प्रसिद्ध भक्ति गायक विक्रांत माथुर द्वारा प्रस्तुत अत्यंत मार्मिक एवं श्रद्धापूरक देवी भजन 'शरण मां की आजा' (Sharan Maa Ki Aaja) मां भगवती आदिशक्ति जगदम्बा के पावन चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण की एक अनुपम पुकार है। शाक्त परंपरा में माता दुर्गा को करुणामयी मां और दुष्टनाशिनी महाशक्ति के रूप में पूजा जाता है, जो सांसारिक संतापों से त्रस्त जीवात्मा को अभय और शरण प्रदान करती हैं। यह भजन विशेष रूप से शरणागति भाव (प्रपत्ति भाव), विनय और वात्सल्य रस से ओत-प्रोत है, जहां भक्त अपने अहं, चिंताओं और सांसारिक बंधनों को त्यागकर मां के वात्सल्यमयी आंचल में विश्राम पाता है। नवरात्रि महोत्सव, माता के जागरण, चौकी, शुक्रवार की संध्या उपासना अथवा नित्य पूजा के समय इस संकीर्तन का श्रवण और गायन मन को गहन शांति, आध्यात्मिक संबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ स्थायी (मुखड़ा) ॥
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा,
भटकना तू छोड़ दे, लगन मां से ला जा।
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा...
जो भी आया द्वारे मैया के, वो झोलियां भर गया,
सच्चे मन से जो पुकारे, भवसागर तर गया।
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा॥
॥ अंतरा १ ॥
जग के झूठे नाते-रिश्ते, मतलब का संसार है,
एक सहारा शेरांवाली, सच्चा इसका प्यार है।
रोते हुए जो दर पे आए, हंसते हुए वो जाए रे,
ममतामयी मेरी मां का साया, हर विपदा मिटाए रे।
छोड़ के दुनियादारी, तू मां के गुण गा जा,
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा॥
॥ अंतरा २ ॥
ऊंचे पर्वतों पे बैठी, जगदम्बे कल्याणी है,
ऋद्धि-सिद्धि देने वाली, अम्बे मां वरदानी है।
पाप कटेंगे पल में सारे, जब दीदार तू पाएगा,
शीश झुका के देख जरा तू, सब कुछ ही मिल जाएगा।
मैया के चरणों में, अपनी प्रीत लगा जा,
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा॥
॥ अंतरा ३ ॥
ज्योत जगे जहां मां की पावन, वहां अंधेरा टिकता नहीं,
मैया की रहमत के आगे, कोई दुखड़ा रुकता नहीं।
हाथ दया का सिर पे रख दे, बिगड़ी बात बना देती,
अपने भक्तों की मैया, सोई तकदीर जगा देती।
विक्रांत कहे पुकार के, अमृत रस पी जा,
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
भजन 'शरण मां की आजा' का मूल भाव सनातन दर्शन के प्रसिद्ध 'शरणागति' सिद्धांत पर आधारित है। श्रीमद्देवीभागवत और दुर्गा सप्तशती में स्पष्ट कहा गया है कि जब मनुष्य अपने व्यक्तिगत सामर्थ्य की सीमा को पहचानकर परम चेतना यानी आदिशक्ति की शरण स्वीकार कर लेता है, तब उसके समस्त मानसिक द्वंद्व, भय और संताप स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
मुखड़े में गायक प्रत्येक संसारी जीव को यह उद्बोधन देता है कि यह नश्वर संसार माया का चक्रव्यूह है, जहां जीव सुख की खोज में दर-दर भटकता है। यह भटकाव तब तक समाप्त नहीं होता जब तक वह अपनी चित्तवृत्ति को जगतजननी मां दुर्गा के चरणों में एकाग्र नहीं कर देता। मां के दरबार का यह शाश्वत नियम है कि वहां से कोई भी याचक रिक्त हाथ नहीं लौटता। जो भी निष्कपट भाव से मां को पुकारता है, वह भवसागर रूपी संसार के जन्म-मरण और कष्टों के चक्र से पार उतर जाता है।
अंतरा भागों में सांसारिक संबंधों की क्षणभंगुरता की तुलना मां भगवती के अहैतुक और निस्वार्थ वात्सल्य से की गई है। सांसारिक रिश्ते स्वार्थ और प्रयोजन पर टिके होते हैं, किंतु शेरांवाली मां का प्रेम निष्काम है। वह अपने भक्त की आर्त पुकार सुनते ही दौड़ी चली आती हैं। त्रिकूटा पर्वत अथवा दुर्गम शिखरों पर विराजमान रहने वाली जगदम्बा केवल पूजा-पाठ की औपचारिकताएं नहीं देखतीं, बल्कि भक्त का समर्पण और दीनता देखती हैं। जैसे ही भक्त अपना शीश और अहंकार मां के श्रीचरणों में अर्पित करता है, अविद्या का अंधकार मिट जाता है और आत्मिक प्रकाश की ज्योति प्रज्वलित हो जाती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की रचना और गायकी में कई विशिष्ट आध्यात्मिक एवं सांगीतिक तत्व समाहित हैं:
- प्रपत्ति एवं शरणागति का संदेश: यह भजन साधक को सिखाता है कि आत्म-समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम और सीधा मार्ग है।
- आधुनिक एवं पारंपरिक ताल का समन्वय: विक्रांत माथुर के ओजस्वी और मधुर स्वर में यह भजन भक्तिमय रस के साथ-साथ श्रोताओं में उमंग और उत्साह का संचार करता है।
- मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: जीवन की आपाधापी और निराशा के पलों में इस भजन का श्रवण मन को यह विश्वास दिलाता है कि एक सर्वोच्च मातृत्व शक्ति सदैव हमारी रक्षा कर रही है।
- सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: भजन की लयबद्धता और सरल बोल इसे जागरण, चौकी और कीर्तन में सामूहिक रूप से गाने के लिए अत्यंत अनुकूल बनाते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
मां भगवती की आराधना यूं तो किसी भी समय की जा सकती है, किंतु कुछ विशिष्ट वेला और अनुष्ठान इस भजन के प्रभाव को बहुगुणित कर देते हैं:
- नवरात्रि पर्व: चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के पावन नौ दिनों में अखंड ज्योति के समक्ष इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- सांध्यकालीन आरती व उपासना: संध्या वेला में जब घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित किया जाए, तब शांत चित्त होकर इसका श्रवण नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- शुक्रवार एवं मंगलवार की उपासना: देवी दुर्गा की विशेष पूजा के दिनों में दुर्गा चालीसा के पाठ के उपरांत इस संकीर्तन को गाना चाहिए।
- श्रवण विधि: स्वच्छ वस्त्र धारण कर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मां दुर्गा के चित्र अथवा प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक और सुगंधित धूप जलाकर एकाग्र मन से भजन का आनंद लें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मूल रूप से आदिशक्ति मां दुर्गा (शेरांवाली, जगदम्बा, कल्याणी) को समर्पित है। सनातन परंपरा में देवी शक्ति के तीन प्रमुख स्वरूप माने गए हैं—महाकाली (बल व संहार शक्ति), महालक्ष्मी (समृद्धि व पालन शक्ति) और महासरस्वती (ज्ञान व विवेक शक्ति)। इस भजन में मां के ममतामयी, अभयदायिनी और पालनकर्ता स्वरूप की स्तुति की गई है। उत्तर भारत की वैष्णो देवी और ज्वाला जी जैसी शक्तिपीठ परंपराओं में मां के इसी करुणामयी वात्सल्य रूप की प्रधानता है, जहां वे अपने बच्चों के हर संकट को क्षण भर में हर लेती हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भक्ति संगीत के क्षेत्र में विक्रांत माथुर एक सुप्रसिद्ध गायक हैं, जिन्होंने कई लोकप्रिय देवी भजनों और श्याम भजनों को अपनी आवाज दी है। 'शरण मां की आजा' भजन माता के भक्तों के हृदय के उस सहज भाव को व्यक्त करता है जब वे सांसारिक उलझनों से थककर मां के आंचल में आश्रय खोजते हैं। लोकधुनों और सुगम संगीत के सुंदर सम्मिश्रण से तैयार यह रचना आधुनिक कैसेट एवं डिजिटल युग में माता के जागरणों और उत्सवों का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें उत्तर भारतीय देवी-भक्ति परंपरा के चिर-परिचित शब्दावलियों (जैसे 'शेरांवाली', 'झोलियां', 'दीदार', 'रहमत') का प्रयोग हुआ है। काव्य शैली की दृष्टि से यह लोक-गीत शैली (Folk Devotional Style) का अनुसरण करता है। इसमें अनुप्रास और तुकांत पदों का ऐसा विन्यास है जो श्रोता को सहज ही अपने साथ गाने पर विवश कर देता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, अपितु जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिक यात्रा की गहरी सीख प्रदान करता है:
- अहंकार का त्याग: 'शीश झुका के देख जरा तू' पंक्ति संकेत करती है कि जब तक व्यक्ति का मिथ्या अहंकार गलता नहीं, तब तक दैवीय कृपा का अनुभव संभव नहीं है।
- संसार की अनित्यता: भजन स्मरण कराता है कि सांसारिक यश, धन और संबंध क्षणिक हैं; केवल ईश्वर और ईश्वरीय प्रेम ही शाश्वत सहारा है।
- सकारात्मक दृष्टिकोण: मां के प्रति पूर्ण विश्वास साधक को हर विपरीत परिस्थिति में धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
- सच्ची भक्ति की सरलता: ईश्वर प्राप्ति के लिए किसी जटिल कर्मकांड की आवश्यकता नहीं, केवल सच्चे मन और दीनभाव से की गई पुकार ही पर्याप्त है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक संदर्भ |
|---|---|---|
| शरण (Sharan) | आश्रय, सुरक्षा, छत्रछाया | परमात्मा के चरणों में अपना सर्वस्व समर्पित कर अभय प्राप्त करना। |
| लगन (Lagan) | गहरी प्रीति, निष्ठा, एकाग्रता | सांसारिक मोह छोड़कर केवल भगवती के ध्यान में मन रमाना। |
| भवसागर (Bhavsagar) | संसार रूपी सागर | जन्म, मृत्यु, सुख और दुख के चक्रव्यूह से मुक्ति का प्रतीक। |
| शेरांवाली (Sheranwali) | सिंह की सवारी करने वाली मां दुर्गा | अदम्य साहस, तेज और धर्म की विजय का प्रतीक स्वरूप। |
| कल्याणी (Kalyani) | सदा मंगल और कल्याण करने वाली | मां भगवती का वह रूप जो भक्तों के सभी अमंगल का नाश करता है। |
| दीदार (Deedar) | दिव्य दर्शन, साक्षात स्वरूप देखना | मां की पवित्र प्रतिमा अथवा अंतर में उनके तेज का साक्षात्कार। |
| रहमत (Rehmat) | कृपा, दया, अनुग्रह | मां भगवती की असीम अनुकंपा जो पात्र-कुपात्र का भेद किए बिना बरसती है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
शरण मां की आजा, शरण मां की आजा, भटकना तू छोड़ दे, लगन मां से ला जा।
हे मानव! तू इस नश्वर संसार के झूठे सुखों की मृगतृष्णा में व्यर्थ ही भटक रहा है। अब इस दिशाहीन भटकाव को विराम दे और जगज्जननी मां भगवती के पवित्र चरणों में समर्पित हो जा। अपने अंतःकरण की सच्ची प्रीत मां से जोड़ ले, ताकि तेरा जीवन सार्थक हो सके।
जो भी आया द्वारे मैया के, वो झोलियां भर गया, सच्चे मन से जो पुकारे, भवसागर तर गया।
इतिहास और पुराण साक्षी हैं कि जिसने भी माता रानी के पावन दरबार में निष्कपट भाव से याचना की, मां ने उसकी मनोकामनाओं की झोली भर दी। यदि कोई आर्त भक्त छल-कपट छोड़कर पवित्र हृदय से केवल एक बार मां को पुकार ले, तो मां उसे इस कठिन संसार रूपी सागर से पार उतार देती हैं।
जग के झूठे नाते-रिश्ते, मतलब का संसार है, एक सहारा शेरांवाली, सच्चा इसका प्यार है।
इस भौतिक जगत के समस्त रिश्ते-नाते स्वार्थ और प्रयोजन की नींव पर टिके हैं। जब स्वार्थ सिद्ध नहीं होता, तब अपने भी पराये हो जाते हैं। ऐसे क्षणभंगुर जगत में केवल सिंहवाहिनी मां दुर्गा का सहारा ही ध्रुव सत्य है, क्योंकि मां का प्रेम किसी शर्त या स्वार्थ से परे होता है।
रोते हुए जो दर पे आए, हंसते हुए वो जाए रे, ममतामयी मेरी मां का साया, हर विपदा मिटाए रे।
जो भी भक्त अपने दुखों, रोगों, संतापों और पीड़ा से रोता हुआ मां के भवन में पहुंचता है, मां की अमृतमयी दृष्टि पड़ते ही उसके सारे शोक मिट जाते हैं और वह आनंदपूर्वक मुस्कराते हुए घर लौटता है। मां का वात्सल्यमयी आंचल हर घोर संकट को हरने में सक्षम है।
ऊंचे पर्वतों पे बैठी, जगदम्बे कल्याणी है, ऋद्धि-सिद्धि देने वाली, अम्बे मां वरदानी है।
मां भगवती दुर्गम हिम शिखरों और ऊंचे पर्वतों पर विराजित होकर समस्त चराचर जगत का संचालन करती हैं। वे केवल सांसारिक कष्ट ही नहीं हरतीं, बल्कि अपने साधकों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष सहित समस्त ऋद्धि-सिद्धियों का वरदान सहज ही प्रदान करती हैं।
ज्योत जगे जहां मां की पावन, वहां अंधेरा टिकता नहीं, मैया की रहमत के आगे, कोई दुखड़ा रुकता नहीं।
जिस स्थान अथवा जिस हृदय में मां भगवती की पावन भक्ति की अखंड ज्योति प्रज्वलित हो जाती है, वहां से अज्ञान, भय, और विपत्तियों का अंधकार स्वतः विलीन हो जाता है। मां की दया दृष्टि के समक्ष जीवन का कोई भी दुख अथवा प्रारब्ध टिक नहीं सकता।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
देवी भजन के गायन से पूर्व अथवा पश्चात इन शास्त्रीय मंत्रों और स्तुतियों का पाठ करने से पूजा का फल अनंत गुना हो जाता है:
शरणागति स्तुति (दुर्गा सप्तशती)
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
सरल भावार्थ: हे नारायणी! हे सब मंगलों का मंगल करने वाली! हे कल्याणदायिनी शिवा! हे समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी! आपको बारंबार नमस्कार है।
देवी विपत्ति नाशन मंत्र
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
सरल भावार्थ: शरण में आए हुए दीनों एवं पीड़ितों की रक्षा में सदा तत्पर रहने वाली तथा सबकी पीड़ा दूर करने वाली हे नारायणी देवी! आपको हमारा प्रणाम है।
नवार्ण मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
सरल भावार्थ: यह भगवती दुर्गा का महामंत्र है जो ज्ञान, ऐश्वर्य, शक्ति और मोक्ष प्रदान कर भक्त को समस्त बंधनों से मुक्त करता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विषय | विवरण |
|---|---|
| भजन का शीर्षक | शरण मां की आजा (Sharan Maa Ki Aaja) |
| गायक / कलाकार | विक्रांत माथुर (Vikrant Mathur) |
| आराध्य देवी | मां दुर्गा / शेरांवाली / जगदम्बा |
| काव्य एवं भक्ति भाव | शरणागति भाव, वात्सल्य, विनय एवं समर्पण रस |
| भाषा शैली | सरल एवं कर्णप्रिय हिंदी (भक्तिमय लोक शैली) |
| गायन के उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, शुक्रवार संध्या, दैनिक पूजा |
| मुख्य संदेश | सांसारिक मोह त्यागकर मां भगवती के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण |
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