Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे देवी भजन के हिंदी लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। नवरात्रि पर माँ दुर्गा की भक्ति और आराधना से जुड़ा पावन गीत।

"आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे" एक अत्यंत ही पावन और भक्ति रस से परिपूर्ण देवी भजन है, जो विशेष रूप से नवरात्रि के पावन पर्व पर माँ दुर्गा की आराधना के लिए गाया जाता है। यह भजन माँ अंबे के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और भक्ति भाव का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जब भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत, पूजा और संकीर्तन करते हैं। यह भजन उसी भक्ति भावना को जागृत करता है, जिसमें भक्त माँ को प्रसन्न करने के लिए उनके गुणों का गान करता है और उनकी शरण में समर्पित हो जाता है। इस भजन की रचना में साधक के अंतर्मन की गहरी भावनाएं झलकती हैं, जो माँ के चरणों में पूर्ण विश्राम पाना चाहता है। यह भजन न केवल नवरात्रि के दौरान बल्कि किसी भी शुभ अवसर पर माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए गाया जा सकता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे

आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे,
भक्ति भाव से माँ का गुणगान सुनाएंगे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

माँ के दरबार में ज्योति जलाएंगे,
सुख समृद्धि और शांति का वरदान पाएंगे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

नौ दिन व्रत रखकर माँ को रिझाएंगे,
दुःख दर्द सारे माँ के चरणों में भुलाएंगे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

माँ अंबे की महिमा अपरंपार है,
भक्तों के लिए माँ सदा सहारा है।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

शेरावाली माँ का दरबार सजाएंगे,
माँ की कृपा से जीवन सफल बनाएंगे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे,
भक्ति भाव से माँ का गुणगान सुनाएंगे।
जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द माँ दुर्गा के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। "आये नवरात्रे माँ को हम मनाएंगे" का अर्थ है कि नवरात्रि का पावन पर्व आ गया है, और हम सब मिलकर माँ दुर्गा की आराधना करेंगे। यह भजन भक्त के मन की उस भावना को प्रकट करता है, जिसमें वह माँ को प्रसन्न करने के लिए पूर्ण समर्पण भाव से उनका गुणगान करता है। "भक्ति भाव से माँ का गुणगान सुनाएंगे" का अर्थ है कि हम अपने हृदय से माँ की महिमा का बखान करेंगे और उनके गुणों का कीर्तन करेंगे।

"माँ के दरबार में ज्योति जलाएंगे" का अर्थ है कि हम माँ के मंदिर या पूजा स्थल पर दीपक जलाकर उनकी आराधना करेंगे। यह ज्योति हमारे जीवन में प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है। "सुख समृद्धि और शांति का वरदान पाएंगे" का अर्थ है कि माँ की कृपा से हमें जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होगी। "नौ दिन व्रत रखकर माँ को रिझाएंगे" का अर्थ है कि हम नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखकर माँ को प्रसन्न करेंगे और उनकी कृपा प्राप्त करेंगे। "दुःख दर्द सारे माँ के चरणों में भुलाएंगे" का अर्थ है कि हम अपने सभी दुःख और कष्ट माँ के चरणों में अर्पित कर देंगे, और वह हमें उनसे मुक्ति दिलाएंगी।

"माँ अंबे की महिमा अपरंपार है" का अर्थ है कि माँ अंबे की महिमा असीम और अनंत है, जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। "भक्तों के लिए माँ सदा सहारा है" का अर्थ है कि माँ अपने भक्तों की सदा रक्षा करती हैं और उन्हें हर कठिनाई में सहारा देती हैं। "शेरावाली माँ का दरबार सजाएंगे" का अर्थ है कि हम माँ शेरावाली के दरबार को फूलों, दीपों और प्रसाद से सजाएंगे। "माँ की कृपा से जीवन सफल बनाएंगे" का अर्थ है कि माँ की कृपा से हम अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाएंगे। इस प्रकार यह भजन भक्त के पूर्ण समर्पण और माँ के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन माँ दुर्गा की आराधना का एक सुंदर माध्यम है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। इस भजन की मुख्य विशेषता यह है कि यह भक्त के मन में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण की भावना को जागृत करता है। भजन में माँ के प्रति प्रेम, उनकी महिमा, और उनकी कृपा से मिलने वाले लाभों का वर्णन किया गया है। यह भजन सुनने और गाने से मन को शांति मिलती है, और भक्त का मन माँ के चरणों में लीन हो जाता है।

इस भजन का धार्मिक महत्व यह है कि यह भक्त को माँ दुर्गा की शरण में जाने और उनसे सहायता मांगने की प्रेरणा देता है। नवरात्रि के दौरान इस भजन को गाने से माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह भजन भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करता है। इसके अलावा, यह भजन माँ के प्रति भक्ति और विश्वास को मजबूत करता है, जिससे भक्त को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में गाया जाता है, लेकिन इसे किसी भी शुभ अवसर पर, जैसे माँ दुर्गा की पूजा, व्रत, या त्योहारों पर भी गाया जा सकता है। भजन गाने का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल या संध्या काल है, जब मन शांत और एकाग्र होता है। भजन गाने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ के सामने दीपक जलाएं। भजन को शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ गाएं। भजन गाते समय मन को माँ के चरणों में केंद्रित रखें और उनकी कृपा की प्रार्थना करें। भजन के बाद माँ की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के पावन पर्व पर गाया जाता है। इसके अलावा, इसे माँ दुर्गा की पूजा, व्रत, या किसी भी शुभ अवसर पर भी गाया जा सकता है।

इस भजन को गाने से मन को शांति मिलती है, भक्ति भावना जागृत होती है, और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। यह भजन जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने में सहायक माना जाता है।

भजन को शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ गाना चाहिए। गाने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ के सामने दीपक जलाएं। मन को एकाग्र रखें और माँ के चरणों में समर्पित भाव से गाएं।

यह भजन मुख्य रूप से उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली क्षेत्र में प्रचलित है, लेकिन यह पूरे भारत में माँ दुर्गा के भक्तों द्वारा गाया जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त को पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव से माँ दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। माँ की कृपा से जीवन के सभी दुःख और कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति साहित्य और देवी उपासना की परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। इस भजन का उद्देश्य माँ दुर्गा के भक्तों को उनकी आराधना के लिए प्रेरित करना और भक्ति भावना को जागृत करना है। हमने इस भजन के मूल पाठ, अर्थ और महत्व को सरल हिंदी में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि अधिक से अधिक भक्त इसका लाभ उठा सकें। यह सामग्री संदर्भ एवं व्याख्या सहित तैयार की गई है, और इसमें किसी भी प्रकार के अतिशयोक्ति या असत्य तथ्यों से बचा गया है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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