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। घाट पर जाते समय "बहंगी लचकत जाए" जैसे उत्साह और भक्ति से भरे गीत गाए जाते हैं।

४. उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन): इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सुबह के समय "उगा हो सुरुज देव भिनसार" गाकर सूर्य देव का आह्वान किया जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विवरण (Field) महत्वपूर्ण जानकारी (Details)
मुख्य विषय छठ महापर्व के पारंपरिक लोकगीत
प्रमुख स्वर शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल
आराध्य देव भगवान सूर्य देव (आदित्य) और छठी मैया
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, हारमोनियम
काव्य शैली लोकगीत (पूर्वी, मैथिली, भोजपुरी)
उपयोगिता छठ पूजा के दौरान मानसिक शांति और भक्ति भाव जागृत करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शारदा सिन्हा जी को "बिहार कोकिला" कहा जाता है। उन्होंने छठ पूजा के पारंपरिक गीतों को अपनी शास्त्रीय और सुरीली आवाज देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। उनके बिना छठ पर्व अधूरा माना जाता है।

यह गीत छठ पूजा की सामग्री की शुद्धता और सादगी को दर्शाता है। यह संदेश देता है कि पूजा में उपयोग होने वाली हर वस्तु (जैसे बांस की टोकरी, फल) अत्यंत शुद्ध और प्रकृति के करीब होनी चाहिए।

अनुराधा पौडवाल जी ने इन गीतों को अत्यंत सुरीली, भक्तिमय और सुगम संगीत शैली में गाया है, जिससे ये गीत देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों के लिए आसानी से समझ में आने वाले और हृदयस्पर्शी बन गए हैं।

सूर्य देव साक्षात दिखाई देने वाले देवता हैं जो पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं। उन्हें अर्घ्य देकर हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना करते हैं।

नहीं, अब छठ महापर्व और इसके मधुर गीत पूरे भारत सहित विदेशों (जैसे नेपाल, अमेरिका, मॉरीशस) में भी अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ गाए और सुने जाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: इस लेख का संकलन पारंपरिक लोक मान्यताओं, वैदिक सूर्य उपासना पद्धतियों और प्रसिद्ध संगीतकारों के आधिकारिक गीतों के आधार पर किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक छठ महापर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को शुद्ध और प्रामाणिक रूप में पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • ऋग्वेद - सूर्य सूक्त एवं उषा स्तुति संदर्भ
  • बिहार की लोक संस्कृति और पारंपरिक गीत संग्रह - बिहार राष्ट्रभाषा परिषद
  • टी-सीरीज भक्ति सागर - अनुराधा पौडवाल और शारदा सिन्हा के आधिकारिक छठ एलबम

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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