Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

झुमका गिरल बा छठी घाट पे

पढ़ें झुमका गिरल बा छठी घाट पे का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"झुमका गिरल बा छठी घाट पे" (Jhumka Giral Ba Chhathi Ghat Pe) केवल एक लोकप्रिय भोजपुरी छठ गीत नहीं है, बल्कि यह लोक-संस्कृति, पारिवारिक उल्लास और छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा का एक जीवंत प्रतीक है। महापर्व छठ के पावन अवसर पर गाए जाने वाले इस गीत ने अपनी मधुर धुन और पारंपरिक पुट के कारण करोड़ों श्रद्धालुओं के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। इस गीत में जहां एक ओर छठी घाट की चहल-पहल, दउरा सजाने की व्याकुलता और सूर्य देव को अर्घ्य देने की तैयारी का सुंदर चित्रण है, वहीं दूसरी ओर एक गृहस्थ महिला के आभूषण (झुमका) के खो जाने और उसे छठी मैया की कृपा से जोड़ने की सहज लोक-कथा को पिरोया गया है। भोजपुरी संगीत जगत के प्रसिद्ध गायक खेसारी लाल यादव की सुरीली आवाज में सजा यह गीत छठ पूजा के दौरान हर घाट और घर-आंगन में गूंजता है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के प्रति समर्पण केवल कठोर तपस्या में ही नहीं, बल्कि जीवन के साधारण और सहज क्षणों में भी समाहित है। इस विस्तृत लेख में हम इस गीत के बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ झुमका गिरल बा छठी घाट पे ॥

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...
उ जे केकरा के जात बहंगिया, छठी घाट पे जाए...

झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!
खोजत-खोजत भइली भिनुसार, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!

दउरा सजवले बानी माथे पर उठवले बानी,
अर्घ्य देवे अइली हम तऽ गंगा जी के पानी।
भीड़ भइल बाटे भारी, विकल भइली सब नारी,
खो गइल मोर सिंगार, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!

सोना के झुमका रहे पिया जी के दिहल हो,
छठी घाट अइला पे कइसे गिर गइल हो।
महिमा अगाध तोहार, सुन लीं अरज हमार,
करब हम व्रत तोहार, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!

सभके पुजवा सफल कइलू, झोली भर देलू हो,
मोर हू गोदी में ललनवा तू दे दऽ हो।
खेसारी गावे गीत तोहार, बाटे निहोरा हमार,
पार लगा दऽ संसार, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!
खोजत-खोजत भइली भिनुसार, हे छठी मैया!
झुमका गिरल बा छठी घाट पे, हे छठी मैया!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत भोजपुरी लोक-मानस की सहजता और सरलता को दर्शाता है। गीत का भावार्थ अत्यंत मार्मिक और भक्ति से ओतप्रोत है। इसमें एक नवविवाहित महिला या व्रती महिला की मनोदशा का वर्णन है, जो अपने पति द्वारा दिए गए सोने के झुमके को छठी घाट पर खो देती है।

प्रथम अंतरा: गीत की शुरुआत में बहंगी (बांस की टोकरी) का पारंपरिक उल्लेख है, जो छठ पूजा का मुख्य प्रतीक है। इसके बाद मुख्य पंक्ति आती है कि "झुमका गिरल बा छठी घाट पे"। व्रती महिला कहती है कि उसका झुमका छठी घाट पर गिर गया है और उसे ढूंढते-ढूंढते सुबह (भिनुसार) हो गई है। यह सुबह का समय सूर्य देव को उषा अर्घ्य देने का समय होता है, जो रात भर जागकर प्रार्थना करने की ओर भी संकेत करता है।

द्वितीय अंतरा: महिला कहती है कि वह माथे पर दउरा (पूजा की टोकरी) सजाकर और गंगाजल लेकर अर्घ्य देने आई थी। घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है, जिसके कारण उसका आभूषण खो गया है। वह छठी मैया से प्रार्थना करती है कि उसका खोया हुआ सुहाग का प्रतीक (झुमका) मिल जाए, क्योंकि वह अत्यंत व्याकुल है।

तृतीय अंतरा: वह झुमका उसके पति (पिया जी) का दिया हुआ उपहार था, जो उसके लिए अमूल्य है। वह मैया की महिमा का गुणगान करती हुई कहती है कि हे मैया, आपकी महिमा अपरंपार है, मेरी पुकार सुनिए। यदि मेरा झुमका मिल जाता है या आपकी कृपा मुझ पर बनी रहती है, तो मैं जीवन भर आपका यह कठिन व्रत पूरी निष्ठा से करूंगी।

चतुर्थ अंतरा: अंत में, गीतकार और गायक छठी मैया से संतान सुख (ललनवा) की कामना करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि जैसे आपने सबकी झोली भरी है, वैसे ही इस व्रती की झोली भी भर दीजिए। गायक खेसारी लाल यादव मैया से संसार रूपी सागर से पार लगाने की प्रार्थना करते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "वात्सल्य, समर्पण और लोक-आस्था" है। छठ पूजा का त्योहार प्रकृति और मानव के सीधे संबंध को दर्शाता है। इस गीत के माध्यम से निम्नलिखित संदेश मिलते हैं:

  • सहज समर्पण: ईश्वर के सामने अपनी हर छोटी-बड़ी चिंता को रख देना ही सच्ची भक्ति है। झुमके का खोना एक सांसारिक घटना है, लेकिन उसे भी मैया की लीला और कृपा से जोड़कर देखना भक्त के भोलेपन को दर्शाता है।
  • पारिवारिक प्रेम: पति द्वारा दिए गए उपहार (झुमके) के प्रति आदर और उसे खोने का डर भारतीय नारी के दांपत्य प्रेम और सुहाग की रक्षा की कामना को प्रदर्शित करता है।
  • सामूहिकता का भाव: घाट पर उमड़ी भीड़ और वहां का वातावरण यह दिखाता है कि छठ केवल एक व्यक्तिगत पूजा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सामुदायिक उत्सव है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) झुमका गिरल बा छठी घाट पे (Jhumka Giral Ba Chhathi Ghat Pe)
मुख्य गायक (Singer) खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav)
श्रेणी (Category) छठ पूजा गीत (Bhojpuri Chhath Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) छठी मैया की आराधना, लोक-आस्था और सुहाग की रक्षा
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत (Folk Devotional)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत उद्योग में खेसारी लाल यादव का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनके गाए हुए देवी गीत और छठ गीत हर साल लाखों-करोड़ों लोगों द्वारा सुने जाते हैं। "झुमका गिरल बा छठी घाट पे" गीत में उनकी आवाज का दर्द और भक्ति भाव श्रोताओं को सीधे छठी घाट के पवित्र वातावरण में ले जाता है। इस गीत के संगीतकार और गीतकार ने पारंपरिक भोजपुरी धुनों को आधुनिक वाद्य यंत्रों के साथ इस तरह पिरोया है कि यह गीत युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को समान रूप से आकर्षित करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना हुआ ढांचा जिसमें छठ पूजा का प्रसाद और दउरा रखकर घाट तक ले जाया जाता है।
भिनुसार (Bhinsar) तड़के सुबह या भोर का समय छठ पूजा के अंतिम दिन सूर्योदय से ठीक पहले का समय।
दउरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें ठेकुआ, फल और अन्य पूजा सामग्री सजाई जाती है।
अर्घ्य (Arghya) जल या दूध की अंजलि देना अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को दिया जाने वाला अर्पण।
ललनवा (Lalanwa) पुत्र या संतान छठी मैया से संतान प्राप्ति की कामना के संदर्भ में।
निहोरा (Nihora) विनती या प्रार्थना भक्त द्वारा मैया से की जाने वाली करबद्ध प्रार्थना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जहां डूबते हुए सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य) और उगते हुए सूर्य (उदीयमान सूर्य) दोनों की पूजा की जाती है। यह जीवन के चक्र को दर्शाता है कि जो अस्त हुआ है, उसका उदय होना निश्चित है।

इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत जैसे "झुमका गिरल बा छठी घाट पे" इस कठिन व्रत को सरल और आनंदमयी बनाते हैं। छठ व्रत अत्यंत कठिन होता है, जिसमें व्रती को 36 घंटे निर्जला उपवास रखना होता है। ऐसे में ये मधुर गीत व्रतियों को मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह गीत समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाता है, क्योंकि छठी घाट पर अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं रह जाता; सभी एक ही घाट पर मिट्टी की वेदी बनाकर पूजा करते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पारंपरिक गीत और छठ महापर्व से हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. धैर्य और विश्वास: भीड़ में खोए हुए झुमके को ढूंढने की व्याकुलता के बीच मैया पर अटूट विश्वास रखना हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी हमें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए।
  2. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: छठ पूजा में नदियों, तालाबों और सूर्य देव की पूजा की जाती है। यह हमें पर्यावरण के संरक्षण और जल स्रोतों को साफ रखने की सीख देता है।
  3. सादगी और पवित्रता: इस पर्व में मिट्टी के चूल्हे, बांस के सूप और दउरे का उपयोग किया जाता है, जो हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान सुना जाता है:

  • नहाय-खाय (प्रथम दिन): इस दिन से ही घरों में छठ के पारंपरिक गीत गूंजने लगते हैं।
  • खरना (द्वितीय दिन): प्रसाद बनाने के समय महिलाएं समूह में बैठकर इन गीतों को गाती हैं।
  • संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन): जब पूरा परिवार घाट की ओर प्रस्थान करता है, तब यह गीत हर लाउडस्पीकर और घाट पर गूंजता है।
  • उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन): सुबह के समय जब "खोजत-खोजत भइली भिनुसार" की स्थिति होती है, तब यह गीत अत्यंत प्रासंगिक और हृदयस्पर्शी लगता है।

इसके अतिरिक्त, बिहार और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गोवर्धन पूजा और अन्य लोक उत्सवों के दौरान भी लोग इस मधुर गीत का आनंद लेते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक झुमका गिरल बा छठी घाट पे
मुख्य विषयवस्तु छठ महापर्व, सुहाग रक्षा और संतान प्राप्ति की कामना
गायन शैली भोजपुरी लोकगीत (Chhath Geet)
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी और हारमोनियम
उपयुक्त अवसर छठ पूजा, कार्तिक मास के लोक उत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय छठ गीत के मुख्य गायक भोजपुरी संगीत जगत के प्रसिद्ध कलाकार खेसारी लाल यादव हैं। उनकी भावपूर्ण आवाज ने इस गीत को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

'भिनुसार' भोजपुरी का एक पारंपरिक शब्द है जिसका अर्थ 'तड़के सुबह' या 'भोर का समय' (Dawn) होता है। छठ पूजा में सुबह के अर्घ्य का समय भिनुसार ही होता है।

'दउरा' बांस की बनी टोकरी होती है जिसमें पूजा का प्रसाद रखा जाता है, और 'बहंगी' उस बांस के ढांचे को कहते हैं जिससे दउरे को कंधे पर उठाकर घाट तक ले जाया जाता है। यह शुद्धता और सादगी का प्रतीक है।

यह गीत मुख्य रूप से हिंदू धर्म के महापर्व 'छठ पूजा' से संबंधित है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।

यह विशेष रूप से एक छठ गीत है, इसलिए इसका मुख्य गायन छठ पूजा के दौरान ही होता है। हालांकि, भोजपुरी लोक संगीत के प्रेमी इसे अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों में भी बड़े चाव से सुनते हैं।

इस गीत का आध्यात्मिक संदेश यह है कि भक्त को अपनी हर सांसारिक चिंता और प्रिय वस्तु को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। मैया अपने भक्तों की हर पुकार सुनती हैं और उनकी झोली भरती हैं।

डूबते सूर्य को अर्घ्य देना यह दर्शाता है कि जो अंत है, वही नए आरंभ की शुरुआत है। यह कृतज्ञता का प्रतीक है कि सूर्य देव ने पूरे दिन संसार को ऊर्जा दी, और अब हम उनके विश्राम के समय उनका आभार व्यक्त कर रहे हैं।

छठ पूजा की शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है, जिसके बाद 'खरना', फिर 'संध्या अर्घ्य' और अंत में 'उषा अर्घ्य' के साथ इस चार दिवसीय महापर्व का समापन होता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी छठ पूजा विधि पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भोजपुरी लोक संस्कृति के अनमोल रत्न "झुमका गिरल बा छठी घाट पे" गीत के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करता है। हमारी संपादकीय टीम ने पारंपरिक स्रोतों, लोकगीत संकलनों और संगीत समीक्षकों के विचारों के आधार पर इस सामग्री को तैयार किया है। यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — इस लेख का उद्देश्य सनातन धर्म की लोक परंपराओं और भजनों के आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - षष्ठी देवी (छठी मैया) की कथा और महिमा।
  • बिहार और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक लोकगीत संहिता।
  • भोजपुरी संगीत और लोक-साहित्य संकलन (भक्ति रस खंड)।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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