radha bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

जगराते की रात Jagrate Ki Raat Maa Aati Rahe I LAKHBIR SINGH LAKKHA, ANURADHA PAUDWAL, KAVITA PAUDWAL

लखबीर सिंह लक्खा व अनुराधा पौडवाल द्वारा गाये प्रसिद्ध देवी भजन जगराते की रात के बोल, अर्थ और महिमा पढ़ें। Bhaktilok पर.

श्रेणियाँ: राधा भजन, देवी जागरण, नवरात्रि विशेष अपडेटेड: २०२६ पठन समय: १२ मिनट

भारतीय सनातन संस्कृति और भक्ति परंपरा में 'जागरण' अथवा 'रात्रijagaran' का अत्यंत विशिष्ट और पावन स्थान है। जब भक्तजन माता रानी अथवा आराध्य देवी-देवताओं के सान्निध्य में पूरी रात जागकर उनके नाम का संकीर्तन करते हैं, तो उस दिव्य रात्रि को 'जगराते की रात' कहा जाता है। प्रस्तुत आध्यात्मिक भजन "जगराते की रात Jagrate Ki Raat Maa Aati Rahe" भारतीय संगीत जगत के दिग्गजों यथा लखबीर सिंह लक्खा, अनुराधा पौडवाल और कविता पौडवाल के स्वर में सिक्त एक ऐसा महा-संकीर्तन है, जो श्रोताओं के अंतःकरण को भक्ति रस से प्लावित कर देता है। देवी भगवती के दरबार में जब भक्त श्रद्धा और विश्वास के दीप जलाकर रातभर माता का गुणगान करते हैं, तो माँ अम्बे की असीम कृपा उनके जीवन में आलोक भर देती है। यह भजन केवल एक संगीत रचना नहीं, अपितु जीवात्मा और परमात्मा के मिलन की वह वेला है जहाँ माँ अपने बालकों की पुकार सुनकर दौड़ी चली आती हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| स्थायी (मखड़ा) ||

जगराते की रात, माँ आती रहे,
भक्तों के द्वार पे, जो ज्योति जगाती रहे!
शेरावाली माँ की महिमा अपरंपार, भक्तों की पुकार सुने बारंबार,
जगराते की रात, माँ आती रहे...

|| प्रथम अंतरा ||

लाल चुनरिया माँ के माथे पे सोहे, भक्तों के मन को माँ की मूरत मोहे,
हाथों में त्रिशूल और सिंह पे सवारी, दर्शन पाकर निहाल हुई दुनिया सारी!
चरणों में झुककर जो अर्जी लगाए, खाली झोली उसकी कभी ना जाए,
माँ अपनी दया की छांव बरसाती रहे...
जगराते की रात, माँ आती रहे...

|| द्वितीय अंतरा ||

मंदिरों में गूंजे जयकारे भवानी के, कष्ट मिटाए सारे महारानी के,
लखबीर, अनुराधा, कविता गाएं गुणगान, माँ के चरणों में अर्पित सारा जहान!
दीपक की लौ से जगमग अंधेरा, माँ के आने से हुआ सुखों का डेरा,
भक्तों के हृदय में ज्योति जगमगाती रहे...
जगराते की रात, माँ आती रहे...

|| समापन अंतरा ||

सच्चे दरबार की जय बोलकर भोर हो जाए, हर एक भक्त का जीवन पावन हो जाए,
माँ का आशीर्वाद सदा बना रहे द्वार, गाते रहें हम मिलकर जयकारा हर बार!
जगराते की रात, माँ आती रहे,
भक्तों के द्वार पे, जो ज्योति जगाती रहे!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस दिव्य भजन की गहराई में उतरने पर हमें शाश्वत भारतीय दर्शन और देवी उपासना के मूल भाव के दर्शन होते हैं। 'जगराते की रात' केवल रात्रि के समय जागने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस आंतरिक अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान और भक्ति का प्रकाश फैलाने का माध्यम है। जब साधक या भक्त अपने समस्त सांसारिक बंधनों और चिंताओं को त्यागकर पूर्ण निष्ठा से माँ की आराधना में लीन हो जाता है, तो उसे लौकिक और पारलौकिक दोनों स्तरों पर माँ का सानिध्य प्राप्त होता है।

भजन की पंक्तियों में लखबीर सिंह लक्खा, अनुराधा पौडवाल और कविता पौडवाल की स्वर लहरियां भक्तों को एक ऐसे लोक में ले जाती हैं जहाँ केवल करुणा, प्रेम और शक्ति का साम्राज्य है। माँ शेरावाली का स्वरूप ममता और शक्ति का अद्वितीय संगम है—एक हाथ में अभय मुद्रा और दूसरे में असुरों का संहार करने वाले शस्त्र। जब भक्त "लाल चुनरिया" और "सिंह पे सवारी" रूपी प्रसंग का गान करते हैं, तो उनके भीतर छिड़ा मानसिक संघर्ष समाप्त होने लगता है और मन में असीम शांति की अनुभूति होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि निश्छल भाव से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती।

वैष्णव और शाक्त परंपराओं में नाम-संकीर्तन को कलियुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन माना गया है। इस भजन का प्रत्येक शब्द माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के त्रिशक्ति स्वरूप का आह्वान करता है। जब रात्रि के चतुर्थ प्रहर में संपूर्ण संसार निद्रा में लीन होता है, तब एक भक्त का जागकर माँ को पुकारना इस बात का प्रतीक है कि उसकी चेतना जागृत हो चुकी है और वह माया के आवरण से मुक्त होना चाहता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • दिव्य त्रिवेणी स्वर: इस भजन में भारत के तीन शीर्षतम पार्श्व गायकों—लखबीर सिंह लक्खा, अनुराधा पौडवाल और कविता पौडवाल—की आवाजों का अद्भुत संगम है, जो इसे ऐतिहासिक बनाता है।
  • जागरण संस्कृति का संवाहक: यह रचना उत्तर भारत की पारंपरिक 'माता की चौकी' और 'जगराता' संस्कृति की प्राणवायु है।
  • भक्ति और शक्ति का समन्वय: भजन में माँ के ममतामयी रूप और उनके रौद्र/शक्ति स्वरूप दोनों का सुंदर सामंजस्य प्रस्तुत किया गया है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके श्रवण मात्र से मन की उलझनें शांत होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को कब और कैसे सुनना या गाना चाहिए, इसका सनातन परंपरा में विशेष विधान है:

शुभ अवसर

शरदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, अष्टमी, नवमी, शुक्रवार की संध्या, या घर में आयोजित होने वाले किसी भी देवी जागरण अथवा माता की चौकी के अवसर पर।

प्रस्तुति विधि

सामने माता की चौकी सजाकर, अखंड दीप प्रज्वलित कर, पुष्प और धूप अर्पित करने के पश्चात इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन के प्रमुख कलाकारों का परिचय | Associated Artists

इस भजन को अपनी जादुई आवाजों से अमर बनाने वाले कलाकार भारतीय भक्ति संगीत के स्तंभ हैं:

श्री लखबीर सिंह लक्खा: इन्हें 'भजन सम्राट' के रूप में जाना जाता है। देवी जागरण और माता के भजनों को घर-घर तक पहुँचाने में उनका योगदान अद्वितीय है। उनकी ऊर्जावान और भावपूर्ण शैली हर श्रोता को झूमने पर विवश कर देती है।

श्रीमती अनुराधा पौडवाल: अपनी मधुर, कर्णप्रिय और करुणा से ओत-प्रोत आवाज के लिए प्रसिद्ध अनुराधा जी ने अनगिनत देवी भजनों को अपनी सुरीली भेंट दी है। उनकी आवाज में माँ की ममता स्पष्ट झलकती है।

सुश्री कविता पौडवाल: अपनी शास्त्रीय सुझबुझ और स्पष्ट उच्चारण के साथ कविता पौडवाल ने इस भजन में एक नई मिठास और दिव्यता जोड़ी है।

कठिन शब्दों के अर्थ एवं भावार्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जगराता रातभर जागकर ईश्वर या देवी की आराधना करना अज्ञान की नींद त्यागकर जागृत अवस्था प्राप्त करना
शेरावाली सिंह पर सवार होने वाली माँ दुर्गा समस्त शक्तियों की आदि स्वामिनी
अपरंपार जिसकी कोई सीमा न हो, असीम ईश्वरीय करुणा और महिमा की अनंतता
ज्योति प्रकाश, दीपक की लौ आत्मा का प्रकाश और ज्ञान
भोर प्रातःकाल, सुबह साधना के उपरांत मिलने वाला आत्मिक आनंद और मोक्ष

भजन से मिलने वाली जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  1. अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा: जीवन में चाहे जितनी भी कठिनाइयां (अंधकार) क्यों न हों, यदि श्रद्धा रूपी दीपक जलाया जाए तो प्रकाश अवश्य आता है।
  2. सामूहिक प्रार्थना की शक्ति: जब परिवार और समाज मिलकर सकारात्मक भाव से प्रार्थना करते हैं, तो उसकी ऊर्जा कई गुना बढ़ जाती है।
  3. शरणागति का भाव: माँ के दरबार में अहंकार का त्याग करके ही वास्तविक शांति और आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
  4. नियमित स्मरण: उत्सव कोई भी हो, अपने आराध्य का स्मरण कभी नहीं भूलना चाहिए।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जगराते की रात Jagrate Ki Raat Maa Aati Rahe
मुख्य गायक लखबीर सिंह लक्खा, अनुराधा पौडवाल, कविता पौडवाल
संगीत शैली लोक एवं पारंपरिक देवी भजन / माता की भेंट
भाषा हिंदी / ब्रज-प्रभावित लोकभाषा
विषय एवं भाव भक्ति, शक्ति, समर्पण और आनंद
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी, शुक्रवार पूजा
संबंधित आंतरिक लिंक श्री हनुमान चालीसा | शिव तांडव स्तोत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को भारतीय संगीत जगत के दिग्गज कलाकारों—लखबीर सिंह लक्खा, अनुराधा पौडवाल और कविता पौडवाल ने अपने मधुर स्वरों से सजाया है।

माता का जगराता रातभर जागकर भगवती का गुणगान करने, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और माँ दुर्गा की असीम कृपा व आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

इस भजन को नवरात्रि के पावन दिनों में, माता की चौकी के समय, या किसी भी शुक्रवार की संध्या को सुनना अत्यंत फलदायी और आनंददायक होता है।

हाँ, परिवार के साथ मिलकर घर पर माता की चौकी सजाकर, अखंड दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक यह भजन गाए और सुने जा सकते हैं।

भजनों और नाम-संकीर्तन के नियमित श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है, तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा व मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ भक्तिलोक (Bhaktilok.in) की संपादकीय टीम द्वारा सनातन धर्म, देवी उपासना परंपरा और लोक-संगीत के उच्च मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सामग्री का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ और जीवनोपयोगी संदेश प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन देवी भागवत पुराण एवं शाक्त परंपरा ग्रंथ
  • भारतीय लोकगीत एवं भक्ति संगीत संकलन
  • टी-सीरीज़ (T-Series) भक्ति संगीत अभिलेखागार

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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