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माँ के नवरात्रों की महिमा सुनिए इसमें (Maa Ke Navratron Ki Mahima)

दीदी पूनम परदेशी की मधुर आवाज में माँ के नवरात्रों की महिमा भजन सुनें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित सम्पूर्ण भक्तिमय प्रस्तुति।

Type 1: Bhajan Navratri Special Didi Poonam Pardesi

माँ के नवरात्रों की महिमा सुनिए इस भजन में | Maa ke Navratron Ki Mahima | Didi Poonam Pardesi

श्रेणी: नवरात्र भजन एवं कथाएं • प्रस्तुति: दीदी पूनम परदेशी • अद्यतन: मार्च 2026

सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का पर्व 'नवरात्र' साधकों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्म-शुद्धि और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सबसे पवित्र काल माना जाता है। इस पावन अवसर पर स्वर कोकिला एवं प्रख्यात भजन गायिका दीदी पूनम परदेशी द्वारा गाया गया यह लोकप्रिय भजन "माँ के नवरात्रों की महिमा सुनिए इस भजन में | Maa ke Navratron Ki Mahima" माँ भगवती के प्रति अगाध श्रद्धा, अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का अनुपम संगम है। इस भजन का प्रत्येक शब्द और स्वर साधक के अंतर्मन को झंकृत कर देता है, जिससे चित्त में दिव्यता और परमानंद की अनुभूति होती है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता रानी के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—का ध्यान करते हुए जब इस संकीर्तन का गान किया जाता है, तो घर-परिवार का पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति रस से सराबोर हो जाता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और व्रत-त्योहार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

शीघ्र जानकारी (Quick Bhajan Information)

यदि आप नवरात्रि के पावन दिनों में माता रानी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो नवरात्रि व्रत कथा के साथ-साथ इस दिव्य भजन का श्रवण और संकीर्तन अत्यंत फलदायी माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मुखड़ा ||

माँ के नवरात्रों की महिमा, जग से न्यारी न्यारी है,
जो भी द्वार पे आए उसके, भाग जगानेहारी है!
शेरावाली मैया की देखो, महिमा अपरम्पार है,
चरणों में झुक जाए जो भी, उसका बेड़ा पार है!

|| प्रथम अंतरा ||

अश्विन और चैत्र की रुत में, घट-घट ज्योति जलती है,
भक्तों की टोली देखो मैया, ले के चुनरी चलती है।
लाल लंगूरा वीर लंगूरा, संग में लांगुरिया गावे,
मैया के दरबार में आके, हर मन वांछित फल पावे।
जय माता दी कह कर देखो, मिट जाती हर बीमारी है,
जो भी द्वार पे आए उसके, भाग जगानेहारी है!

|| द्वितीय अंतरा ||

नौ दिन नौ रूप धरे हैं, जग जननी अम्बे रानी,
वेद पुराणों ने भी इनकी, गाई है अमर कहानी।
मार्कण्डेय ऋषि ने जाके, महिमा शतचंडी गाई,
दुष्टों का संहार करने, माँ सिंह पर हो के असार आई।
भक्तों की रक्षा के खातिर, हर पल माँ तैयार खड़ी है,
चरणों में श्रद्धा से देखो, दुनिया सारी झुकी पड़ी है!

|| तृतीय अंतरा ||

पूनम परदेशी गावे, मैया के गुण गावे,
चरणों की धूलि को ले के, अपने माथे लगावे।
मैया दया की मूरत है, सबकी सुनती झोली है,
भक्ति के इस पावन मेले, रंग बिरंगी होली है।
दीदी पूनम की ये वाणी, भक्तों को प्यारी लागी है,
मैया के चरणों में जिसकी, सुरत हमेशा लागी है!

|| समापन / रिफ्रेन ||

बोलो साचे दरबार की जय!
शेरावाली मैया की जय!
माता शैलपुत्री की जय!
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

दीदी पूनम परदेशी द्वारा प्रस्तुत इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और प्रेरणादायक है। सनातन संस्कृति में माँ दुर्गा को आदिशक्ति, महामाया और जगत जननी के रूप में पूजा जाता है। भजन की शुरुआत इस सत्य से होती है कि माँ के नवरात्रों की महिमा इस संसार में सबसे निराली और अलौकिक है। जो भी भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में हाजिरी लगाता है, माँ उसकी सोई हुई किस्मत को जगा देती हैं।

प्रथम अंतरे में कवयित्री ने चैत्र और अश्विन मास में आने वाले शारदीय और वासंतिक नवरात्रों का सुंदर चित्रण किया है। इन दिनों घर-घर और मंदिरों में कलश स्थापना होती है, अखंड ज्योत जलती है और भक्तगण माता की चुनरी ओढ़कर दरबार में हाजिरी लगाते हैं। लांगुरिया गीत और माता के जयकारे वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना देते हैं।

द्वितीय अंतरे में पौराणिक संदर्भ देते हुए मार्कण्डेय ऋषि और शतचंडी पाठ का स्मरण किया गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तब-तब आदि शक्ति माँ दुर्गा दुष्टों का संहार करने के लिए सिंह पर सवार होकर प्रकट होती हैं। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।

अंतिम चरणों में गायिका दीदी पूनम परदेशी अपने भावों को व्यक्त करते हुए कहती हैं कि वे माँ के चरणों की धूल को अपने माथे का तिलक बनाती हैं। माँ करुणामयी और दया की मूरत हैं, जो अपने बच्चों की हर पुकार सुनती हैं और उनकी झोलियां खुशियों से भर देती हैं। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि अहंकार छोड़कर केवल माता के चरणों में शरणागति अपनाने से जीवन के सभी कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। आप इस प्रकार के अन्य पावन पदों के लिए माता रानी के अन्य लोकप्रिय भजन भी पढ़ सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • 1. आदिशक्ति की महिमा: यह भजन प्रत्यक्ष रूप से जगत जननी माँ दुर्गा की अनंत शक्तियों और उनके नौ स्वरूपों की महिमा का गुणगान करता है।
  • 2. माधुर्य एवं सरलता: दीदी पूनम परदेशी की मधुर वाणी और अत्यंत सरल शब्दों के कारण यह भजन हर उम्र के भक्तों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।
  • 3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का श्रवण करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का वास होता है।
  • 4. पूर्ण शरणागति का संदेश: भजन साधक को सिखाता है कि माता के चरणों में समर्पण ही सभी दुखों का एकमात्र निवारण है।
  • 5. सांस्कृतिक परंपरा का संवर्द्धन: यह रचना पारंपरिक लोक संगीत और शास्त्रीय भक्ति भाव का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के पूर्ण आध्यात्मिक फल प्राप्ति के लिए उचित समय और विधि का ध्यान रखना आवश्यक है:

शुभ समय (Best Timing)

  • नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह स्नान के बाद पूजा के समय।
  • संध्याकाल में आरती के समय दीपक प्रज्वलित करते हुए।
  • माता के जागरण, चौकी या किसी भी पारिवारिक अनुष्ठान के दौरान।

गायन एवं श्रवण विधि (Vidhi)

  • शुद्ध आसन पर बैठकर माता के चित्र या ज्योत के समक्ष ध्यान लगाएं।
  • ताली बजाकर सामूहिक रूप से संकीर्तन करने से मन को विशेष आनंद मिलता है।
  • श्रवण करते समय मन में किसी प्रकार का विकारों न रखकर पूर्ण विश्वास रखें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
अपरम्पार असीम, जिसकी कोई सीमा न हो ईश्वर या शक्ति की महिमा का विस्तार
घट-घट कण-कण में, प्रत्येक प्राणी के हृदय में परमात्मा की सर्वव्यापकता
लांगुरिया भगवान हनुमान या बाल स्वरूप सेवक माता की सेवा में समर्पित अनन्य भक्त
शरणागति पूर्ण रूप से शरण में जाना अहकार का त्याग कर भगवान को सब कुछ सौंपना
शतचंडी सौ अध्यायों वाला दुर्गा पाठ देवी महात्म्य का ग्रंथ एवं उसकी महिमा

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता रानी के इस भजन के पाठ के साथ निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

अर्थात: जो देवी समस्त जीवों में शक्ति के रूप में विराजमान हैं, मैं उनको बार-बार नमस्कार करता हूँ।

नवरात्रि के पावन पर्व और व्रत विधान की विस्तृत जानकारी के लिए आप संपूर्ण नवरात्रि उत्सव गाइड का भी अध्ययन कर सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माँ के नवरात्रों की महिमा सुनिए इस भजन में (Maa ke Navratron Ki Mahima)
गायिका दीदी पूनम परदेशी (Didi Poonam Pardesi)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति / शेरावाली
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक शैली
मुख्य थीम नवरात्रि महिमा, भक्ति, शक्ति उपासना और शरणागति
उचित अवसर शारदीय एवं वासंतिक नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन की लोकप्रिय गायिका प्रख्यात भजन गायिका दीदी पूनम परदेशी जी हैं, जिनकी मधुर आवाज में यह भजन माँ के भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है।

यह भजन मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि और चैत्र (वासंतिक) नवरात्रि के नौ दिनों में, माता की चौकी, जागरण और संध्या आरती के समय विशेष रूप से गाया और सुना जाता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

इस भजन के श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और माता रानी की विशेष कृपा तथा आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हाँ, विशेषकर नवरात्रि के दिनों में या प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा के समय इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत शुभ और सकारात्मक फल देने वाला माना गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख सनातन धर्म की परंपरा, देवी भागवत पुराण के प्रसंगों और लोक भक्ति संगीत के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, सरल भावार्थ और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करना है। किसी भी प्रकार की धार्मिक मान्यता या अनुष्ठान को अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार करें।

स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References)

  • देवी भागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती प्रसंग)
  • पारंपरिक लोकगीत एवं नवरात्रि संकीर्तन परंपरा
  • भजन गायिका दीदी पूनम परदेशी की आधिकारिक प्रस्तुतियां एवं ऑडियो-विजुअल अभिलेख

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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