Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

लेकर के सिंह सवारी भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

पढ़ें लेकर के सिंह सवारी भक्ति इन हिंदी लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म में आदिशक्ति माँ दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। "लेकर के सिंह सवारी भक्ति इन हिंदी लिरिक्स" (Lekar Ke Singh Sawari Bhakti In Hindi Lyrics) एक ऐसा ही परम पावन और हृदयस्पर्शी देवी भजन है, जो भक्तों के अंतर्मन में श्रद्धा, समर्पण और अलौकिक आनंद का संचार करता है। यह भजन मुख्य रूप से माँ जगदम्बा के भव्य स्वरूप, उनकी दिव्य सिंह सवारी और उनके ममतामयी रूप को समर्पित है। इस भजन का गायन विशेष रूप से शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि, जगराता, माता की चौकी और विशेष पूजा-अर्चना के अवसरों पर किया जाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'विनय' और 'पूर्ण शरणागति' है, जहाँ एक व्याकुल जीवात्मा अपनी परम माता से दर्शन देने की गुहार लगा रही है। इस लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और शास्त्रीय संदर्भों का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार ॥


(कोरस / मुखड़ा)
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार।
मैया आ जाओ एक बार, देवी आ जाओ एक बार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार।
तरस रहे हैं नैन हमारे, सुन लो मेरी पुकार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार...

(अंतरा - 1)
लाल चुनरिया मैया तुमको सुहाए,
हाथों में त्रिशूल मैया मन को लुभाए।
मस्तक पे चमके बिंदिया, गले सोहे हार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार...

(अंतरा - 2)
पैरों में पैजनिया छम-छम बाजे,
सिंह पे बैठी मैया अति ही विराजे।
भक्तों की बिगड़ी बनाने, आ जाओ एक बार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार...

(अंतरा - 3)
ऊंचे पहाड़ों पे मंदिर तुम्हारा,
सारे जगत का तू ही सहारा।
हम बालकों को मैया, दे दो अपना दुलार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार...

(अंतरा - 4)
रजनीश पे मैया कृपा बनाए रखना,
चरणों की सेवा में लगाए रखना।
भवसागर से मैया, कर दो बेड़ा पार॥
लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अनूठे और निश्छल संबंध को दर्शाता है। यहाँ भक्त अपनी आराध्य माँ दुर्गा से प्रार्थना कर रहा है कि वे अपने दिव्य वाहन सिंह पर सवार होकर उसके सम्मुख प्रकट हों।

मुखड़े का भावार्थ: भक्त कहता है कि हे माँ! मेरे नेत्र आपके दर्शनों के लिए अत्यंत व्याकुल हैं, वे निरंतर अश्रुधारा बहाते हुए आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप अपनी सिंह की सवारी पर विराजमान होकर कम से कम एक बार मेरे द्वार पर अवश्य पधारें और मेरी इस करुण पुकार को स्वीकार करें।

अंतराओं का भावार्थ: माँ के दिव्य श्रृंगार का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि माँ के शीश पर लाल रंग की चुनरी अत्यंत सुशोभित हो रही है। उनके हाथों में सुसज्जित त्रिशूल दुष्टों का संहार करने वाला और भक्तों को अभय प्रदान करने वाला है। माँ के मस्तक पर लगी बिंदिया और गले का दिव्य हार उनकी अलौकिक आभा को बढ़ा रहा है। जब माँ अपने सिंह पर बैठकर चलती हैं, तो उनके पैरों की पैजनिया (पायल) से निकलने वाली छम-छम की ध्वनि संपूर्ण ब्रह्मांड को आनंदित कर देती है। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन के समस्त संकटों को दूर कर उसका उद्धार करें और इस संसार रूपी भवसागर से उसकी नैया को पार लगाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सिंह सवारी का प्रतीक: माँ दुर्गा का वाहन सिंह (शेर) अदम्य साहस, शौर्य और क्रोध का प्रतीक है। माँ का सिंह पर सवार होना यह दर्शाता है कि उन्होंने अपनी इच्छाओं, क्रोध और अहंकार पर पूर्ण नियंत्रण पा लिया है। यह साधक को अपने भीतर के पशुत्व पर विजय पाने की प्रेरणा देता है।
  • लाल चुनरी और श्रृंगार: लाल रंग ऊर्जा, शक्ति और संकल्प का प्रतीक है। माँ का लाल चुनरी धारण करना ब्रह्मांड की सृजनात्मक ऊर्जा को दर्शाता है।
  • शरणागति का भाव: यह भजन साधक को सिखाता है कि जब तक हम ईश्वर के समक्ष पूरी तरह से समर्पित नहीं होते, तब तक हमें वास्तविक शांति और मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय और विधि अत्यंत फलदायी मानी गई है:

शुभ समय: नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और संध्या काल की आरती के समय इस भजन का गायन अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त मंगलवार और शुक्रवार को देवी पूजन के समय भी इसे गाया जा सकता है।

गायन की विधि:

  • सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर लाल या पीले रंग के) धारण करें।
  • माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  • माँ को लाल पुष्प, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  • पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ ताली बजाते हुए या ढोलक-मंजीरे के साथ इस भजन का कीर्तन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन सर्वशक्तिमान आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है। सनातन परंपरा में माँ दुर्गा को त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की सामूहिक शक्ति का स्वरूप माना गया है। वे महिषासुरमर्दिनी हैं, जो संसार से असुरत्व और अंधकार का नाश करती हैं। इस भजन के रचयिता और गायक रजनीश गुप्ता हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और सरल शब्दों के माध्यम से माँ के प्रति अपनी अनन्य भक्ति को व्यक्त किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक युग के लोकप्रिय देवी गीतों में से एक है। इसकी रचना लोक संगीत और शास्त्रीय पुट के सुंदर मिश्रण से की गई है। उत्तर भारत के पारंपरिक देवी जगरातों की पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर इस भजन को तैयार किया गया है। इसकी लय और ताल इतनी सुगम है कि कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गुनगुना सकता है और माता की भक्ति में लीन हो सकता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें कहीं-कहीं लोक भाषाओं के शब्दों का भी प्रयोग किया गया है। इसकी काव्य शैली 'गेय' (गाने योग्य) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग देखने को मिलता है। "छम-छम बाजे" और "बिगड़ी बनाने" जैसे शब्द भजन में संगीतात्मकता और प्रवाह उत्पन्न करते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीने के महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  1. धैर्य और विश्वास: "तरस रहे हैं नैन हमारे" पंक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए साधक के भीतर तीव्र व्याकुलता और अटूट धैर्य होना आवश्यक है।
  2. अहंकार का त्याग: माँ के चरणों में स्वयं को "बालक" मानकर समर्पित करना यह दर्शाता है कि ज्ञान और शक्ति के अहंकार को त्याग कर ही ईश्वर की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
  3. भवसागर से मुक्ति: जीवन का अंतिम लक्ष्य सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना है, जो केवल भगवद कृपा से ही संभव है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
सिंह सवारी शेर की सवारी करना क्रोध, भय और अहंकार पर पूर्ण नियंत्रण का प्रतीक।
लाल चुनरिया लाल रंग का वस्त्र / ओढ़नी शक्ति, तेज और सौभाग्य का प्रतीक।
त्रिशूल तीन शूलों वाला अस्त्र सत्व, रज और तम गुणों पर विजय का प्रतीक।
पैजनिया पायल / नूपुर सृष्टि के कण-कण में गूंजने वाले अनाहत नाद का प्रतीक।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे जीवात्मा मुक्त होना चाहती है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार..."
हे जगत जननी! आप अपने दिव्य और पराक्रमी वाहन सिंह पर सवार होकर मेरे जीवन में एक बार अवश्य पधारें।

"लाल चुनरिया मैया तुमको सुहाए, हाथों में त्रिशूल मैया मन को लुभाए..."
आपके दिव्य विग्रह पर सुशोभित लाल चुनरी और आपके हाथों में सुसज्जित त्रिशूल आपके संहारक और रक्षक दोनों रूपों को एक साथ प्रदर्शित करता है, जो अत्यंत मनमोहक है।

"ऊंचे पहाड़ों पे मंदिर तुम्हारा, सारे जगत का तू ही सहारा..."
आप दुर्गम पर्वतों पर निवास करती हैं, जो यह दर्शाता है कि आपको पाने का मार्ग कठिन अवश्य है, परंतु आप ही इस संपूर्ण चराचर जगत का एकमात्र अंतिम आश्रय हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से पूजा का फल बहुगुणित हो जाता है:

"सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको हमारा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु जानकारी
भजन का नाम लेकर के सिंह सवारी मैया आ जाओ एक बार
संबद्ध देवी-देवता माँ दुर्गा / माँ शेरावाली
मुख्य गायक / रचयिता रजनीश गुप्ता
भाषा हिंदी (भक्ति रस प्रधान)
मुख्य रस / भाव भक्ति रस / विनय एवं समर्पण भाव
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जगराता, दुर्गा पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मुख्य गायक और रचयिता रजनीश गुप्ता हैं। उन्होंने अपनी मधुर और भक्तिमय आवाज में इस भजन को गाकर भक्तों के बीच लोकप्रिय बनाया है।

माँ दुर्गा की सवारी सिंह अदम्य साहस, तेज, शौर्य और शक्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि माँ दुर्गा समस्त प्राकृतिक और तामसिक शक्तियों को नियंत्रित करने वाली आदिशक्ति हैं।

इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय नवरात्रि (शारदीय और चैत्र), माता का जगराता, चौकी, या प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार की संध्या आरती का समय है।

लाल रंग सनातन धर्म में शक्ति, सुहाग, ऊर्जा और विजय का प्रतीक है। माँ दुर्गा को लाल चुनरी अत्यंत प्रिय है, जो उनके ममतामयी और कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाती है।

हाँ, इस भजन की सरल लय और भक्तिमय शब्द साधक के मन को एकाग्र करते हैं, जिससे तनाव दूर होता है और आंतरिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

"भवसागर" का अर्थ है संसार रूपी समुद्र, जिसमें जन्म, मृत्यु, सुख, दुख और मोह-माया का चक्र चलता रहता है। भक्त माँ से इस चक्र से मुक्ति (मोक्ष) की प्रार्थना करता है।

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है। इसकी शैली गेय और काव्यात्मक है, जिसे बच्चे से लेकर वृद्ध तक आसानी से गा सकते हैं।

अनिवार्य तो नहीं, परंतु नवरात्रि के पावन दिनों में इसे सुनने और गाने से घर का वातावरण अत्यंत पवित्र और सकारात्मक हो जाता है, जिससे देवी माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ, अर्थ और आध्यात्मिक विश्लेषण को तैयार करने के लिए सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, जैसे देवी भागवत पुराण और पारंपरिक लोक भजनों के संकलनों का संदर्भ लिया गया है। इस सामग्री की शुद्धता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए इसका संपादन अनुभवी आचार्यों द्वारा किया गया है ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: माँ दुर्गा के स्वरूप और सिंह सवारी के आध्यात्मिक महत्व का शास्त्रीय आधार।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: उत्तर भारतीय लोक संगीत और माता के जगराते की मौखिक परंपराएं।
  • भक्ति रसामृत सिंधु: भक्ति के विभिन्न भावों (विनय और शरणागति) का शास्त्रीय विवेचन।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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